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विज्ञापन के नाम पर लगातार रिपोर्टरों का शोषण कर रहे पब्लिक एप के कर्मचारी

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विज्ञापन ना देने पर 4 साल तक काम करवाने के बाद की आईडी बंद

तकरीबन 4 साल पहले शुरू हुए ऑनलाइन वीडियो प्लेटफार्म पब्लिक ऐप ने अपने रिपोर्टरों को बड़े हसीन सपने दिखाए. लेकिन कुछ समय बीत जाने के बाद रिपोर्टरों पर विज्ञापन का दबाव बनाकर हर महीने मानसिक तनाव देना और विज्ञापन ना देने पर आईडी बंद करने की धमकियां देने का सिलसिला शुरू हो गया.

ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के जनपद जालौन की तहसील माधौगढ़ से आया है, जहां पिछले 4 सालों से पब्लिक एप के लिए काम कर रहे रिपोर्टर शत्रुघन सिंह को विज्ञापन ना देने पर पब्लिक एप के कर्मचारियों ने बाहर निकाल दिया.

इन शॉर्ट नाम की कंपनी ने कुछ समय पहले अपना एक वीडियो प्लेटफार्म ऐप तैयार किया जिसका नाम पब्लिक एप रखा। इसको शत्रुघ्न जैसे रिपोर्टरों ने आसमान तक पहुंचा दिया। गूगल प्ले स्टोर पर 100 मिलियन प्लस पहुंचने के बाद अब इस प्राइवेट ऐप के कर्मचारियों के दिमाग खराब हैं। अब इन कर्मचारियों ने न्यूज़ को धंधा बना लिया है।

हर महीने 20 हजार से ₹30000 रुपये का विज्ञापन मांगना और ना देने पर रिपोर्टर को मानसिक तनाव देना आम बात हो गई है। ऐसे ही कई मामले लगातार कई दिनों से सामने आ रहे हैं। पब्लिक एप के कर्मचारी बिना नथे हुए बैल की तरह काम कर रहे हैं। जब मन में आया तब रिपोर्टर को बाहर का रास्ता दिखाया। इन प्राइवेट कंपनियों पर किसी का जोर नहीं है। वही देश भर में सब की आवाज उठाने वाले पत्रकारों की ही कोई नहीं सुनना चाहता।

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  • दिल्ली में ये हाल तो नही बल्कि अब नया पैतरा चालू किया है कोई चन्दर प्रकाश नाम से जो दिल्ली हेड है कहा कि रिपोर्टर ने कहा कि जितना टारगेट दे रहे उससे ज़्यादा खबर लगवा लो मगर पैसा न दो ये झूट बोलै गया जबकि किसी रिपोर्टर ने ऐसा नही किया आज से सभी रिपोर्टर को खबरों का टारगेट कम कर दिया परेशान किया जा रहा है पब्लिक अप्प के जो मालिक है उनको तो कुछ पता नही है भड़ास वालो से अपील है इनकी बारे में उछाले जिन्होंने नवम्बर 1 किया पब्लिक अप्प वालो को अब पब्लिक अप्प वाले उन रिपोटर को परेशान किया जा रहा है।

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