48 लाख करोड़ का थोरियम घोटाला (भाग दो)

पिछले लेख (क्लिक करें- थोरियम घोटाल पार्ट एक) में मुख्यतः इस घोटाले की “परिकल्पना” बतायी गयी थी, पृष्ठभूमि समझाई गयी थी, बताया गया कि कैसे एक बेहद सुनियोजित, सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील एवं राष्ट्र-कल्याणकारी योजना अन्तराष्ट्रीय साजिशों का शिकार बनी. अब इस साजिश को अमल में कैसे लाया गया, इसकी बात करते हैं. लेकिन इससे पहले इस घोटाले के अर्थशास्त्र पर एक पुनर्दृष्टि डालते हैं.

48 लाख करोड़ की हानि का जो आकलन अभी तक किया जाता रहा है वो थोरियम के 100 डालर प्रति टन के अनुमानित कीमत के आधार पर है. दी स्टेटमेंट अखबार ने सबसे पहले इस नुकसान का आर्थिक आकलन किया था जो उसने विशेषज्ञों के अनुमान के आधार पर बताया था. (पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- दी स्टेट्समैन अखबार में छपी खबर) लेकिन 100 डालर  प्रति टन की ये कीमत वो कीमत है जिस पर IREL (India Rare Earth Limited भारत सरकार का वो उपक्रम है जिसे भारत के रेत से या किसी भी अन्य पदार्थ से थोरियम को निकलने का एकाधिकार प्राप्त है यानि कोई और संस्था-सरकारी या निजी थोरियम को उत्कार्षित नहीं कर सकता); NPCIL (Nuclear Power Corporation of India Limited ) या अन्य सरकारी एजेंसियों को भारत के अन्दर ही भारत सरकार के परमाणु योजना के अंतर्गत बेचता है.

अगर इसकी अन्तराष्ट्रीय कीमत जाननी हो तो यूएसए के जियोग्राफिकल सर्वे के आकड़ों (क्लिक करें यहां- इंटरनेशनल कीमत) पर जाना होगा. पृष्ठ संख्या 2 पर “Price” पैराग्राफ में 99.9% शुद्ध थोरियम की कीमत जियोग्राफिकल सर्वे ऑफ़ अमेरिका 300 डालर प्रति किलोग्राम अनुमानित करता है. भारत से निकलने वाला थोरियम 99.92-99.96% तक शुद्ध होता है, इस हिसाब से घोटाले करके बाहर भेजे गए थोरियम की कुल कीमत 150,000,000000,00000000 रुपये आती है-एक सौ पचास हज़ार लाख करोड़!

ये आंकड़े इसलिए भी विश्वसनीय है क्योंकि अमेरिका खुद अपना जो भी थोडा-बहुत थोरियम बाहर निर्यात करता है वो इसी कीमत या इससे अधिक पर करता है. इसी दस्तावेज के अगले पेज पर Foreign Trade के पैराग्राफ में सन 2010 के थोरियम निर्यात के आकड़ें मिल जायेंगे. इसके मुताबिक कुल 1500 किलोग्राम थोरियम अमेरिका ने 2010 में निर्यात किया जिसका मूल्य 60500 डालर था यानि 403 .33 डालर प्रति किलोग्राम! यानि ये साफ़ है की अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में थोरियम की कीमत कम से कम 300 डालर प्रति कि.ग्रा. प्रचलित और मान्यता-प्राप्त है.

……जारी….

लेखक अभिनव शंकर प्रोद्योगिकी में स्नातक हैं और फिलहाल एक स्विस बहु-राष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत हैं.


 

इसके पहले का पार्ट पढ़ें…….

48 लाख करोड़ का थोरियम घोटाला (भाग एक)

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