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भोपाल। लंबे समय से राजधानी के पत्रकारों को आवास संकट से जूझना पड़ रहा था। आज हुई मप्र सरकार की केबीनेट बैठक में इस संबंध में निर्णय लेकर पत्रकारों के आवास नियमों के सरलीकरण किए है। सरकार के इस निर्णय से आवास समस्या से जूझ रहे पत्रकारों को लाभ मिलेगा। पत्रकारों  के  देश के सबसे बड़े संगठन आईएफडब्ल्यूजे ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया है। आईएफडब्ल्यूजे के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कृष्णमोहन झा ने विज्ञप्ति जारी कर सरकार द्वारा पत्रकार हित में उठाए गए कदम पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए पत्रकार आवास कमेटी जो तीन लोगों की बनाई गई है उसमें वरिष्ठ पत्रकारों को भी शामिल किए जाने की मांग की है। उल्लेखनीय है कि पत्रकारों आवास समस्या कई दिनों से हल नहीं हो रही थी, लेकिन सरकार द्वारा लिए गए इस निर्णय से पत्रकारों को अवश्य लाभ मिल सकेगा।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में पत्रकारों को शासकीय आवासों का आवंटन करने के लिये जनसंपर्क मंत्री की अध्यक्षता में समिति गठित करने का निर्णय लिया गया। अपर मुख्य सचिव गृह और प्रमुख सचिव जनसंपर्क समिति के सदस्य और आयुक्त जनसंपर्क समिति के संयोजक होंगे। प्रेस पूल में शासकीय आवासों की संख्या पूर्ववत 230 रहेगी तथा यह आवास ई-टाइप या उससे कमतर श्रेणी के होंगे। आवंटिती को 2 माह का अग्रिम लायसेंस शुल्क जमा करवाना होगा। उक्त आवंटन गृह विभाग द्वारा निर्धारित सामान्य दरों पर किया जायेगा।

समिति पत्रकारों को आवास आवंटित करने के संबंध में प्राप्त आवेदनों पर विचार कर अपनी अनुशंसाएँ गृह विभाग के माध्यम से मुख्यमंत्री को अनुमोदन के लिये प्रस्तुत करेगी। आवास आवंटन अधिकतम 3 वर्ष के लिये होगा। समिति की अनुशंसा पर इस आवंटन को पुन: 3 वर्ष के लिये नवीनीकृत किया जा सकेगा। ऐसे पत्रकार, जिन्हें भोपाल नगर निगम क्षेत्र में पूर्व में आवास के लिये शासकीय भूमि पत्रकारों की गृह निर्माण सहकारी समिति के माध्यम से आवंटित की गयी हो अथवा उनका अपना निजी आवास गृह नगर निगम सीमा में स्थित हो, तो उन्हें आवंटन के लिये अपात्र नहीं माना जायेगा। ऐसे पत्रकारों को आवास-गृह का प्रेस-पूल के लिये निर्धारित सामान्य से दोगुनी राशि के बराबर लायसेंस शुल्क देना होगा।

समिति ऐसे पत्रकारों के आवेदनों पर भी विचार करेगी, जिनमें पत्रकार शासकीय आवास में रह रहे हैं, लेकिन उनकी आवंटन अवधि समाप्त हो चुकी है और उन्हें गृह विभाग द्वारा पुन: आवंटन नहीं हुआ है। ऐसे पत्रकार अगर आवंटन के लिये पात्र पाये जाते हैं, तो उनके द्वारा अनाधिकृत आधिपत्य की अवधि की प्रेस-पूल के लिये निर्धारित लायसेंस शुल्क से दोगुनी राशि एकमुश्त जमा किये जाने पर उन्हें शासकीय आवास आवंटित किया जा सकेगा।

समिति पत्रकारों की पात्रता के संबंध में स्वत: मापदण्ड निर्धारित कर सकेगी तथा उन्हीं मापदण्डों के अनुसार शासकीय आवास आवंटित किये जायेंगे। प्रेस-पूल के अंतर्गत आवंटित आवास ऐसे आवंटिती से रिक्त करवाये जा सकेंगे, जिनके समाचार-पत्र वर्तमान में नियमित रूप से प्रकाशित नहीं हो रहे हैं, अथवा वे स्वयं पत्रकार के रूप में सक्रिय नहीं है अथवा उन्होंने आवंटन की किन्हीं शर्तों का उल्लंघन किया हो। आवास रिक्त कराने की कार्यवाही गृह विभाग प्रचलित नियमों के अंतर्गत करने के लिये स्वत: सक्षम होगा।

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