मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर जो लोग प्रताड़ित किए जा रहे, वे अपना डिटेल एडवोकेट उमेश शर्मा को भेजें

दिनांक 12/1/2016 को माननीय सुप्रीम कोर्ट के सामने मजीठिया मामले में सुनवाई के दौरान माननिय न्यायाधीशों ने सभी राज्य सरकारों द्वारा दिया गए स्टेटस रिपोर्ट को पत्रकारों के अधिवक्ताओं को सौंपने के लिए कहा. साथ ही मीडिया कर्मचारियों के वकीलों द्वारा कर्मियों को मैनेजमेंट द्वारा प्रताड़ित किए जाने व सादे कागजों पर दस्तखत कराने संबंधी कही गई बातों पर गौर किया. कोर्ट ने वकीलों को इस सम्बन्ध में कार्यवाही करने के आजादी दी.

अदालत ने यह कहा कि रिपोर्टों से स्पष्ट है कि सिर्फ कुछ ही अखबार संस्थानों ने कर्मचारियों को मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ दिया है. अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि कुछ संस्थानों ने कर्मचारियों को दुर्भावनापूर्ण रूप से निलंबित, स्थानांतरित एवं बर्खास्त किया है. कोर्ट ने कहा कि इस बात का उल्लेख कर्मचारियों द्वारा लिखित रूप में किया जाये. अदालत ने इस बात का भी उल्लेख किया है कि कुछ अख़बार मालिक कर्मचारियों से जबरदस्ती कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर ले रहे हैं. इसका उल्लेख कर्मचारी अपने वकील के जरिए सुप्रीम कोर्ट के सम्मुख करें.

सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से यह तो स्पष्ट है कि अख़बार मालिकों द्वारा अपनाए गए हथकंडे अदालत के संज्ञान में हैं और अदालत इस बात पर गंभीर भी है.

ऐसे सभी कर्मचारी जो अभी तक अपना मामला अदालत के सामने नहीं ला पाये हैं, वो अब भी अदालत के सामने अपना मामला लाएं. साथ ही जिन लोगों को प्रताड़ित किया गया है या किया जा रहा है, वो सामने आकर अपनी बात अदालत को बताएं. कर्मचारी अपना नाम, पद, वेतन और मजीठिया लाभ की बकाया राशि का विवरण दे कर इस कार्यवाही की शुरुआत अभी भी कर सकते हैं.

इस बाबत सुप्रीम कोर्ट के वकील उमेश शर्मा से संपर्क legalhelplineindia@gmail.com के जरिए किया जा सकता है.

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