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दिल्ली

महंगी पड़ी भावना की राजनीति, चौदह दिन की जेल

Sanjaya Kumar Singh : आम आदमी पार्टी के नेता अरविन्द केजरीवाल पर स्याही फेंक कर चर्चा में आई भावना अरोड़ा को चौदह दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। चौदह दिन की जेल अच्छे-भले अपराधी के लिए पर्याप्त है भावना जैसी गैर आपराधिक, राजनैतिक पृष्ठभूमि की युवती के लिए जीवन बदलने वाला साबित होना चाहिए। सिर्फ जीवन बदलने वाला ही नहीं, संभवतः राजनीति सीखा और करवा लेने वाला भी।

<p>Sanjaya Kumar Singh : आम आदमी पार्टी के नेता अरविन्द केजरीवाल पर स्याही फेंक कर चर्चा में आई भावना अरोड़ा को चौदह दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। चौदह दिन की जेल अच्छे-भले अपराधी के लिए पर्याप्त है भावना जैसी गैर आपराधिक, राजनैतिक पृष्ठभूमि की युवती के लिए जीवन बदलने वाला साबित होना चाहिए। सिर्फ जीवन बदलने वाला ही नहीं, संभवतः राजनीति सीखा और करवा लेने वाला भी।</p>

Sanjaya Kumar Singh : आम आदमी पार्टी के नेता अरविन्द केजरीवाल पर स्याही फेंक कर चर्चा में आई भावना अरोड़ा को चौदह दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। चौदह दिन की जेल अच्छे-भले अपराधी के लिए पर्याप्त है भावना जैसी गैर आपराधिक, राजनैतिक पृष्ठभूमि की युवती के लिए जीवन बदलने वाला साबित होना चाहिए। सिर्फ जीवन बदलने वाला ही नहीं, संभवतः राजनीति सीखा और करवा लेने वाला भी।

भावना ने अरविन्द केजरीवाल का विरोध करने के लिए उनपर स्याही फेंकने का बहुत ही लोकप्रिय और चर्चित तरीका अपनाने का निर्णय किया होगा तो इसकी कल्पना शायद नहीं की होगी। थोड़ी चर्चा के साथ थोड़ी पिटाई चल जाती है और महिला होने के नाते भावना ने सोचा होगा कि यह भी नहीं होगा। अगर भावना ने पिछले मामलों से प्रेरणा पाई हो तो उनके साथ धोखा हो गया। अगर राजनीति के लिए भावना का उपयोग किया गया और महिला होने का लाभ लेने की कोशिश की गई हो तो मामला उल्टा पड़ा।

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अब लग रहा है कि कुल मिलाकर भावना को सौदा महंगा पड़ा। वे अपनी मां से कहकर निकली थीं, टीवी देखना। और टीवी पर दिखने के लिए 14 दिन की जेल! वे चाहे जिस पार्टी या सोच की हों, राजनीति में आगे बढ़ने का शॉर्ट कट और इसे अपनाने के उनके निर्णय में भावना की कोई जगह अब नहीं रही। राजनीति में भावना की कार्रवाई का कोई समर्थन करे या विरोध अब भुगतना भावना को ही है। हो सकता है उन्हें इसका पर्याप्त फल भी मिले पर वे इसे पचा पाएंगी कि नहीं और सच कहूं तो भावनात्मक रूप से इस लायक रहेंगी कि नहीं, यह भविष्य ही बताएगा।

वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से.

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