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जनवादी लेखक संघ मथुरा में श्री बालेन्दु स्वामी द्वारा आहूत नास्तिक सम्मलेन के स्थल पर हिन्दुत्ववादियों द्वारा की गयी तोड़-फोड़, हंगामे और बदसलूकियों की कड़े शब्दों में निंदा करता है. मथुरा के जिला-प्रशासन और वहाँ की पुलिस ने इस मौक़े पर जो भूमिका निभाई, वह भी निंदनीय है. यह सम्मलेन समुचित अनुमति के साथ आयोजित किया गया था, लेकिन भगवाधारियों ने यह सुनिश्चित किया कि देश के कोने-कोने से आये इसके भागीदारों को मथुरा का प्रशासन क़दम-क़दम पर परेशान करे, उन्हें होटलों में रहने की जगह न मिले और डराने-धमकाने से लेकर मारने-पीटने तक की कार्रवाइयों से उन्हें शहर छोड़ने पर मजबूर कर दिया जाए.

सम्मलेन स्थल पर तोड़-फोड़ करते हुए उन्होंने इस आयोजन को प्रतिबंधित करने की मांग की और, जैसा कि इन दिनों हर अवसर पर देखा जा रहा है, जिला प्रशासन ने हंगामे की आशंका को देखते हुए आयोजकों को अपना आयोजन रद्द करने की घोषणा करने पर मजबूर किया. नास्तिकता कोई अपराध नहीं, यह हमारा संविधानप्रदत्त अधिकार है. साथ ही, ऐसे सम्मलेनों का आयोजन भी हमारा संविधानप्रदत्त अधिकार है.

मथुरा में इस देश के नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों को स्थगित करने की जो कोशिश की गयी, उसकी हम भर्त्सना करते हैं. यह केंद्र में सत्तासीन भाजपा और उसे निर्देशित करने वाले संगठन आरएसएस का फ़ासीवादी रवैया है जो कला, संस्कृति और विचार-विमर्श की दुनिया में उठ रही आलोचनात्मक आवाजों को कुचल देना चाहता है और इसके लिए खुलेआम राज्यतंत्र का असंवैधानिक इस्तेमाल करता है. 14 अक्टूबर को ही उदयपुर में जन संस्कृति मंच द्वारा आयोजित ‘प्रतिरोध का सिनेमा’ के आयोजन स्थल की बुकिंग को कुछ घंटे पहले रद्द करना भी ऐसी ही कार्रवाई थी, जिसका करारा जवाब देते हुए जसम के साथियों ने एक भिन्न आयोजन स्थल तय करके अपने फिल्म फेस्टिवल को जारी रखा.

भाजपा-आरएसएस और उनके खड़े किये हुए असंख्य सम्प्रदायवादी संगठनों तथा उनके साथ मिलीभगत कर रहे प्रशासन के इस रवैये की हम कठोर शब्दों में निंदा करते हैं. साथ ही, इस रवैये का बहादुरी से मुकाबला करने के लिए हम नास्तिक सम्मलेन के भागीदारों और उदयपुर में ‘प्रतिरोध का सिनेमा’ दिखा रहे जसम के साथियों को क्रांतिकारी सलाम पेश करते हैं.

जनवादी लेखक संघ

मुरली मनोहर प्रसाद सिंह (महासचिव)

संजीव कुमार (उप-महासचिव)

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