सेलरी हड़पने वाले गुरदीप सप्पल और अमृता राय के खिलाफ नारे लगे, देखें वीडियो

स्वराज एक्सप्रेस चैनल अचानक बंद कर डेढ़ सौ लोगों की सेलरी मारने वाले गुरदीप सप्पल और अमृता राय से नाराज मीडियाकर्मियों ने चैनल के बंद पड़े आफिस के बाहर एकजुट होकर प्रदर्शन किया.

सेलरी के लिए प्रदर्शन करने वालों ने गुरदीप सप्पल और अमृता राय के खिलाफ जमकर नारे लगाए.

इस चैनल में कार्यरत रहे मीडियाकर्मी विनय कुमार ने न्याय के लिए सचित्र ट्वीट किया है. पढ़ें-

Vinay Kumar
@vinayup007

स्वराज एक्सप्रेस न्यूज़ चैनल हम 150 लोगो की सैलरी अगस्त महीने से लगातार नहीं दे रहा. संस्थान 15 सितम्बर से बन्द कर ताला लगा दिया गया है. इस चैनल का संचालन @digvijaya_28 की पत्नी अमृता राय व @gurdeepsappal करते थे. आज 150 लोग भुखमरी के कगार पर खड़े है.

ये चैनल मिलाप बिल्डिंग आईटीओ से संचालित होता था ,लोगो के घरों में हालात ऐसे हो गए है कि खाने के लाले पड़ गए हैं और भगवान न करे कोई बीमार हो जाये तो कैसे झेलेंगे ये कर्मचारी….. बड़ी उम्मीद है आप सभी से कि हम लोगों की मदद करें…

धन्यवाद

बेरोजगार_पत्रकार


इस ट्वीट पर बहुत सारे लोगों ने कमेंट किया है, कुछ टिप्पणियां देखें-

Yash Kumar Varshney
@KumYash
digvijay ji ki wife amrita ji ne gurdeep ji k sath ek News channel khola…Swaraj Express k naam se…Ab unhone use ek dum se band kar dia…150 logon ki salary bhi n di…unki family kaise rhe…

sanjay das
@sanjayd98088685
Hum log apa huk leke rhenge

साहिल खान journalist
@Sahilkhankld1

हमे भी अभीतक एक पैसा नही दिया गया, और अचानक चैनल बंद कर पैसा हजम गर गए, कोरोना काल मे भी खतरे उठाकर काम किया..साहिल खान रिपोर्टर सन्तकबीरनगर यूपी..

Vinay Kumar
@vinayup007
मोदी जी, दिल्ली में पाप हो रहा है

Vinod Kumar
@vinodkumarlive
हर जिले में FIR दर्ज हो रही इन लोगो के खिलाफ

Pankaj prince
@Pankajprince24
अमृता गुरदीप चोरी ऐसे करते हैं ही कि कोई पकड़ नहीं सकता

देखें कुछ तस्वीरें और वीडियो-

देखें संबंधित वीडियो-

इस प्रकरण पर गुरदीप सिंह सप्पल का पक्ष पढ़ें-

स्वराज एक्स्प्रेस के कर्मचारी परेशान हैं। आंदोलन कर रहे हैं। भड़ास ने खबर छापी है। अब थोड़ा सा अपना पक्ष भी आ जाना चाहिये।

नारे लगाते हुए कुछ कर्मचारियों ने अपना विडीओ आपको भेजा है। लेकिन शायद किसी वजह से ये आपको बताना भूल गए कि मैं इन सब से रोज़ बात कर रहा हूँ। कल भी मैंने इन सब से मुलाक़ात की थी और इनके समर्थन में ही था।

दरअसल सच बात तो यही है कि चैनल बंद हो गया है और कर्मचारी परेशान हैं। सच ये भी है कि उनकी एक महीने की सैलरी, छुट्टियों का हिसाब बकाया है। और साथ ही नोटिस पिरीयड की भी माँग है।

ये सब कुछ जायज़ है। मिलना ही चाहिये। और जो कम्पनी के मालिक हैं, उन्हें देना ही चाहिये। अभी शनिवार को ही, हमारी पहल पर, उनकी ओर से दो व्यक्ति भोपाल से बातचीत के लिए आए थे, कर्मचारियों के प्रतिनिधि मंडल से मिले भी थे। बातचीत नतीजे पर नहीं पहुँची थी। इसलिए कल फिर से उनकी बात मैंने ही करवायी थी। जब भी कोई कम्पनी अचानक बंद होती है, दिक़्क़तें समेटने में कुछ वक्त लगता है। यहाँ तो मामला और अधिक संवेदनशील है क्योंकि चैनल भी हमने बंद नहीं किया, बल्कि हमारी पत्रकारिता ही बंद होने का सबब बन गयी!

ख़ैर, जो कर्मचारियों का हक़ है, उन्हें मिलना ही चाहिये। हम स्वयं इसके लिए प्रयासरत हैं। हाँ, विशुद्ध राजनीतिक कारणों से कुछ कर्मचारी हमारे ही ख़िलाफ़ नारे लगा रहे हैं, उसका तो एक ही जवाब है- अपने पत्रकार साथियों के समर्थन में हमारा क़ायम रहना और साथ ही अच्छी पत्रकारिता पर प्रतिबद्ध रहना। हम दोनों काम कर रहे हैं। अपने साथियों के साथ रोज़ मिलता भी हूँ, उनके पक्ष से लड़ भी रहा हूँ और हम ‘हिंद किसान’ के माध्यम से मूल्य-आधारित पत्रकारिता को आगे बढ़ाने की कोशिश भी कर रहे हैं।

बाक़ी जो खुद कम्पनी में सैलरी पर काम करते थे, उन पर दूसरों की सैलरी हड़पने का इल्ज़ाम लगाना कौतुहल ज़रूर पैदा करता है।

-गुरदीप सप्पल

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