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जागरण प्रकाशन की इकाई नईदुनिया ने वार्षिक वेतन वृद्धि के दौरान मजीठिया का केस लगाने वाले अपने समस्त कर्मचारियों के वेतन में प्रतिमाह मात्र 100 रुपये की वृद्धि की है। कहा जा रहा है कि ऐसा कर नईदुनिया और जागरण के प्रबन्धन ने अपने कर्मचारियों को, जिन्होंने अपने जायज़ वेतन की मांग के चलते मजीठिया के लिए कोर्ट केस किया हुआ है, सजा के तौर पर यह मामूली वेतन वृद्धि की है।

सुनने में आया है कि यह प्रबन्धन द्वारा ही लिया गया फैसला था कि केस करने वाले समस्त कर्मचारियों को सौ रुपये से लेकर अधिकतम चार सौ रुपये की ही वेतन वृद्धि की जाए। ऐसा करके नईदुनिया प्रबन्धन ने मजीठिया वेज बोर्ड की अनुशंसाओं का अनुपालन जानबूझकर नहीं किया और सुप्रीम कोर्ट की फिर अवमानना की है। जिन कर्मचारियों ने मजीठिया के लिए केस नहीं लगाया है, उनको वेतन वृद्धि का भरपूर लाभ दिया गया है। सुनने में आया है कि उपरोक्त भेदभाव भरे वेतन वृद्धि के चलते पीड़ित कर्मचारियों द्वारा लेबर कोर्ट, लेबर कमिश्नर को जल्द शिकायती पत्र भेजे जाने की तैयारी है। उधर सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को भी इस मामले में एक शिकायती पत्र भेजा जा रहा है।

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