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पिछले दिनों डीबी स्टार के रिपोर्टर के द्वारा जज पर दबाव डालकर फैसला अपने एक परिचित के पक्ष में देने को लेकर उपभोक्ता फोरम के जज इतने भड़क गए कि उन्होंने आईजी को पत्र लिख दिया कि इसके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। इस खबर के भड़ास में छपने के बाद उच्च प्रबंधन हरकत में आया और बताया जा रहा है कि मामले में भास्कर की किरकिरी होते देख जज के घर संपादक और यूनिट हेड गए, ताकि उन्हें मैनेज किया जा सके। इतना ही नहीं, उन्होंने जज अशोक पाठक को आश्वस्त किया कि वे पुरानी खबरों का खंडन छापेंगे। मंगलवार को उसी डीबी स्टार में सात कॉलम में पुरानी खबरों का खंडन छापा है और एक बॉक्स में पुरानी खबरों के लिए खेद भी प्रकट किया है। भास्कर अपनी विश्वसनीयता की बात करता है, उसके इस खंडन से उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। संभवत: बिलासपुर में यह पहला मामला होगा, जिसमें भास्कर ने सात कॉलम में खंडन भी छापा और खेद भी प्रकट किया।

छत्तीसगढ़ में दैनिक भास्कर के पत्रकारों पर आरोप लगते ही रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से छत्तीसगढ़ में दैनिक भास्कर में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा। उपभोक्ता फोरम के जज अशोक कुमार पाठक को दैनिक भास्कर बिलासपुर के रिपोर्टर आशीष दुबे ने दबाव डालकर फैसला अपने परिचित के हक में देने के लिए कहा था। यह आरोप खुद जज ने लगाया है और आईजी को इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के लिए पत्र लिखा था। आशीष दुबे के खिलाफ जज ने जो पत्र लिखा है, उसकी प्रति नीचे है।  जज ने आरोप लगाया है कि एक मामले में आशीष दुबे एकतरफा फैसला करना चाहता था। ऐसा नहीं करने पर देख लेने की धमकी दी और उलजुलूल खबरें छापने लगा। जज के मुताबिक धमकी के बाद आशीष दुबे ने जज को फोन भी किया कि वह उन्हें देख लेगा। इन सारी बातों का जिक्र जज के आईजी को लिखे पत्र में है।

आशीष दुबे मूलत: दैनिक भास्कर में ही टेलीफोन ऑपरेटर था। वह संपादकों के खास होने के साथ साथ उनके घर का भी खास हो जाता था। ऐसा करते करते मनीष दबे ने उसे संपादकीय टीम में शामिल कर लिया। इसके बाद जितने भी संपादक आए, आशीष दुबे एकदम करीबी बना रहा क्योंकि वह संपादकों के लिए हर किस्म का मक्खन लेकर खड़ा रहता था। यही कारण है कि ढेरों शिकायतों के बाद भी उसके खिलाफ कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। उल्टे उसे सिटी चीफ तक प्रमोट किए जाने की चर्चाएं हुईं। बहरहाल, जिन लोगों को आशीष दुबे ने साजिश करके निपटाया, अब उनके हाथ ये खबर लगी, वे उन्हें कहां छोड़ने वाले हैं। इस खबर को ऊपर तक पहुंचाने की कोशिश में जुटे हैं ताकि भास्कर मैनेजमेंट को इसकी असलियत का भी पता चल सके।

लोग कहने लगे हैं कि जिद से दुनिया बदलने निकले दैनिक भास्कर ने अपने अखबार में दल्ले भर डाले हैं। यही वजह है कि ईमानदार, जुझारु और कर्मठ पत्रकारों के लाले पड़े हैं। भास्कर का बिलासपुर एडिशन भी इससे अछूता नहीं है। यहां डीबी स्टार से जुड़े तथाकथित पत्रकार आशीष दुबे द्वारा इरादतन कन्जयूमर फोरम की कार्य प्रणाली के एंटी खबर लगवाकर अपने परिचित के पक्ष में फैसला सुनाने फोरम के अध्यक्ष पर दबाव डालने का मामला सामने आने के बाद यह अखबार घुटनों के बल पर आ गया। दरअसल दुबे जिस कलम को हथियार बनाकर दलाली की दुकान खोले था, जज ने उसी को कठघरे में खड़ा करने के लिए कमर कस ली। फिर हुआ यूं कि भास्कर प्रबंधन ने अपनी फजीहत बचाने के लिए तत्काल पॉजिटिव खबर बनाकर परोसी।

एक नवम्बर की खबर में बताया गया कि फोरम अच्छे से काम नहीं कर रहा जिसके बाद अध्यक्ष महोदय ने पत्रकार दुबे के खिलाफ एसपी को शिकायत दी। इस मामले को प्रेस क्लब के एक नमूने द्वारा दबाने की भनक भी लगी जिसके बाद कुछ पत्रकारों ने भड़ास से सम्पर्क करके मुद्दे को सामने लाने को कहा। इसके परिणामस्वरुप 7 नवम्बर को उसी अखबार के उसी पेज पर खबर छपी कि फोरम जबरदस्त काम कर रहा। लेकिन यह तो फजीहत बचाने की कोशिश है। उस पत्रकार पर क्या कार्रवाई की जायेगी, यह देखना मजेदार होगा।

आशीष चौकसे

एसोसिएट एडिटर, भड़ास4मीडिया

मूल खबर : 

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