पीएमओ ने ‘सिंह बंधुओं’ के काले चिट्ठे को जांचने का आदेश दिया

राजेश्वर सिंह : फाइल फोटो

द हिंदू अखबार में खबर छपी है कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने ईडी अधिकारी राजेश्वर सिंह और उनके भाई रामेश्वर सिंह पर लगे आरोपों की जांच के आदेश दे दिए हैं. राजेश्वर पीपीएस अधिकारी हैं और डेपुटेशन पर प्रवर्तन निदेशालय में तैनात हैं. उनके भाई रामेश्वर सिंह आईआरएस अधिकारी हैं और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के सूरत आफिस में पदस्थ हैं.

इन दोनों पर आय से अधिक संपत्ति और कई किस्म के करप्शन के आरोप लगे हैं. वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय लगातार राजेश्वर सिंह को लेकर सवाल उठाते रहे और खुलासे करते रहे. इस कारण उच्चस्तरीय साजिश रच कर उपेंद्र राय को गिरफ्तार कराया गया. उपेंद्र जब सीबीआई जांच में जेल में बंद रहने के बाद जमानत पर छूटे तो जेल गेट से ईडी अफसरों की टीम ने उन्हें उठा लिया. उपेंद्र अब भी तिहाड़ जेल में हैं.

इस बीच, प्रकृति के चक्र ने कुछ ऐसा चक्कर चलाया कि खुद राजेश्वर सिंह देश भर में उस समय चर्चा के विषय बन गए जब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें किसी किस्म के जांच से बचाने वाला खुद के द्वारा दिया गया अभयदान वापस लेकर सरकार को राजेश्वर पर लगे आरोपों की जांच के लिए आजाद कर दिया.

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि राजेश्वर पर लगे आरोप बेहद गंभीर हैं जिनकी जांच कराने के लिए सरकार स्वतंत्र है. ताजी सूचना है कि पीएमओ ने राजेश्वर-रामेश्वर बंधुओं पर लगे आरोपों की जांच के लिए रेवेन्यू डिपार्टमेंट को अधिकृत कर दिया है. ये विभाग राजेश्वर-रामेश्वर बंधुओं पर लगे गंभीर किस्म के आरोपों और आय से अधिक संपत्ति की जांच करेगा.

ज्ञात हो कि अनिल गलगली नाम एक व्यक्ति ने पीएमओ को इसी साल अप्रैल महीने में राजेश्वर सिंह और रामेश्वर सिंह की संपत्तियों का पूरा लेखाजोखा भेजा था. इसमें इनके द्वारा किए गए भ्रष्टाचार और बेनामी संपत्तियों का सारा डिटेल दिया गया था.

“Details of properties acquired by black money and corruption of more than ₹500 crore of Mr Rameshwar Singh (IRS – 1988) Principal Director (investigation), Surat and his family” शीर्षक से भेजे गए इस काले चिट्ठे यानि शिकायती पत्र को संज्ञान लेते हुए पीएमओ ने जांच के आदेश जारी किए हैं.

शिकायती पत्र में कहा गया है कि राजेश्वर और उनके परिजनों के पास लखनऊ, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, इलाहाबाद और मुंबई में फ्लैट् हैं, फार्म हाउस हैं, बंगला हैं, आवासीय भूखंड हैं. पत्र में Carnoustie Group के राजेश मलिक समेत कैप्टन दास, रहित सहाय और पंकज टंडन को राजेश्वर बंधुओं व उनके परिजनों का दलाल बताया गया है.

अनिल गलगली की शिकायत में कहा गया है कि Carnoustie Group के राजेश मलिक की संपत्ति में 2011-16 के बाद से गजब का इजाफा देखा गया है. सिर्फ नोएडा में ही इनके पास 1100 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है. आरोप लगाया गया है कि 2जी केस में आरोपित व्यक्तियों और कंपनियों से ली गई रिश्वत की रकम को राजेश मलिक की कंपनी के जरिए चैनलाइज किया गया है.

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