A+ A A-

  • Published in आयोजन

कोटा। मशहूर रंगकर्मी, साहित्यकार एवं राजनेता शिवराम के स्मृति दिवस पर परिचर्चा और नुक्कड़ नाटक का आयोजन “विकल्प जन सांस्कृतिक मंच” “श्रमजीवी विचार मंच" तथा "अभिव्यक्ति नाट्य एवं कला मंच" अनाम, कोटा द्वारा आयोजित किया गया। इस स्मृति दिवस पर नुक्कड़ नाटक "विश्वास एवं अंधविश्वास" की प्रस्तुति शिवराम द्वारा संस्थापित नाट्य संस्था "अभिव्यक्ति नाट्य एवं कला मंच  "अनाम" कोटा (राजस्थान) द्वारा की गई। नाटक की दो प्रस्तुतियां कोटा मे की गई।

पहली प्रस्तुति गायत्री सभागार, झालावाड़ रोड पर और दूसरी किशोर सागर तालाब के किनारे पर। प्रस्तुति के दौरान दर्शक मंत्र मुग्ध हो कर देखते रहे और बाद में दर्शकों ने सभी कलाकारों से मिल कर बधाई दी। नाटक का उद्देश्य समाज मे व्यापत ढोंग, आडम्बर, पांखड और अंधविश्वास के विरुद्ध जन जागरूकता फैलाना था। नाटक के निर्देशन की जिम्मेदारी युवा रंगकर्मी आशीष मोदी द्वारा निभाई गयी तथा मुख्य भूमिकाएं पवन स्वर्णकार, राजकुमार, जितेंद्र सोनी, सचिन राठौर, मनोज शर्मा, राम शर्मा, कपिल गौतम, शिवकुमार, सोम्या स्वर्णकार, आकाश सोनी, कपिल तारे ने निभाई।

शिवराम द्वारा लिखित नाटक "जनता पागल हो गयी है" हिंदी का पहला नुक्कड़ नाटक माना जाता है और भारत में सबसे ज्यादा खेला गया नुक्कड़ नाटक भी यही है। महत्वपूर्ण बात यह रही कि निर्देशक आशीष मोदी एक रात पहले ही दिल्ली से कोटा पहुचे थे और महज तीन घंटे में ही उनके साथ नाट्य दल ने इस नाटक को तैयार कर दोनों प्रस्तुतियां दी।

परिचर्चा में अपने विचार व्यक्त करते हुए साहित्यकारों ने कहा की समय के जिस दौर से हम गुजर रहे है वह कुटिल और मनुष्य विरोधी दौर है, ऐसे विपरीत समय में रचनाकारों और कलम के सिपाहियों का यह फर्ज़ बनता है की मनुष्य विरोधी ताकतों का विरोध करे। समारोह के मुख्य अतिथि सवाईमाधोपुर से आए डा. रमेश वर्मा ने कहा की वर्तमान समय मे वर्चस्वकारी शक्तियों ने सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्यो को नष्ट करने की मुहिम चला रखी है, बाजारवादी भूमंडलीकरण ने केवल उपभोग की वस्तुओ का ही नहीं मनुष्य के विवेक और ज्ञान को भी खरीद लिया है।

उत्तराखंड से आए साहित्यकार सिद्धेश्वर सिंह ने कहा कि वर्तमान समाज बेहतर मनुष्य बनाने के बजाय सफल मनुष्य बनाने की और अग्रसर है, यह सफलता बाज़ारवाद पर टिकी है जिसने साहित्य और संस्कृति को सूचनाओ और विकृतियों से ग्रस्त कर दिया है, उन्होंने वर्तमान समय को मनुष्य समाज का संकट काल बताते हुए कहा की बेहतर साहित्य का सृजन संकट के समय ही होता है। दिनेश राय दिवेदी ने अपने उदबोधन मे कहा की शिवराम नुक्कड़ नाटक की विधा के जन्मदाता और एक उत्प्रेरक साहित्यकार थे । साहित्यकार महेंद्र नेह ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा की वर्तमान समय अंधविश्वासों और रूढ़ियों से संघर्ष करके एक नया प्रगतिशील समाज गढ़ने का समय है। कार्यक्रम के प्रारम्भ मे रविकुमार ने शिवराम की कविताएं एवं गीत सुनकर उन्हें जीवित कर दिया।आयोजन स्थल पर रविकुमार द्वारा शिवराम की कविताओं पर पोस्टर प्रदर्शनी एवं लघु पत्रिका प्रदर्शनी लगाईं गई जिसमें "बनास जन", "चौपाल" और "अभिव्यक्ति" जैसी पत्रिकाएं उपलब्ध थीं।

फोटो एवं रिपोर्ट- आशीष मोदी

भड़ास4मीडिया डॉट कॉम को छोटी-सी सहयोग राशि देकर इसके संचालन में मदद करें: Rs 100 > Rs 200 > Rs 500 > Rs 1000 > Rs 2000 > Rs 5000

Leave your comments

Post comment as a guest

0
Your comments are subjected to administrator's moderation.
terms and condition.
  • No comments found

Latest Bhadas