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प्रभात खबर में रंजीत कुमार को दिया गया ‘एडिटोरियल आडिट’ का काम

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प्रभात खबर के झारखण्ड के संस्करणों का ऑडिट पहले अनुज कुमार सिन्हा और बिहार के संस्करणों का ऑडिट अजय कुमार किया करते थे। अभी ऑडिट की नई व्यवस्था शुरू हुई है। ऑडिट का जिम्मा पिछले साल हिंदुस्तान के धनबाद संस्करण से मुक्त किए गये रंजीत कुमार को दिया गया है।

रंजीत कुमार प्रभात खबर के संपादकों का ऑडिट कर रहे हैं कि वह कैसा अखबार निकाल रहे हैं. वे बताएंगे कि संपादकों को कैसा अखबार निकालना चाहिए.

अपने से काफी सीनियर रहे पटना के सम्पादक रजनीश उपाध्याय, स्टेट हेड अजय कुमार, भागलपुर के सम्पादक जीवेश रंजन सिंह, धनबाद के सम्पादक विजय पाठक, रांची के सम्पादक संजय मिश्रा को रंजीत जी बता रहे हैं कि कौन सी खबर पेज वन पर रखनी चाहिए थी और किस खबर का प्लेसमेंट कमजोर है.

चर्चा है कि रंजीत को आडिट का काम दिए जाने से कई संपादकों में नाराजगी है पर कोई खुल के बोल नहीं रहा है.

कहा जा रहा है कि प्रभात खबर में कई ज्यादा योग्य लोग हैं जिन्हें आडिट का जिम्मा दिया जा सकता था. रांची ऑफिस में बैठे सुशील भारती जैसे अनुभवी सम्पादक को ऑडिट के काम में लगाया जा सकता था. कॉरपोरेट एडिटर विनय भूषण को ऑडिट का जिम्मा दिया जा सकता था.

प्रभात खबर के सेकेंड लाइन यानी न्यूज एडिटरों का कहना है कि संपादकीय के ऑडिट का महत्वपूर्ण काम स्टेट एडिटर या फिर किसी सीनियर व अनुभवी व्यक्ति का ही होना चाहिए. झारखंड के स्टेट एडिटर अनुज कुमार सिन्हा झारखंड और बिहार के स्टेट एडिटर अजय कुमार बिहार के संस्करणों का ऑडिट करें, यह बात तो समझ में आती है। दोनों लोग अनुभवी भी हैं और सभी के सीनियर भी है।

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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  • बायस्ड रिपोर्ट। पहले तो नाम अधूरा है, पूरा नाम है रंजीत प्रसाद सिंह। दूसरा हिंदुस्तान में संपादक बनने से पहले रंजीत जी प्रभात खबर में दस साल स्थानीय संपादक रह चुके हैं। जमशेदपुर एडिशन को लगातार नंबर रखने का श्रेय उन्हें ही जाता है। इससे पहले अमर उजाला में भी बड़ी जिम्मेवारी निभा चुके हैं। उनसे योग्य अभी तो प्रभात खबर में कोई संपादक नहीं दिखता है।

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