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अजय कुमार, लखनऊ
उत्तराखंड के एक युवा अजय सिंह बिष्ट के योगी आदित्यनाथ बनने तक का सफर अगर करीब से किसी ने देखा है तो उसमें पहला नाम गोरखपुर का आता है। यहीं से उनके पहले सन्यासी और उसके बाद सियासी जीवन की शुरूआत हुई थी। 1993 में पढ़ाई के दौरान गुरु गोरखनाथ पर शोध करने गोरखपुर पहुंचे अजय बिष्ट यहां अपने प्रवास के दौरान महंत अवैद्यनाथ के संपर्क में आए और कुछ समय के भीतर ह ीवह महंत अवैद्यनाथ की शरण में ही चले गए। महंत अवैद्यनाथ से  दीक्षा लेने के बाद 1994 में अजय बिष्ट पूर्ण संन्यासी बन गए, जिसके बाद इनका नाम अजय सिंह बिष्ट से योगी आदित्यनाथ हो गया।

करीब बीस बरस बाद 12 सितंबर 2014 को गोरखनाथ मंदिर के पूर्व महन्त अवैद्यनाथ के निधन के बाद योगी  आदित्यनाथ कों यहाँ का महंत बना दिया गया और इसी के दो दिन बाद योगी को नाथ पंथ के पारंपरिक अनुष्ठान के अनुसार मंदिर का पीठाधीश्वर घोषित कर दिया गया। इस दौरान योगी की सियासी पारी भी शुरू हो चुकी थी। 26 साल की छोटी सी उम्र में गोरखपुर से योगी ने लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत कर अपनी राजनैतिक पारी की नींव भी रखी थी। योगी से पूर्व महंत अवैद्यनाथ भी यहां से चार बाद सांसद रह चुके थे। इससे पूर्व महंत अवैद्यनाथ के गुरू दिग्विजय नाथ भी हिन्दू महासभा के टिकट से सांसद रह चुके थे।

उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने से पहले तक योगी पांच बार गोरखपुर से सांसद रहे। सीएम के लिये विधान सभा या विधान परिषद का सदस्य होना पहली शर्त होती है, इसी कड़ी में पिछले दिनों योगी ने विधान परिषद का निर्विरोध चुनाव जीता था। तब से योगी का सांसदी छोड़ना औपचारिकता भर रह गया था। इसी के साथ योगी का जनप्रतिनिधि (सांसद)के रूप में गोरखपुर से नाता भी टूट गया। आज यूपी की राजनीति में अगर कोई सबसे चर्चित चेहरा है तो वो है भाजपा के फायर नेता व गोरखपुर के सांसद योगी अदित्यनाथ ही हैं। योगी ऐसा नेता हैं, जिसने कई सालों तक हिंदु व हिंदुत्व के मुद्दे पर यूपी ही नहीं बल्कि पूेर प्रदेश में अपनी ललकार दिखाई। राम मंदिर आंदोलन में भी योगी ने अग्रणी भूमिका निभाई थी।

योगी को करीब से जानने वालों का कहना है योगी जी संघर्ष करके निकले नेता हैं। जब मुलायम-मायावती और अखिलेश राज में उत्तर प्रदेश भ्रष्टाचार, लव-जेहाद, धर्मान्तरण, नक्सली व माओवादी हिंसा तथा अपराध की अराजकता में जकड़ा था, उसी समय नाथ पंथ के विश्व प्रसिद्ध मठ श्री गोरक्षनाथ मंदिर,गोरखपुर में 15 फरवरी 1994 को गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ  महाराज ने योगी आदित्यनाथ को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। इसके बाद महन्त अवैद्यनाथ ने 1998 में राजनीति से संन्यास लिया और योगी आदित्यनाथ को अपना राजनैतिक उत्तराधिकारी भी घोषित कर दिया। योगी से पहले महंत अवैद्यनाथ गोरखपुर के सांसद हुआ करते थे।इस तरह से योगी आदित्यनाथ की राजनीतिक पारी शुरू हुई। अपने पूज्य गुरुदेव के आदेश एवं गोरखपुर संसदीय क्षेत्र की जनता की मांग पर योगी वर्ष 1998 में मात्र 26 वर्ष की उम्र में गोरखपुर से 12वीं लोकसभा का चुनाव जीतकर पहली बार संसद पहुंचे थे। योगी को सबसे कम उम्र का सांसद होने का गौरव हासिल हुआ था। बहरहाल, योगी अब गोरखपुर के सांसद भले नहीं रहे हों लेकिन उनका यहां आना-जाना लगा रहेगा। उम्मीद है कि यहां उप-चुनाव में योगी की पसंद का ही कोई नेता सांसद बनेगा। राजनीति के गलियारों में यह चर्चा चल भी पड़ी है कि योगी के बाद कौन?

लेखक अजय कुमार लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं.

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