ईडी अफसर राजेश्वर सिंह प्रकरण पर वित्त मंत्रालय में बवाल शुरू

दी टेलीग्राफ में छपी खबर

केंद्रीय वित्त मंत्रालय में असैनिक संघर्ष शुरू हो गया है और यह बुधवार को खुलकर सामने आ गया। पता चला है कि प्रवर्तन निदेशालय के संयुक्त निदेशक राजेश्वर सिंह ने राजस्व सचिव हसमुख अधिया से लिखित में पूछा है कि सर्वोच्च अधिकारी “घोटालेबाजों और उनके सहयोगियों का पक्ष लेकर” क्या उनसे नाराजगी जता रहे हैं? अधिया गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी हैं और वित्त मंत्रालय में ना सिर्फ सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं बल्कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बेहद करीबी माने जाते हैं। नोटबंदी और जीएसटी लागू करने में इनकी निर्णायक भूमिका रही है।

हालांकि, हाल के दिनों में यह अटकल चल रही है कि सत्ता के गलियारे में अधिया का महत्व कुछ कम हुआ है। खुद वित्त मंत्रालय भी इस समय बदलाव की स्थिति में है क्योंकि सर्जरी के बाद स्वास्थ्य लाभ करते हुए अरुण जेटली बगैर मंत्रालय के मंत्री हो गए हैं पर अपने पिछले मंत्रालय पर करीबी नजर रख रहे हैं। नवीनतम विवाद की शुरुआत बुधवार को तभी हो गई जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय के संयुक्त निदेशक राजेश्वर सिंह के खिलाफ संपत्ति से संबद्ध मामले की जांच होनी चाहिए। प्रवर्तन निदेशालय वित्त मंत्रालय के तहत रजस्व विभाग को रिपोर्ट करता है। अदालत ने यह भी कहा है कि वह किसी के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं कर रही है।

द टेलीग्राफ अखबार ने अंदर पेज सात पर एक अलग खबर छापी है जिसमें कहा गया है कि दूरसंचार घोटाले से संबंधित अधिकारी की जांच होगी। इस खबर के मुताबिक “बेहद संवेदनशील” एयरसेल मैक्सिस करार समेत टूजी स्पेक्ट्रम आवंटन के मामलों की जांच कर रहे अधिकारी के खिलाफ “गंभीर आरोपों” की जांच के लिए केंद्र स्वतंत्र है और किसी भी अधिकारी को आरोपों के साए में नहीं रहना चाहिए। न्यायमूर्ति अरुण मिश्र और एसके कौल की अवकाश पीठ का मानना था कि ईडी अधिकारी राजेश्वर सिंह के खिलाफ लगे आरोप गंभीर हैं और इनकी जांच होनी चाहिए तथा यह सरकार के ऊपर है कि एयरसेल मैक्सिस जांच में उनकी भूमिका रहेगी कि नहीं। राजेश्वर सिंह पर आय के ज्ञात स्रोत से ज्यादा संपत्ति रखने का आरोप है।

फाइल फोटो : राजेश्वर सिंह

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि जब आपके (राजेश्वर सिंह) खिलाफ आरोप हैं, सही हों या गलत, तो उसे देखा जाना चाहिए। दूसरा मुद्दा यह है कि आपको प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए। तीसरा बिन्दु यह है कि जब आप पर आरोप है और आपके खिलाफ जांच चल रही है तो आपके लिए जांच करना उपयुक्त होगा कि नहीं। इसपर अदालत ने कहा, आप सिर्फ एक अधिकारी हैं। आपको खुले तौर पर क्लिन चिट नहीं दी जा सकती है। हर कोई जवाबदेह है। आपको भी अपनी किसी कार्रवाई के लिए जवाबदेह होना चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करना है कि आप जवाबदेह रहें। हम आपको क्षति पहुंचाना या आपके खिलाफ टिप्पणी करना नहीं चाहते हैं। आपके खिलाफ बहुत गंभीर आरोप हैं।”

एयरसेल मैक्सिस मामले में यूपीए के मंत्री दयानिधि मारण पर आरोप है कि वे एयरसेल के मालिक पर दबाव डालते रहे हैं ताकि अपना हिस्सा मैक्सिस को बेच सकें। इस मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के परिवार पर भी आरोप लगे हैं। ऐसे संकेत रहे हैं कि वित्त मंत्रालय में एक वर्ग चाहता है कि सिंह को एयरसेल मैक्सिस मामले की जांच से अलग किया जाए। इस अधिकारी के आलोचक उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हैं और एक फोन कॉल की चर्चा रही है जो सिंह के पास दुबई से 2016 में आया था। इस आधार पर सिंह की तरक्की रोक ली गई है।

ईडी द्वारा जारी प्रेस रिलीज

भाजपा सांसद सुब्रह्मणियम स्वामी ने शाम में एक आरोप को रीट्वीट किया- ”वित्त सचिव हसमुख अधिया @adhia03 ने चिदंबरम को बचाने के लिए रॉ के बनाए 2016 के एक पुराने इनपुट को आज एक सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट में पेश करके ईडी अधिकारी राजेश्वर सिंह के खिलाफ फ्रॉड किया है। अधिया ने रॉ को ईडी प्रमुख के जवाब को दबा दिय़ा।”

इस पर टिप्पणी के लिए अधिया से संपर्क नहीं किया जा सका। सिंह छुट्टी पर चले गए हैं। पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है। अदालत की पीठ ने जब यह कहा कि सिंह की जांच होनी चाहिए तो अदालत से दूर खूब ड्रामा हुआ। सिंह ने एक चिट्ठी अधिया को लिखी थी जो राजस्व सचिव को अग्रसारित की गई थी, ‘लीक’ हो गई। इस चिट्ठी में सिंह ने अधिया से कहा है, ”मुझे इससे और तकलीफ हुई कि आपने कई बार वरिष्ठ अधिकारियों से अनौपचारिक बातचीत में कहा है कि मैं न्यायपालिका को प्रभावित करता रहा हूं, खासौतर से सुप्रीम कोर्ट को। यह अजीब है और अविश्वसनीय भी कि इतने वर्षों तक सरकारी नौकरी में रहने के बाद भी आप मानते हैं कि इतने सार जजों को प्रभावित किया जा सकेगा और वह भी इतने लंबे समय तक।”

राजेश्वर सिंह से संबंधित एक पत्र जिसे सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया

अधिकारी ने कहा कि एक पत्रकार जो उन्हें धमका रहा है, की पहुंच वित्त मंत्रालय से लेकर सत्ता के गलियारे तक है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी वाली एयरसेल मैक्सिस जांच के कारण चिदंबरम उनके खिलाफ खुला और सीधा दुर्भाव रखते हैं। हालांकि अधोहस्ताक्षरकर्ता (सिंह) को जो चीज सबसे ज्यादा चौंकाती है वह है “घोटालेबाजों और उनके सहयोगियों का पक्ष लेकर” आपने स्थायी तौर पर मेरे खिलाफ आपने विद्वेष पाला है।

पत्र ‘लीक’ होने के बाद वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने पीटीआई से कहा कि सिंह ने राजस्व सचिव के खिलाफ जो आरोप लगाए हैं वे निराधार हैं। एक सूत्र के हवाले से यह लिखा गया है कि, ईडी अधिकारी अब सिर्फ अपनी खाल बचाने के लिए अनुचित आरोप लगाने की कोशिश कर रहे हैं। पर प्रवर्तन निदेशालय ने इन सूत्रों का खंडन किया और सिंह को एक जिम्मेदार अधिकारी बताया जिनका शानदार कैरियर रिकार्ड है। स्वामी के दावे के संदर्भ में एक औपचारिक बयान में प्रवर्तन निदेशालय ने कहा है, रिकार्ड ठीक करने के लिए राजेश्वर सिंह के पास 2016 में दुबई से किसी व्यक्ति का फोन आया था जिसने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की जा रही जांच के संबंध में महत्वपूर्ण सूचनाएं दीं। उल्लेखनीय करियर रिकार्ड वाला एक जिम्मेदार अधिकारी होने के नाते सिंह ने यह सूचना निदेशालय को दी और इसका उपयोग मामले की जांच में किया गया। यह नोट करना महत्वपूर्ण है कि उनके पास एक ही कॉल आई थी और वह भी इस व्यक्ति द्वारा ही दुबई से की गई थी।

संजय कुमार सिंह

मुख्यरूप से कोलकाता और पूर्वी भारत के भिन्न केंद्रों से प्रकाशित होने वाले अंग्रेजी दैनिक द टेलीग्राफ की खबर का अनुवाद। अखबार के ब्यूरो ने पीटीआई की अतिरिक्त रिपोर्टिंग के साथ यह खबर सात कॉलम में लीड छापी है। वरिष्ठ पत्रकार और अनुवादक संजय कुमार सिंह ने फेसबुक पर अपने Anuvaad Communication के पेज पर यह अनुवाद पोस्ट किया है, जहां से हम साभार प्रकाशित कर रहे हैं।

मूल खबर….

ईडी अधिकारी राजेश्वर सिंह पर आरोप काफी गंभीर, आय से अधिक संपत्ति की जांच हो : सुप्रीम कोर्ट

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