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नई दिल्ली। अठारह जनवरी 2018 को बहस की निर्धारित तिथि पर पीटिशनर शोभना भरतिया और बिहार सरकार के विद्वान अधिवक्ताओं की अनुपस्थिति को सुप्रीम कोर्ट ने काफी गंभीरता से लिया है और कोर्ट ने अपनी गहरी नाराजगी प्रकट की है। सुप्रीम कोर्ट ने 18 जनवरी, 2018 को पारित अपने आदेश में अपनी नाराजगी प्रकट करते हुए  निम्नलिखित आदेश पारित किया है:- ‘‘न्याय का तकाजा है कि कोर्ट दोनों पार्टियों पीटिशनर शोभना भरतिया और रेसपोन्डेन्ट नंबर एक बिहार सरकार को अगली तारीख 14 मार्च, 2018 को अपना पक्ष रखने का अंतिम मौका प्रदान करता है। पीटिशनर के विद्वान अधिवक्ता की अनुपलब्धता की स्थिति में आज बहस स्थगित की जाती है।''

सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर-02 में न्यायमूर्ति श्री जे. चेलामेश्वर और न्यायमूर्ति श्री संजय किशन कौल की खण्डपीठ दैनिक हिन्दुस्तान अखबार की मालकिन शोभना भरतिया की अपील पर सुनवाई कर रही थी। इस मुकदमे में रेसपोन्डेन्ट नंबर दो मुंगेर के मन्टू शर्मा हैं. इनकी ओर से बहस में हिस्सा ले रहे बिहार के अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद ने बहस में पीटिशनर शोभना भरतिया के विद्वान अधिवक्ता के बहस में हिस्सा न लेने पर न्यायालय से पीटिशनर शोभना भरतिया पर बड़ा जुर्माना लगाने की प्रार्थना की और न्यायालय को बताया कि वे लगभग पांच वर्षों  से कोर्ट की कार्यवाही में नियमित भाग ले रहे हैं, परन्तु पीटिशनर शोभना भरतिया और बिहार सरकार के विद्वान अधिवक्तागण बहस से कतरा रहे हैं।

विद्वान न्यायाधीश द्वय ने काफी समय तक विचार-विमर्श के बाद उपरोक्त लिखित आदेश पारित किया और पीटिशनर और बिहार सरकार को अगली तिथि को बहस में हिस्सा लेने और अपना-अपना पक्ष रखने का अंतिम मौका प्रदान किया । स्मरणीय है कि पिछली तिथि को बिहार सरकार के विद्वान अधिवक्ता ने न्यायालय के समक्ष इस मुकदमे से जुड़ी संचिकाओं की चोरी होने की स्थिति में बहस में हिस्सा लेने में असमर्थता प्रकट की थीं और अगली तिथि को बहस में हिस्सा लेने की बात न्यायालय से कही थी।

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