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सईद अंसारी के पास न व्हाट्सएप है, न फेसबुक, न ट्विटर और न इंस्टाग्राम!

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विकास मिश्र-

सईद अंसारी। कई मायने में धरती पर अजूबा हैं ये। इनके बारे में एक पोस्ट बहुत पहले लिखी थी, लेकिन ये पोस्ट तो इनके अजूबेपन पर है।

सईद भाई देश के जाने माने एंकर हैं। हर खबर से अपडेट रहते हैं, लेकिन इनके फोन में न तो व्हाट्सएप है, न तो फेसबुक पर इनकी प्रोफाइल है। ट्विटर और इंस्टाग्राम पर भी ये नहीं हैं। यानी सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर हैं।

सईद भाई खुद तो सोशल मीडिया के किसी भी प्लेटफॉर्म पर नहीं हैं, लेकिन इनके फैन्स ने तो फेसबुक और इंस्टाग्राम पर बाकायदा इनका पेज बना रखा है। इनकी जबरदस्त फैन फॉलोइंग है।

आज के दौर में जहां व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर को लोग अनिवार्य जरूरत मानते हैं, अक्सर मोबाइल में सिर गड़ाए दिखते हैं। मोबाइल जिनके लिए लत बन चुकी है। ऐसे लोगों के लिए चुनौती हैं सईद अंसारी। जो कभी सिर झुकाकर मोबाइल में नहीं घुसे रहते। हमेशा सिर उठाकर रहते हैं, जीते हैं।

सईद अंसारी के मोबाइल में व्हाट्सएप स्टार्ट करवाने की सुपारी कई लोगों ने ली। कुछ एंकर्स ने भी कोशिश की, लेकिन सारी कोशिशें नाकाम रही, सईद भाई सोशल मीडिया पर नहीं आए तो नहीं आए। फोटो शेयर वे जीमेल से करते हैं। डेस्कटॉप पर ही यू-ट्यूब वगैरह देख लेते हैं। मतलब ये कि मोबाइल पर इनका डाटा खर्च बहुत कम है।

सईद भाई हमेशा प्रसन्न दिखाई देते हैं। दूसरों को भी प्रसन्न रखने में इनका कोई सानी नहीं है। इस चक्कर में कई बार फंस जाते हैं। एक बार दफ्तर में एक बड़े ग्रुप के चीफ पीआरओ आए। उन्होंने सईद भाई को बताया कि उनके दफ्तर में काम करने वाली एक मैडम ने प्राइमरी की पढ़ाई आपके साथ ही की है। कहिए तो मैं बात करवा दूं। सईद भाई बोले- हां जरूर क्यों नहीं।

फोन लग गया। सईद भाई फोन पर आ गए । सईद भाई ने पहचाना तो नहीं, लेकिन उन्हें एहसास भी नहीं होने दिया कि पहचान नहीं पाए। लिहाज इस नाते था कि अगर उन्हें लग गया कि नहीं पहचाना तो बुरा लग सकता है।

सात-आठ मिनट बात हुई होगी। सईद भाई बातों-बातों में एक कदम और आगे बढ़ गए। बोले- हां मैं तो अक्सर आपकी टिफिन से खाना खा लेता था। वो मैडम ठिठक गई, बोलीं- नहीं सर, आप मुझसे एक साल सीनियर थे।

आजतक के पत्रकारद्वय विकास और सईद

साभार-Fb

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