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पब्लिक एप में कत्लेआम जारी, झारखंड से भी सैकड़ों युवा रिपोर्टर हटाए गए

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Mahesh kumar-

झारखण्ड : पब्लिक एप का नाम आपने सुना होगा! या नहीं भी सुना होगा तो जान लीजिए यह एक एंड्रॉयड आधारित ऐप है, जो सोशल मीडिया के तर्ज पर काम करता है। यह आपको आपके आसपास होने वाले घटनाओं से रूबरू कराता है। आज इस एप की छवि बेहद खराब हो गई है। इस एप ने रिपोर्टरों को भर्ती किया खबरें भेजने के लिए और अब उन पर उगाही का दबाव बनाया जा रहा है। जो ऐसा नहीं कर रहा है, उसकी नौकरी ले ली जा रही है।

यह कंपनी सबसे पहले किसी क्षेत्र में प्रखंड स्तर पर रिपोर्टर बहाल करती है। उसे प्रति समाचार के आधार पर मूल्य निर्धारित कर उसके बैंक खाते में महीने के अंत में पैसे डाल देती है, जिससे रिपोर्टर का इस एप पर विश्वास बढ़ जाता है।

ये एप पहले दूसरे मीडिया हाउस के पत्रकार को अपने साथ लेता है। बाद में अप्रत्यक्ष तौर पर उस पर दबाव बनाता है कि वह सब कुछ छोड़ कर प्राथमिक तौर पर उसे ही अहमियत दे।

जब वह पत्रकार अपने प्रारंभिक हाउस को छोड़ता है तो बाद में उस पर दबाव बनाया जाता है कि वह पब्लिक एप के लिए लगातार काम करे।

दबाव में रिपोर्टर अपनी आमदनी कायम रखने के लिए काम करता है। तो पहले उसके ऊपर समय की पाबंदी, बाद में दाम में कमी, अर्थात जिस समाचार के लिए पहले 200 मिलता था अब 100 रुपये के नीचे आ गया है। इसके बाद अधिक संवाददाता की नियुक्ति कर आपस में प्रतिस्पर्धा कराता है, जिससे एक दूसरे की शिकायत करने का काम पत्रकार शुरू कर देते हैं। अब इसका फायदा उठाकर वो रिपोर्टर को 100 की जगह 50 रुपये का भुगतान करता है। जब कंपनी को लगता है कि अधिक रकम दिया जा रहा है तो खबर को यह लिखकर रिजेक्ट किया जाता है कि यह उसके गाइडलाइंस में नहीं है।

अब समझिए जब समाचार स्वयं पत्रकार संकलन करता है, स्वयं उसके बारे में बताता है, इंटरनेट तेज रखने की जिम्मेवारी रिपोर्टर की, इसके बाद कंपनी सिर्फ रिजेक्ट करने का काम करती है। जबकि अभी तक किसी रिपोर्टर को पता नहीं कि गाइडलाइंस है क्या।

जो रिपोर्टर इस एप को प्राथमिकता देकर अपने हाउस को छोड़ देता है (जो इसे पहचान देता है) वह अब लाचार नजर आता है। तनाव में अपना जीवन गुजार रहा है। उसके परिवार के सदस्य से पता चलता है कि समाचार को लेकर काफी तनाव में है।

विज्ञापन का दबाव न सिर्फ 15 अगस्त, 26 जनवरी को, बल्कि किसी छोटे नेता का जन्मदिन भी हो तो कंपनी रिपोर्टर को मैसेज करती है कि आप उससे संपर्क करें। इसके बाद रिपोर्टर परेशान नजर आ रहे हैं।

यदि कोई प्रतिष्ठान या व्यापारी अपना विज्ञापन देता है तो वह दुबारा देना नहीं चाहता क्योंकि एप पर विज्ञापन देने से उसे कोई रिटर्न नहीं मिलता। जब व्यापारी को लाभ नहीं है तो वह विज्ञापन दे क्यों?

जब कोई रिपोर्टर विज्ञापन नहीं दे पाता है तो उसे कंपनी हटा देती है। कुछ युवा पत्रकार जो इस एप से जुड़ कर अपना भविष्य निर्माण करने की सोचे थे, सदमे में हैं। परिवार वाले परेशान हैं। गुस्से में लोग पब्लिक एप को मोबाइल से हटा रहे हैं, अनइंस्टाल कर रहे हैं।

ये एप वाले खबर भी क्या पसंद करते हैं, कभी मुर्गा लड़ाई तो कभी पड़ोसी के घर झगड़े की न्यूज को ये लोग दिखाते हैं। ऐसी न्यूज को लोग पसंद नहीं करते हैं। लेकिन रिपोर्टर को तो हर न्यूज़ पर पैसा मिलता है इसलिए ऐसा करता है।

पब्लिक एप अपने रिपोर्टर पर जुर्माना लगाकर इसकी सूचना सभी ग्रुप में डालता है जिससे रिपोर्टर भयभीत रहे.. स्पष्ट है कि ये ऐप पत्रकारिता करने नहीं बल्कि पैसे बनाने के लिए आया है जिसका असली मकसद खुलकर अब सामने आया है.. इसका मुख्य लक्ष्य रिपोर्टर को चिटफंड कंपनियों नान-बैंकिंग कंपनियों के एजेंट की तरह उपयोग करना है। बेचारे रिपोर्टर अपनी नौकरी बचाने के लिए अपने हित, मित्र, रिश्तेदार से विज्ञापन मांगते नजर आते हैं।

किसी नेता या विधायक के यहां पब्लिक एप के पत्रकार यूं कहें एजेंट इतनी बार जाते हैं कि वह भी परेशान हो जाते हैं… आगे क्या होगा यह नहीं पता लेकिन एक बात स्पष्ट है कि इस एप से अनेक युवा पत्रकार हतोत्साहित हैं, परेशान हैं।

देखिए झारखंड में पब्लिक एप का मैसेज और हटाए गए रिपोर्टर की सूची…

सभी रिपोर्टर साथी ध्यान दें… निरंतर हमारे द्वारा सभी रिपोर्टर साथियों से अनुरोध किया जा रहा है कि आपको न्यूज़ टारगेट के साथ-साथ सेल्स के टारगेट को भी पूरा करना है। हमारे कई रिपोर्टर साथियों ने सेल्स के कार्य को गंभीरता से नहीं लिया।जिस कारण इन रिपोर्टर साथियों की 100 से अधिक आईडी को आज डीएक्टिवेट किया गया है। इनके द्वारा दिसंबर माह में एक भी विज्ञापन नहीं दिया गया गया है। आप सभी से अनुरोध है सेल्स के कार्य को गंभीरता से लें और जनवरी माह में समय रहते सेल्स का टारगेट पूर्ण करें। 1 फरवरी को उन सभी रिपोर्टर साथियों की आई डी को भी बंद कर दिया जाएगा जिनके द्वारा जनवरी माह का सेल्स टारगेट पूरा नहीं किया जाएगा। निम्नलिखित रिपोर्टर्स की आई डी आज हमारे द्वारा बंद की गई है-

नाम यूजरआईडी
Name UserName
Palku palku
Ranjan Kumar ranjanku
naresh kumar naresh.kbokaro
SwetaAnita swetaanita
News Today Petarwar kumar08225157
Utpal Saxena utpalsaxena
Vikash Kumar Sharma vikash39447260
Dharmendra Pathak dharmendrapathak2016
Krishna Goswami krastikgiri25
Krishna Goswami krastikgiri25gmail
mahesh Kumar mahesh29916
dipak kumar dubeydeepak75
Banty jha pbjha1990
Sanjay Yadav sanjay6172yadav
harihar verma दैनिक भास्कर hariharverma5
Bharat mandal_ News 11 भारत bharat909061
@Shivani Seth sethshivani77
Ashmita Mahajan mahajanashmita137
muktinath pandey muktinathpandey36
Kamlesh Das kamlesh.das85
Md Manawwar Ansari 8102432467 mdmanawwaransari868
Deepak Kumar deepak.okni
Deepak gupta princerajprince143
Sourav Anurag souravanurag
deepak singh deepakjamtara
Suman Bhattacharjee bsuman
खबर भी असर भी mim733
Rudra Sachin rudra_sachin
KASHIF AKHTER kashifakhtersajid
public news saraswatisneha19
Amit Lakra Bhagat amit7687882
Akash sahu akashsahu12
M. HINDUSTANI mahi123raj
Madhusudan sah mr.mantu12345
Kundan Kumar 123kunal.kunal
Niranjan Sinha (पत्रकार ) publicnewschhatarpur
Pancham Kumar yourpancham
Nikhil kumar pandey golupandeypalamau
Ravi Shanker ravi_9304731946
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पत्रकार रामबली दुबे dubey1995
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Bhavna Jha bhavnajha
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