इस तरह की रिपोर्टिंग आपको हिन्दी अखबारों में नहीं मिलेगी

नैतिकता को ताक पर रखकर पीयूष गोयल ने पीरामल समूह को बेचे अपनी कंपनी के शेयर

Ravish Kumar : ‘बिप्लबी बयान’ के बहाने रोहिणी सिंह की पीयूष गोयल पर रिपोर्ट ही गुल हो गई… thewire.in की रोहिणी सिंह ने पीयूष गोयल के बारे में एक और रिपोर्ट की है। पीयूष गोयल के मंत्री बनने के चार महीने बाद सितंबर 2014 में उनकी पत्नी की स्वामित्व वाली कंपनी पीरामल ग्रुप को 1000 गुना अधिक दाम में बेच दी गई।

पत्रकार रोहिणी सिंह की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह लेन-देन नैतिकता से जुड़े कई सवाल खड़े करता है। क्योंकि 2014 और 2015 में प्रधानमंत्री कार्यालय में मंत्री के तौर पर संपत्तियों और देनदारियों की अनिवार्य घोषणा में न तो इस कंपनी फ्लैशनेट इंफो साल्यूशंस पर उनके स्वामित्व का कोई ज़िक्र है न बिक्री का।

यह हितों के टकराव का एक और मामला है। पीरामल ग्रुप बिजली और नवीन एवं अक्षय ऊर्जा के झेत्र से जुड़ा हुआ है और बिक्री के समय पीयूष गोयल बिजली, कोयला और नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय के राज्यमंत्री थे।

वायर ने पीरामल ग्रुप और पीयूष गोयल का जवाब भी छापा है जिस पर संपादक सिद्धार्थ वरदराजन की टिप्पणी बताती है कि यह जवाब रूटीन सा है। मूल सवालों का जवाब नहीं है। आप ख़ुद भी पढ़ सकते हैं। हिन्दी में भी है। ऐसी ख़बरें आजकल ग़ायब कर दी जाती हैं। ऐसी कौन सी कंपनी है जिसके शेयर 1000 गुना दाम पर बेचे गए, वो कंपनी अब क्या गुल खिला रही है?

नीचे लिंक दे रहा हूं ताकि आप इसे चटका कर पढ़ सकें। पीयूष गोयल पर रोहिणी सिंह की यह दूसरी रिपोर्ट है। इस तरह की रिपोर्टिंग आपको हिन्दी अखबारों में नहीं मिलेगी। आप भी इस ख़बर को शेयर करें ताकि 99 प्रतिशत मीडिया जो गोदी मीडिया में बदल चुका है, उसके बीच किसी तरह का संतुलन कायम किया जा सके। जो लोग मेरी तटस्थता को लेकर कमेंट में गाली देते रहते हैं, उनके लिए भी तटस्थ होने का शानदार मौका है। वे भी इस लिंक को शेयर कर खुद को तटस्थ साबित कर सकते हैं।

http://thewirehindi.com/41603/in-selling-firm-to-piramal-group-as-minister-piyush-goyal-pushes-ethical-boundaries/

एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार की एफबी वॉल से.

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