सहारा मीडिया में सेलरी संकट से मीडियाकर्मी परेशान, कब रुकेगा यह सिलसिला

: आधी सेलरी से कब तक काम चलाएं : महोदय, सहारा मीडिया मे काम करने वालों को लगभग एक साल से नियमित वेतन नहीं मिल रहा है. अक्टूबर का मिला दिसंबर में वो भी आधा. जनवरी 2015 में अक्टूबर का बकाया वेतन प्रबंधन ने 20 तारीख के बाद दिया. वेतन सबको एक साथ नहीं दिया जा रहा है. कैटेगरी वाईज दिया जा रहा है. वेतन न मिलने से बड़ी संख्या में कर्मचारी दूसरे संस्थानों का रुख कर रहे हैं. अब तक बड़ी संख्या में लोग सहारा को छोड़ चुके हैं. कई लोग लम्बे समय से आफिस नहीं आ रहे हैं.

महोदय, वेतन न मिलने से बचे हुये कर्मचारी भुखमरी के कगार पर आ गये हैं क्योंकि वेतन भी इतना ज्यादा नहीं है कि हर माह कुछ बचत ही हो जाती हो. प्रबन्धन ने सहाराश्री की ओर से एक नोटिस चिपका रखा है हर कहीं कि कर्मचारी दिसंबर से जनवरी तक धैर्य बनाये रखें. साथ ही अप्रैल में बहुत ही अचछा होने की उम्मीद जताई है. आज हालत यह है कि किसी कर्मचारी ने बच्चों की फीस रोक रखी है तो किसी ने मकान का किराया. कुछ कर्मचारियों के पास आफिस आने तक का किराया भी नही है. महोदय, हम लोग सबकी खबर छापते और दिखाते हैं. हम लोगो के हालात कौन सामने लायगा. उम्मीद करता हूं कि आप इसे भड़ास पर छापेंगे.

एक सहारा कर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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Comments on “सहारा मीडिया में सेलरी संकट से मीडियाकर्मी परेशान, कब रुकेगा यह सिलसिला

  • मुर्तजा हाशमी says:

    सहारा समय के एक चैनल हेड फरार हो गए हैं। सहाराकर्मियों को पिछले तीन महीने से सैलरी नहीं मिल रही है तो दूसरी ओर समय चैनल के एक रीजनल हेड कई दिनों के ऑफिस नहीं आ रहें हैं। निराश कर्मियों का मनोबल बढ़ाने के लिए जहां वरिष्ठों को ऑफिस में मौजूद होना चाहिए वहीं एक हेड के फरार होने से कर्मी हताश हैं। खबर है कि जो हेड फरार हैं वे बिहार में एक बड़ा आवासीय विद्यालय भी चलाते हैं और इनदिनों उसी स्कूल को जमाने के लिए दफ्तर से फरार हैं। कहा ये भी जाता है कि उक्त हेड करोड़पति हैं और उनकी वाइफ भी एडभटाइजिंग एजेंसी चलाती हैं। ऐसे में उनके पास पैसे की कोई कमी नहीं है। दूसरी ओर महीनों से सहाराकर्मियों को सैलरी नहीं मिलने से उनका परिवार भुखमरी के कगार पर है

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  • Insaf India says:

    Salary ki maar toh saharakarmi jhel lenge, kyonki yeh pariwar se judi samsya hai. Lekin madhandh aur saharavirodhi varishthon ki maar reporteron par bhari par rahi hai. Patna ke editor tarah tarah ki pareshaniyan khadi kar yogya reporteron ko bhagane me juta hai. Sankat ka phayda toh editor utha rahe hain. Sankat me reporteron ki bhawna kaun samjhe. Reporter maar khakar bhi editor ki shikayat nahi kar rahe hain. jante hai hajamat reporter ki hi hogi. so, Reporter sari musibat aapne uper le rahe hain. Long live sahara pariwar.

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  • आज सहारा की इस हालत के जिम्मेदार भी खुद सहारा के कुछ बड़े अधिकारी हैं. पर झेलना बेचारे छोटे कर्मचारियों को पड़ रहा है.

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  • sahara koi pariwar nahi sirf ek baniye ki dukaan hai. jo sirf apne fayde ki sochta hai. usse kisi employs ki koi chinta nahi hai.

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