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इस बार सपा बसपा अप्रासंगिक हुई तो लगभग खत्म समझिए!

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मनीष तिवारी-

यदि किसी को ये लगता है कि भाजपा ठीक-ठाक हार की तरफ बढ रही है तो गलतफहमी निकाल दे और यदि किसी को ये भ्रम है की सपा एक शानदार जीत की ओर अग्रसर है तो वो भी किसी तरह के मुगालते में ना रहे।

किसान आंदोलन , कोरोना की दुर्व्यवस्था से लेकर बढ़ती मँहगाई इन सारी बातों को भाजपा की केन्द्र और राज्य सरकारों ने मिलकर समाधान ढूंढ लिया है। मुफ्तखोरी की आदी हमारे देश की बहुसंख्यक आबादी जिसके घरों में लगातार अनाज राशन भरा जा रहा है उसके खातों में पैसा छोटी रकम ही सही समय समय पर भेजी जा रही है।

उसके अलावा राष्ट्रवाद और धार्मिक उन्मादिता उनके दिलों दिमाग पर हर वक्त बढ़ चढ़ कर तड़का लगा रही है। हिन्दू-मुस्लिम खेल अभी और जोर पकड़ेगा ही। ऐसे में आप खुद आंकलन करिए कि बिखरा विपक्ष कितना लड़ेगा?

याद रखिए ! यूपी का चुनाव भाजपा सपा बसपा और चौथा कांग्रेस के बीच ही तय होता है उसी के मतदाता हैं जो अलग अलग जातियों मजहब को मानने वाले हैं और इनकी आस्थाएँ भी अपने अपने दलों के साथ आज भी वैसे ही हैं इनके नेता इन भेड़ों को जहाँ हांक देते है ये उधर ही चल पड़ते हैं।

ऊपर से ये बाहरी ममता ओवैसी केजरीवाल की विस्तारवादी महत्वाकांक्षा अलग फुफकार फुफकार के इन्हीं विपक्षी दलों को कमजोर कर रही हैं। ऊपर से आप लोग भाजपा की हार का सपना संजोए बैठे हैं ….

कुछ नही होगा। भाजपा धीरे-धीरे मजबूत हो रही है योगी ना सही कोई और सही , हाँ! इतना तय है कि यदि इस बार सपा बसपा अप्रासंगिक हुई तो लगभग खत्म समझिए। इसलिए जीत की ज्यादा जरूरत इन्हीं दो क्षेत्रीय दलों को है। कांग्रेस भाजपा इतनी जल्दी देश से बाहर नही होने वाली, चाहे जो जितना कह ले या मना ले।

सत्येंद्र पीएस-

प्रसिद्ध कवि एवं आलोचक, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर (डॉ) कुमार विश्वास से जाने माने लेखक और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठतम नेता प्रोफेसर रामगोपाल यादव की कालजयी पुस्तक राजनीति के उस पार का विमोचन कराया जाना समाजवादी पार्टी का मास्टर स्ट्रोक है।

डॉ विश्वास ने रामलीला मैदान में कहा था कि “जिन्हें भैंस चरानी चाहिए थी, वह देश चला रहे हैं”, बिल्कुल सही कहा था। भैंस एक उपेक्षित, तिरस्कृत, प्राणी है। वह सबसे बेहतरीन दूध देती है, साफ सुथरा रहना पसंद करती है, इन गुणों के बावजूद। ऐसे में भैंस चराना सबसे महान काम है। इस कविता में कवि कहना चाहता था कि यह काम राजनीति से कहीं बहुत ज्यादा श्रेष्ठ है। भैंस चराने वालों द्वारा देश चलाने से भैंसों की उपेक्षा हुई है और इससे देश का विकास प्रभावित हुआ है। डॉ विश्वास का यह बयान बेहद सम्मानजनक है।

अखिलेश यादव का भी डॉ विश्वास बहुत सम्मान करते हैं। टोंटीचोर वाली ट्वीट फर्जी पाई गई है, जो डॉ विश्वास की नहीं है। डॉ विश्वास टोंटी का बहुत सम्मान करते हैं। अगर वह ट्वीट सही आईडी से भी हुई है तो उसमें कहीं भी अखिलेश यादव के नाम का जिक्र नहीं है, टोंटी चोर तो कोई भी हो सकता है। संभव है कि उन्होंने योगी आदित्यनाथ को टोंटीचोर कहा हो, जिन्होंने अखिलेश के फ्लैट खाली करते ही टोंटी की चोरी करा ली। सही मायने में टोंटी चुराना जन भावना है। लोग रेल डिब्बों में से टोंटी चुरा लेते हैं। टोंटी सच्चा समाजवाद है।

डॉ विश्वास दलित, ओबीसी वगैरा को आरक्षण देकर समाज में विभेद पैदा करने भी विरोधी रहे हैं। समाजवाद यही है, जिसमें किसी के साथ भेदभाव न हो और सत्ता किसी विशेष व्यक्ति या समुदाय को खास तरजीह न देते हुए सबको समान भाव से देखे।

कुल मिलाकर इस मास्टर स्ट्रोक से समाजवादी पार्टी चर्चा में आई है। नेता जी का यह बयान भी सामने आ रहा है, जिसमें उन्होृंने चर्चा में बने रहने को बहुत ज्यादा अहमियत दी है। ऐसे में इस चर्चा को विराम देने वाले सपा विरोधी हैं। अगर यह चर्चा बनी रहती है तो उत्तर प्रदेश का ब्राह्मण समाजवादी पार्टी से जुड़ेगा। सूत्रों के मुताबिक मास्टर स्ट्रोक के रूप में पं. हरिशंकर तिवारी और बसपा सांसद पं. ऋतेश तिवारी को चुनाव के ठीक पहले सपा में शामिल कर सपा ब्राह्मणों को लुभाने का क्रांतिकारी काम करने जा रही है। इससे उत्तर प्रदेश के 25 प्रतिशत ब्राहमण समाजवादी पार्टी को वोट करेंगे। और सामाजिक न्याय विरोधी भाजपा की भाजपा की चूलें हिल जाएंगी।

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