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Anil Singh : भयावह है सच को दबाने की धमकी.. 'द वायर' की रिपोर्टर रोहिणी सिंह ने अपनी खबर पर जय शाह का पक्ष जानना चाहा तो उनके वकील माणिक डोगरा ने लिखा...

If you or anyone in the print, electronic or digital media carries and/or broadcasts any defamatory and/or false imputations including those which breach his fundamental right of privacy and/or defame him, Mr. Jay Shah reserves the right to prosecute and sue such person/entity including anyone who carries or broadcasts a repetition of such libelous / defamatory statement.

क्या अब एबीपी न्यूज़ और एनडीटीवी पर भी मानहानि का मुकदमा ठोंका जाएगा?

Anurag Dwary : टेम्पल इन्टरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड का टर्नओवर साल 2015-16 में 16 हजार गुना बढ़ा है। यह बढ़ोत्तरी तब हुई जब केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनी और उनके पिता अमित शाह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए। इससे पहले टेम्पल इन्टरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड का टर्नओवर न के बराबर था। ‘द वायर’ के मुताबिक जय की कंपनी के टर्नओवर में उछाल की वजह 15.78 करोड़ रुपये का अनसेक्योर्ड लोन है जिसे राजेश खंडवाल की KIFS फिनांशियल सर्विसेज फर्म ने उपलब्ध कराया है लेकिन हैरत की बात ये है कि लोन देनेवाली KIFS फिनांशियल सर्विसेज ने जिस साल जय की कंपनी को लोन दिया उस साल उसकी कुल आय ही 7 करोड़ रुपये थी।

दूसरी बड़ी बात आरओसी के दस्तावेज से यह सामने आई है कि KIFS फिनांशियल सर्विसेज की एनुअल रिपोर्ट में टेम्पल इन्टरप्राइजेज को दिए गए 15.78 रुपये के अनसेक्योर्ड लोन का कोई जिक्र नहीं है। बता दें कि राजेश खंडवाल भाजपा के राज्यसभा सांसद और रिलायंस इंडस्ट्रीज के टॉप एग्जिक्यूटिव परिमल नथवानी के समधी हैं।

जय की कंपनी की बैलेंस शीट में बताया गया है कि मार्च 2013 और मार्च 2014 तक उनकी कंपनी में कुछ खास कामकाज नहीं हुए और इस दौरान कंपनी को क्रमश: कुल 6,230 रुपये और 1,724 रुपये का घाटा हुआ लेकिन जैसे ही केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनी और उनके पिता भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने जय शाह की कंपनी के टर्नओवर में आश्चर्यजनक रूप से इजाफा हुआ है। साल 2014-15 के दौरान उनकी कंपनी को कुल 50,000 रुपये की इनकम पर कुल 18,728 रुपये का लाभ हुआ। मगर 2015-16 के वित्त वर्ष के दौरान जय की कंपनी का टर्नओवर लंबी छलांग लगाते हुए 80.5 करोड़ रुपये का हो गया। यह 2014-15 के मुकाबले 16 हजार गुना ज्यादा है।

मुंबई के वरिष्ठ आर्थिक पत्रकार अनिल सिंह और एनडीटीवी के पत्रकार अनुराग द्वारी की एफबी वॉल से.

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  • Guest - गिरीश त्रिपाठी

    ये आर्थिक पत्रकार क्या बताएँगे कि कोई कंपनी अपनी आय से लोन देती है या अपनी पूंजी से देती है।ये बता रहे है की 7 करोड़ की आय थी जिस वर्ष कंपनी ने लोन दिया पर ये बड़के दल्ले पत्रकार उस कंपनी की पूजी का जिक्र नहीं कर रहे।दूसरा ये दोनों पत्रकार ये बताये की KIFC अगर एक फाइनेन्शियल कंपनी है और वो किसी जमानत पर लोन देती है तो इसमे क्या गलत है,भले ही वो किसी की रिश्तेदार हो।ये महोदय वर्ष 13 व 14 के टेम्पल एंटरप्राइजेज के टर्नओवर का जिक्र तो करते है पर ये उसके पूर्व का जिक्र क्यों नहीं करते जब की जहाँ तक मुझे मालुम है ये कंपनी 2004 की है।क्योकि इसका जिक्र करते ही इनके दोगलेपन की कहानी सामने आ जायेगी।ये अपनी कहानी में ये भी नहीं बताते कि कंपनी ने अपने लोन का मय ब्याज के भुगतान पूर्व में ही कर दिया है।
    ये सब राडिया गैंग के सदस्य है और ये उसी तरह कांग्रेस के कहने पर कहानी को फैलाना चाहते है जैसे वी पी सिंह के खिलाफ बोफोर्स मुद्दे पर सेंट किट्स मुद्दा कुछ दल्ले पत्रकारो ने उठाया था।

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