मकान कब्जाने के आरोपों पर न्यूज24 के पत्रकार प्रशांत देव का ये है विस्तृत जवाब, पढ़ें

प्रशांत देव, पत्रकार (न्यूज24)

डियर, यशवंत (भडास फार मिडिया)

एक जर्नलिस्ट की हैसियत से मैं पिछले करीब 20 सालों से मीडिया में काम कर रहा हूं। आपने मुझे बदनाम कर, मेरे प्रोफेशनल carrier की इंटीग्रिटी पर सवाल खड़ा कर दिया है, जिससे मैं बहुत आहत हूं। खबर लिखने का पहला सिद्धांत है कि दोनों पक्षों की बात आनी चाहिए, खासकर जिस पर आप आरोप लगा रहे हैं, उसके बारे में उसका पक्ष जरूर लेना चाहिए, लेकिन आपने ऐसा नहीं किया। जब आपने पहली बार मेरे खिलाफ लिखा, लिखने के पहले आपने मुझसे बात करके मेरा पक्ष नहीं जाना। आपको इस बात का अंदाज़ा नहीं है कि आपके इस व्यवहार से मैं और मेरा परिवार किस प्रताड़ना के दौर से गुजर रहा है।

मेरे जैसे साधारण पत्रकार के ऊपर इस तरह का हमला क्यों? ये मेरी समझ से बाहर है. सालों की कड़ी मेहनत और लगन से मीडिया में ये जगह बनाई है। मेरा आपसे निवेदन है कि बिना पूरी बात जानें इस तरह से मुझे बदनाम ना करें। जहां तक फ्लैट के विवाद की बात है या जो आरोप आपने मेरे ऊपर लगाया है, मकान कब्जा करने का, वो पूरी तरह से बेबुनियाद है। मेरे खिलाफ माफियाओं का षड्यंत्र है। सोशल मीडिया पर आपके द्वारा दुष्प्रचारित की गई हर बात का जवाब मेरे पास है। लेकिन मैं आपको ये बताना चाहता हू कि इस पूरे षड्यंत्र के पीछे बिल्डर माफिया, प्रॉपर्टी डीलर माफिया सक्रिय हैं, जिससे मैं और मेरा परिवार खौफ में है।

मैं भड़ास के पाठकों को ये बताना चाहता हूँ की मैं वैलिड रेंट एग्रीमेंट पर हूं। मकान मालिक ने खुद ये घर किराया पर मुझे दिया है, जिसका वो किराया लेता है। मैं जबरदस्ती इनके घर में नही घुसा हूँ। समय पर किराया देता हूं और अपनी मजबूरी परेशानी को देखते हुए टेनेंसी एक्सटेंड करने की request भेजी है। आपको हैरानी होगी ये जान कर कि मुझे आज तक ये नहीं पता है कि लवलेश कड़वे कहाँ रहता है, उनका भाई कहाँ रहता है, उसका पता क्या है, सिर्फ फ़ोन पर सम्पर्क हो सकता है, वो भी जब वो करना चाहे।

मैं ये बात साफ कर देना चाहता हूँ कि रिकॉर्ड के हिसाब से इस मकान का मालिक लवलेश कड़वे है, मैं सिर्फ किरायदार हू। मुझे समझ नहीं आता कि मेरे मकान मालिक ने इसे इतना विवादित क्यों ंबनाया? जो बात बैठ कर आपस मे सुलझ सकती है, उसके लिए इतना बवाल क्यों?

मैं इस बात से आशंकित हूँ कि इसके पीछे बिल्डर माफिया का षड्यंत्र है, जो इसका मकान हड़पना चाहते हैं। आश्चर्य की बात है कि मैं अपने मकान मालिक लवलेश कड़वे को अप्रैल के महीने से फ़ोन कर रहा हूँ कि आकर बात करिये, या फिर मुझे बताइये कहां आना है, लेकिन वो नहीं आये। मुझे उलझा कर रखा। सीधे कानूनी नोटिस भेज दिया जो मुझे मिला नहीं। मकान मालिक नोटिस भेजें तो कानून की बात और अगर मैं कानून की बात करूं तो एतराज क्यों? मैं अपने मकान मालिक से यही कहना चाहता हूँ कि या तो कानूनी रास्ता पकड़ो या फिर आपस मे बैठ कर बात करो, किसी एक जगह रहो।

अब मेरे खिलाफ राजेश कड़वे का षड्यंत्र और आतंक सुनिए…. जो खुद को लवलेश कड़वे का भाई बताता है। जानकारी के मुताबिक ये एक वैशाली का बदनाम प्रॉपर्टी डीलर रहा है और लवलेश कड़वे ने ये बात कभी नहीं बताई कि वो उसका भाई है। अप्रैल 2019 के महीने में लवलेश कड़वे प्रॉपर्टी डीलर के साथ मेरे घर में घुस गया, बिना मेरी मौजूदगी में। फ्लैट बेचेने की बात लेकर। घर में पत्नी बच्चे अकेले थे। मैं शहर से बाहर था। मैंने फौरन मकान मालिक लवलेश को फ़ोन पर ये बात बताई। लवलेश ने फोन पर जवाब में कहा- “ऐसी कोई बात नहीं है, मुझे फ्लैट नहीं बेचना है, आप फ्लैट में आराम से रहिये”।

हर फ़ोन रिकॉर्डिंग का दावा करने वाले इस बातचीत की रिकॉर्डिंग ऑडियो भी सुनायें।

मैं निश्चन्त होकर रहने लगा क्योंकि फ्लैट किराये पर देने के पहले मकान मालिक से ये बात हुई थी कि फ्लैट बिकने वाला नहीं है और मैं इसमें शिफ़्ट हो गया। लेकिन राजेश कड़वे इस फ्लैट को बेचने पर आमादा था। चौकाने वाली बात ये है कि राजेश प्रॉपर्टी डीलरों को तभी भेजता था मेरे घर में, जब मैं शहर से बाहर होता था। ऐसा कई बार हुआ। मेरी गैरमौजूदगी में प्रॉपर्टी डीलर घर में घुसते थे। परिवार परेशान होता था। मैं शहर में नहीं होता था। मेरा मकान मालिक लवलेश कड़वे मुझसे फ़ोन पर बात नहीं करता था। परेशान होकर मैंने राजेश कड़वे को फ़ोन पर बताया कि फ्लैट बेचना चाहते हो तो मुझे ही दे दो। एक दो मीटिंग के बाद मेरी डील फ्लैट खरीदने की हो गई। इस बीच राजेश कड़वे ने फ़ोन पर मुझसे 2 लाख रुपए की मांग की। कहा एडवांस चेक से हमारे एकाउंट में जमा कर दो। मैंने फ़ोन पर राजेश कड़वे को कहा मकान मालिक को तो बुलाओ, एग्रीमेंट पर sign तो मकान मालिक के ही होंगे। राजेश कड़वे ने हैरान करने वाला जवाब दिया। राजेश कड़वे ने फ़ोन पर मुझसे कहा कि 2 लाख एकाउंट में जमा कर दो मैं corrier भेजकर मकान मालिक का sign करा दूंगा.

क्या कभी सेल एग्रीमेंट ऐसे बनता है? क्या कोई इस तरह से घर खरीदने का एडवांस दे सकता है? मकान मालिक लवलेश चुप क्यों है? राजेश कड़वे मुझसे फ्रॉड करके पैसे हड़पना चाहता था। राजेश कड़वे की नीयत में खोट थी। राजेश ने फ़ोन पर मुझे बताया कि उसने फ्लैट बेचने का अग्रीमेंट किसी और से कर लिया है। इस पर मैंने उसे निवेदन करते हुए कहा कि मैं प्राइस मैच करने के लिए भी तैयार हूं। मेरे परिवार को ये घर पसंद है हम इसे खरीद लेंगे। मैंने सभी बात मकान मालिक लवलेश को भी बताई। तय कीमत से 5000 ज्यादा की रकम देने का निवेदन किया। फिर भी वो मुझे फ्लैट नहीं देना चाहते हैं तो ये उनका अधिकार है। मेरा निवेदन था, कोई जबरदस्ती नहीं क्योंकि लवलेश मकान मालिक है। उसको पूरा अधिकार है अपना फ्लैट किसे बेचे।

ये बात अप्रैल 2019 के महीने की है। हर फ़ोन रिकॉर्डिंग का दावा करने वाले इस बातचीत की रिकॉर्डिंग ऑडियो भी सुनायें।

महीनों मकान मालिक लवलेश ने मुझसे बात नहीं की और अचानक दो दिन पहले फ़ोन किया। मेरी बातचीत की रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया में वायरल कर दी। वो खुद एक्सपोज़ हो रहा है, मुझे अपशब्द बोलकर। इस विवाद के बीच किराया भी लेता रहा। आज की तारीख में जितना किराया बनता है उससे ज्यादा की रकम उसके खाते मे मेरी ओर से जमा है। फिर भी मेरी ओर से कोई विवाद नहीं है। सज्जनता से बैठ कर बात करने से समस्या तुरंत सुलझ जाएगी।

डिअर, यशवंत, मेरे खिलाफ एकतरफा मत लिखो, और सच लिखो। मैं एक पत्रकार हू, एक रेपुटेड संस्था में काम करता हुं। इसकी आड़ लेकर मुझे और मेरी संस्था को बदनाम मत करिये। आपको ये बता दूँ मेरे साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ मैं लड़ूंगा, हर हाल में लड़ूंगा। ये जानते हुए की इसमें बिल्डर माफिया सक्रिय है, मेरी जान को भी खतरा हो सकता है। लेकिन एक पत्रकार के लिए इज्जत और सम्मान सबसे बड़ी चीज है। इस पर हमला बोलने वालों के खिलाफ कानूनी आवाज जरूर बुलंद करूँगा।

प्रशांत देव श्रीवास्तव
(पीड़ित )
prashantd008@gmail.com


(जैसा प्रशांत देव ने भड़ास को मेल किया है, वैसा हूबहू प्रकाशित किया गया है, थोड़े बहुत ग्रामेटिकल सुधारों के सिवा.)


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One comment on “मकान कब्जाने के आरोपों पर न्यूज24 के पत्रकार प्रशांत देव का ये है विस्तृत जवाब, पढ़ें”

  • प्रशांत देव says:

    Dear यशवंत
    मेरे जवाब में छठे पैराग्राफ की छठी लाइन में लवलेश कड़वे की जगह , राजेश कड़वे पढ़े।
    जो जवाब मेरा 11 जुलाई के छपा है, वो टाइपिंग मिस्टेक है
    वैसे पूरी कहानी में ये बात साफ हो जाती है

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