इस पत्रकार की नौकरी तो हमेशा लड़कियों ने ही ली! पढ़िए क्या-क्या घटित हुआ

Abhishek Srivastava ये जो #MeToo वाला ट्रेंड चल रहा है, थोड़ा विचलित करता है। लगे हाथ सोचा कुछ फर्स्‍ट हैंड कहानियां कह दी जाएं। पहली कहानी यूएनआइ समाचार एजेंसी की- वर्ष 2003। एक दिन एक एक बालिका संपादक के कमरे से निकल कर न्‍यूज़रूम में आई। पता चला इनटर्न है। उसे मेरे सुपुर्द कर दिया …

मोदी सरकार में पीएम से लेकर मंत्री तक अपना काम छोड़ दूसरे का भार हलका करने में जुटा है!

अनफ्री सेक्‍स कुछ और नहीं, बल्कि रेप है : कविता कृष्णन

सीपीआई (एमएल) पोलित ब्यूरो सदस्य और जानी मानी महिलावादी नेता कविता कृष्णन व उनकी मां लक्ष्मी कृष्णन सोशल मीडिया पर फ्री सेक्स की न सिर्फ वकालत की बल्कि इसे खुद के जीवन में अपनाया हुआ बताया। कविता कृष्णन ने अपनी पोस्ट में जेएनयू के शिक्षकों को निशाने पर लिया है. जेएनयू के शिक्षकों ने 2015 में एक दस्‍तावेज तैयार किया था, जिसमें यूनिवर्सिटी के छात्रों के सेक्‍स और शराब से भरे जीवन के बारे में बताया गया था. पोस्‍ट में दावा किया गया है कि कविता ने एक टीवी चैनल की डिबेट में कहा कि यह अफसोस की बात है कि कुछ लोग ‘फ्री सेक्‍स’ (अपनी मर्जी से किसी व्‍यक्ति से शारीरिक संबंध बनाना) से डरते हैं।

कासगंज : एक बंटे हुए समाज को मीडिया की एकतरफा रिपोर्टिंग ने और बांट दिया है

Abhishek Srivastava : कल रात तक अपनी समझ पर बीस परसेंट शंका थी। आज साफ हो गयी जब मृतक नौजवान चंदन के एक अनन्य मित्र ने भारी मन और भरी आंखों से बताया, “भैया, आप नहीं जानते यूपी का हाल। जब से मोदीजी ने नेतानगरी को एक फुलटाइम काम कहा है, यहां की हर गली में हर लौंडा मोदी बनने की इच्छा पाल बैठा है। कासगंज के हर मोहल्ले से एक मोदी निकल रहा है।”

योगी का आना हिंदुओं में लिबरल स्‍पेस का जाना है!

Abhishek Srivastava : अब योगी के बारे में कुछ बातें। मैं मानता हूं कि योगी आदित्‍यनाथ भाजपा के लिए बिलकुल सही चुनाव हैं। योगी को चुनकर भाजपा ने जनादेश को सम्‍मान दिया है। भाजपा के राजनीतिक एजेंडे के लिहाज से भी यह उपयुक्‍त चुनाव है। तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं योगी के चयन को लेकर आ रही हैं। कई जगह पढ़ा कि कुछ लोगों के मुताबिक वे भाजपा के लिए भस्‍मासुर साबित होंगे। ऐसे लोग योगी को जानने का दावा करते हैं। मुझे लगता है अभी वह वक्‍त नहीं आया कि हम योगी की तरफ़ खड़े होकर उनके चुनाव का विश्‍लेषण करें।

अनुशासन के मामले में लखनऊ का सचिवालय अब गोरखनाथ मठ की फ्रेंचाइज़ी बन जाएगा : अभिषेक श्रीवास्तव

Abhishek Srivastava : ‘उत्‍सव के नाम पर उपद्रव नहीं होना चाहिए’ – बतौर भावी मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ का यह पहला निर्देश प्रशासन के लिए आया है। रामगोपाल वर्मा की फिल्‍म ‘रक्‍तचरित्र-1’ का आखिरी सीक्‍वेंस याद करिए जब मुख्‍यमंत्री बनने के बाद रवि ने सभी बाहुबलियों को अपने घर खाने पर बुलाकर ज्ञान दिया था कि जंगल का राजा केवल एक होता है और राजा चूंकि वो है, इसलिए बाकी जानवर अब हुंकारना बंद कर दें। इस हिसाब से सोचिए तो उम्‍मीद बनती है कि अगला निर्देश मुख्‍यमंत्री पद पर शपथ ग्रहण के बाद उन लोगों के लिए आएगा जो प्रशासन को अपनी जेब में रखने का शौक पालते हैं यानी गुंडे, बदमाश और माफिया।

अखिलेश यादव को चेग्‍वारा बताने वाले ‘सोशलिस्‍ट फैक्‍टर’ के संपादक फ्रैंक हुजूर का अब क्या होगा!

Abhishek Srivastava : पेड़े कटहर ओठे तेल…! अभी मुख्‍यमंत्री तय हुआ नहीं और जनता सेटिंग-गेटिंग में जुट गई। लखनऊ में मार मची है पत्रकारों की। कोई मनोज सिन्‍हा की उम्‍मीद में डेरा डाले हैं तो कोई राजनाथ रामबदन का बगलगीर होने की फि़राक़ में है। किसी को ज़मीन छ़ुड़वानी है, किसी को ज़मीन लिखवानी है, किसी को विज्ञापन लेना है, किसी को ठेका चाहिए, कोई गैस एजेंसी और पेट्रोल पंप का मारा है तो कोई अपने स्‍कूल की मान्‍यता के लिए छटपटा रहा है।

बीईए जैसी संस्‍थाओं को अब भंग कर दिया जाना चाहिए

Abhishek Srivastava : 14 सितंबर को समाचार चैनलों पर दो दिलचस्‍प हेडलाइनें चल रही थीं। एक में बताया जा रहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस को गोवा के मसले पर ‘फटकार’ दिया है। संवैधानिक व्‍यवस्‍था कहती है कि राज्‍यपाल सबसे पहले सबसे बड़ी पार्टी को बुलाएगा सरकार बनाने के लिए। सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस की याचिका पर उससे पूछा है कि उसने अपनी लिस्‍ट राज्‍यपाल को पहले क्‍यों नहीं दी। सब इसे सुप्रीम कोर्ट की ‘’डांट’ या ‘फटकार’ बताकर चला रहे थे। आजतक पर रिपोर्टर अहमद अज़ीम ने डांट-फटकार की कोई बात नहीं कही, लेकिन ऐंकर सईद लगातार ‘डांट-फटकार’ बोले जा रहे थे।

2009 में कांग्रेस जीती थी तो बीजेपी के बड़े नेताओं ने EVM का रोना रोया था, देखें सुबूत

Abhishek Srivastava : सबसे ऊपर बीजेपी के प्रवक्ता जी वी एल नरसिम्हा राव हैं जिन्हें आप दिन रात टीवी पर देखते हैं। नीचे एक किताब का कवर है जो इन्होंने लिखी है और उस किताब की भूमिका लालकृष्ण आडवाणी ने, जो अब मार्गदर्शक मंडल का हिस्सा हैं पार्टी में।

सिद्धार्थ वरदराजन की वेबसाइट दि वायर पर ‘जन की बात’ कर रहे विनोद दुआ

एक जमाने में विनोद दुआ का नाम चलता था। उनकी चुनावी रेल को एक दिन न देखिए तो लगता था ज़रूरी ख़ुराक छूट गई। उनकी सधी हुई भाषा, दो शब्‍दों के बीच का मौन, मीठा तंज और सहज विश्‍लेषण भारत में टीवी के इतिहास की विरल परिघटनाओं में से एक कहा जा सकता है। आज उनकी सांस उखड़ रही है, तंज गायब है, ओढ़ी हुई गंभीरता उनकी बात का वज़न कम कर रही है। सिद्धार्थ वरदराजन की वेबसाइट दि वायर पर मंगलवार से शुरू हुआ उनका वीडियो कार्यक्रम जन की बात दो दिन में ही हांफने लगा है।

पुण्य प्रसून वैसे तो ऐसे ही हैं, लेकिन कभी-कभी चुपचाप अपना काम कर जाते हैं

Abhishek Srivastava : महीनों बाद आज घंटे भर के लिए टीवी खोला तो देखा, चारों ओर जंग का माहौल है। इस बीच दस बजे पुण्‍य प्रसून हाथ मलते हुए अवतरित हुए तो मीर की याद के साथ। उनके पीछे परदे पर लिखा था, ”आगे-आगे देखिए होता है क्‍या…।” जंग के माहौल के बीच इश्‍क़ की बात करना गुनाह है, लेकिन उन्‍होंने संदर्भ-प्रसंग सहित मीर के इस मशहूर शेर की न सिर्फ व्‍याख्‍या की, बल्कि महेश भट्ट के जन्‍मदिन पर जाते-जाते ज़ख्‍म का गीत भी सुना दिया- तुम आए तो आया मुझे याद…!

अनुराग कश्यप इस समाज को ज्‍यादा विद्रूप, जघन्‍य, असंवेदी, हिंसक, असहिष्‍णु और मनोविकारी बनाने के लिए याद किए जाएंगे

Abhishek Srivastava : Raman Raghav 2.0 को अगर उसके दार्शनिक आयाम में समझना हो, तो Slavoj Žižek को पढि़ए। इसे अगर आप कमर्शियल सिनेमा मानकर देखने जा रहे हों तो बीच के मद्धम दृश्‍यों में सोने के लिए तैयार रहिए। इस फिल्‍म में रमन का किरदार Badlapur (film) में लियाक़ के किरदार का एक्‍सटेंशन है। लोकप्रियता के लिहाज से भले ही इसे साइको-थ्रिलर का नाम दिया जा रहा हो, लेकिन यह बुनियादी तौर पर एक राजनीतिक फिल्‍म है जो एक आदतन अपराधी को हमारे समाज में मौजूद तमाम किस्‍म के अपराधियों के ऊपर प्रतिष्‍ठापित करती है। इस हद तक, कि फिल्‍म के अंत में रमन बोधिसत्‍व की भूमिका में आ जाता है- बोधिसत्‍व यानी निर्वाण का वह चरण जहां आपका कुकर्म कोई बुरी छाप नहीं छोड़ता, बल्कि आप दूसरे के कुकर्मों से उनको बरी करने की सलाहियत हासिल कर लेते हैं।