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24 झूठे मुक़दमे झेल रहे रिटायर बैंक कर्मी ने सुकून छीनने वाले वकील का खेल ख़त्म कर दिया!

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धीरज सिंह-

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर शहर की कोर्ट परिसर में एक वकील भूपेंद्र सिंह की सुरेश गुप्ता ने गोली मार कर हत्या कर दी! मुलजिम 88 साल के सुरेश गुप्ता जी का कहना है कि मृतक वकील भूपेंद्र सिंह ने उस पर 24 झूठे मुक़दमे दायर करवा रखे थे। हमेशा तारीख पर हाजिर रहना पडता था,नही हाजिर होने पर मृतक वकील मिली भगत करके गिरफ्तारी वारंट निकलवा देता था। झूठे मुक़दमे की वजह से खाना-पीना हराम हो गया था, रात-रात भर नींद नही आती थी। बहुत परेशान हो गया था। आत्म हत्या करने को जी करता था।

सुरेश गुप्ता के साथ 2008 में किराये की संपत्ति विवाद के बाद मृतक वकील उनका जीना हराम कर चुका था। सुरेश गुप्ता जी पहले बैक में काम करते थे, रिटायर होने के बाद अच्छी भली सुकून भरी जिदगी जी रहे थे लेकिन मृतक वकील ने 24 झूठे मुक़दमे दर्ज करा कर उनकी जिदगी में भूचाल ला दिया था,इस लिए उसकी हत्या करनी पडी, उन्हे इस बात का रत्ती भर मलाल नही है।

24 मुकदमे लडने के लिए सुरेश गुप्ता जी ने वकालत की डिग्री भी मजबूरन हासिल कल ली,क्यों कि 24 मुकदमों की पैरवी करने के लिए वकीलों की फीस देने में वे असमर्थ थे। वे जिदगी से हताश हो गए थे।

मुझे लगता है,सुरेश गुप्ता जी का बयान अगर सही है तो उन के द्वारा वकील भूपेंद्र सिंह का कत्ल करना जायज है। भले यह संवैधानिक रूप से जुर्म है,गलत है लेकिन बर्दाश्त करने की भी एक सीमा होती है। 24 झूठे मुक़दमे झेलने से बेहतर है कि जीवन की अंतिम बेला में 88 वर्ष की उम्र में कत्ल का एक मुकदमा ही झेला जाए!

वैसे भी भारतीय अदालते देर से फैसला देने के लिए कुख्यात है तो ऐसे में एक 88 साल के शख्स का कोई क्या बिगाड पाएगा? कोई कितना बाल बांका कर पाएगा ? जब तक अदालत का कोई ठोस फैसला आए, सुरेश गुप्ता जी इस दुनिया से रुखसत कर चुके हो ?

संविधान को सत्य की परख और इंसाफ करना ही है तो अपने आप में काफी कुछ बदलाव लाना पडेगा। काफी कुछ सुधार की गुंजाईश है,ताकि बेगुनाह व्यक्ति को बेमतलब का परेशान न होना पडे। संविधान की कंमजोरियो को दूर करने के लिए सरकार को भी सोचना चाहिए और इस ओर पहल करनी चाहिए।

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