बीबीसी वाले संजीव श्रीवास्तव को कचौरी बेचने की जरूरत नहीं थी; बल्कि वे जिंदगी के मजे ले रहे हैं!
ओम थानवी- मुझे लगता है मेरे परम मित्र संजीव श्रीवास्तव, बीबीसी वाले, मज़े ले रहे हैं। उन्होंने मटर-कचौरी की दुकान खोल ली, क्योंकि “बचपन से यह सपना था”। नाम थोड़ा विलायती है, थोड़ा अपना — Throwback Desi (गुज़रे दिनों का स्वाद)! यह वैसा ही उपक्रम है जैसे हमारे एमएफ़ हुसेन साहब दुनिया की सबसे महँगी … Continue reading बीबीसी वाले संजीव श्रीवास्तव को कचौरी बेचने की जरूरत नहीं थी; बल्कि वे जिंदगी के मजे ले रहे हैं!
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बीबीसी वाले संजीव श्रीवास्तव को कचौरी बेचने की जरूरत नहीं थी; बल्कि वे जिंदगी के मजे ले रहे हैं!
ओम थानवी- मुझे लगता है मेरे परम मित्र संजीव श्रीवास्तव, बीबीसी वाले, मज़े ले रहे हैं। उन्होंने मटर-कचौरी की दुकान खोल ली, क्योंकि “बचपन से यह सपना था”। नाम थोड़ा विलायती है, थोड़ा अपना — Throwback Desi (गुज़रे दिनों का स्वाद)! यह वैसा ही उपक्रम है जैसे हमारे एमएफ़ हुसेन साहब दुनिया की सबसे महँगी … Continue reading बीबीसी वाले संजीव श्रीवास्तव को कचौरी बेचने की जरूरत नहीं थी; बल्कि वे जिंदगी के मजे ले रहे हैं!