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यूपी के दागी नौकरशाह और चीफ सेक्रेट्री राहुल भटनागर ने भाजपा राज में भी कई महीने तक निर्विरोध बैटिंग कर ली, यह उनके करियर की प्रमुख उपलब्धियों में से एक माना जाना चाहिए. जिस राहुल भटनागर के कार्यकाल में और जिस राहुल भटनोगर के अनुमोदन से यूपी में दर्जनों गोलमाल हुए, वही राहुल भटनागर आज भी खुद को पाक साफ दिखाकर मुख्य सचिव की कुर्सी हथियाए हुए हैं.

यहां तक कि गोमती रिवर फ्रंट घोटाले की जांच रिपोर्ट तक को मैनेज करने का उन पर आरोप है. घोटाले न्यायिक जांच रिपोर्ट के बारे में लोगबाग कहने लगे हैं कि यह रिपोर्ट सिर्फ राहुल भटनागर को बचाने की एक कोशिश का हिस्सा भर है. इस रिपोर्ट के आधार पर दर्ज एफआईआर में सिर्फ इंजीनियरों को बलि का बकरा बनाया गया है. जो असली घोटालेबाज अफसर और नेता हैं, वे मौज काट रहे हैं. आरोप है कि जांच रिपोर्ट और उसके बाद हुई कार्रवाई के जरिए हजारों करोड़ के घोटाले के असली गुनाहगारों को प्रभावशाली पद पर बैठे हुए लोग बचाने की कोशिश कर रहे हैं.

74 पेज की जांच रिपोर्ट में जांच कर रहे न्यायमूर्ति ने कहीं भी यह सवाल खड़ा नहीं किया कि प्रमुख सचिव वित्त रहते राहुल भटनागर ने पहले ही चरण में योजना को वित्तीय अनुमोदन किया. जब दूसरे चरण में योजना की धनराशि दोगुने से अधिक कर दी तब भी सूबे के प्रमुख सचिव राहुल भटनागर पर न्यायिक जांच में सवाल नहीं उठाए गए. कई महीनों तक परियोजना की उच्च स्तरीय अनुश्रवण समिति के अध्यक्ष के रूप में जब वह चीफ सेक्रेट्री थे, मीटिंग की गई और परियोजना का निरीक्षण किया गया, मगर पूरी जांच रिपोर्ट में इस बिन्दु पर कोई सवाल नहीं उठाया गया. यह सब इसलिए हुआ क्योंकि राहुल भटनागर जिन पर वित्तीय संसाधनों को संभालने की जिम्मेदारी थी, वह इस धांधली में शामिल थे, वे सबसे बड़ी कुर्सी पर बैठे हैं, तो कोई भी जांच निष्पक्ष हो पाएगी, इसकी उम्मीद करना बेमानी है.

यूपी के बदनाम चीफ सेक्रेट्री राहुल भटनागर को आखिर कौन बचा रहा है... चर्चा है कि शुगर लॉबी ने सूबे के सबसे ताकतवर एक बाहरी नेता को 10 करोड़ रुपया दिया.. शुगर लॉबी चाहती है कि राहुल भटनागर से शुगर लॉबी का साथ न छूटे.. आाजदी के बाद से यह पहला मौका है कि जब किसी चीफ सेक्रेट्री ने किसी विभाग के प्रमुख सचिव का पद भी अपने पास रखा हो... चुनाव से पहले यही भाजपा राहुल भटनागर के भ्रष्टïचार की शिकायत चुनाव आयोग से की थी और उन्हें तत्काल चीफ सेक्रेट्री के पद से हटाने की मांग की थी लेकिन चुनाव जीतने के बाद भाजपा का राहुल भटनागर के प्रति अचानक प्रेम उमड़ने लगा. पर कहा जा रहा है कि लगातार शिकायतों और बदनामियों से परेशान भाजपा नेतृत्व ने योगी सरकार के चीफ सेक्रेट्री पद से राहुल भटनागर को हटाने का मन बना लिया है. इस बाबत जिस अफसर का नाम लिया जा रहा है वो हैं राजीव कुमार सिंह.

भारत सरकार ने 81 बैच के आईएएस अधिकारी राजीव कुमार को समय पूर्व अपने गृह प्रदेश में जाने को मंजूरी दे दी है. इस संबंध में नियुक्त समिति ने पत्र भी जारी कर दिया है. संभावना जताई जा रही है कि राजीव कुमार को यूपी का अगला चीफ सेक्रेटरी बनाया जा सकता है. इस तरह आईएएस राजीव कुमार के समय पूर्व प्रतिनियुक्ति से वापसी से भ्रष्ट चीफ सेक्रेटरी राहुल भटनागर की विदाई की घड़ी करीब आ गई है. अपने भ्रष्टाचारों को लेकर प्रदेश के वर्तमान चीफ सेक्रेटरी मीडिया में सुर्खियों पर रहे हैं. सरकार बदलने के बाद भी अपने पद पर जमे राहुल भटनागर के पीछे भाजपा के कुछ नेताओं का हाथ बताया जा रहा है. फिलहाल खन्ना समिति ने रिवर फ्रंट मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है. ऐसे में यदि सीबीआई जांच में मौजूदा चीफ सेक्रेट्री राहुल भटनागर फंसते हैं तो सरकार की काफी किरकिरी हो जाएगी. इसलिए सरकार ने राहुल भटनागर की ओर से अपना हाथ खींच लिया है.

आईएएस राजीव कुमार सिंह को लेकर भाजपा नेता और पूर्व आईएएस अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह अपनी एफबी वॉल पर ये लिखते हैं-

उत्तर प्रदेश में मुख्यसचिव पद पर 'बहुप्रतिक्षित' बदलाव की दस्तक..... १९८१ बैच IAS राजीव कुमार सिंह अगले मुख्यसचिव होंगे। बहुत ही सुलझे हुए अधिकारी की छवि लिए राजीव कुमार सिंह को केंद्र से प्रदेश के मुख्यसचिव की कमान सम्भालने के लिए कार्यमुक्त किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश विकास से कोसों दूर अपनी दुर्दशा-भयंकर बेरोज़गारी, किसानों / मज़दूर की बेबसी, ग़रीबी से जूझ रहा है। सरकारें बड़े-२ वादों के साथ आती रही और जाती रहीं... उत्तर प्रदेश विकास से उपेक्षित जाति, धर्म की राजनीति में ही उलझा रहा....पूर्व दो सरकारों द्वारा गिफ़्ट में मिली क़ानून व्यवस्था व भ्रष्टाचार आज भी बड़ी समस्या... अनियंत्रित है। कड़क, दृढ़संकल्पित मुख्यमंत्री के रहते भी उत्तर प्रदेश आज भी ढीली-ढाली प्रशासनिक व्यवस्था से उलझ रहा है। नौकरशाही के आधी-अधूरी प्रतिबद्धताएँ, टीमवर्क के अभाव, व मंत्रिगणों की अनुभवहीनता जनमानस व मीडिया में चर्चा का विषय है। १०० दिन में सरकार के पास दिखाने के लिए 'प्रत्यक्ष' कुछ विशेष भी नहीं है, फिर भी कुछ-न-कुछ तो बताना ही होगा। आने वाले मुख्यसचिव राजीव कुमार सिंह, यद्यपि अत्यंत कर्मशील अधिकारी की छवि के साथ आ रहे हैं, के समक्ष चुनौतियाँ- ऊपर से निचले स्तर तक 'आदत-ख़राब' अकर्मणय नौकरशाही,लच्चर वित्तीय प्रबंधन, भ्रष्टाचार, ख़राब क़ानून व्यवस्था... मुँहवाहे खड़ी हैं। आने वाले नए मुख्यसचिव को मेरी सहृदय शुभकमाएँ ....

लखनऊ से भड़ास संवाददाता की रिपोर्ट.

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