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इकनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली यानि ईपीडब्ल्यू मैग्जीन के संपादक जाने माने पत्रकार परंजय गुहा ठाकुरता हैं. ईपीडब्ल्यू पत्रिका में 17 जून के अंक में एक स्‍टोरी केंद्र सरकार के वाणिज्‍य और उद्योग मंत्रालय के खिलाफ छपी. इसमें मंत्रालय द्वारा नियम कायदे बदलकर अडानी समूह को फायदा पहुंचाने के बारे में विस्तार से बताया गया.

ईपीडब्‍लू की स्‍टोरी के मुताबिक केंद्रीय वाणिज्‍य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले वाणिज्‍य विभाग ने स्‍पेशल इकनॉमिक ज़ोन में स्थित ऊर्जा परियोजनाओं के संबंध में नियमों की सिलसिलेवार फेरबदल से अडानी पावर को कस्‍टम शुल्‍क रिफंड कराने की सुविधा दे दी. इस रीफंड का कुल मूल्‍य 500 करोड़ रुपया बैठता है. खास बात ये कि अडानी पावर ने इस शुल्‍क का कभी भुगतान किया ही नहीं था.

स्टोरी के छपने से नाराज केंद्र सरकार का वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय नहीं हुआ बल्कि गौतम अडानी जी हो गए.  अडानी ने फौरन अपने वकीलों से पत्रिका को लीगल नोटिस भिजवा दिया. इस स्‍टोरी पर कायदे से सरकार को आपत्ति होनी चाहिए थी लेकिन यह बात अडानी की कंपनी को नागवार गुज़री. ईपीडब्‍लू मैग्जीन की तरफ से कानूनी नोटिस का जवाब भेज दिया गया है.

ईपीडब्ल्यू मैग्जीन के संपादक परंजय ने इस बाबत एक ट्वीट भी किया है जो इस प्रकार है-

ParanjoyGuhaThakurta @paranjoygt

Why has a lawyer representing Adani Power headed by Gautam Adani sent a legal notice alleging defamation by the EPW?

EPW में छपी स्टोरी पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :

500 crore bonanza to adani group

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