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मोदी स्टाइल में कई ड्रेस बदल कर रवीश ने किया ‘वो’ वाला प्राइम टाइम! इस Video को न देखा तो क्या देखा

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यशवंत सिंह-

बीते बरस न्यूज चैनलों ने बहुत निराश किया. मोदी के गोदी बन चुके ज्यादातर न्यूज चैनलों में देखने लायक कुछ था ही नहीं इसलिए मेरे घर पर टाटा स्काई का कनेक्शन रीचार्ज नहीं हुआ. वही सुधीर चौधरी, वही अमीश देवगन, वही रजत शर्मा, वही अंजना ओम कश्यप, वही चित्रा त्रिपाठी, वही श्वेता सिंह, वही राहुल कंवल, वही दीपक चौरसिया… सरकार भी भक्ति में लीन पत्रकारों की इन जमात से किसी ऐसे कंटेंट या किसी ऐसे शो की उम्मीद नहीं कर सकते थे जिनसे सत्ता सिस्टम सबक ले, सत्ता सिस्टम सुधार को प्रेरित हो… ये गोदी पत्रकार सत्ता के इशारे पर अपने चैनल का सत्तानुकूल लय में बजाते रहे और इस नए साल में भी बजा रहे हैं… टीवी पत्रकारिता इतनी घटिया इतनी औसत और इतनी बौनी कभी न थी…

पत्रकार होने का सीधा साफ मतलब होता है सरकार की गलत नीतियों का खुलासा कर इसके लिए जिम्मेदार लोगों की बैंड बजाइए… इस दिशा में जिन जिन ने प्रयास किया, उन्हें गोदी चैनलों ने अपने यहां से हटा दिया.. पुण्य प्रूसन बाजपेयी से लेकर नवीन कुमार तक… ऐसे दर्जनों पत्रकारों ने अपना ठीहा फेसबुक-यूट्यूब पर बनाया और यहीं से पत्रकारिता करने लगे. ये एक नए किस्म की पत्रकारिता है… डिजिटल टीवी जर्नलिज्म… देखते देखते अजीत अंजुम, साक्षी जोशी, नवीन कुमार, पुण्य प्रसून बाजपेयी, अभिसार शर्मा आदि के लाखों फालोवर बन गए… इनके चैनलों के वीडियोज करोड़ों में देखे जाने लगे… इनकी एक अलग दुनिया बन गई… ये लोग सैटेलाइट न्यूज चैनल से मुक्त होकर डिजिटल टीवी जर्नलिज्म में आए और छा गए….

उधर सैटेलाइट चैनलों की दुनिया में मोदी सरकार की तमाम प्रताड़नाओं के बावजूद एनडीटीवी पर रवीश कुमार अकेले मोदी सरकार की गलत नीतियों की पोल खोलते रहे, सत्ता से सवाल पूछते रहे, सत्ता के झूठ और प्रोपेगंडा का पर्दाफाश करते रहे… रवीश पूरे देश में पत्रकारिता के रोल माडल बन गए… एक तरफ टीवी के दर्जनों गोदी पत्रकार थे तो दूसरी तरफ अकेले रवीश कुमार… एनडीटीवी ने रवीश कुमार को बोलने कहने बताने की आजादी दी तो रवीश कुमार अपने अंदाज में निए नए प्रयोग करते कहते दिखाते बताते गए…

इसी कड़ी में साल बीतते बीतते रवीश ने एक ऐसा प्राइम टाइम किया जिसने तहलका मचा दिया… पीएम नरेंद्र मोदी जिस तरह किसी एक दिन के प्रोग्राम में कई बार कपड़े बदल लेते हैं उसी तरह रवीश कुमार ने एक ही प्राइम टाइम में कई सूट बदल कर पीएम मोदी की कथनी-करनी के फर्क पर करारा चोट किया.

मोदी खुद को वैसे तो फकीर बताएंगे लेकिन दिन में दर्जन भर बार कपड़े बदल लेंगे… ये विरोधाभाष दिखाने के लिए रवीश ने एक ही शो में कई बार कपड़े बदले… उन्होंने इस प्राइम टाइम में बताया कि बीत रहे साल में देश से ‘वो’ गायब हो गया… इस ‘वो’ को जो न समझ पाए, समझिए वो पक्का वाला भक्त है क्योंकि उसके पास ‘वो’ है ही नहीं…

रवीश के इस प्राइम टाइम को जरूर देखना चाहिए… पत्रकारिता से जुड़े लोगों को विशेषकर देखना चाहिए… पत्रकारिता के छात्रों को खासकर देखना चाहिए… और आम नागरिकों को इसलिए देखना चाहिए कि एक पत्रकार किस तरह अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए सत्ता शीर्ष पर चलने वाले खेल तमाशों का भंडाफोड़ अपने तरीके से करता है…

देखें Ravish Dress and Vo prime time show

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  • यशवंत जी इनकी समस्या अलग लेबल की है ये विरोध के लिए विरोध करते कभी कुछ अच्छा भी हुआ या उसका बिरोध किया उसे ऐसा दिखया की इसकी जरूरत नही, 2009 से आप को भी पढ़ता हूं , इनको खूब देखता था पता नही अब बुरा लगने लगा। रविश जी बौद्धिकता के रोगी हो गए!

  • Yaswant ji, Mujhe lagta hai aapko ye prime time khud ek baar dhyaan se dekhna chahiye. fir aap sochiyega ki kya ye sirf virod karna hai isliye virodh nahi hai.
    Ek viewer ki haisiyat se mai bhi kabhi Ravish ka Jabardast Fan hua karta tha, itna ki Ravish ke alawa or koi program nahi dekhta tha.
    aab baat Bhadas ki, pichale kai ek saalo se bhadas mere jivan ka hissa bana hua hai, magar ab aisa lagne laga hai Bhadas bhi sirf "MODI, BJP or RSS" ke virodh karne ka plateform banta ja raha hai.
    Khair, aaj ke samay me mai koi ptrakar to nahi hun, viewer hu sirf.
    Magar sochiyega..vastav me media Godi ho gaya hai kya.. agar ha to jo nahi huye hain (mere vichar me sirf our sirf NDTV) unko kya naam dena chahiye ?
    aapko isliye bola ki sochiyega kyonki ummid hamesha karm yogi se hoti hai..
    Dhanyawad

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