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Ajay Prakash : कई बार सच कुछ और होता है और प्रचारित कुछ और होता है। इसी का फायदा सरकार भी उठाती है और दलाल भी। गोरखपुर में कल सुबह जब मैं कफील के निजी अस्पताल पहुंचा तो मुख्यद्वार 'डॉक्टर के खान मेडिस्प्रिंग चाइल्ड होस्पिटल' स्वागत कर रहा था। तारीफ में दो स्थानीय अखबारों के विज्ञापन भी पब्लिश थे। लेकिन कुछ घंटे बाद ही सब निशान कफील ने मिटवा दिए। फिर मैं नाम पर सफेदी चढ़ी तस्वीर भी ले आया। वहां उनकी गुंडई से निपटना पड़ा तो निपटा भी।

आप खुद देखिए और तय कीजिये कि विलेन को आपने हीरो कैसे बनाया। यह आदमी सुबह 9 बजे से शाम 9 बजे तक अपने निजी अस्पताल में होता था, जबकि यह मेडिकल कॉलेज में बच्चा और इंसेफ्लाइटिस दोनों ही वार्ड का मुखिया था। इस बारे में दैनिक भास्कर में छपी मेरी रिपोर्ट पढिए... नीचे की न्यूज कटिंग पर क्लिक करिए...

 

लेखक अजय प्रकाश तेजतर्रार और जन सरोकारी पत्रकार हैं. उनका यह लिखा उनकी एफबी वॉल से लिया गया है.

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