आज का दिन कांग्रेस की लानत मलामत का है, बिना किन्तु परंतु के

कांग्रेसी अब भी न सुधरे तो 2019 में आंसू पोंछने को भी नाम लेवा न मिलेगा

पांच सूबों के नतीजे सन् 2016 के केलेंडर पर कांग्रेस के लिए कट्टस लगा रहे हैं।दो साल से बदहाल और बेहाल बैठी कांग्रेस का हाल उस दुल्हन की तरह हो गया जिसके लिए कहते हैं- ” कछू तौ पहलैई रुआंसी बैठीं थीं तापै भैया और आय गए”। जनता ने “हाथ का पंजा” मरोड़ कर धर दिया है।पांच राज्यों से पांचों उंगलियां गाल पर छप गयीं हैं।ऐसा ‘चनकट्टा’ लगा है कि बिलबिलाहट बहुत देर तक रहेगी। आज जिन पांच राज्यों के नतीजे आये हैं उनमें से तीन में कांग्रेस की सरकारें थी। असम और केरल ‘हाथ’ से फिसल गए हैं।पुडुचेरी में गिरते पड़ते सरकार बन रही है।तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में दूसरे का पल्ला पकड़ना भी काम नहीं आया।

Open Letter to PM Narendra Modi Ji : NEET-II परीक्षा निरस्त करने के लिए अध्यादेश लाने की तैयारी के विषय में

आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी,

भारत की आम जनता व्यथित होकर एक बार फिर सभी चोर और भ्रष्ट राजनेताओं के पार्टी लाइन से उठकर एक होने का नजारा देख रही है। घोर निराशा की बात है कि माननीय उच्चतम न्यायालय के NEET-II को लागू करने के ऐतिहासिक निर्णय के विरूद्ध सभी राजनेता एकजुट होकर अध्यादेश लाने की बात कर रहे हैं। कोई इसे राज्यों की सम्प्रभुता के नाम पर, और कोई छात्रों की भाषा की समस्या के नाम पर उठा रहे हैं। पर सच्चाई यह है कि इसके पीछे प्राईवेट मेडिकल कालेजों की खरबों रूपयों की इण्डस्ट्री है जिसने इस देश में मेडिकल शिक्षा को व्यापार बना कर उसका स्तर रसातल में पहँचा दिया है।

आंबेडकर के लिए इतने घमासान के निहितार्थ समझिए

-राहुल वर्मा-

डॉ. भीमराव आंबेडकर अपनी 125वीं जयंती पर भारतीय राजनीति में नए चुनावी जोड़ तोड़ के केंद्र में हैं. कांग्रेस, बीजेपी, बीएसपी, आप और वाम पार्टियाँ उन्हें अपना घोषित करने की तेज़ लडाई में लगी हैं. अधिकतर राजनीतिक टिप्पणीकारों का दावा है कि आंबेडकर और उस की धरोहर को हथियाने को लेकर पार्टियों में यह वाकयुद्ध दलितों को जीतने के लिए है. क्या इस से हमें हैरानी होनी चाहिए? आखिरकार सभी पार्टियों का उद्देश्य अपने वोट बैंक को बढ़ाना और कुर्सी जीतना है. दिलचस्प प्रश्न तो यह है कि अब भाजपा डॉ. आंबेडकर को हथियाने के लिए उतावली क्यों है, पांच या दस साल पहले क्यों नहीं थी? पिछले कुछ महीनों से बीजेपी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के अधीन दलितों को पटाने के प्रयास में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है. मोदी ने स्वयं को आंबेडकर भक्त कहा है, महाराष्ट्र में देवेन्द्र फडनविस की सरकार ने लन्दन में पढ़ने के दौरान आंबेडकर जिस मकान में रहते थे को खरीद लिया है.

पीलीभीत जेल में सात कैदियों की पीट कर हत्या करने के मुकदमें को समाजवादी सरकार ने जनहित में वापस लिया

लखनऊ : पीलीभीत जेल में सात कैदियों की पीट पीट कर हत्या के मामले को वापस लेने की हो न्यायिक जांच… यह बात आज एस.आर. दारापुरी, राष्ट्रीय प्रवक्ता, आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने प्रेस को जारी बयान में कही है. ज्ञात हो कि 1994 में जब मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री थे तो पीलीभीत जेल में जेल स्टाफ द्वारा 28 टाडा कैदियों की बुरी तरह से पिटाई की गयी थी जिनमें से 7 कैदियों की मौत हो गयी थी. इसकी सीबीसीआईडी द्वारा विवेचना की गयी थी जिसमें 42 जेल कर्मचारियों के दोषी पाए जाने पर उनके विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया था. इनमें से एक कर्मचारी को गिरफ्तार भी किया गया था.

Install CCTV cameras in all prisons, mental asylums and boarding schools…

Do your best to put an end to sufferings of isolated Indians. Ending the tradition of human rights abuses in indian prisons, mental asylums and boarding school. Nearly a million Indians are waiting in prisons, mental asylums and boarding schools… For someone who can put an end to their sufferings. If CCTV cameras are installed in all prisons, mental asylums and boarding schools, Atleast it would end the suffering of those people , whose voices cannot cross the boundaries Of prisons, mental asylums and boarding schools.

मन में अभी भी काम-वासना उठती है इसलिए स्त्रियां मिलें तो कैसा व्यवहार करें

बुद्ध ने कहा है, कि न कोई परमात्मा है, न कोई आकाश में बैठा हुआ नियंता है। तो साधक क्या करें? तो बुद्ध ने कहा है, होश से चले, होश से बैठे, होश से उठे। बुद्ध का एक भिक्षु आनंद पूछने लगा; वह एक यात्रा पर जा रहा था और उसने पूछा कि भगवान, कुछ मुझे पूछना है। स्त्रियों के संबंध में मन में अभी भी काम-वासना उठती है; तो स्त्रियां मिल जाएं तो उनसे कैसा व्यवहार करना?

तो बुद्ध ने कहा, “स्त्रियां अगर मिल जाएं तो बचकर चलना। दूर से निकल जाना।”

आनंद ने कहा, “और अगर ऐसी स्थिति आ जाए कि बचकर न निकल सकें?

तो बुद्ध ने कहा, ”आंख नीची झुकाकर निकल जाना।

कार्ल मार्क्स को सिर्फ उनकी किताबों के जरिए समझने वाले अक्सर दुराग्रही हो जाते हैं

Chandra Bhushan : कार्ल मार्क्स को पढ़ना कठिन जरूर है लेकिन अगर आप लिखने-पढ़ने से कुछ वास्ता रखते हैं तो उन्हें मूल रूप में पढ़ने की कोशिश करें। आप कितने भी ज्ञानी हों, दिमाग का दही हो जाएगा। लेकिन एक बार बात समझ में आने लगी तो सतह पर मौजूद हल्ले के नीचे की गहरी बातें जानने-समझने की आदत पड़ जाएगी। एक दौर था, जब मैंने लंगोट बांधकर उनकी कई सारी किताबें एक के बाद एक पढ़ डाली थीं। इस काम में गणित की पढ़ाई के दौरान हासिल तर्कपद्धति ने मेरी काफी मदद की थी, लेकिन यह कहना होगा कि मार्क्स को सहजबोध का हिस्सा बनाने के लिए इतना काफी नहीं था। मार्क्स दुराग्रही नहीं थे लेकिन उन्हें सिर्फ उनकी किताबों के जरिये समझने वाले अक्सर दुराग्रही हो जाते हैं। इस बीमारी का इलाज खोजने में फिर काफी वक्त लगता है। पता नहीं इतना वक्त मैं दे पाया या नहीं।

कोलकाता में हिंदी व जनसंचार से एमए करने हेतु प्रवेश के लिए 31 मई तक करें आवेदन

कोलकाता : नैक द्वारा ए ग्रेड प्राप्त महात्माव गांधी अंतरराष्ट्री य हिंदी विश्वतविद्यालय के कोलकाता केंद्र में सत्र 2016-17 के लिए एमए हिंदी और एमए जनसंचार में प्रवेश के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 मई 2016 है। एमए जनसंचार व एमए हिंदी के अलावा एमए शांति व विकास तथा एनजीओ मैनेजमेंट में डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी कोलकाता केंद्र में इस वर्ष से प्रारंभ किए गए हैं और उनके लिए भी आवेदन मांगे गए हैं। एमए हिंदी, एमए जनसंचार, एमए शांति व विकास तथा एनजीओ मैनेजमेंट में डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आवेदन पत्र ऐकतान, आईए 290, सेक्टर-3, साल्टलेक स्थित कोलकाता केंद्र से प्राप्त किए जा सकते हैं।

दिल्ली, डीजल, मुनाफा, जनसत्ता के वो दिन और ये बेइमान नेता

Sanjaya Kumar Singh : योजना आयोग के साथ और उसके बिना… बहुत पुरानी बात है, कुछ लोग दिल्ली आए हुए थे और वापस जाने की उनकी ट्रेन पुरानी दिल्ली से थी। रास्ता एकसप्रेस बिल्डिंग होकर था और तय हुआ था कि मैं एक्सप्रेस बिल्डिंग से उनलोगों के साथ गाड़ी में सवार होकर स्टेशन जाउंगा और ट्रेन में बैठाकर वापस आ जाउंगा। चूंकि छोड़ने वाली गाड़ी को इसी रास्ते वापस लौटना था इसलिए मुझे उसी से वापस एक्सप्रेस बिल्डिंग आ जाना था। उस दिन ड्यटी क्या थी वह सब अब याद नहीं है पर उन दिनों हमलोग कहीं से भी घूम-फिर कर एक्सप्रेस बिल्डिंग पहुंच जाते थे ढाबे पर खाना खाते थे और ज्यादा देर हो जाए तो रात में कर्मचारियों को घर छोड़ने वाली कंपनी की गाड़ी से या किसी साथी के साथ बस से घर आ जाते थे। उन दिनों साथियों के पास दुपहिया भी अपवाद ही थे और डीटीसी की बस के अलावा कोई विकल्प नहीं था। देर सबेर जब आ जाती थी उसी में सवार होना होता था और रात में इक्का-दुक्का ही सही बसें चलती रहती थीं।

यूपी में मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव जैसे पदों पर बैठे लोग फर्जी अभिलेख बनाते हैं, इन्हें दंडित कराऊंगा : अमिताभ ठाकुर

Amitabh Thakur : कैट के आदेश के बाद भी मेरी बहाली नहीं करने के सम्बन्ध में मेरे द्वारा दायर याचिका पर कैट ने प्रमुख सचिव गृह देबाशीष पांडा के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किया है. जिन बड़े-बड़े आईएएस अफसरों ने राजनैतिक आका को खुश करने के लिए मेरे मामलों में फर्जी अभिलेख बनाने का घिनौना काम किया, उनके सबूत अब मेरे हाथ में हैं और अपनी आदत के मुताबिक मैं उनकी जिम्मेदारी तय कराने में लग चुका हूँ. निजी फायदों के लिए कितना गिरेंगे ये घिनौने सफेदपोश नौकरशाह!

अपने मालिक से कुछ क्यों नहीं मांगते पत्रकार, सरकार के आगे कटोरा लिए क्यों खड़े रहते हैं?

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर : एक पराडकर जी हुआ करते थे। अखबार के ही काम से गए लेकिन काशी नरेश का आतिथ्य स्वीकार नहीं किया। एक आज के पत्रकार हैं। वे अपने निजी काम के लिए भी सूचना विभाग की गाड़ी के ऐड़ी चोटी का जोर लगा देंगे। बच्चे को जिले के नामी गिरामी स्कूल में दाखिला दिलवाने का मामला हो या फीस माफ करवाने का, सारे घोड़े खोल डालेंगे। एक कहावत है भ्रष्टाचार रूपी गंगोत्री ऊपर से नीचे को बहती है। यह फार्मूला अखबार या यूं कहें मीडिया पर पूरी तरह से लागू होता है। पहले छोटे अखबार के छोटे कर्मचारी ही जुगाड़ में लगे देखे जाते थे आज हर कोई बहती गंगा में हाथ धोने को आतुर रहता है।

अखिलेश सरकार के बाद NGT ने JP GROUP को दिया झटका, 2500 एकड़ वनभूमि वापस लेने का दिया आदेश

प्राधिकरण ने खारिज की उत्तर प्रदेश सरकार की अधिसूचना…. मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का भी दिया आदेश…

नई दिल्ली। सोनभद्र में वनभूमि हस्तांतरण मामले में उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार के बाद राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने भी जेपी समूह को झटका दिया है। उत्तर प्रदेश की पूर्ववर्ती बसपा सरकार द्वारा सोनभद्र में जेपी समूह की सहयोगी कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) के पक्ष में 1083.231 हेक्टेयर (करीब 2500 एकड़) वनभूमि को हस्तांतरित करने के लिए जारी अधिसूचना को एनजीटी ने आज खारिज कर दिया। साथ ही उसने राज्य सरकार को आदेश दिया कि वह जल्द से जल्द अधिसूचना जारी कर जेएएल के पक्ष में हस्तांतरित वन भूमि उत्तर प्रदेश वन विभाग को सौंप दे और गैर-कानूनी ढंग से इस वन भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करे। बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में कैबिनेट बाई-सर्कुलेशन के जरिये जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड से गलत ढंग से हस्तांतरित करीब 2500 एकड़ वनभूमि वापस लेकर वनविभाग को सौंपने की अधिसूचना जारी करने का दावा किया था। 

चुनावों में हेयर डाई, शैंपु या फिर गोरा बनाने वाली क्रीम की तर्ज पर तय होगा देश और जनता का भविष्य!!

चुनावी वादों के बावजूद आपके एकाउंट में अब तक 15 लाख रुपए क्यों नहीं आए..? क्या कालाधन विदेशों से वापस आ गया..? एक सिर के बदले कई पाकिस्तानियों के सिर लाए जाने लगे..? क्या धारा 370 हटा दी गई..?  कुछ इसी तरह के दूसरे कई सवालों के जवाब बिल्कुल ऐसे हैं जैसे कि गोरा करने की क्रीमों के इतने विज्ञापनों के बावजूद मिशेल ओबामा और विलियम बहने अब तक काली क्यों हैं…? और बालों को झड़ने से रोकने वाले इतने तमाम शैंपुओं के विज्ञापनों की मौजूदगी में अनुपम खेर और गोरवाचौफ के सिर बाल कहां चले गये?

पदोन्नति में आरक्षण की बहाली हेतु संविधान संशोधन ज़रूरी

गत वर्ष उत्तर प्रदेश सरकार ने शासनादेश द्वारा पदोन्नति में आरक्षण और परिणामी ज्येष्ठता के आधार पर 15/11/97 के बाद और 28/4/12 के पूर्व पदोन्नति पाए सभी दलित अधिकारीयों/कर्मचारियों को उनके मूल पद पर पदावनत करने का आदेश जारी किया था. शासनादेश में कहा गया था कि उक्त कार्रवाही सुप्रीम द्वारा एम नागराज के मामले में दिए गए निर्णय के अनुपालन में की जा रही है. इसी प्रकार की कार्रवाही देश के अन्य प्रान्तों में भी की गयी है. आइये सब से पहले यह देखें कि 2006 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा एम नागराज के मामले में क्या दिशा निर्देश दिए गए थे? इस निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने पदोन्नति में आरक्षण और परिणामी ज्येष्ठता के नियम को स्थगित करते हुए कहा था कि सरकार जिन जातियों को इस का लाभ देना चाहती है वह उन जातियों के सामाजिक एवं शैक्षिक पिछड़ापन, सरकारी नौकरियों में उनके प्रतिनिधित्व के बारे में आंकड़े तथा इस से कार्यक्षमता पर पड़े प्रभाव का आंकलन करके रिपोर्ट प्रस्तुत करे. सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय 2006 में आया था जब उत्तर परदेश में मुलायम सिंह की सरकार थी. इस पर उन्होंने पदोन्नति में आरक्षण पर रोक लगा दी थी.

उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी द्वारा लखनऊ में ’RTI भवन’ के उद्घाटन का विरोध करेंगे समाजसेवी

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की सरकार ने सरकारी खजाने से लगभग 25 करोड़ की भारी-भरकम रकम खर्च करके राज्य सूचना आयोग के लिए सभी अत्याधुनिक सुख-सुविधाओं से लैस बिल्डिंग बना तो दी और इसे ‘RTI भवन’ का एक अच्छा सा नाम भी दे दिया पर लगता है कि उद्घाटन को लेकर इस  ‘RTI भवन’ की किस्मत कुछ ठीक नहीं है l  पहले इस ‘RTI भवन’ का उद्घाटन सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के हाथों बीते 11 अप्रैल को  होना था पर सूचना आयुक्तों की कार्यप्रणाली से क्षुब्ध आरटीआई कार्यकर्ताओं  द्वारा उसी दिन ‘RTI भवन’ के मुख्य द्वार के सामने सभी सूचना आयुक्तों का पुतला दहन कर विरोध प्रदर्शन करने के ऐलान के चलते अखिलेश ने कार्यक्रम से अपने हाथ पीछे खींच लिए और 11 अप्रैल से आयोग का विधिवत कार्य ‘RTI भवन’ का उद्घाटन हुए बिना ही आरम्भ हो गया थाl

मजदूर दिवस पर आईएफडब्लूजे प्रतिनिधिमंडल ने लखनऊ में सौंपा श्रम मंत्री को ज्ञापन

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में कार्यरत मीडियाकर्मियों के वेतन और अन्य सुविधाओं के लिए जल्दी ही प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। मजीठिया वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू किए जाने पर उत्तर प्रदेश की स्थिति की रिपोर्ट जल्दी ही तैयार कर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जाएगी। उत्तर प्रदेश के श्रम मंत्री शाहिद मंजूर ने मजदूर दिवस के मौके पर इंडियन फेडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट (आईएफडब्लूजे) के प्रतिनिधि मंडल को यह आश्वासन देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार मीडिया कर्मियों को स्वास्थ सुविधाएं दिए जाने को लेकर भी उचित कदम उठाएगी।

मोदी गो बैक का नारा लगाने के कारण बीबीएयू के मेस में नान वेज हुआ प्रतिबंधित!

संघ बताए मछली वेज या नानवेज, अगर वाजपेयी नान-वेज खा सकते हैं तो फिर दलित छात्र क्यों नहीं, नान वेज खाने वाले देशों से आर्थिक सम्बंध क्यों नहीं तोड़ लेते मोदी

लखनऊ । रिहाई मंच ने बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी (बीबीएयू) की मेस में नानवेज प्रतिबंधित करने को बीबीडीयू के दलित छात्रों द्वारा कुछ दिनों पहले रोहित वेमुला का सवाल उठाने और मोदी की मौजूदगी में मोदी गो बैक का नारा लगाने के चलते नाराज मोदी सरकार द्वारा की गई कुंठित और बदले की कार्रवाई बताया है। मंच ने जेएनयू के छात्रों  द्वारा छात्रों के निलम्बन के खिलाफ चलाए जा रहे भूख हड़ताल का भी समर्थन किया है।

बुद्ध के ऊपर जान का ख़तरा नहीं था जबकि मुहम्मद को अपनी जान बचाने के लिए जूझते रहना पड़ा

Tabish Siddiqui : क़ुरआन की पहली आयत नाज़िल होने के बाद क़रीब बारह (12) साल तक पैग़म्बर मुहम्मद ने लोगों को समझाने का काम किया.. बारह साल तक वो लोगों की गालियां खाते रहे.. पत्थर और लकड़ियों से उन पर हमला होता जहाँ भी वो अपनी बात कहते.. ऊंट के मूत्र भरे हुवे मूत्राशय और मलाशय को उन पर फेंका जाता.. लगभग ये रोज़ की बात हो गयी थी बारह सालों तक.. मुहम्मद घर से निकलते और वापस आते तो खून से लहूलुहान होते थे और पेशाब और मल से लथपथ.. और वापस आने पर उनसे पंद्रह साल बड़ी बीबी ख़दीजा उनको अपने गाउन में छुपा लेती थी.. दिलासा देती थीं और साहारा देती थी और उन्हें सत्य पर चलने की प्रेरणा देती थीं.. अंत में बारह साल तक गाली खाने के बाद थक हार कर वो मक्का से मदीना चले गए.

मायावती को कन्हैया पर गुस्सा क्यों आता है?

हाल में 14 अप्रैल को लखनऊ में आंबेडकर जयंती के अवसर पर सर्वजन की रैली को संबोधित करते हुए मायावती ने जेएनयू के कन्हैया कुमार पर अपना गुस्सा दिखाया और दलितों को उस से सावधान रहने के लिए कहा. उस ने कन्हैया के बारे में मुख्यतया चार बातें कहीं: (1) कन्हैया दलित नहीं भूमिहार है (2) कन्हैया अम्बेडकरवादी नहीं कम्युनिस्ट है (3) कन्हैया लाल सलाम और नीला सलाम को मिला कर दलितों को धोखा देना चाहता है तथा (4) कन्हैया जय भीम का नारा लगा कर दलितों को गुमराह करना चाहता है. इससे स्पष्ट है कि मायावती को अपने को छोड़ कर किसी अन्य द्वारा दलितों की राजनीति करने या आंबेडकर के बारे में बातचीत करने या नारा लगाने पर सख्त आपत्ति है क्योंकि वह समझती है कि दलितों की राजनीति या आंबेडकर पर उस का ही एकाधिकार है और किसी दूसरे का इस क्षेत्र में प्रवेश बिलकुल वर्जित है.

मुलायम सिंह यादव ने जेपी समूह को वन विभाग की 2500 एकड़ ज़मीन का किया अवैध आवंटन!

सीबीआई जांच की मांग, भूमि पर किये खनन से हुयी हानि की भरपाई जेपी समूह से करायी जाये

लखनऊ : जेपी समूह को वर्ष 2006 में मुलायम सिंह सरकार द्वारा वन विभाग की 2500 एकड़ भूमि के अवैध अवैध आवंटन  के मामले की हो सीबीआई जाँच” यह मांग आज एस.आर.दारापुरी भूतपूर्व आई.जी. तथा राष्ट्रीय प्रवक्ता, आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में उठाई है. उन्होंने आगे कहा है कि उक्त भूमि मुलायम सिंह सरकार द्वारा वर्ष 2006 में सोनभद्र स्थित यूपी सीमेंट कारपोरेशन के दिवालिया होने पर जेपी समूह को बेचते समय दी गयी थी.