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पंकज कुमार वर्सेज यूनियन आफ इंडिया रिट याचिका की सुनवाई जस्टिस रंजन गोगई व जस्टिस नवीन सिन्हा की बेंच करेगी... बिहार के गया जिले से जम्मू तबादला किये गए दैनिक जागरण के पत्रकार पंकज कुमार के रिट याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्टूबर की टेनटेटिव तिथि निर्धारित की है. जस्टिस रंजन गोगई व जस्टिस नवीन सिन्हा की बेंच सुनवाई करेगी. बिहार के पूर्व कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश नागेन्द्र राय सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता पंकज कुमार की ओर से अदालत में पक्ष रखेंगे.

क्या है मामला : पंकज कुमार दैनिक जागरण के गया कार्यालय में बतौर सब एडिटर कम रिपोर्टर के पद पर कार्यरत हैं. पिछले साल सितम्बर में पंकज कुमार को पेसमेकर लगाया गया. पूर्व में २००४ में भी पेसमेकर लगा था. पिछले साल अक्टूबर में एक अन्य आपरेशन हुआ. बीमारी व आर्थिक परेशानी से जूझ रहे पंकज ने मजीठिया वेज बोर्ड की मांग की. इसके बाद 21 दिन की वेतन कटौती मैनेजमेंट द्वारा कर दी गयी. मैनेजमेंट ने दबाव बनाने के लिए बीमार व अस्वस्थ पत्रकार पंकज को कार्यालय आकर बायोमेट्रिक हाजिरी लगाने को बाध्य किया. पंकज कुमार लुंगी पहनकर असहनीय दर्द के बीच कार्यालय जाते रहे. उन्होंने अर्न लीव में 21 दिन की वेतन कटौती को एडजस्ट करने की गुहार लगाई लेकिन कंपनी ने कोई तवज्जो नहीं दिया. मजीठिया का भूत उतारने के लिए एक मार्च से पटना ट्रान्सफर का मौखिक आदेश दिया गया.

पंकज कुमार ने 25 मार्च को श्रम आयुक्त के यहाँ मजीठिया की मांग करते हुए आवेदन दिया. कंपनी ने बैकडेट में 20 मार्च की तिथि में जम्मू ट्रान्सफर कर दिया. एक मार्च को प्रेषित कंपनी का ट्रान्सफर आर्डर पंकज को तीन अप्रैल को मिला. कंपनी की तानाशाही के खिलाफ पंकज कुमार सुप्रीम कोर्ट की शरण में न्याय की गुहार लगाने पहुंचे और दो याचिकाएं दाखिल की. 330/2017 रिट की सुनवाई 13 अक्टूबर को संभावित है.

इस बीच पंकज कुमार के ट्रान्सफर आर्डर के खिलाफ मगध प्रमंडल के सहायक उप श्रमआयुक्त विजय कुमार का 30 अगस्त का आदेश दैनिक जागरण के मुंह पर तमाचा है. उप श्रम आयुक्त विजय कुमार ने अपने आदेश में कहा है कि बीमार व अस्वस्थ पत्रकार पंकज कुमार को गया से जम्मू तबादला मजीठिया की मांग करने के कारण किया गया है. आदेश में साफ़ है कि प्रबंधन को ट्रान्सफर करने का अधिकार है. लेकिन अधिकार को कर्मचारी की जायज मांग मांगने के कारण उपयोग करना श्रम कानून के हित में नहीं है. उप श्रम आयुक्त विजय कुमार ने अपने आर्डर में साफ़ लिखा है कि पंकज कुमार का ट्रान्सफर आर्डर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना है. साथ ही कंपनी के खिलाफ़ इस आरोप कि पुष्टि हो गयी कि पंकज कुमार को मजीठिया वेज की अनुसंशा का कोई लाभ देने का एक भी प्रमाण सुनवाई के दौरान देने में कंपनी सफल नहीं हो सकी.

पंकज ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में कंपनी को 32 लाख 90 हजार का डिमांड नोटिस अगस्त में भेजा. कंपनी की ओर से डिमांड नोटिस का कोई जबाव नहीं आया. इसके बाद पंकज ने श्रम सचिव से अनुरोध किया कि वे गया के कलेक्टर से दैनिक जागरण के खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट जारी कराएं. पंकज कुमार की शिकायत पर जागरण कार्यालय पहुंचे जिला श्रम अधीक्षक जुबेर अहमद को मैनेजमेंट ने परिसर के अन्दर घुसने नहीं दिया. जागरण पर सर्विस बुक नहीं देने, ईपीएफ, स्वास्थ्य बीमा का लाभ न देने, गया यूनिट में मजीठिया वेज का अनुपालन न होने सहित कई आरोप हैं. बिहार के श्रम आयुक्त गोपाल मीणा पिछले दो महीने से उप श्रम आयुक्त को आरोप की जाँच कर रिपोर्ट समर्पित करने को कह रहे हैं. लेकिन श्रम आयुक्त श्री मीणा के आर्डर का अनुपालन उप श्रम आयुक्त डॉ. अपर्णा के स्तर से अभी तक नहीं किया गया है.

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
९३२२४११३३५

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