Asaram supporters zeroing on an IPS

IPS officer Amitabh Thakur, who is pursuing the murder case of Asaram follower Akhil Kumar Gupta in Muzaffarnagar, seems to have come in the target-zone of Asaram Bapu followers. Sri Thakur got a message on Facebook from a New Delhi swami that Asaram’s followers are eliciting information about him through a lady Police Circle Officer posted in Meerut. The message talked ofmany organizers of these Ashrams being criminal elements.

The message also mentioned a Meerut Ashram organizer as being in the loop of Akhil murder case. Sri Thakur talked to the lady CO to conclude that her family is indeed Asaram’s follower and one Asaram Bhakta had actually called her to seek information about him. Based on these facts, Sri Thakur has today requested DGPA K Jain to get the facts stated in the FB message enquired to ensure his and his wife’s security and to get the named Meerut organizer properly interrogated.

आईपीएस अमिताभ ठाकुर के बारे में आसाराम समर्थक सूचना एकत्र कर रहे

आसाराम मामले के गवाह अखिल कुमार गुप्ता की मुजफ्फरनगर में हुई हत्या में मृतक पक्ष की पैरवी कर रहे आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर आसाराम बापू के अनुयायियों के निशाने पर आ गए दिखते हैं. श्री ठाकुर को फेसबुक पर नयी दिल्ली निवासी एक स्वामी ने मेसेज कर बताया कि आसाराम के समर्थक मेरठ में तैनात उनकी एक पुलिस उपाधीक्षक शिष्या के माध्यम से उनके बारे में सूचना एकत्र कर रहे हैं. मेसेज में बताया गया कि उनके आश्रम में कई संचालक आपराधिक किस्म के हैं. मेसेज में मेरठ आश्रम के एक संचालक से पूछताछ करने पर अखिल हत्याकांड का खुलासा होने की पूरी सम्भावना व्यक्त की गयी.

श्री ठाकुर ने उक्त महिला सीओ से बात की तो उनके परिवार वालों के आसाराम की भक्त होने और एक भक्त द्वारा इस हत्याकांड के सन्दर्भ में उनके विषय में पूछताछ करने की बात सही साबित हुई. इनके आधार पर श्री ठाकुर ने आज डीजीपी ए के जैन को इस मेसेज के तथ्यों की गहराई से छानबीन कराते हुए अपनी और अपनी पत्नी की सुरक्षा सुनिश्चित कराने और मेरठ संचालक से पूछताछ कराने का निवेदन किया है.

सेवा में,
पुलिस महानिदेशक,
उत्तर प्रदेश,
लखनऊ 
विषय- आसाराम बापू मामले के गवाह श्री अखिल कुमार गुप्ता की हत्या मामले में मेरे द्वारा की जा रही पैरवी पर मुझे और मेरी पत्नी को संभावित खतरा/आशंका विषयक
महोदय,

कृपया निवेदन है कि मैंने अपने पत्र संख्या-AT/Complaint/52 दिनांक- 13/01/2015 द्वारा आसाराम बापू मामले के गवाह श्री अखिल कुमार गुप्ता की हत्या के विषय में कतिपय तथ्य प्रस्तुत करते हुए श्री आलोक शर्मा, आईजी मेरठ ज़ोन को  निवेदन किया था कि इस मामले में लूट तथा स्थानीय/ व्यक्तिगत रंजिश में हत्या होने की बहुत ही कम सम्भावना दिखती है और यह हत्या काफी हद तक श्री आसाराम बापू कांड में श्री अखिल की गवाही से जुडी दिख पड़ती है और प्रथमद्रष्टया उस दिशा में गंभीरता से तफ्तीश करना उचित जान पड़ता है.
मैंने पुनः अपने समसंख्यक पत्र दिनांक- 30/01/2015 द्वारा इस प्रकरण से जुड़े तथ्यों को प्रस्तुत करते हुए कतिपय निवेदन किये थे और कालांतर में मैं और मेरी पत्नी डॉ नूतन ठाकुर स्वयं मुज़फ्फरनगर जा कर श्री अखिल की पत्नी और परिवारवालों से मिले थे.

उस समय से आज तक इस मामले में प्रकरण जस का तस पेंडिंग है और यथेष्ठ कार्यवाही नहीं हुई है. इसी बीच आज दिनांक 27/04/2015 को मुझे मेरे फेसबुक पेज Amitabh Thakur (वेबलिंक- https://www.facebook.com/amitabh.thakur) पर A (वेबलिंक B) का दिनांक 26/04/2015 समय 09.23 PM बजे एक मेसेज प्राप्त हुआ जो निम्नवत है-“Apr 26th, 9:23pm आपके बारे में मेरठ की एक पुलिस सीओ वंदना मिश्र [ जो कि आशाराम कि शिष्य है. ] के माध्यम से सूचनाये आशाराम बापू के लोग एकत्र कर रहे है . आशाराम बापू के आश्रमों के ज्यादातर संचालक अपराधी किस्म के लोग है पर पुलिस उन लोगों पर कुछ ख़ास कारवाई नहीं करती . मेरठ आश्रम का उनका संचालक D से पूछताछ करने पर अखिल हत्याकांड के बारे में बहुत कुछ पता चल सकता है.”
उक्त A के सम्बन्ध में उनके फेसबुक अकाउंट पर अधिक डिटेल नहीं हैं, मात्र यह लिखा है कि वे खंडवा के रहने वाले हैं, नयी दिल्ली में रहते हैं, जेएनयू से पढ़े हैं और वर्तमान समय में फेसबुक पर उनके चार मित्र हैं.

इस मेल के आने के बाद मेरा सतर्क और सशंकित होना स्वाभाविक था और मैंने सुश्री वंदना मिश्रा से फोन नंबर 0522-2286662 से उनके फोन नंबर C पर संपर्क किया तो यह ज्ञात हुआ कि वे मेरठ में सीओ ऑफिस के पद पर कार्यरत हैं. उन्होंने बताया कि उनके ससुराल के लोग श्री आसाराम के अनुयायी हैं और इस रूप में वे भी श्री आसाराम के सत्संग आदि में जाती रही हैं. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ दिनों पूर्व उन्हें एक फोन आया था और पूछने वाले व्यक्ति ने उन्हें कहा था कि वे सुश्री वंदना से किसी सत्संग में मिले थे. उन्होंने इसी आधार पर सुश्री वंदना से मेरे बारे में जानकारी ली थी. यद्यपि सुश्री वंदना ने कहा कि उक्त व्यक्ति ने किसी प्रकार की धमकी भरी बात नहीं की थी और मूल रूप से यही कहा था कि आखिर श्री अमिताभ ठाकुर इस मामले में अनावश्यक क्यों रूचि ले रहे हैं और क्या उनसे संपर्क किया जा सकता है, आदि.

सुश्री वंदना से फोन पर मेरी वार्ता होने के बाद इतना स्थापित हो गया है कि वास्तव में सुश्री वंदना मिश्रा मेरठ में सीओ हैं, उनके परिवार वाले श्री आसाराम के भक्त हैं और सबसे बड़ी बात यह कि उन्हें वास्तव में मेरे सम्बन्ध में कम से कम एक फोन आया था.

ऐसे में मुझे फोन करने वाले की बातों की सत्यता काफी बढ़ जाती है और साथ ही उनके बातों की गंभीरता थी. उन्होंने मेसेज में यही बात सामने आ रही है कि मेरे बारे में सूचनाएँ एकत्र की जा रही हैं और इसमें आपराधिक किस्म के लोगों की सहभागिता और उनके द्वारा कोई आपराधिक षडयंत्र किये जाने की पूर्ण आशंका है. हम इस बात से भी अवगत हैं कि श्री आसाराम के समर्थकों द्वारा उनके कथित विपक्षियों के सम्बन्ध में गंभीर और घातक हमले करने के दृष्टान्त पूरे देश भर में सामने आये हैं और इनसे इस मेसेज की गंभीरता और भी बढ़ जाती है.

उपरोक्त तथ्यों के दृष्टिगत आपसे निम्न निवेदन है-

1. कृपया A की उपरोक्त सूचना के क्रम में पूरे प्रकरण की गहराई से छानबीन कराते हुए मेरी और मेरी पत्नी डॉ नूतन ठाकुर, जो अनवरत इस मामले में मृतक पक्ष की ओर न्याय दिलाने में लगे हुए हैं, की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित कराने और यदि किसी प्रकार के षडयंत्र के तथ्य सामने आते हैं तो उनके सम्बन्ध में आवश्यक विधिक कार्यवाही कराये जाने की कृपा करें

2. कृपया मेरठ आश्रम के संचालक D से पूछताछ करने पर अखिल हत्याकांड के बारे में बहुत कुछ पता चलने के सम्बन्ध में दी गयी जानकारी के विषय में सभी सम्बंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने की कृपा करें

3. कृपया श्री अखिल गुप्ता के परिवार वालों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करवाने की कृपा करें

4. कृपया श्री अखिल गुप्ता हत्याकांड में यथाशीघ्र अनावरण कराने के सम्बन्ध में सम्बंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश देने की कृपा करें

पत्र संख्या-AT/Complaint/52                               

दिनांक- 27/04/2015
भवदीय,                                                     
(अमिताभ ठाकुर)
5/426, विराम खंड,
गोमती नगर, लखनऊ
# 94155-34526
amitabhthakurlko@gmail.com

प्रतिलिपि- प्रमुख सचिव गृह, उत्तर प्रदेश को कृपया आवश्यक कार्यवाही हेतु

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आसाराम केस के गवाह के पिता को हत्या में आसाराम की बेटी पर शक

आसाराम बापू मामले के गवाह अखिल कुमार गुप्ता की हत्या में उनके पिता नरेश गुप्ता को आसाराम की बेटी भारती पर शक है. श्री नरेश ने आज आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर को फोन कर विस्तार से बताया कि उनके लड़के का केस किसी रंजिश का परिणाम नहीं है और यह हत्या 05 जनवरी 2015 को गुजरात हाई कोर्ट द्वारा आसाराम की जमानत याचिका ख़ारिज होने से सीधा जुड़ा है. श्री नरेश ने कहा कि आसाराम के परिवार में उनके अरबों की संपत्ति के लिए आपसी झगड़े की स्थिति है और उनकी बेटी भारती, जो जेल से बाहर हैं, द्वारा यह कांड कराये जाने की सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता.

श्री नरेश ने भारती की साथियों रेखा, महक और ड्राईवर शीतल का नाम लेते हुए इन लोगों पर अपनी शंका व्यक्त की. श्री नरेश ने स्थानीय पुलिस के तफ्तीश पर गहरा असंतोष व्यक्त किया और साथ ही उन लोगों की सुरक्षा में भारी लापरवाही का भी आरोप लगाया. श्री ठाकुर ने यूपी के प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी को इन तथ्यों से अवगत कराते हुए इन लोगों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित कराये जाने का निवेदन किया क्योंकि मृतक अखिल की पत्नी वर्षा भी इस मामले में गवाह हैं. उन्होंने मृतक के पिता द्वारा बताये गए तथ्यों का संज्ञान लेते हुए सही तफ्तीश कराये जाने का अनुरोध किया और स्थानीय पुलिस को दिक्कत होने पर यह तफ्तीश सीबीआई या किसी स्पेशियेलाईज एजेंसी से कराने का सुझाव दिया.

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पगड़िया बाबा… खपड़िया बाबा… ऐसे हजारों बाबा अपना खेल रच रहे, खबर आपको केवल रामपाल की है!

Shailesh Bharatwasi : लगभग 15 साल पुरानी बात है। मेरे गाँव, डोमा में एक बाबा आए। पगड़िया बाबा। सर पर पगड़ी बाँधते थे, इसलिए अपनी ख्याति इसी नाम से चाहते थे। बाबा हमारे गाँव में अखंड रामायण पाठ और जग (यानी यज्ञ) करवाने आए थे। उन्हें गाँव के लोगों ने कभी आमंत्रित नहीं किया था, वे ख़ुद ही अपना डेरा जमा लिए थे। हमारे तरफ़ के गाँवों के अधिकाधिक सार्वजनिक आयोजन गाँव के एकमात्र सरकारी प्राथमिक विद्यालय में ही होते हैं।

बाबा ने भी वहीं शरण ली थी। बाबा केवल फल, सेंधा नमक, सिंघाड़े का हलवा खाते थे और दूध पीते थे। दूध केवल सफेद गाय का पीते थे। भैंस या गैरसफेद गाय का दूध वे नहीं पीते थे। बाबा ने ही तय किया था कि उनके भोजन की ज़िम्मेदारी गाँव के प्रत्येक परिवार की होगी। बारी-बारी से एक-एक दिन के भोजन की व्यवस्था अलग-अलग परिवार करेगा। बाबा साष्टांग प्रणाम करवाना पसंद करते थे। जो साष्टांग प्रणाम नहीं करता था, उसे वे डाँट देते थे और भगवान का डर दिखाते थे। ब्राह्मण जाति के लोगों के अलावा अन्य किसी भी जाति को उनका चरण छूकर प्रणाम करने की अनुमति नहीं थी। ग़ैरब्राह्मण लोगों को वे छूत मानते थे। उन्होंने गाँव में लगभग 4 महीने का समय बिताया था और गाँव वालों को अखंड रामायण पाठ और जग करवाने पर मज़बूर कर दिया था। हमारे गाँव के अलावा आसपास के गाँवों के लोगों के ऊपर भी चंदे का भार आया था। बाबा के पास हर कोई अपना कष्ट लेकर आने लगा था। बाबा सबका कष्ट सुनते थे और उम्मीद बँधाते थे कि वे सब ठीक कर देंगे।

मैं उस समय रेणुकूट में रहकर इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रहा था। मेरी तरह और भी बहुत से ऐसे लोग थे जो गाँव से बाहर रहकर अपनी-अपनी पढ़ाई कर रहे थे। Pradeep Verma और Kaushal Kumar उस समय इलाहाबाद में रह रहे थे। बाबा की एक ख़ास बात यह भी थी कि उन्होंने अपने कुछ विश्वसनीय भक्त बना लिए थे, जिनके माध्यम से वो गाँव के हर आदमी, हर परिवार की पूरी टोह ले लेते थे। उन्हें पता था कि किसकी औलाद गाँव से बाहर रहकर पढ़ाई कर रही है, कौन नौकरी कर रहा है। मेरी माँ से उन्होंने कहा था कि पढ़ने-लिखने से कुछ नहीं होता, अपने बेटे से कहो कि वो हमारा आशीर्वाद ले। उनके ये कहने के 15 दिनों तक भी मैं गाँव नहीं पहुँचा तो उन्होंने माँ से कई बार कहा कि आपका बेटा घमंडी है। मेरे घमंड की पुष्टि तब हो गई थी, जब मैं गाँव गया था, उनसे मिला था, उन्हें हाथ जोड़कर प्रणाम किया था, लेकिन साष्टांग नहीं हुआ था।

Anjani चूँकि ब्राह्मण हैं तो वे उनके क़रीब जा सकते थे। एक बार अंजनी ने उनसे पूछा था कि बाबा आपने शादी की है या नहीं? उन्होंने कहा था- बच्चा, हम इन झमेलों में नहीं फँसे। अपने प्रवचन में भी उन्होंने खुद को गैरशादीशुदा और मोह-माया से दूर बताया। लेकिन इनके प्रवास के आख़िरी दिनों में यह भेद खुला था कि बाबा शादीशुदा हैं। राजपूत जाति के हैं और कई लड़कियों के बाप हैं। उस बाबा से जुड़े तमाम ग्रामीणों के संस्मरण को जमा करें तो पगड़िया बाबा-पुराण बाबा रामपाल के कारनामों से कम न होगा। थोड़े समय बाद ही हमारे पड़ोस के गाँव, मिश्री में खपड़िया बाबा आ धमके थे और जग कराकर ही दम लिया था। खपड़िया बाबा के बारे में बस इतना बता देना काफ़ी होगा कि मिश्री में जग कराने के लिए बाबा ने जितना धन जुटाया था, जग कराने के बाद बचे पैसों से खपड़िया बाबा ने एक पिक-अप (छोटा भारवाहक वाहन) खरीदा, और उसे केतार से कोन के बीच चलाने लगे। खुद पिकअप के ड्राइवर भी हो गए और खलासी भी। अभी भी इस तरह के हज़ारों बाबा अपना खेल रच रहे हैं, ख़बर तो आपको केवल रामपाल की है।

हिंदयुग्म प्रकाशन के मुख्य कार्यकारी शैलेष भारतवासी के फेसबुक वॉल से.

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बेल न मिली तो दीपक चौरसिया जा सकते हैं जेल (देखें कोर्ट आदेश)

लगता है आसाराम के खिलाफ पीछे पड़े रहने का ‘पाप’ दीपक चौरसिया को लगने लगा है. ऐसा आसाराम के भक्त सोशल मीडिया पर कह रहे हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दीपक चौरसिया को गिरफ्तारी से मिले स्टे को खत्म कर दिया है और उनकी प्रार्थना को निरस्त कर दिया है. दीपक चौरसिया को महीने भर के भीतर कोर्ट जाकर बेल के लिए अप्लाई करना होगा और अगर कोर्ट ने बेल नहीं दी तो उन्हें जेल जाना पड़ सकता है.

‘इंडिया न्यूज’ के दीपक चौरसिया ने अपने चैनल पर आसाराम के खिलाफ लगातार खबरें दिखाने और टीआरपी पाने के क्रम में कुछ ऐसी झूठी खबरें भी दिखा दी हैं जो उनके गले की फांस बन गई है. आरोप है कि दीपक चौरसिया ने गुड़गांव के निवासी और आसाराम के एक भक्त की पारिवारिक प्राइवेट वीडिओ से छेड़छाड़ कर निहित स्वार्थ वश चैनल पर दिखाया. खबर के जरिए दीपक चौरसिया ने गुड़गांव के एक परिवार की 10 वर्षीय नन्ही स्कूली बच्ची और उसकी ताई के चरित्र को कलंकित कर दिया. इनकी शिकायत पर गुडगाँव पुलिस ने बड़ी मुश्किल से 15 दिसंबर 2013 को जीरो FIR करके जांच-पड़ताल नोएडा ट्रांसफर कर दी. इतने बड़े चैनल और इतने बड़े पत्रकार के मामले से बचने के उद्देश्य से नोएडा पुलिस ने केस को फिर गुड़गाँव वापस भेज दिया. कार्रवाई के लिए पुनः प्रार्थना दिए जाने दोनों जगहों की पुलिस एक दूसरे के सिर मामले को टालती रही.

पीड़ित परिवार की ओर से प्रार्थना पत्र आने पर कुछ समाजसेवी संस्थाओं (NGO)ने इसमें हस्तक्षेप कर व्यापक धरना-प्रदर्शन किया. इसके बाद दीपक चौरसिया ने इलाहबाद उच्च न्यायालय के तीन बड़े वकीलों द्वारा अरेस्ट स्टे (बेल) की अर्जी लगा दी. चूँकि पक्की FIR दर्ज नही हुई थी, फिर भी न्यायालय को गुमराह करते हुए, सेटिंग से 18 अप्रैल 2014 को अरेस्ट स्टे ले लिया. इस स्टे को पीड़ित परिवार ने चैलेन्ज किया. 8 अक्टूम्बर 2014 को दीपक चौरसिया का अरेस्ट स्टे इलाहाबाद उच्च न्यायलय ने खारिज कर दिया. अपने आर्डर में कोर्ट ने कहा है कि जब जीरो FIR के आधार पर अभी तक कोई केस दर्ज ही नहीं हुआ है तो बेल का कोई औचित्य नहीं बनता है. 

पीड़ित परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में आरोपियों पर पुलिस कार्यवाही की मांग को लेकर अर्जी लगाई थी जिस पर 17 फरवरी 2014 को सुप्रीमकोर्ट ने गुड़गांव और नोएडा दोनों जगहों की पुलिस को जवाब देने का नोटिस दे दिया. सुप्रीम कोर्ट की नोटिस को कोई महत्व ना देते हुए दोनों जगहों की पुलिस इसे आठ महीने तक टालती रही. अंत में सुप्रीम कोर्ट ने 8 अक्तूबर, 2014 को 7 दिन में जवाब देने और 27 अक्तूबर तक केस फाइल करने की म्याद देकर दोनों पुलिस को आर्डर पकड़ा दिया है. इस तरह दीपक चौरसिया के जेल जाने की स्थितियां तैयार होती दिख रही हैं.

मूल खबर…

आसाराम मामले में हाई कोर्ट ने दीपक चौरसिया की ज़मानत अर्जी खारिज की

संबंधित खबर से जुड़े कुछ डाक्यूमेंट्स….

इन्हें भी पढ़ें…

आसाराम समर्थकों ने दीपक चौरसिया, अजीत अंजुम और अजय कुमार के खिलाफ जारी किया प्रेस नोट

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सिर्फ ‘न्यूज नेशन’ ही नहीं, ‘इंडिया न्यूज’ और ‘न्यूज24’ के भी खिलाफ हुआ है एफआईआर

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एफबी पर आसाराम समर्थकों ने दीपक चौरसिया को भी लिया निशाने पर

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Wanted Posters of Deepak Chaurasia, Ajit Anjum and Ajay Kumar

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‘न्यूज नेशन’ की घटिया पत्रकारिता, शैलेश कुमार समेत कइयों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

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इस प्रकरण से जुड़े कुछ वीडियो लिंक….

https://bhadas4media.com/old1/video/viewvideo/775/media-world/noidafinalwithdc.html

https://bhadas4media.com/old1/video/viewvideo/776/media-world/noidadharna03012014.html

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