न्यूज24 के पत्रकार प्रशांत द्वारा फ्लैट हड़पने से दुखी कड़वे ब्रदर्स ने सोसाइटी सदस्यों को भेजा पत्र, पढ़ें

Yashwant Singh : बशीर बद्र का एक मशहूर शेर है-

लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में,
तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में!

इसको थोड़ा सा मोडिफाई करें तो ऐसा बनेगा-

लोग टूट जाते हैं एक फ्लैट खरीदकर किश्त चुकाने में,
तुम तरस नहीं खाते किराएदार बनकर इसे कब्जाने में!

मकान कब्जाने वाले ‘न्यूज़24’ चैनल के टीवी पत्रकार प्रशांत देव श्रीवास्तव से दुखी मकान मालिक भाईयों ने अपनी सोसायटी / अपार्टमेंट के निवासियों और पदाधिकारियों को भेजा पत्र-

आदरणीय

अध्यक्ष महोदय,
सचिव महोदय,
समिति के सदस्य एवं
निवासी गण
सिद्धिविनायक सोसाइटी अभय खंड थर्ड इंदिरापुरम गाजियाबाद

विषय : किराएदार द्वारा फ्लैट कब्जा करने हेतु सूचना

महोदय जी

मैंने अपना फ्लैट 11 महीने पहले मिस्टर प्रशांत देव श्रीवास्तव News 24 channel को किराए पर दिया था जिसकी अवधि 14 जुलाई 2019 को समाप्त हो गई है. अब इस फ्लैट में प्रशांत श्रीवास्तव और उनका परिवार (जिसमें इनके अलावा 3 सदस्य और हैं) अवैध रूप से कब्जा कर कर रहे हैं. अब जबकि एग्रीमेंट की अवधि समाप्त हो गई है, इसीलिए अब मेरा प्रशांत देव श्रीवास्तव या उसके परिवार की ओर से सोसायटी के प्रति कोई भी उत्तरदायित्व नहीं रहा. अब अगर सोसायटी एक कब्जेदार से व्यवहार करती है तो उसका सोसाइटी का अपना उत्तरदायित्व होगा. सोसाइटी से अनुरोध है कि 14 जुलाई के बाद का कोई भी मेंटेनेंस, किसी भी प्रकार का लेनदेन कब्जेदार के साथ ना किया जाए. जुलाई 2019 के बाद का मेंटेनेंस हमारे द्वारा सोसायटी को दिया जाएगा. अब चूंकि मेंटेनेंस हमारे द्वारा किया जाना है, इसलिए मेरा आपसे अनुरोध है कि मुझे जनरेटर बैकअप की सुविधा की आवश्यकता नहीं है. इसीलिए मेरा जनरेटर बैकअप का कनेक्शन काट दिया जाए. इसके अतिरिक्त जो पार्किंग की आपसी सहमति से व्यवस्था की गई है, मैं अपने फ्लैट की कार पार्किंग की जगह को सोसाइटी को देता हूँ. कोई भी सदस्य जिसको कार पार्किंग की आवश्यकता हो, वहां अपनी कार खड़ी कर सकता है. इसके लिए मैं अनुमति देता हूं. मुझे जिस समय कार पार्किंग की आवश्यकता होगी, उस समय मैं लिखित आवेदन देकर आप लोगों को सूचित कर दूंगा. अगर कब्जेदार किसी भी सदस्य के साथ दुर्व्यवहार करता है तो मेरा समिति से निवेदन है कि पूरी समिति सदस्य का साथ दे क्योंकि उस पार्किंग की अनुमति मेरे द्वारा दी गई है. कब्जादार मकान खाली नहीं कर रहा है. मुझे व मेरे भाई को वापस आना है तो मैं अपनी छत के ऊपर एक अस्थाई कमरा बना कर रहेंगे, जब तक कि कब्जेदार मेरा मकान खाली नहीं कर देता।

प्रशांत देव श्रीवास्तव मेरे फ्लैट में एक कब्जेदार के रूप में रह रहा है तो उसका कोई भी हक और अधिकार सोसाइटी से खत्म हो चुका है. अब सोसायटी कब्जेदार के साथ में कोई भी व्यवहार करती या रखती है तो यह स्वयं सोसायटी की जिम्मेवारी होगी.

कबजेदार के बारे में कुछ जानकारी आपको देना चाहता हूं. यह आदमी सपरिवार पिछले 11 महीनों से मेरे फ्लैट में निवास कर रहा है. इन 11 महीनों में दो बार पुलिस को बुला चुका है. हमारे लिए नहीं, किसी और परिवार के लिए. उस परिवार ने इस बात की जानकारी हमको फोन पर दी थी. दूसरी बार पुलिस उस व्यक्ति के लिए बुलाई जिसने इसे यह मकान किराए पर दिलवाया था. उस व्यक्ति को हमने कहा कि यह तुम्हारी जिम्मेदारी बनती है इस मकान खाली कराने की. तब उस व्यक्ति ने प्रशांत देव श्रीवास्तव से कहा कि आप मकान खाली कर दो तो प्रशांत देव ने उन्हें डराने-धमकाने के लिए पुलिस को बुला लिया. हालांकि जांच करने के बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो गया. पुलिस वापस चली गई.

हमारे खिलाफ बहुत सी झूठी कार्यवाही कराने की कोशिश की.चाहे वह पुलिस की कार्यवाही हो, क्राइम ब्रांच की कार्यवाही हो, चाहे वकील की कार्यवाही हो. इसने सब कुछ करने की पूरी कोशिश कर ली. परंतु यह हमारा अभी तक कुछ भी बुरा करने में कामयाब ना हो पाया. यह अभी भी कुछ ना कुछ साजिश करते ही रहता है. इसके दिमाग में बस यही साजिश चलती रहती है कि कैसे मकान पर अवैध कब्जा कायम रख सकूं, कैसे सोसाइटी वालों की सहानुभूति हासिल कर सकूं.

“सिद्धिविनायक समिति के निवासियों से अनुरोध”

भाइयों, आज मेरे और मेरे परिवार के ऊपर इस पत्रकार की वजह से मुसीबत आई है. मेरा आशियाना छीनने की पूरी तरीके से कोशिश कर ली. लेकिन यह उसमें अभी कामयाब ना हो पाया है. अपनी लड़ाई तो स्वयं मैंऔर मेरा भाई दोनों लड़ रहे हैं. मेरा आपसे अनुरोध है कि आप इस लड़ाई में हमारा साथ दें. हम आपसे यह नहीं कह रहे हैं कि आप हमारे साथ थाने चलें, कोर्ट में चलें. हम तो सिर्फ यह कह रहे हैं कि अवैध कब्जा किए इस परिवार का बहिष्कार करके आप हमारी लड़ाई का एक हिस्सा बनें. सोसायटी के लेटर हेड पर एक सहमति पत्र बनाकर हमें दें जिसमें यह लिखा हो कि हम सभी लोग जो यहां अपने अपने मकान में रहते हैं, इस बात की पुष्टि करते हैं कि जिस मकान पर अवैध कब्जा हुआ है, वह लवलेश कड़वे का है और हम लोग लवलेश कड़वे को जबसे सोसायटी बनीं हैं, तबसे जानते हैं. लवलेश हमारे साथ ही रहे हैं, हमारे बीच में ही रहे हैं. प्राइवेट नौकरी में कार्यरत होने की वजह से उनका ट्रांसफर इंदौर हो गया था. अब वह वापस यहां आना चाहते हैं. सिद्धिविनायक समिति के हम सभी निवासी लवलेश कड़वे के साथ हैं.

उपरोक्त तथ्य को लिखने के बाद आप लोगों को सिर्फ अपना नाम लिखना है और हस्ताक्षर करना है. इससे न्यायालय में और पुलिस विभाग में न्याय मिलने में और हमारा आशियाना वापस मिलने में आसानी होगी. भगवान से प्रार्थना है कि जो मेरे साथ हुआ वह सोसाइटी में किसी और अन्य व्यक्ति के साथ ना हो.

जय हिंद।

लवलेश कड़वे
राजेश कड़वे
999 3973 686
T F-2 सिद्धि विनायक अपार्टमेंट
अभय खंड तृतीय
इंदिरापुरम, गाजियाबाद

भड़ास एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से. उपरोक्त पोस्ट पर आए ढेरों कमेंट्स में से कुछ प्रमुख यूं हैं-

Madan Tiwary : इसके चैनल मालिक को नोटिस दिलवाइये फ्लैट मालिक से. फिर चैनल मालिक पर भी क्रिमिनल केस फाइल करवाइये.

Yashwant Singh : अभी ये प्रशांत देव श्रीवास्तव पहलवानी करने के मूड में है 😀 देखें स्क्रीनशाट…

Madan Tiwary : बन्धु, इस मकान मालिक को कहिये दस आदमी बुलाकर उस पत्रकार को घसीटकर बाहर निकालें. उसका सामान बाहर निकाल दें. अविलंब अपना सामान फ्लैट में रखकर जम जाए. पुलिस को न खाली करवाने का अधिकार है न सामान फ्लैट में रखवाने का.

Yashwant Singh : मकान मालिक को जो करना होगा, वो करेगा। किराएदार को जो करना होगा, वो करेगा। मेरा अपना काम है इस मामले के डेवलपमेंट्स को रिपोर्ट करना, वो मैं करूंगा। टेंशन नॉट। आप भी कूल कूल रहें 🙂

Madan Tiwary : हम तो हमेशा कूल कूल रहते हैं. जब इस तरह का आदमी कोई पिटाता है, तब भी सिगरेट पीते हुए उससे सहानभूति दिखाते हैं. वह आपका फेसबुक पढ़ रहा होगा.

Yashwant Singh : मदन भाई आप वकील हैं तो वो भी घिसा हुआ पत्रकार है। साजिशों का मास्टरपीस है, तभी तो वो साम दाम दंड भेद सारे हथियारों का इस्तेमाल कर मकान कब्जाने में सफल हुआ है। वो आपके यहां पुलिस भेज ही रहा होगा 😀

Madan Tiwary : हाहाहाहा किस्मत खराब होगी तो यह गलती करेगा. बिहार दौड़ते दौड़ते जीवन गुजारेगा.

Sanjay Yadav : Ab patrakar mahoday ke samman ki ladai ho gayi hai ye. wo aise hi nahi jhukenge ab.

Yashwant Singh : ये सम्मान नहीं, अपमान की लड़ाई लड़ रहा है। सम्मान होता तो चीजों को कूल तरीके से हैंडल कर मकान खाली कर चुका होता। यह पुलिस, कोर्ट, मीडिया के त्रिकोण के दम पर दंगल कर रहा है। एक ठीकठाक पत्रकार के महापातन की ग़ज़्बे कहानी है ये। इसे लोग अब मकान कब्जाने वाले पत्रकार के रूप में याद रखेंगे, यही इसके पत्रकारीय करियर की उपलब्धि रहेगी।

Madan Tiwary : इसको लतखोर के रूप में याद करेंगे. फ्लैट मालिक शराफत दिखा रहा है. लगता है उसके सलाहकार गलत है.

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Comments on “न्यूज24 के पत्रकार प्रशांत द्वारा फ्लैट हड़पने से दुखी कड़वे ब्रदर्स ने सोसाइटी सदस्यों को भेजा पत्र, पढ़ें

  • kamal sharma says:

    इस पत्रकार महोदय को आपना इतना फैमस कर दिया है, जिसको भी पता चलेगा इसे आगे से किराये पर फ्लैट नहीं देगा।

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  • India rejuvenation initiative says:

    भारत में सीधी अंगुलियों से घी नहीं आता है

    Reply
  • एम० टी० फरीदी says:

    इन जैसे पत्रकारों की वजह से पूरी पत्रकारिता की बरादरी पर लोग उंगली उठाते है ।
    इन जैसे लोगो को पत्रकार कहते शर्म आती है ।

    Reply

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