A+ A A-

Yashwant Singh : यूपी सरकार ने मीडिया को मैनेज कर लिया. हिंदुस्तान अखबार में आज फिर यूपी गवर्नमेंट का जैकेट एड यानि चार फुल पन्नों का कलर विज्ञापन छपा है. दो-चार रोज पहले भी ऐसा ही फुल फुल पेज का विज्ञापन यूपी सरकार का छपा था. आल एडिशन इस चार पेजी कलर विज्ञापन की कीमत कितनी होगी, इसका सिर्फ अंदाजा भर लगा सकते हैं. हिंदुस्तान की डिजिटल टीम को भी विज्ञापन मिला है. इसी कारण हिंदुस्तान की वेबसाइट पर अखिलेश का विज्ञापन चलता रहता है. यूपी केंद्रित रीजनल न्यूज चैनल और इसके मालिकान-संपादक लोग अखिलेश के चरणों में बिछे ही हुए हैं. सत्ता जब पैसे और पावर का प्रलोभन दे तो उसके आगे बड़े बड़े शूरमा गिर जाते हैं..

जो नौकरशाह मायावती के जमाने में मीडिया आदि को मैनेज करना का काम संभालता था, वही नवनीत सहगल अब अखिलेश राज का भी संकटमोचक बना हुआ है. याद करिए लखनऊ की निर्भया को लेकर हिंदुस्तान अखबार कितनी तेवरदार रिपोर्टिंग करता था. लेकिन डील हुई और सरोकार खत्म. नतीजा अब सामने दिख रहा है. धड़ाधड़ करोड़ों के विज्ञापन छप रहे हैं. ऐसा ही दूसरे अखबारों के साथ भी हुआ है. यूपी में कुशासन छिपाने के लिए सीएम अखिलेश और उनके संरक्षक लोग नेशनल व रीजनल मीडिया को सेट करने के काम में जोरशोर से लगे रहते हैं. हर किसी नए विवाद, नए घटनाक्रम, नए खुलासे के बाद यूपी सरकार के लोग 'मीडिया मनाओ मीडिया पटाओ' पखवाड़ा शुरू कर देते हैं.. और, ब्लैकमेलर मीडिया आम जन के सरोकार की कीमत पर प्रदेश सरकार से खूनी डील कर लेती है. तुम मुझे पैसा दो, मैं तुझे निगेटिव न्यूज से छुटकारा दूंगा. यही फंडा है ब्लैकमेलर मीडिया का.

ये तो सोशल मीडिया है, वेब साइटें और मोबाइल जैसे आम जन के माध्यम हैं जो असली खबरों को सामने ला देते हैं. अन्यथा मुख्य धारा और कार्पोरेट परस्त ब्लैकमेलर मीडिया तो केवल पैसा बनाने की फैक्ट्री में तब्दील हो चुकी है, इसके मुंह में खून लग चुका है. नेता, अफसर महाचोर और महाहरामी तो हैं ही, ये मीडिया भी परमदलाली के दलदल में धंस चुकी है. अब आम जन की जान तो भइया भगवान ही भरोसे हैं. एक एक दिन अगर चैन से गुजर जाइए तो बंशी बजाइए वरना भाग्य पर आंसू बहाइए कि काहें को यूपी में पैदा हुए... काहें को यपिये में रह गए... लखनऊ में पत्रकारिता के दलालों की लंबी फौज है. जो दलाली नहीं करते वो सरकारी घर पाकर चुप्पी साधे हैं और कहीं बोलने पर बेघर न हो जाएं, इसी आशंका में मौन हैं. याद है, भाजपा से जुड़े पत्रकार पंकज कुमार झा ने लखनऊ निर्भया कांड के ठीक बाद फेसबुक पर लिखा था कि ये दलाल मीडिया पैसे खाकर निर्भया कांड पर चुप बैठ जाएगा. हुआ भी वही. दोषी आईपीएस अफसरों, दोषी डाक्टरों, हत्यारों और बलात्कारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई... सब मौज मजे में है और सरकार का कहना है कि उत्तर प्रदेश तरक्की पर है...

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

इसे भी पढ़ सकते हैं...

अगर हफ्ते भर में चैनलों पर 'चमकता उत्तर प्रदेश' का विज्ञापन शुरू हो जाए तो समझना लखनऊ के निर्भया कांड की खबर बिक गई

xxx

थूथू करवाने के बाद अखिलेश सरकार ने मोहनलालगंज कांड की सीबीआई जांच की सिफारिश की

xxx

यूपी का जंगलराज : यौन उत्पीड़न की शिकार महिला सिपाही न्याय के लिए भटक रही

Leave your comments

Post comment as a guest

0
Your comments are subjected to administrator's moderation.
terms and condition.
  • No comments found

Latest Bhadas