स्वराज एक्सप्रेस बंदी पर संचालक गुरदीप सप्पल ने तोड़ी चुप्पी, पढ़ें उनका पक्ष

भड़ास, जैसा कि नाम है, भड़ास निकालने का ही प्लैट्फ़ॉर्म है। कभी सच बताता है, कभी गप्प सुनाता है और कभी बिना पड़ताल के आरोप भी लगाता है।

ये सच कि स्वराज एक्स्प्रेस चैनल बंद हो गया है। ये भी सच है कि इस बंदी में हमारा रोल नहीं था। तमाम चुनौतियों की बावजूद हमने एक महीने तक चैनल पुनः शुरू करने की कोशिश की। असफल हुए, आज के सामाजिक-राजनीतिक-आर्थिक हालात ही कुछ ऐसे है।

रही बात हमारे यहाँ काम करने वालों की सैलरी की। उस पर कब सवाल था? रोज़ लोगों की सैलरी आ रही है और सभी की आएगी। जब कोरोना हो और जब किसी चैनल को जबरन बंद कर दिया जाये तो इतनी दिक़्क़त अस्वाभाविक नहीं होती है। लेकिन हम अपने साथ काम करने वाले साथियों के साथ खड़े हैं, पूरी ईमानदारी से और ज़िम्मेदारी के साथ।

रही बात अनर्गल आरोप की, तो यशवंत भाई का मंच है ही भड़ासी। वो तो स्वयं जानते हैं कि उनके इस मंच पर कितना सत्य और कितनी गप्प होती है। इसी का मज़ा वो भी लेते हैं और उनके पाठक भी। कीचड़ की महिमा का दौर है, चलेगा अभी कुछ और। हम भी लेकिन अपनी टेक पर अड़े रहेंगे, बेहतर पत्रकारिता के लिए।

-गुरदीप सप्पल (संचालक, स्वराज एक्सप्रेस चैनल)

मूल खबर-

स्वराज एक्सप्रेस के संचालकों ने सेलरी हड़प ली, 70 मीडियाकर्मी भुखमरी की कगार पर!

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One comment on “स्वराज एक्सप्रेस बंदी पर संचालक गुरदीप सप्पल ने तोड़ी चुप्पी, पढ़ें उनका पक्ष”

  • Mukesh Chauhan says:

    सच्ची पत्रकारिता, सच्ची खबर कहा किसी को पसंद आती है. ये दौर है की खबर को खबर का ही नहीं पता होता। खबर कम मसाला ज्यादा चाहिए लोगो को और वो ही बिक रहा है

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