शीतलवाणी का ‘बलराम अंक’

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सहारनपुर। सहारनपुर से प्रकाशित हिन्दी साहित्य की प्रतिष्ठित त्रैमासिक पत्रिका ‘शीतलवाणी’ने अपना जनवरी-जून 2022 (संयुक्तांक) अंक प्रख्यात कथाकार व कथेतर गद्य शिल्पी बलराम पर केन्द्रित किया है। वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार डॉ.वीरेन्द्र आज़म के सम्पादन में प्रकाशित इस अंक में जहां ख्यात आलोचक विश्वनाथ त्रिपाठी और वरिष्ठ कथाकार से रा यात्री के अलावा मूलचंद गौतम, श्रीराम तिवारी, दामोदर खड़से, प्रेम जनमेजय, सूर्यकान्त नागर, जवाहर चौधरी, रुप सिंह चंदेल, सुरेश उनियाल, तरसेम गुजराल, महेश दर्पण, चैतन्य त्रिवेदी, राजकमल, राकेश शर्मा, शिवनारायण, विवेक मिश्र, ज्योतिष जोशी, बीएल आच्छा, केशव, सुभाष राय व सुधांशु गुप्त सहित अनेक शब्द मनीषियों ने बलराम के व्यक्तित्व व कृतित्व पर अपनी कलम चलायी है वहीं बलराम के सृजन की सभी विधाओं की बानगी भी इस अंक में है।

‘बाबा के संग वो सोयी सारी रात’तथा ‘मित्रजीवी-उत्सवप्रेमी कमलेश्वर और ‘देके अश्क आंख में शख्स जो चले गए’ सहित बलराम के अनेक चर्चित संस्मरणों को भी इस अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है। 264 पृष्ठों के इस अंक में बलराम की साहित्यिक यात्रा पर चित्र वीथिका भी है। बलराम से इतर प्रख्यात ग़़ज़लकार विज्ञान व्रत और आईएएस अधिकारी और जाने माने ग़ज़लकार पवन कुमार की ग़ज़लें तथा वेदप्रकाश अमिताभ की कहानी भी है। पत्रिका का मुख पृष्ठ तो आकर्षक है ही, मुद्रण की दृष्टि से भी अंक बेजोड़ है। सम्पादक डॉ. वीरेन्द्र आज़म के सम्पादकीय कौशल और सामग्री ने अंक को संग्रहणीय बना दिया है।

इससे पूर्व भी स्वतंत्रता सेनानी, वरिष्ठ पत्रकार व शैलियों के शैलीकार पद्मश्री कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर, वरिष्ठ कथाकार व उपन्यासकार से रा यात्री और उदय प्रकाश के अलावा कवि शमशेर बहादुर व नरेश सक्सेना, प्रख्यात रंगकर्मी डॉ.लक्ष्मी नारायण लाल, हिन्दी के जाने माने ग़ज़लकार व हाइकुकार कमलेश भट्ट कमल, भाषाविद् व जयशंकर प्रसाद साहित्य के मर्मज्ञ डॉ.द्वारिका प्रसाद सक्सेना, आलोचक कमला प्रसाद तथा देश के चहेते गीतकार राजेन्द्र ‘राजन सहित अनेक साहित्यकारों पर केन्द्रित अंकों के लिए ‘शीतलवाणी’ चर्चाओं में रही है।

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