ये भाषा है खुद को देश का सबसे बड़ा हिंदी अखबार बताने वाले भास्कर की

-गाली छापा, तो भास्कर रायपुर में दो लोगों की गई नौकरी, मची है खलबली

इन दिनों दैनिक भास्कर रायपुर में जबरदस्त खलबली मची है। एक तरफ दैनिक भास्कर, रायपुर में कोई ज्वाइन नहीं करना चाह रहा है, तो दूसरी तरफ यहां से लोग भी जाते जा रहे हैं। ताजा मामला तो काफी दिलचस्प है। यहां अखबार में अश्लील शब्दों के इस्तेमाल के कारण दो रिपोर्टरों की नौकरी चली गई है। सिटी भास्कर के इंचार्ज तन्मय अग्रवाल और एक रिपोर्टर के खिलाफ सीधे एमडी सुधीर अग्रवाल ने कार्र्वाई की  है। बताया जा रहा है कि 14 अक्टूबर शनिवार के सिटी भास्कर में भास्कर का ही एक आयोजन था, जिसमें यूट्यूबर भुवन को बुलाया गया था। वे अपने कार्यक्रम में यूथ के हिसाब से कुछ गंदे बोलचाल के शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। इन सारे शब्दों को भास्कर में जस का तस छाप दिया गया। ऊपर इसकी शिकायत पहुंची, तो इस पर सीधी कार्रवाई हुई और दोनों को टर्मिनेट करने का आर्डर जारी किया गया।

वास्तव में दबी जुबान में यह कहा जा है कि एमडी श्री सुधीर अग्रवाल जी ने जितनी आजादी पत्रकारिता करने के लिए दी है, यहां के लोग उसका उतना ही फ़ायदा उठा रहे हैं। पिछले कुछ महीनों से रायपुर दैनिक भास्कर में दो-तीन स्थानीय लोगों का वर्चस्व है। संपादकीय विभाग में सारे बड़े पदों पर ये लोग ही हैं। तो वो लोग मनमानी भी कर रहे हैं। अफसरों, मंत्रियों से इनके संबंधों और संबंधों के कारण खबरों के किस्से रायपुर में तो काफी चर्चित हैं। रायपुर का हर पत्रकार इनके बारे में जानता है। यहां खबरें दबाई जाती हैं और उठाई भी जाती हैं, लेकिन पत्रकारिता के कारण नहीं, संबंधों को देखकर। आरोप तो और भी बड़े बड़े हैं, लेकिन बोलेगा कौन? और सुनेगा कौन? भास्कर रायपुर में भी सब इसके बारे में जानते हैं, लेकिन बोलता कोई नहीं। खैर, नीचे उस दिन के अखबार की कटिंग को पढ़िए और देखिए कि आखिर भास्कर ने क्या छापा था, जिसके कारण श्री सुधीर अग्रवाल को रिपोर्तरों को टर्मिनेट करना पड़ा।

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

दैनिक भास्कर में ये क्या छप गया! गई दो पत्रकारों की नौकरी

हैडिंग में कोई शायरी नहीं है। बल्कि हकीकत है दैनिक भास्कर के रायपुर एडिशन की। आनंद पांडे जी के जाने के बाद जब से शिव दुबे को रायपुर भास्कर का संपादक बनाया गया है। भास्कर की छीछालेदर होती जा रही है। ताजा उदाहरण है कि 14 अक्टूबर के सिटी भास्कर में खबर में ऐसे शब्द शामिल हैं जिन पर कड़ी आपत्ति आते ही 2 कर्मियों तन्मय अग्रवाल और सुमन पांडे की विदाई कर दी गई है।

दरअसल गलती खबर बनाने वालों की नहीं है क्योंकि उन्हें तजुर्बा ही नहीं… उन्हें पता ही नहीं कि किसी ने अपने किरदार का नाम “गाली” रखा हो तो उसे घुमाकर परोसा जाता है। उन्होंने तो सीधे-सीधे किरदारों के नाम लिखकर छाप दिए थे। अब हुआ यूं कि जब ऊपर से शिव दुबे की सिंकाई हुई तो उसने दोनों कर्मियों को तत्काल रिलीव कर दिया।

अंदर की बात यह है कि तन्मय अग्रवाल, शिव दुबे का खास बन्दा था। दुबे को पता था सिटी भास्कर को निकालने और पब्लिक के टेस्ट को पकड़ने का हुनर उसके किसी और खास आदमी में नहीं है। इसीलिए उसने तन्मय को सुनहरे भविष्य के सपने दिखाकर भास्कर से जाने नहीं दिया था। लेकिन जब माई बाप से प्रेशर पड़ा तो उसी ने तन्मय की विदाई कर दी। वैसे यह वही शिव दुबे हैं जो सन्डे के दिन IIT का रिजल्ट डिक्लेयर होने की खबर बनवा रहा था जिसे मैंने रुकवाया था। क्योंकि सन्डे को एग्जाम तो कंडक्ट हो सकते हैं लेकिन रिजल्ट डिक्लेयर नहीं हुआ करते।

नमूनों से भरी है नई टीम

24 अक्टूबर के रायपुर सिटी भास्कर के फ्रंट पेज की लीड खबर में ट्रांसपेरेंट शब्द की बजाय “न्यूड” का बारबार इस्तेमाल किया गया है। अब जाहिर सी बात है ट्रेनी पत्रकारों को या नौसिखियों को कम तनख्वा देकर बिठाओगे तो यही सब तो पढ़ने मिलेगा।

आशीष चौकसे
पत्रकार और ब्लॉगर
ashishchouksey0019@gmail.com

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मीडियाकर्मियों ने मांगी छुट्टी तो ‘हिन्दुस्तान’ के संपादक ने दी गालियां!

जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर प्रबंधन से मांगने पर स्वामी भक्त संपादकों को भी बुरा लग रहा है। सबसे ज्यादा हालत खराब हिन्दुस्तान अखबार की है। खबर है कि हिन्दुस्तान अखबार के रांची संस्करण के दो कर्मियों अमित अखौरी और शिवकुमार सिंह ने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन प्रबंधन से मांगा तो यहां के स्वामी भक्त स्थानीय संपादक  दिनेश मिश्रा को इतना बुरा लगा कि उन्होंने पहले मजीठिया कर्मियों को ना सिर्फ बुरा भला कहा बल्कि एक कर्मचारी को तो गालियां भी दीं। बाद में इन दोनों कर्मचारियों ने विरोध किया तो उन्हें मौखिक रूप से स्थानीय संपादक ने कह दिया कि आप दोनों कल से मत आईयेगा।

सुरक्षागार्ड से भी कह दिया कि इनको गेट के अंदर मत आने देना। इन दो कर्मचारियों में एक डबल एमए है और एक उज्जवल भविष्य की कामना के साथ सरकारी नौकरी छोड़कर पत्रकारिता में आया था। फिलहाल इस संपादक के खिलाफ दोनों कर्मचारियों ने ना सिर्फ श्रम आयुक्त से शिकायत की है बल्की दूसरे सरकारी महकमों और सुप्रीमकोर्ट को भी इत्तला कर दिया है।

बताते हैं कि २७ अक्तूबर २०१६ को वरीय स्थानीय संपादक दिनेश मिश्र ने छुट्टी नहीं देने के बहाने संपादकीय विभाग में वर्ष २००० से कार्यरत मुख्य उप संपादक अमित अखौरी को काफी जलील किया। उनका इतने से भी मन नहीं भरा तो गाली गलौज भी की। गाली का विरोध करने पर मीडियाकर्मी को बर्बाद करने की धमकी तक दे डाली। यह धमकी अमित अखौरी को १७ नवंबर को भारी भी पड़ गयी। चर्चा है कि पहले तो संपादक ने एचआर के माध्यम से काम करने से मना करा दिया, फिर संपादकीय विभाग में उनकी इंट्री रुकवा दी और तीसरे दिन गेट के अंदर आने से भी मना करवा दिया।

नौकरी से बाहर और वेतन नहीं मिलने से परेशान अमित अखौरी अब सचिव, श्रमायुक्त और उप श्रमायुक्त के यहां न्याय की गुहार लगाते फिर रहे हैं। अब तक न्याय नहीं मिलने से परेशान अमित अब दिल्ली में बैठे अपने वरीय अधिकारियों शोभना भरतिया, शशि शेखर, एचआर हेड राकेश गौतम से गुहार लगा रहे हैं। आशा है कि शायद उनकी पीड़ा का समाधान हो। संस्थान में काम नहीं करने देने से उनके सामने आर्थिक संकट आ गया है। चिंता है कि उनकी दो बेटियों की पढ़ाई कैसे होगी।

अब आइए जानते है कि दूसरे कर्मी शिव कुमार सिंह का क्या हुआ। शिव कुमार सिंह वर्ष 2000 से काम कर रहे हैं पर 1 अगस्त 2010 में कन्फर्म हुए। वह वर्तमान में वरीय उप संपादक के पद पर कार्यरत हैं। अपनी आदतों से लाचार वरीय संपादक दिनेश मिश्र ने अमित अखौरी को निपटाने के बाद टारगेट शिव कुमार सिंह को बनाया। छोटी-छोटी बातों को लेकर प्रताड़ित करना, सभी कर्मचारियों के सामने जलील करना वरीय संपादक ने रोजमर्रा में शामिल कर लिया। कर्मी शिव कुमार सिंह की गलती सिर्फ इतनी थी कि इन्होंने भी हिन्दुस्तान प्रबंधन से मजीठिया वेतन बोर्ड के तहत वेतन भत्ता समेत अन्य सुविधाएं देने की मांग की थी।

एक कर्मी मजीठिया की मांग करे यह सांमती मानसिकता वाले दिनेश मिश्रा को काफी नागवार गुजरा। उन्होंने अब शिव कुमार को भी निपटाने की ठान ली। हुआ भी ऐसे ही। ६ दिसंबर २०१६ को रोज की तरह जब शिव कुमार अपने काम पर गए तो संपादक के निर्देश पर एचआर हेड हासिर जैदी ने मौखिक आदेश के तहत उन्हें कार्यालय में घुसने से मना कर दिया। शिव कुमार ने कार्यालय में काम करने देने के लिए काफी मिन्नतें कीं पर इसका असर जैदी पर तनिक नहीं पड़ा। शिव कुमार ने जब कहा कि मैं संपादक से इस मामले में बात करना चाहूंगा तो जैदी ने साफ कर दिया कि यह सारी कार्रवाई दिनेश मिश्र के निर्देश पर ही हो रही है।

रांची में किराए के मकान में रह कर हिन्दुस्तान में काम कर रहे शिव कुमार के सामने भी आर्थिक समस्या उत्पन्न हो गयी है। आपको बता दें कि हिन्दुस्तान गोरखपुर में भी इसी तरह संपादक द्वारा सुरेन्द्र बहादुर सिंह को परेशान किया गया था। वजह साफ थी कि सुरेन्द्र बहादुर सिंह ने प्रबंधन से मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर मांगा था। संपादक ने परेशान किया तो सुरेन्द्र ने मानवाधिकार आयोग और स्थानीय पुलिस तक की शरण ले ली। 

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टीविस्ट
मुंबई
९३२२४११३३५

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

यूपी में मंत्री ने अफसर को दी मां-बहन की गालियां (सुनें टेप)

यूपी में समाजवार्दी पार्टी की सरकार के मंत्री बेलगाम हैं और पूरा जंगलराज कायम कर रखा है. अखिलेश यादव अपनी इमेज के सहारे इलेक्शन जीतने की तैयारी में लगे हैं लेकिन उनके मंत्री उनकी लुटिया डुबाने के लिए कमर कसे हैं. तभी तो आए दिन मंत्रियों के कारनामों की खबरें सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती है. ताजा मामला सपा सरकार के एक राज्यमंत्री की दबंगई का है.

खबर है कि एक राज्यमंत्री ने कुशीनगर में जिला पंचायत के ठेके के बंटवारे को लेकर अपर मुख्य अधिकारी (जिला पंचायत) को माँ-बहन की खूब गालियां दी. इस गालीबाजी से संबंधित आडियो सामने आया है. यह आडियो जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी के मोबाइल में रिकार्ड हुआ. इसमें चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री राधेश्याम सिंह जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी उमेश पटेल को भद्दी-भद्दी गाली दे रहे हैं. डर के चलते अपर मुख्य अधिकारी पूरे मामले में कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं. आडियो सुनने के लिए नीचे दिए गए यूट्यूब लिंक पर क्लिक करें :

https://youtu.be/z5bCZ0J3gjU

कुशीनगर से शकील अहमद की रिपोर्ट.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

ताजमहल देखने गई एक रइसजादी ने दी मां-बहिन की गंदी-गंदी गालियां (देखें वीडियो)

Are you safe in TajMahal? see this video आगरा में एक बार फिर से शराब के नशे में धुत शराबी पर्यटकों ने ताजमहल की सुरक्षा में सेंध लगाते हुए ताजमहल के पश्चिमी गेट को तोड़ते हुए अपनी गांड़ी के अंदर ले गए..पर्यटकों की इस दुस्साहिक कदम से रोकने में तैनात ताज सुरक्षा के सिपाहियों की पर्यटकों ने लात घूसों से जमकर पिटाई कर दी…

दिल्ली के रहने वाले चार पर्यटकों में दो लड़के और दो लड़कियां ताजमहल के प्रतिबंधित क्षेत्र में शराब के नशे में धुत होकर गाड़ी के साथ बैरियर तोड़ते हुए अंदर प्रवेश कर गए… ताज सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों के रोकने पर चारों पर्यटकों ने ताज सुरक्षा के सिपाहियों को जमकर पीटना शुरू कर दिया…

इस दौरान एक लड़की ने पूरी ताज सुरक्षा को धता बताते हुए पुलिसकर्मियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की धमकी देते हुए जमकर गाली गलौज किया… वहीं इस महिला के साथ आए दो लड़कों ने सिपाहियों को लात घूसों से पीटना शुरू कर दिया…

सुरक्षा के लिहाज से संवेदशील माने जाने वाले पश्चिमी गेट पर पुलिसकर्मियों को चार पर्यटकों ने जमकर पीटा.. इसको देखने के बाद ताजमहल की सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है… फिलहाल पुलिस सभी पर्यटकों को हिरासत में लेकर ताजगंज थाने ले आई है.

वीडियो देखने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें :

https://www.youtube.com/watch?v=PRnWPPTlrQc

आगरा से syed shakeel की रिपोर्ट.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

महिषासुर मुद्दे पर डिबेट करने वाली इस न्यूज एडिटर और एंकर को गंदी गंदी गालियां मिलीं

Kavita Krishnan : A woman news anchor in Kerala gets abusive messages branding her a slut etc for moderating a debate on Mahishasura Diwas. The irony, the irony! They falsely claim Durga was called a slut, then in revenge they brand women who moderate debates on Mahishasura, sluts!

It’s fine to say even alternate anti Brahmicical mythology should not fall back into patriarchal slut shaming, since even slut shaming Durga has real consequences for living women, just as branding indigenous people or Dalit icons as asuras and rakshasas has real consequences those peoples. But what the Sanghis believe in is, to slut shame real live women in the name of defending and avenging goddesses!

सीपीआईएमएल लिबरेशन की नेता कविता कृष्णन के फेसबुक वॉल से.


संबंधित एंकर की पूरी खबर Thenewsminute.com पर है, जो इस प्रकार है :

Threatened and termed a sex worker after Mahishashura debate : Asianet News editor Sindhu

All Sindhu did was to moderate a discussion on whether Mahishashura Jayanthi could be considered treason on Asianet News Hour.

Chintha Mary Anil| Monday, February 29, 2016 – 12:29

On Friday when Asianet News Chief Coordinating Editor Sindhu Sooryakumar moderated a discussion on whether celebrating Mahishashura Jayanthi could be considered an act of treason, little did she know that she would be subject to a barrage of torrential abuse from both within the country and abroad.

As the anchor of the show, all Sindhu did was pose this query to a panel comprising Congress MP Anto Antony, CPI(M) MP MB Rajesh and Kerala BJP spokesperson VV Rajesh.

Speaking to The News Minute, Sindhu said that almost 98% of the people who called her up and abused her had actually not seen the discussion on television.

Apparently someone had spread the rumour on social media that Sindhu had found no fault with Durga being termed a sex-worker.

The alleged messages on Whatsapp and Facebook reportedly circulated Sindhu’s mobile number too and exhorted one and all to call Sindhu and shower her with the choicest abuses for her supposed act of treason.

Sindhu shudders at the thought of how people could subject her to such verbal sexual abuse without even verifying the truth of such blatant rumours.

She said, “Even now while I’m speaking to you, I’m getting call alerts. Since Friday night, I’ve been threatened with beatings, even death with most calling me a sex-worker. I guess I must have had almost 2000 calls till now with people even calling me from abroad.”

When the calls became unbearable, Sindhu filed a complaint on Saturday with the Thiruvanathapuram Commissioner of Police who registered an FIR. She gave them around 20 telephone numbers too. “The police can verify my mobile call list for any documentary evidence needed,” she added.

Sindhu is a very popular face on Asianet News with a huge fan base for her mature and hard-hitting presentation style.

VV Rajesh who had taken part in the said debate as the BJP representative had got in touch with her on Saturday morning and assured her of his full support and coperation. Sindhu asked him to make his statement of support public but Rajesh said that he would first need BJP state president Kummanam Rajasekharan’s clearance for the same.

“I am yet to hear from that quarter. VV Rajesh says that since Kummanam is currently out of station and will reach Thiruvananthapuram by Monday, only then can any formal announcement can be made by the party exonerating me from all such cooked-up and completely baseless charges.”

SIndhu has posted the link of that particular discussion on Facebook. “Anyone who actually takes the trouble to watch the entire debate cannot ever blame me for having made any derogatory remarks against Durga. It was VV Rajesh himself who repeatedly quoted from the pamphlets allegedly circulated in the JNU campus and which was produced in Parliament by Union HRD Minister Smrithi Irani as evidence of sedition against the JNU students. All I did was ask how the act of celebrating Mahashishura Jayanthi could be considered treason against the nation?” she elaborates.

She has also forwarded copies of her complaint to Kummanam as well as CPI(M) leaders VS Achuthanandan, Pinarayi Vijayan and Kodiyeri Balakrishnan and also KPCC president VM Sudheeran.

CPI(M) state secretary Kodiyeri Balakrishnan promptly issued a media statement of the party’s unconditional support to Sindhu in this regard.

You can view the discussion which triggered off the present controversy here:

http://www.asianetnews.tv/news/kerala/Threat-to-life-against-Sindhu-Sooryakumar-55020

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

रवीश ने गाली देने वाले से पूछा- क्या तुम ऐसे सवाल अपनी मां से कर लेते हो?

अरविंद, आपने पूछा है कि क्या मेरी मां चाचा के साथ सोई थी। क्या तुम ऐसे सवाल अपनी मां से कर लेते हो?  किस घर्मग्रंथ से तुमने ऐसे सवालों की प्रेरणा पाई है मेरे मित्र। मेरी मां देवी हो या न हो, वो मां है इसीलिए मेरी नज़र कभी उसके सामने उठ भी नहीं सकती। वैसे भी मेरी मां तो भारत माता है। दोस्त मैं माफी चाहता हूं। मैं अपनी भारत माता से ये सवाल नहीं कर सकता। वैसे तुम लोगों की हिन्दी भी बहुत ख़राब है। आप जिस विचारधारा के गुप्त गुंडे हैं, आप भारत माता का अपमान कर सकते हैं लेकिन मैं नहीं कर सकता क्योंकि इससे तो उन शहीदों का अपमान हो जाएगा जिन्होंने भारत माता के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। गुप्त गुंडे इसलिए कहा कि आप ये ट्वीट न तो अपनी बहन को दिखा सकते हैं, न अपनी मां को या पत्नी को। ज़ाहिर है आप कभी सामने नहीं आएंगे। आप अपने पिता को भी नहीं दिखा सकते।

मित्र पता है मुझे लगता है कि कोई तुम्हें ब्लैक मेल कर रहा है। अभी तुमसे मुझे गाली दिलवा रहा है। एक दिन वो तुमसे कहेगा कि अब तुम अपनी मां को गाली दो नहीं तो पूरी दुनिया को बता देगा कि तुम्हीं हो जिसने रवीश कुमार की मां को गाली दी थी। ये जिस भी आई डी से, जिस भी संगठन के आई टी सेल से तुमने ये गाली लिखी है वो उसके रिकार्ड में है। वहां कोई सी सी टी वी कैमरा भी होगा। इसलिए मुझे तुम्हारी चिन्ता हो रही है। क्योंकि मुझे पता है कि तुम जब मेरी मां से मिलोगे तो तुरंत पांव छू लोगे। हम और तुम जिस धर्म परंपरा से आते हैं उसमें इतना तो सीख ही लेते हैं। मैं भी तुम्हारी मां के पैर ही छुऊंगा। वैसे मेरी मां रोज़ तुलसी की पूजा करती है। साल में अनगिनत व्रत रखती है। सूरज को जल चढ़ाती है। मैं उसे तीर्थ यात्राओं पर भी ले जाता हूं। तुम्हारी मां भी यही करती होगी। नहीं भी करती होंगी तो कोई बात नहीं। ईश्वर तो दिल में होता है। पर हम तो पत्थर को भी भगवान मानते हैं और तुम इतने पत्थर हो गए कि मेरी मां को क्या क्या कह गए। कोई बात नहीं। मैं तुम्हारे भीतर मौजूद वैचारिक पत्थर को भगवान मानता हूं। उसे पूजना चाहूंगा। जल चढ़ाना चाहूंगा। मैं अपनी मां से कहूंगा कि अरविंद अच्छा लड़का है। उसे अपना ही बेटा समझ कर माफ कर देना। मैंने कहां और कब हिन्दुओं के खिलाफ ज़हर उगला है एक प्रमाण तो दे दो। इस तरह की बातें लिखकर, व्हाट्स अप पर फैला कर आप हिन्दू धर्म को उसी तरह बदनाम कर रहे हैं जिस तरह आतंक की राह पर जाकर, आईसीस की तरफ जाकर कई लोग इस्लाम को बदनाम कर चुके हैं। माल्दा में जिन गुंडों ने यह हरकत की है उन्होंने कोई शान नहीं बढ़ाई है। मैं उस घटना पर भी लिखूंगा। मैं तुम्हारे लिए लिखूंगा क्योंकि मुझे पता है कि तुम दादरी की हकीकत के लिए कितने बेचैन थे। तुमने इखलाक के हत्यारों को सज़ा दिलवाने के लिए कैसे दिन रात एक कर दी थी।

इस तरह के कई मैसेज आए हैं । जिनके हिसाब से मैं पठानकोट हमले की रिपोर्टिंग कर रहा हूं। आप सब जानते हैं कि मैं छुट्टी पर हूं। मैं कैसे आतंकवादियों की मदद के लिए संवेदनशील सूचनाएं दे सकता हूं। इस तरह के अफवाह व्हाट्स अप पर फैला रहे हैं। असलियत यह है कि किसी भी चैनल ने लाइव रिपोर्टिंग नहीं की है। मैंने पठानकोट आपरेशन को असफल साबित करने का कोई प्रयास नहीं किया है। कई लोग कह रहे हैं कि असफल ही है। सेना के भी लोग कह रहे हैं। क्या सवाल उठाने वाले पूर्व सैनिक अधिकारी भी आतंकवादियों की मदद कर रहे हैं।

इस मैसेज के हिसाब से मैंने कहा है कि सैनिक कार्रवाई में मारे गए लोगों को आतंकवादी कहना गलत है। हद है। जब मैं छुट्टी पर हूं तो कब कह दी ऐसी बात। और मैं आतंकवादी को क्यों न आतंकवादी कहूंगा। वैसे प्रधानमंत्री ने मानवता के दुश्मन कहा है। इंडिया युनाइटेड नाम से भेजे गए इस मैसेज में कहा गया है कि मैंने ऐसा कह कर शहीदों का अपमान कर दिया है।

इसे भी पढ़ें>

नवभारत टाइम्स ने रवीश कुमार पर बनाया घटिया चुटकुला, पढ़िए रवीश की प्रतिक्रिया

क्या आपको भी व्हाट्स अप पर मुझे लेकर अफवाहें, लतीफे और गालियों वाले मैसेज मिल रहे हैं। क्या आपने इन गालियों को भेजने वाले की राजनीतिक और वैचारिक सोच के बारे में पता किया है ? अगर आप महिला हैं, लड़की हैं तो ऐसे गाली देने वालों से सावधान रहिएगा। इनकी प्रोफाइल नकली हो सकती है मगर कोई लिखने वाला तो होगा ही। किसी जगह से जुड़ा होगा। इनकी सोच नकली नहीं है। आपकी आज़ादी पर हमला न हो इसलिए आप लड़कियों के लिए ये पोस्ट लिखा है।

असहमतियाँ हो सकती हैं लेकिन गालियों और धमकियों की प्रवृत्ति दिन ब दिन घिनौनी होती जा रही है । इन्हें नोटिस में लाना जरूरी है । मुझसे असहमत होने वाले भी जान सकेंगे कि इस तरह सीमा पार कर जाने के बारे में उन्होंने भी नहीं सोचा होगा। मैं इन्हें भाव नहीं देता लेकिन हमारी राजनीति और समाज में असहमति के इस रूप को लेकर हम इतने सहज कैसे होते जा रहे हैं । इस बीमारी को रोकिये । कोई हमारे लोकतंत्र को बीमार कर रहा है।

मित्रों, हम किसके लिए सनक रहे हैं। क्या इस देश में बहुत सारे अच्छे और सस्ते अस्पताल बन गए हैं, क्या सरकारी स्कूलो की हालत इतनी बेहतर हो गई है वहां एडमिशन के लिए लोग मार कर रहे हैं, क्या सबको नौकरी मिल गई है। क्या दवाएं सस्ती हो गईं हैं, क्या सबके पेंशन का इंतज़ाम हो गया है, । प्लीज आई टी सेल में बर्बाद हो रहे हमारे नौजवानों को बचा लीजिए । इन लड़कों का कोई क़सूर नहीं है । कोई इन्हें अपने हित में जला रहा है । मैंने उन्हें बचाने के लिए लिखा है । अपनी माँ के लिए नहीं, भारत मां के बेटों के लिए लिखा है । जय माँ भारती, जय हिन्द ।

जाने माने पत्रकार रवीश कुमार के ब्लाग कस्बा से साभार.

इसे भी पढ़ें>

गाली देने वाले को रवीश ने समझाया- ….इसलिए कभी किसी को रंडी मत कहना

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

गाली देने वाले को रवीश ने यूं समझाया


मैं भारत माता की संतान हूं। अगर मेरी मां भारत माता नहीं है तो फिर कोई भारत माता नहीं है। फिर कोई मां पूजे जाने के लायक नहीं है। मैंने हमेशा भारत माता को अपनी माता समझा है और अपनी मां में भारत माता देखी है। क्या हम सभी सौ फीसदी माँ भारती की औलाद नहीं हैं? सवाल मेरी मां का भी नहीं है। सवाल उन तमाम मांओं का है जिनके आगे बड़े बड़े नेता देवी कह कह कर गिड़गिड़ाते हैं और बाद में अपने वैचारिक समर्थकों से उन्हीं देवियो को किसी न किसी बहाने गाली पड़वाते हैं। गाली देने वाले की प्रोफाइल गलत हो सकती है मगर नकली नाम के पीछे किसी असली आदमी ने ही तो लिखा होगा। उसकी कुछ सोच होगी। वो किसी संगठन के लिए काम करता होगा। उसकी भलाई चाहता होगा। क्या उस संगठन में मांओं की यही इज़्ज़त है। अगर आप इस प्रवृत्ति को अब भी नहीं समझे और सतर्क नहीं हुए तो बहुत देर हो जाएगी। आखिर कौन लोग हैं जो पिछले कुछ दिनों धड़ाधड़ गालियां दिये जा रहे हैं। Continue reading

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

खुद को और बरखा दत्त को सोशल मीडिया पर गाली देने वाले को रवीश कुमार ने अपनी कलम के जरिए दिखाया आइना

आपकी गाली और मेरा वो असहाय अंग

कुछ ही तो वाक्य हैं बाज़ार में
जिन्हें तल कर
जिनसे छन कर
वही बात हर बार निकलती है
बालकनी के बाहर लगी रस्सी पर
जहाँ सूखता है पजामा और तकिये का खोल
वहीं कहीं बीच में वही बात लटकती है
जिन्हें तल कर
जिनसे छनकर
वही बात हर बार निकलती है
बातों से घेर कर मारने के लिए
बातों की सेना बनाई गई है
बात के सामने बात खड़ी है
बात के समर्थक हैं और बात के विरोधी
हर बात को उसी बात पर लाने के लिए
कुछ ही तो वाक्य हैं बाज़ार में
जिन्हें तल कर
जिनसे छनकर
वही बात हर बात निकलती है
लोग कम हैं और बातें भी कम हैं
कहे को ही कहा जा रहा है
सुने को ही सुनाया जा रहा है
एक ही बात को बार बार खटाया जा रहा है
रगड़ खाते खाते बात अब बात के बल पड़ने लगे हैं
शोर का सन्नाटा है, तमाचे को तमंचा बताने लगे है
अंदाज़ के नाम पर नज़रअंदाज़ हो रहे हैं हम सब
कुछ ही तो वाक्य है बाज़ार में
जिन्हें तल कर
जिनसे छनकर
वही बात हर बार निकलती है ।
बात हमारे बेहूदा होने के प्रमाण हैं
वात रोग से ग्रस्त है, बाबासीर हो गया है बातों को
बकैती अब ठाकुरों की नई लठैती है
कथा से दंतकथा में बदलने की किटकिटाहट है
चुप रहिए, फिर से उसी बात के आने की आहट है।

अब भाषण सुनिये मित्रों, मैं इन दिनों लंबी छुट्टी पर हूँ । लेकिन उन्हें छुट्टी नहीं मिली जो सोशल मीडिया पर इस न्यूज उस न्यूज के बहाने हमारी अग्निपरीक्षा लेने के लिए आतुर रहते हैं । मुझे खुशी है कि जो लोग वर्षों तमाम चैनलों पर भूत प्रेत से लेकर वहशीपना फैला गए वो आज समादरित हैं । उनसे पत्रकारिता की शान है । वैसे तब भी वही समादरित रहे और आगे भी वही रहेंगे । लोग उन्हीं को देख रहे हैं । वो कब किसी खबर के गुमनाम पहलू को छूकर सोना बन जाते हैं, यह चमत्कार मुझे प्रेरित करने लगा है।

हमें गाली देने वालों को जो तृप्ति मिलती है उससे मुझे खुशी होती है । कम से कम मैं उनके किसी कम तो आता हूँ । अगर किसी को गाली देना संस्कार है तो इसकी प्रतिष्ठा के लिए मैं लड़ने के लिए तैयार हूँ । इसीलिए गाली का एक नमूना लगा दिया । कविता पहले लिखी जा चुकी थी । वर्ना  ये किसी भदेस गाली के सम्मान में लिखी गई कविता हो सकती थी । पहली है या नहीं, पता नहीं । फिर भी मैंने गाली को कविता से पहले रखा है । गाली को साहित्यिक सम्मान भी मैं ही दिलाऊँगा।

जो मित्र मेरे एक खास अंग को तोड़ कर पीओके भेजना चाहते हैं कम से कम अख़बार तो पढ़ लेते । पीओके से जो आ जाते हैं उन्हें तो मारने में चार दिन लग जाते हैं, लिहाज़ा हमारे अंगों को क्षति पहुँचाकर पीओके भेजने वाले मित्र अगर नवाज़ भाई जान से इजाज़त ले ले तो अच्छा रहेगा । कहीं क्षतिग्रस्त अंगों को लेकर सीमा पर इंतज़ार न करना पड़ जाए और उनसे मल न टपकने लगे !  टूटे अंग को डायपर में ले जाइयेगा।

अरे बंधु इतनी घृणा क्यों करते हैं । आपसे गाली देने के अलावा कुछ और नहीं हो पा रहा है तो नवीन कार्यों के चयन में भी मदद कर सकता हूँ । मैं स्वयं और उस अंग की तरफ से भी माफी माँगता हूँ जिसे आप तोड़ देना चाहते हैं । हालाँकि मेरे बाकी अंग स्वार्थी साबित हुए । वे ख़ुश हैं कि बच गए । मैं आपके सामने शीश झुका निवेदन करना चाहता हूँ । आप उस अंग को न सिर्फ मेरे शरीर से, जो सिर्फ भारत को प्यार करता है, अलग करना चाहते हैं  बल्कि मेरी मातृभूमि से भी जुदा करना चाहते हैं । प्लीज डोंट डू दिस टू माई… । आप तो एक सहनशील  मज़हब से आते हैं । वही मेरा धर्म है । इसलिए आप तोड़े जाने के बाद मेरे उस अंग को उस अधिकृत क्षेत्र में न भेजें जो अखंड भारत के अधिकृत नहीं है।

अब तो मुस्कुरा दो यार। गाली और धमकी आपने दी और माफी मैं मांग रहा हूँ । इसलिए कि कोई आपके मेरे धर्म पर असहिष्णुता के आरोप न लगा दे । ट्वीटर पर आपकी इस धमकी भरी गाली ने मुझे कितना साहित्यिक बना दिया । अगर मैं आपके ग़ुस्से का कारण बना हूँ तो अफ़सोस हो रहा है । आशा है आप माफ कर देंगे और वो नहीं तोड़ेंगे जो तोड़ना चाहते हैं।

जाने माने टीवी जर्नलिस्ट और एंकर रवीश कुमार के ब्लाग से साभार.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

खबर छपने से बौराए फर्रूखाबाद के प्रभारी सूचनाधिकारी पूरन चंद्र मिश्रा ने पत्रकार आनंद भान शाक्य को दी जमकर गालियां (सुनें टेप)

: गुंडों को लेकर रात में पत्रकार के घर पर बोला धावा : यूपी के जंगल राज में सबसे ज्यादा बेलगाम पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी हैं. भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह ने बारिश में बिना वाइपर लगे बस चलाने की लिखित शिकायत गाजीपुर जिले में पदस्थ रोडवेज अधिकारी से की तो अधिकारी ने बदतमीजी करते हुए अपने नेतृत्व में रोडवेजकर्मियों के साथ हमला बोल दिया. इस मामले में अधिकारी के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर 36 घंटे बाद तब दर्ज की जब लखनऊ से एफआईआर दर्ज किए जाने के लिए दबाव डलवाया गया. यह मामला अभी पुराना भी नहीं पड़ा था कि यूपी के फर्रूखाबाद जिले से एक नया मामला सामने आ गया है. यहां के प्रभारी सूचनाधिकारी पूरन चंद्र मिश्रा ने एक पत्रकार को फोन कर धाराप्रवाह गंदी गंदी गालियां दीं.

अखिलेश यादव का यह बेलगाम अधिकारी फोन कर पत्रकार को धमकाता है और फिर गंदी गालियां देता है. टेप सुनेंगे तो कहेंगे कि ऐसी गाली तो कोई नशेड़ी ही दे सकता है जिसे होश न हो कि वह किससे क्या बात क रहा है. जनपद फर्रूखाबाद के प्रभारी सूचनाधिकारी पूरन चन्द्र मिश्रा को डीएम ने बीते दिनों पंचायत चुनाव के मतगणना के दौरान मीडिया कर्मियों के सामने जमकर हड़काया था और एफआईआर कराने व जेल भेजने तक की चेतावनी देते हुए कार्यालय में उपस्थित होने को कहा था.

डीएम ने यह निर्देश तब दिया जब उनसे मीडिया कर्मियों ने रुपये लेकर पत्रकारों को पास दिये जाने की शिकायत की थी. इस खबर को एक स्थानीय वेब पोर्टल एफबीडी न्यूज ने चलाया. इसी बात पर गुस्साये पूरन चन्द्र मिश्रा ने अपने मोबाइल नम्बर 9453005387 से बेब पोर्टल के सम्पादक आनंद भान शाक्य को रात 9.49 बजे फोन कर 1.04 मिनट तक धमकाते हुए गंदी गंदी गालियां दीं. वे पत्रकार की एक बात नहीं सुन रहे थे.

दबंग अधिकारी का इतने से भी मन नहीं भरा तो वह अपने 4 गुंडों के साथ रात 10 बजे सम्पादक के आवास पर भी पहुंच गया और यह कहकर दरवाजा खुलवाने का प्रयास किया कि बाहर निकलो तो मैं तुम्हे खबर छापने का नतीजा दे दूं. उसने जान से मारने तक की धमकी दी. पुलिस ने अधिकारी का मामला होने के कारण रिपोर्ट दर्ज करने से मना कर दिया.  एएसपी ने भी यह कहकर रिपोर्ट दर्ज करने से मना कर दिया कि वह मामले की पहले सीओ सिटी से जांच करायेंगे. एफबीडी न्यूज के सम्पादक ने बीते माह ही डीएम से सूचनाधिकारी की लिखित व मौखिक शिकायत की थी कि वह प्रेस नोट उपलब्ध नहीं कराते.

सुनें गालियों वाला टेप :

https://www.youtube.com/watch?v=JqWvgbigVqg


इसे भी पढ़ें>> 

यशवंत पर हमले की कहानी, उन्हीं की जुबानी ( देखें सुनें संबंधित आडियो, वीडियो और तस्वीरें )

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

श्रुति सेठ, कविता कृष्णन, शर्मिला टैगोर, शोभा डे आदि को रंडी, वेश्या, चरित्रहीन कहने वाले ये लोग कौन हैं?

Krishna Kant : भारतीय सवर्ण मर्द के पास महिला की बात का जवाब नहीं होता तो तुरंत चरित्र हनन पर उतर आता है. यह पाखंडी समाज है इसलिए किसी का भी चरित्र हनन बहुत कारगर हथियार है. प्राय: पति जब पत्नी से हारता है तो लांछन लगा देता है. कोई किसी से हारता है तो उसके चरित्र पर कीचड़ उचाल देता है. सोशल मीडिया पर महिलाओं को गालियां देने वाले कौन लोग हैं?

श्रुति सेठ, कविता कृष्णन, शर्मिला टैगोर, शोभा डे… आदि को लेकर चारित्रिक अभियान चलाने वाले कौन लोग हैं? ये ऐसे गिरे हुए गलीज संस्कारी हैं कि यदि सुषमा स्वराज भी मोदी या संघ पर उंगली उठा दें तो ये लोग उन जैसी भद्र महिला के साथ भी यही करेंगे. सोनिया गांधी को लेकर अश्लील चुटकुले पिछले कुछ सालों में खूब मजे लेकर शेयर किए गए. गांधी और नेहरू की फोटोशाप्‍ड पिक्‍चर पर इन सिपाहियों ने बड़ी मेहनत की है.

इनकी खासियत देखिए कि ये माताओं बहनों की इज्जत के लिए ही जीते हैं. स्वनामधन्य संस्कारवान होते हैं. ईश्‍वर में जान देने की हद तक भरोसा है. गोमूत्र तक का अपमान नहीं सह सकते. उस संगठन के समर्थक हैं जो 90 साल तक मेहनत करके इनका चरित्र निर्माण कर पाया है. ये भारत मां की अस्मिता के रखवाले हैं. देवी की पूजा करते हैं. गाय माता के लिए सर काटने और कटाने के लिए तैयार हैं.

दलितों, महिलाओं, मुसलमानों से घृणा करने वाले लोगों में एक खास समानता है कि वे सवर्ण हिंदू हैं और आरएसएस समर्थक हैं. ये खास लोगों की खास प्रवृत्ति है जिसके मूल में वर्णव्‍यवस्‍था है. वह वर्णव्‍यवस्‍था जहां दलित और महिलाएं अछूत हैं, कमतर हैं. मुसलमान म्‍लेच्‍छ है. जहां भी स्त्रियों की असहमति का सामना हो, उन्‍हें रंडी बता देते हैं. कुछ नमूने उपर और नीचे दिए गए हैं, देखें.

युवा पत्रकार कृष्णकांत के फेसबुक वॉल से.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

बर्बाद फसल दिखाने आई गरीब महिला को हड़का रहे इस कलेक्टर ने चार जूते मारने लायक काम किया है या नहीं? (देखें वीडियो)

एबीपी न्यूज में स्पेशल करेस्पांडेंट ब्रजेश राजपूत ने एक वीडियो फेसबुक पर शेयर किया है. साथ ही यह भी बताया है कि इस वीडियो के एबीपी न्यूज पर चलने के फौरन बाद वीडियो में दिख रहे खलनायक अफसर के ट्रांसफर का आदेश आ गया. वीडियो में खलनायक अफसर एक गरीब किसान महिला को हड़का रहा है. यह किसान महिला जनसुनवाई में अपनी सूखी फसल दिखाने लाई थी और फसल दिखाते ही अफसर इस महिला पर बिगड़ पड़ा.

पहले पढ़िए ब्रजेश राजपूत ने फेसबुक पर क्या लिखा है और फिर देखिए वो वीडियो जिसे उन्होंने एफबी पर अपनी पोस्ट के साथ शेयर किया है. वीडियो देखकर पक्का आपका खून खौल उठेगा. ऐसे संवेदनहीन अफसरों को क्या चौराहे पर खड़े करके चार जूते नहीं मारने चाहिए ताकि बाकी अफसरों में खौफ पैदा हो सक? इन अफसरों को पद और पैसा आखिर मिलता किस बात के लिए है? कि ये आम जन से बदतमीजी करें? जब भी कोई अफसर इस किस्म की बेहूदा हरकत करे, फौरन उसे मोबाइल में शूट कर ऐसे ही पब्लिक डोमेन में लाने की जरूरत है ताकि इनके भीतर तनिक तो डर कायम रहे. -एडिटर, भड़ास4मीडिया


Brajesh Rajput : कैमरा लोकतंत्र का सच्चा प्रहरी है। भले ही वो मोबाइल कैमरा क्यों ना हो। ये हैं भिंड के पूर्व कलेक्टर मधुकर आग्नेय जो जनसुनवाई में सूखी फ़सल दिखाने आयी महिला पर इस बुरी तरह से बिगड़े कि एमपी में संवेदनशील सरकार के दावों की क़लई खुल गयी। हैरान करने वाला ये छोटा सा वीडियो एबीपी न्यूज़ ने 10 बजे हेडलाइन बनाकर दिखाना शुरू किया तो चार बजे कलेक्टर साहब की जिले से रवानगी के आदेश आ गये। ज़िम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की ऐसी हरकत दिल दुखा देती है। चैनल और कैमरा सलामत रहे सदियों तक।

वीडियो देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें:Badtameez Afsar

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

कोतवाली प्रभारी ने न्यूज चैनल के रिपोर्टर को लात मारी

उरई (जालौन) : न्यूज24 के रिपोर्टर अखिलेश कुमार सिंह ने जिला कोतवाली मुख्यालय में अपने साथ कोतवाली प्रभारी द्वारा की गई बदसलूकी की शिकायत पुलिस उच्चाधिकारियों से की है। उन्होंने बताया है कि बेवजह गुस्से में कोतवाली प्रभारी ने सबके सामने उन्हें लात मारी।  

उन्होंने बताया है कि पिछले दिनों वह खबरों के संकलन के सिलसिले में कोतवाली पहुंचे तो उन्होंने कोतवाल दयाशंकर सिंह ने फर्जी मुकदमे में फंसा देने की धमकी दी। रिपोर्टर के मुताबिक कोतवाली प्रभारी ने उन्हें धमकाते हुए कहा कि तुम्हें दो सगी बहनों के अपहरण के मामले में फंसा दूंगा। 

इसके बाद कोतवाली प्रभारी ने उन पर लात भी चलाई। उनका रौद्र रूप देखकर कोतवाली में मौजूद अन्य फरियादी वहां से खिसक लिए। अखिलेश कुमार सिंह ने अपने साथ हुई इस घटना की शिकायत डीआईजी, आईजी, एसपी एवं उच्चाधिकारियों से करते हुए दया शंकर सिंह के स्थान पर किसी अन्य प्रभारी की तैनाती की मांग की है। 

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

धार्मिक चैनल के सीओओ ने एंकर के साथ ऋषिकेश के होटल में की छेड़छाड़, मामला दबा दिया गया

मानव जीवन को दिशा देने हेतु अध्यात्म, आस्था, धर्म, साधना आदि का ज्ञान पहचान कराने वाले धार्मिक न्यूज चैनलों के अंदर खुद कितनी अनैतिकता-अधार्मिकता है, इसे कोई मीडिया के बाहर का सीधा सच्चा आदमी जान जाए तो उसे पूरे धर्म से ही घृणा-वितृष्णा हो जाए. बाबाओं से पैसे लेकर उनके भाषण प्रवचन प्रसारित करने वाले धार्मिक चैनलों में से एक चैनल के सीओओ पर आरोप लगा है कि उन्होंने अपने सहकर्मी के साथ यौन दुर्व्यवहार किया है. हालांकि पीड़िता खुलकर सामने नहीं आ पा रही है लेकिन उसके साथ काम करने वाली महिलाओं का कहना है कि पीड़िता एंकर के पद पर है और उसने चैनल के अंदर कंप्लेन की हुई है.

पर चैनल के लोगों का कहना है कि सीओओ इतना पावरफुल है और प्रबंधन का खास है कि उसके खिलाफ बोर्ड मीटिंग में कोई एक्शन नहीं होता. वह हमेशा साफ पाक बरी होकर बाहर निकल जाता है क्योंकि उस पर मालिक मेहरबान हैं. चैनल के सीओओ से पीड़ित एंकर ने दिल्ली महिला सेल में शिकायत की धमकी दी है. चर्चा है कि पीड़ित एंकर का मनुहार कर मुंह बंद रखने को मजबूर कर दिया गया है. पीड़ित एंकर और चैनल के सीओओ के साथ-साथ की तस्वीरें इनके फेसबुक एकाउंट पर भी हैं जिनसे पता चलता है कि दोनों काफी करीबी हैं. पर एंकर को यह अंदाजा नहीं था कि इस करीबी का मतलब सीओओ कुछ और निकालता है.

सूत्रों के मुताबिक पीड़िता एंकर अपने सीओओ के साथ एक शूट पर ऋषिकेश गई हुई थी. वहां होटल के रूप में एंकर के साथ सीओओ ने बदतमीजी की. ये सीओओ महिलाओं से दुर्व्यवहार के मामले में कुख्यात है. कभी ये लड़कियों को उल्टे सीधे एसएमएस भेज भेज कर परेशान करता है तो कभी उनके साथ अश्लील हरकत करके. इन्हीं हरकतों के कारण पिछले दिनों चैनल से एक लड़की ने इस्तीफा दे दिया. ताजे घटनाक्रम की पीड़िता इतनी डरी हुई है कि वह बाहर कंप्लेन करने की हिम्मत नहीं कर पा रही है.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

अगर ‘चूतिया’, ‘हरामी’ और ‘हरामखोर’ जैसी गालियां इस्तेमाल करते हैं तो आप दलित-ओबीसी विरोधी हैं!

Pramod Ranjan : आप अपने विरोधियों के लिए किस प्रकार की गालियों का इस्‍तेमाल करते हैं? ‘हंस’ के संपादक राजेंद्र यादव व अनेक स्‍त्रीवादी इस मसले को उठाते रहे हैं कि अधिकांश गालियां स्‍त्री यौनांग से संबंधित हैं। पुरूष एक-दूसरे को गाली देते हैं, लेकिन वे वास्‍तव में स्‍त्री को अपमानित करते हैं। लेकिन जो इनसे बची हुई गालियां हैं, वे क्‍या हैं? ‘चूतिया’, ‘हरामी’, ‘हरामखोर’..आदि। क्‍या आप जानते हैं कि ये भारत की दलित, ओबीसी जातियों के नाम हैं या उन नामों से बनाये गये शब्‍द हैं। इनमें से अनेक मुसलमानों की जातियां हैं।

आप कितनी आसानी से कह देते हैं – ‘चोरी-चमारी’ मत करो। यह कहते हुए आप ‘चोरी’ को एक जाति विशेष से जोड देते हैं। ‘चूतिया’ जाति मुख्‍य रूप से आसाम की है। हलालखोर/ हरामखोर बिहार की जाति है। यहां देखिए असम की ओबीसी सेंट्रल लिस्‍ट में ‘चूतिया जाति’ का नाम : http://ncbc.nic.in/Writereaddata/cl/assam.pdf

अहो! कितनी दमदार ‘संस्‍कृति’ है आपकी और कितना प्‍यारा होगा इस संस्‍कृति पर आधारित आपका ‘सांस्‍कृतिक राष्‍ट्रवाद’?

फारवर्ड प्रेस मैग्जीन के संपादक प्रमोद रंजन के फेसबुक वॉल से.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

यूपी के जंगल राज का नमूना देखिए… टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने पर दबाव, गाली और धमकी

Shashank Pandey Roushu : 15 मिनट पहले की घटना। भूतपूर्व विधायक हंड़िया इलाहबाद के पुत्र आजकल उनकी जगह पर विधायक हो गए हैं, उनकी आकस्मिक मृत्यु के कारण। अभी UP STATE BRIDGE CORP. LTD. ने बैरागिया नाला पर सेतु बनाने हेतु टेंडर निकल है। इस टेंडर में मैं भी भाग ले रहा हूँ और विधायक जी के बड़े भाई रिंकू भी। कल उन लोगों ने मुझ पर एवं सभी अन्य टेंडर फॉर्म लेने वालों के ऊपर दबाव बनाकर बाकी सबके फॉर्म ज़बरदस्ती ले लिए परंतु मैंने अपना फॉर्म उन्हें नहीं दिया और मैंने टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने के लिए फॉर्म भर कर जमा भी करवा दिया है।

अभी 9 बजे के लगभग उनके चेले मेरे घर के सामने आये और मेरे ऊपर अपशब्द भी कहे। उनके सारे आदमी असलहों से लैस थे। कल शाम 5 बजे टेंडर खुलेगा और मुझे पूर्ण विश्वास है की इसके बाद इनके गुंडे मेरे घर पर धावा बोलेंगे। अपने सभी मित्रों से मेरा ये सवाल है कि जनतंत्र में क्या मुझे इतना भी हक़ नहीं मिला है की मैं स्वतंत्र होकर कार्य कर सकूँ? मुझे आपलोगों का सुझाव चाहिए कि क्या मुझे गीदड़ की तरह डरकर अपना फॉर्म वापस ले लेने चाहिए या फिर एक हिंदुस्तानी की तरह उनसे डटकर मुकाबला करना चाहिए?

मैं अपने कुछ प्रशासनिक एवं पत्रकार मित्रों से ये भी जानना चाहता हूँ की क्या आप लोग किसी तरह से मेरी सहायता में आगे आ सकते हैं?

जय हिन्द!

इलाहाबाद निवासी शंकर पांडेय रोशू के फेसबुक वॉल से. उपरोक्त स्टेटस पर इलाहाबाद की प्रगतिशील महिला सुमन सिंह का कमेंट कुछ यूं है…

Suman Singh : हमारे पारिवारिक मित्र हैं Shashank Pandey Roushu। अभी यहाँ फेसबुक पर इनकी पीड़ा/ दुःख/समस्या को पढ़ा। आहत तो हूँ.. क्योंकि इनको मै जानती हूँ। पर अभ्यस्त भी हूँ ऐसी घटनाओं से.. जहां हम सब लम्पट सत्ताधारियों के खौफ के आगे बेबस हो जाते हैं। मुझे इनके लिए चिंता भी हो रही है, की ये सुरक्षित रहें.. क्या इनकी कोई मदद हो सकती है ? कुछ लोगों की वाल तक ये बात पहुंचाना चाहती हूँ जिससे शायद बहुत से लोग ये बात जान सकें — Yashwant Singh Samar Anarya Mohammad Anas Akbar Rizvi Sandhya Navodita Rahul Pandey Himanshu Pandey Krishna Kant Pankaj Mishra (टैग के लिए मुआफ़ी सहित)

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

6 मिनट में 41 गाली बकने वाला BJP का MLA

..प्रह्लाद गुंजल को नहीं जानते? ये वैसे ही है जैसे पंखा चलाते हैं और पीएसपीए नहीं जानते। बीजेपी के पीएसपीओ। ऊपर से पार्टी सत्ता में है। तो दिसंबर की सर्दी में भी पारा जून की दोपहरी वाला था। सरोकार, संस्कार, धर्म, पूजा, वंदना, आराधना वाली भारतीय जनता पार्टी के विधायक श्री प्रह्लाद गुंजल मां-बहन-बेटियों के साथ ऐसे धारा प्रवाह संबंध बनाए जा रहे थे जैसे सत्यनारायण की कंठस्थ कथा का सस्वर वाचन कर रहे हों। ..

..मुंह मत बिचकाइए। गाली, धमकी, गलीजपन ये सब तो पीएम मोदी वाली पार्टी के विधायक जी ने अमृत समझकर दिल ही में उतार लिया था। एहसान है जो अमरत्व का जल फोकट में सीएमएचओ पर उलीचे जा रहे थे। ऐसा तेज तो पवन पुत्र हनुमान के अंदर भी न रहा होगा। सुमेरू पर्वत उठा लिया था तो क्या हुआ। 6 मिनट में 41 गाली..आप रिकॉर्ड पता कर लीजिएगा। माइकल शुमाकर इतनी तेजी से फॉर्मूला वन की कार नहीं दौड़ा पाता होगा।

..समय समय की बात है। नेता अब विद्वान नहीं पहलवान होना चाहता है। हर जगह की यही कहानी है। सिनेमा के डायलॉग पर हंसी न आए तो ये बात सोलह आने सच है कि थप्पड़ से डर नहीं लगता साहब विधायक से लगता है।..

..भतीजे तो तमाम हुए दुनिया में। आगे भी होंगे। द्वापर में धर्मराज युधिष्ठिर के भतीजे हुए। त्रेता में भरत-शत्रुघ्न के भतीजे हुए। द्रोणाचार्य और यागवल्क्य जैसे मुनियों के भतीजों का भी उल्लेख मिलता है। लेकिन ऐसा भतीजा किसी का नहीं हुआ जैसा समाजवादी पार्टी के विधायक बृजलाल सोनकर का हुआ। सत्ताधारी पार्टी का विधायक का भतीजा होना सारे भतीजो से खास होता है। विधायक का भतीजा भतीजा नहीं होता भगवान हो जाता है। और जैसे भगवान पर कोई सवाल नहीं उठा सकता वैसे विधायक जी के भतीजे पर भी कोई नहीं उठा सकता। ..

न्यूज24 पर रात 7.57 बजे प्रसारित रिपोर्टों के कुछ हिस्से. साभार, नवीन कुमार के फेसबुक वॉल से.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

पहले यश मेहता को गालियां दी, नौकरी से निकाला गया तो भड़ास पर खबर छपने के कारण यशवंत को गालियां दे रहा

Yashwant Singh :  कल रात एक बंदे ने मुझे फोन किया और बिना नाम पहचान बताए धाराप्रवाह माकानाका करने लगा यानि गालियां बकने लगा. खूब दारू पिए हुए लग रहा था. उससे मैं पूछता रह गया कि भाई साब आप कौन हैं, क्या समस्या है.. पर वो सिवाय गाली बकने के दूसरा कोई काम नहीं कर रहा था, न सुन रहा था, न सवालों का जवाब दे रहा था. वह सिर्फ गालियां बकता जा रहा था. फोन कटा तो मैं हंसा. उस बंदे का नंबर फेसबुक पर डाला और फेसबुकिया साथियों से पता लगाने को कहा कि ये कौन शख्स है, जरा काल कर के इससे पूछें.

Divya Ranjan

Divya Ranjan

Divya Ranjan FB Profile


एफबी वाले कितने मित्रों ने पूछा, ये तो नहीं पता लेकिन ढेर सारे साथियों ने उसी के अंदाज में उस गालीबाज शख्स को फोन कर उसकी धुलाई की. मीडिया और पुलिस के कई साथियों को इसका नंबर देकर पता लगाने को कह दिया कि इस नंबर से गाली बकने वाले का नाम पता लोकेशन आदि सर्विलांस के जरिए पता करें व बताएं. सुबह होते-होते सब पता चल गया. आज सुबह मालूम हुआ कि ये शख्स ‘दिव्य रंजन’ नामक प्राणी है जो कभी ‘4रीयल न्यूज’ चैनल में पीसीआर में सेवारत हुआ करता था. वहां के तत्कालीन सीईओ यश मेहता के साथ ऐसी ही ओछी व गाली-गलौज वाली हरकत इसने की थी. तब यश मेहता ने इसके खिलाफ नोएडा में एफआईआर दर्ज कराई और नौकरी से बाहर कर दिया. सीईओ को फोन पर गरियाने, धमकाने आदि से संबंधित एफआईआर की खबर मय दस्तावेज भड़ास पर छपी थी. ये बात इसी साल अप्रैल की है. संबंधित खबर का लिंक ये http://goo.gl/Cq4ozm है, इस पर क्लिक करें और पढ़ें.

भड़ास पर छपी इसी खबर के कारण वह बंदा चिढ़ा हुआ था और करीब चार महीने बाद उसकी चिढ़न कल रात अचानक सतह पर आ गई. उसने मुझे बतौर खलनायक अपने मन-मस्तिष्क में पेंट किया और दिल में छुपा रखी महीनों पुरानी खुन्नस को सामने ले आया. इसी क्रम में उसने नशे की अधिकता में फोन मिलाया और गालियां बकने लगा. हालांकि भड़ास पर छपी खबर में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसका कोई कम अक्ल पत्रकार भी बुरा माने. अगर किसी के खिलाफ कोई एफआईआर हुई है तो उस एफआईआर की कापी के साथ खबर छापने में कोई गलत बात नहीं. यह एक रुटीन किस्म की खबर है. इसमें आहत करने होने जैसी कोई बात ही नहीं है. पर इस खबर के कारण अगर खबर में उल्लखित कोई आरोपी खार खा जाए, कुंठित हो जाए, रिएक्ट करने लगे और दुबारा वही हरकत करे जिसके कारण वह खबर का हिस्सा बना था तो उसे पत्रकार हरगिज नहीं माना जा सकता. वह प्रोफेशनल क्रिमिनल माइंडसेट रखने वाला शख्स माना जाएगा.

ऐसे लोगों का क्या इलाज है? अब सुबह से इस प्राणी को फोन कर रहा हूं तो यह फोन नहीं उठा रहा. ऐसे लोग रात में दारू की उर्जा में स्कोर सेटल करने बैठते हैं. वैसे, सच कहूं तो कुछ-कुछ मेरी तरह का लगता है ये दिव्य रंजन नामक प्राणी. बस एक बड़ा फर्क यह है कि अपन ने कभी नाम पहचान छिपाकर किसी से बदतमीजी नहीं की. जिससे भी बुरी या खरी बात कही तो पहले नाम पता परचिय बताया उसके बाद सुनाया या समझाया. दूसरी बात ये कि अपन कभी छोटे मोटे मसलों को लेकर रिएक्ट नहीं हुए. ज्यादातर मामलों को इगनोर किया, चित्त से देहि उतार के अंदाज में. फिर भी, मैंने भी मदिरापान करके ढेर सारे कांड और कुकृत्य किए हैं, इससे इनकार नहीं. पर जो नाम पहचान छुपाकर और बिना कारण बताए गाली गलौज करने लगे उसे मैं ओछा व महाकुंठित प्राणी मानूंगा. अबे दम है तो पहले नाम पता बताओ, फिर जो कहना है कहो. वैसे मदिरा मस्त विभाग में एक ऐसा रोग है, जो महाकुंठित लोगों को हो जाया करता है. वो ये कि ऐसे लोग पीते ही अथाह उर्जा से खुद को लैस पाते हैं और इसी ताव में कुछ ही देर में विवेक शून्य हो जाते हैं. फिर इन्हें एहसास नहीं होता कि ये क्या कह रहे, क्या कर रहे.

ऐसे लोगों से जब आप सुबह बात करने की कोशिश करेंगे तो ये बात नहीं करेंगे, आंखें नीची किए रहेंगे, आमना-सामना करने से कतराएंगे. यह एल्कोहलिक एब्यूज और डिसार्डर भारत में काफी कामन है. ऐसे मेंटल स्टेट में ढेर सारे अपराध घटित हो जाया करते हैं. सुबह जब दिव्य रंजन ने फोन नहीं उठाया तो उसे मैसेज करके बता दिया कि तुम्हारा नाम पहचान करतूत सब पता है और तुमने रात में जो किया है वह अक्षम्य है, लेकिन अगर तुम्हें गल्ती का एहसास तनिक भी हो तो क्षमा मांग लो, मेरा दिल बहुत उदाहर है, माफ कर दूंगा. अगर ऐसा नहीं हुआ तो लीगल प्रक्रिया में मुझे जाना पड़ेगा. मजेदार है कि दिव्य रंजन मेरे फेसबुक फ्रेंड भी हैं : उनका फेसबुक प्रोफाइल और तस्वीर यहां दे रहा हूं… मैं हमेशा से मानता रहा हूं कि लिखने पढ़ने वाले बरास्ते पुलिस से बात नहीं करते, कलम के जरिए बात करते हैं. इसी कारण पूरे घटनाक्रम को यहां लिख रहा हूं. अगर पुलिस में जाना होता तो अभी तक एफआईआर करा चुका होता. लेकिन किसी की भी एक दो गल्तियां माफ की जानी चाहिए. खासकर तब जब वह घोड़े पर सवार होकर हवा से बात करने वाली दारूबाजी की स्थिति में हो.

दिव्य रंजन को देर सबेर अपने एल्कोहलिक व्यवहार का इलाजा कराना पड़ेगा अन्यथा ये जीवन में कभी बड़ा गड़बड़ कर बैठेगा जिसके चलते उसे पूरे जीवन पश्चाताप करना होगा. इसलिए मैं दिव्य रंजन से अनुरोध करूंगा कि वह नार्मल स्थितियों में बात करे और अपनी बात रखे. अगर उसे भड़ास से कोई शिकायत है, मेरे से कोई शिकायत है तो लिखकर भेजे, उसके पक्ष को प्रमुखता से भड़ास पर प्रकाशित किया जाएगा. भड़ास इसीलिए जाना जाता है कि यह निष्पक्ष मंच है, एकपक्षीय मंच नहीं है. अगर हम गल्तियां करते हैं तो उससे सबक लेते हैं और उसका परिमार्जन भी प्रकाशित करते हैं. सभी के जीवन में उतार चढ़ाव आता है और सभी हालात से निपटने के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हैं. पर कई साथी मुश्किलों चुनौतियों को फेस करने की जगह नकारात्मक दृष्टिकोण लिए अतीतजीवी हो जाते हैं. इस अतीतजीविता में सिवाय डिप्रेशन, तनाव, कुंठा, विवाद के कुछ मिलता नहीं है. खैर, यहां काफी लंबा भाषण हो गया लेकिन यह सब लिखना जरूरी था ताकि मेरे दिल दिमाग पर कोई बोझ न रहे और सब कुछ ट्रांसपैरेंट रहे. दिव्य रंजन के लिए मेरी शुभकामनाएं हैं. वो खुद को संभालें, सफल हों, यह कामना है. दिव्य रंजन का फेसबुक प्रोफाइल लिंक ये https://www.facebook.com/dibya.ranjan.792 है.

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से. इसी मामले पर यशवंत की शुरुआती पोस्ट यूं है…

Yashwant Singh : +917870199133 Es number se ek aadmi makanaka kar raha hai. Apna naam pehchaan bhi nahi bata raha. Chhup ke gaali dene wala ye shakhs kaun ho sakta hai? Vigyaan aawo kar ke dekhen Aap bhi lagiye zara aur apna feedback dijiye. Ek call aapki taraf se en bhayi saab ko banta hai na.. — feeling excited.

इस पोस्ट पर आए कुछ कमेंट इस प्रकार हैं…

UmaShanker Sharma यह फोन अभी गया बिहार के आस पास कही है बाकी सुबह पुलिस में एक कम्प्लेंट डालिए , बाकी वो सम्भाल लेगी

Yashwant Singh Subah police mei jaana hi hai. Tab tak raat ka aanand liya jaaye..

UmaShanker Sharma कोई फायदा नहीं इन उच्चको के मुह लगने का ये सब अपने माता पिता की ग़लतफ़हमी से इस धरती पे आ गए हैं

Shekhar Subedar Great Yashwant Singh ji .Bilkul banta hai.

Arsh Vats Sahb ye kh rha h danish bol rha hu isko alankaar lga diye h bhut ab phn nhi utha rha msg kar diye h bhut sare or sewa btyo sirSee Translation

Ashok Aggarwal स्विच आफ जा रहा है अब ? शायद फट गई ….

Pradeep Sharma दादा अगर इस नंबर वाले को गाली देने की छुट दे तो में कर सकता हू अपनी जुबान भी जरा साफ़ हो जायेगी…..आज्ञा दे दादा..

Prashant Mishra are good ,bahut din se kisi ki gariyaye nhi hai…

Mukesh Gairola KYa aap bhi hamre ley aise taiyar rhengy ?

Anurag Singh Mob.switched off……

Punit Bhargava bihar-jharkhand circle ka number hai

Gyanesh Tiwari Busy ja raha hai. Shayad kayi log ek saath try kar rahe honge.

Vikash Kumar Gupta ha ha iska no. to switch off ja raha hain

Prashant Mishra shubham v.c. to mila nhi.esi sale ko gariaao……abhi sala off aa rha..See Translation

Pradeep Sharma ऑफ़ आ रहा है नंबर दादा..

Prashant Singh Bhaiya meri awaz unko pasand nahi kutch bol hi nahi rahe. waise mai puri rat jaga hi hu check karta rahungaSee Translation

Gyanesh Tiwari Number on hai. Koi uthaya tha lekin bol nahi raha hai.

Yashwant Singh Jab bhi number on ho, en bhayi saab ko phone kariye. Baaki servilance ki sewaaye lene ki taiyaari hai. Jald hi mahashay ko saamne le aata hu.

Shubham Pandey Hum bhi try kiye. Waisa hi mann mera hai. Frustiyaaye huye hai tab se yaar. Gariyaya jaaye saale ko kuttu smjh ke hi Prashant Mishra

Yashwant Singh Number on hai. Busy bata raha hai. Mai bhi try kar raha. Aap sabhi bhi kariye. Gaali do lekin naam pehchaan ke saath. Chhupa khel pasand nahi aata apan ko.

Pradyumna Yadav एक धक्का गाली-गलौज हुयी है । उसका पूरा खानदान किये है । ससुरा , दांत चियार रहा था । बहुत बेहया लगता है ।

Yashwant Singh Pradyumna Yadav ha ha ha … Wo bhi sochega kaha fas gaya

Ashok Aggarwal मुझे लगता है उसे ये न0 बन्द करना पडेगा वो सोच रहा होगा पडी लकडी ले ली….

Kamal Kumar Singh हम एक ठो उससे बात पूछे, उसके बाद वो भड़क गया। नंबर सदाबहार मनोरंजन का साधन है ये। मजे लिजिए समय समय पर सब।

UmaShanker Sharma यशवंत भाई, गुस्ताखी के लिए अग्रिम माफ़ी उसके लिए क्या है वो तो निर्लज्ज होगा , लेकिन अपने तो निर्लज्ज नहीं न हो सकते अपनी जुबान काहे को कडवी करे इन सब को ट्रेस आउट करने में पुलिस को केवल चार घंटे लगते हैं, और थोड़ी पहचान हो तो ६ घंटे में गिरफ़्तारी भी हो जाती है सामने आएगा तो उसके समझ में आ जायेगा के अगले तीन पीढियों को ये समझाना है के ऐसा काम नहीं करने का

Yashwant L Choudhary मैंने तो कुछ सुना ही नहीं, फोन उठाते ही अपनी पूरी भड़ास निकाल दी, फोन ही काट दिया मेरा

Yashwant Singh UmaShankar Sharma bhayi. Aap se sahmat hu. Kal din mei ho jaayega kaam. Lekin raat mei kyu karen aaraam

Aman Singh Yah sala kisi bikau mediahause ka pilla hoga..

मुकेश कुमार http://www.truecaller.com/in/7870199133

Alpna Chauhan Hahaha…thakur shab k sath prani n ye vyabhar kiya h kya isko chor diya jaye?

Gyanesh Tiwari Diya hoon khaane bhar ko. Saala palat ke gaali bak raha hai. Subah iska ilaaj hona hi chahiye.

Yashwant Singh Mere paas abhi uska phone aaya. Bol raha hai ki dusro se gaali dilwa rahe ho.. es sadachaari pe to mar mar jaawan.

Gyanesh Tiwari Hahahaha… Jo bhi hai, bahut bada wala patit hai…

Syed Shakeel Good hai boss …..kamaal hai ap bhi wo ek apke pochhe laga tha apne ek hajar log uske pichhe laga diye ….uski to maa ka ho gaya saki nakaSee Translation

Abdul Noor Shibli Oo kaisa besharm hai re bhai…..

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें: