घटिया लेख नहीं छापा तो संघी राकेश सिन्हा ने प्रबंधन से मेरी शिकायत कर दी थी

Anil Jain : संघ के प्रचारक उर्फ विचारक राकेश सिन्हा को दलित आंदोलनकारी समझकर पुलिस द्वारा पकडने की कहानी में बडा झोल है। राकेश सिन्हा रोजाना तीन-चार सुपारीबाज टीवी चैनलों की चकल्लस उर्फ बहस में शामिल होते है, इस नाते उनका चेहरा सब लोग खूब पहचानते हैं। ऐसे में यह बात गले नहीं उतरती कि पुलिस ने उनको दलित आंदोलनकारी समझकर पकड लिया होगा। निश्चित मामला कुछ और ही रहा होगा जिसके चलते पुलिस ने सिन्हा को पकड़ा होगा। अगर सिन्हा की कहानी सही होती तो बेखबरी टीवी चैनल चीख-चीख जमीन-आकाश एक कर देते। वैसे भी राकेश सिन्हा अव्वल दर्जे के झूठे और मक्कार हैं। एक दशक पहले मैं जिस अखबार में कार्यरत था, वहां इन महाशय का एक घटिया लेख मैंने छापने से इनकार कर दिया था, जिस पर इन्होंने अखबार के प्रबंधन से मेरे बारे में झूठी शिकायत की थी। हालांकि उससे मेरा कुछ नहीं बिगडा था। हां, इन महाशय को एक अवसर पर मैंने सार्वजनिक तौर जरूर आईना दिखा दिया था।

वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन की एफबी वॉल से.

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