इन छोटी मानसिकता वाले चैनलों ने कई लोगों की ज़िंदगी तबाह कर दी है

किसी का बच्चा उसकी पत्नी की पेट में तकलीफ से पल रहा हो, किसी का मकान मालिक उसे घर से निकाल दे, किसी के पास ऑफिस आने तक का किराया ना हो, कोई दिन में एक टाइम खाना खाकर जी रहा हो, किसी का स्वाभिमान कर्ज मांगते-मांगते मिट गया हो, किसी की आत्मा रो रही हो, तो क्या आप उसे पत्रकार कहेंगे? चैनल वन न्यूज में काम करने वाले कर्मचारियों की दशा ऐसी ही हो चुकी है जैसी आत्महत्या करने से पहले जैसी हो जाती है। पत्रकारिता का दंड क्या होता है वो चैनल में काम करने के बाद पता चलता है। कहने को तो चैनल वन न्यूज़ नेशनल चैनलों की फेहरिस्त में शुमार है लेकिन यहां जिस तरीके से काम किया और करवाया जाता है उसकी स्थिति जल्लादों से कम नहीं है।

कुछ कर्मचारी ऐसे हैं जिनकी नवंबर की सैलेरी उन्हें अब तक नहीं मिली, कुछ को नवंबर की सैलेरी के चेक दिए गए थे लेकिन उनका पैसा एकाउंट में नहीं आया। नवंबर के बाद दिसंबर, जनवरी और अब आधी फरवरी। कुल मिलाकर देखिए तो साढ़े तीन महीने से ज़्यादा की सैलेरी पर सांप की फन मारकर बैठा है ज़हीर अहमद (चेयरमैन)। मनोज मेहता नाम का आउटपुट हेड ही ज़हीर अहमद को सैलेरी लेट करने के तरीके समझाता है और सबके सामने भोला बना रहता है।

एचआर जैसी चैनल में कोई चीज़ नहीं है और अगर ऊपर वालों से पूछो तो वो कहते हैं कि सैलेरी कब मिलेगी ये हम भी नहीं बता सकते।और सबसे बड़ी समस्या ये है कि अगर यहां से कोई नौकरी छोड़कर जाता है उसकी सैलेरी ना देने के ज़हर को मनोज मेहता नाम के सांप ने ज़हीर अहमद को सिखा दिया है। चैनल वन न्यूज़ का पीसीआर हो, ग्राफिक डिपार्टमेंट हो, आउटपुट का गिना-चुना स्टाफ हो, या फिर एंकर्स हो सबकी स्थिति एक जैसी हो गई है। जिस व्यक्ति को पत्रकारिता का प भी नहीं पता वो व्यक्ति जब चैनल का मालिक बन जाता है तो हश्र क्या होता है उसका आभास चैनल वन न्यूज़ से ज़्यादा कोई नहीं करा सकता।

ये सब कहने मात्र नहीं है कि पत्रकारों की दशा अतिदयनीय हो चुकी है, बल्कि पत्रकार उस शख्सियत का नाम हो गया है जो मुफलिसी में ज़िंदगी जीने का हुनर सीख जाता है। इन छोटी मानसिकता वाले चैनलों ने कई लोगों की ज़िंदगी तबाह कर दी है। चैनल वन न्यूज़ का दाग़ मीडिया बाज़ार में खुला दिखता है। मेरी सलाह है कि यहां आकर अपनी ज़िंदगी खराब ना करे।

चैनल वन में कार्यरत एक कर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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Comments on “इन छोटी मानसिकता वाले चैनलों ने कई लोगों की ज़िंदगी तबाह कर दी है

  • NEELESH SHUKLA says:

    बिलकुल सही लिखा है दोस्त.. हम आपकी बातों से सहमत हैं…नाम तो चैनल वन है..लेकिन काम पूरा 420 का है…मैं भी तो इसका भुक्तभोगी था….इसकी तारीफ करना मुंह की बरबादी करने से कम नही है…

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  • मित्रों सुदर्शन न्यूज़ का भी यही हाल है…देश नम्बर 1 बनाने की बात करने वावे प्रधान संपादक अपने कर्मचारियों के भविषय पर ग्रहण लगा रहे है….मात्र 3 हजार सैलरी(मजदूरी) मिल रही है न्यूज़ रुम में काम करने वालों को…जिनसे दोगुना सुदर्शन में झाड़ू लगाने वाले को मिलती है…ऐसे देश नम्बर 1 बनाना चाहते है संपादक जी

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  • patkrita ka sb ne jnaaza nikal diya hai koi bhee chenal khol deta hai aur khud paisa kamata hai is field km krne vlo kee halat to mjduru se badtar hai … 😀 😀 😀 😀 😀 😀 😀

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  • kutte hai or suar hai khabeej ke bache 2 bihari 100 bimari hai ye manoj mehta or raajiv kaluaaa waha khud choos rhae hai channel se paise paid story chalate hai paise maangte rehte hai stringers kaam naam ki chij nai hai bas saale chair tod ke baithke chale jaate hai ye raajiv or manoj mehta or jahher ahmed mai to kyaa kehna raajiv to inka tisra beta hai bas isko nikalwa diya uski job kha li yahi kaam hai asli tarike se to malik nai 4. se 5 log claa rhae hai ye channel bas jinhe kuch ptaa nai bade channel mai inhe kadam tak nai rakhne diyaa jaaye bhaut bure haal hai

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  • मुबारक हो,,,, सुना है सुदर्शन न्यूज के कर्मचारीयों के अच्छे दिन आ गए है….जिन कर्मचारीयों को 3 हजार वेतन मिलता था, अनहे अब 3 हजार 500 मिलेंगे । वाह रे संपादक महोदय…वाह क्या अहसान किया है….

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