ये भाषा है खुद को देश का सबसे बड़ा हिंदी अखबार बताने वाले भास्कर की

-गाली छापा, तो भास्कर रायपुर में दो लोगों की गई नौकरी, मची है खलबली

इन दिनों दैनिक भास्कर रायपुर में जबरदस्त खलबली मची है। एक तरफ दैनिक भास्कर, रायपुर में कोई ज्वाइन नहीं करना चाह रहा है, तो दूसरी तरफ यहां से लोग भी जाते जा रहे हैं। ताजा मामला तो काफी दिलचस्प है। यहां अखबार में अश्लील शब्दों के इस्तेमाल के कारण दो रिपोर्टरों की नौकरी चली गई है। सिटी भास्कर के इंचार्ज तन्मय अग्रवाल और एक रिपोर्टर के खिलाफ सीधे एमडी सुधीर अग्रवाल ने कार्र्वाई की  है। बताया जा रहा है कि 14 अक्टूबर शनिवार के सिटी भास्कर में भास्कर का ही एक आयोजन था, जिसमें यूट्यूबर भुवन को बुलाया गया था। वे अपने कार्यक्रम में यूथ के हिसाब से कुछ गंदे बोलचाल के शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। इन सारे शब्दों को भास्कर में जस का तस छाप दिया गया। ऊपर इसकी शिकायत पहुंची, तो इस पर सीधी कार्रवाई हुई और दोनों को टर्मिनेट करने का आर्डर जारी किया गया।

दैनिक भास्कर में ये क्या छप गया! गई दो पत्रकारों की नौकरी

हैडिंग में कोई शायरी नहीं है। बल्कि हकीकत है दैनिक भास्कर के रायपुर एडिशन की। आनंद पांडे जी के जाने के बाद जब से शिव दुबे को रायपुर भास्कर का संपादक बनाया गया है। भास्कर की छीछालेदर होती जा रही है। ताजा उदाहरण है कि 14 अक्टूबर के सिटी भास्कर में खबर में ऐसे शब्द शामिल हैं जिन पर कड़ी आपत्ति आते ही 2 कर्मियों तन्मय अग्रवाल और सुमन पांडे की विदाई कर दी गई है।

मीडियाकर्मियों ने मांगी छुट्टी तो ‘हिन्दुस्तान’ के संपादक ने दी गालियां!

जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर प्रबंधन से मांगने पर स्वामी भक्त संपादकों को भी बुरा लग रहा है। सबसे ज्यादा हालत खराब हिन्दुस्तान अखबार की है। खबर है कि हिन्दुस्तान अखबार के रांची संस्करण के दो कर्मियों अमित अखौरी और शिवकुमार सिंह ने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन प्रबंधन से मांगा तो यहां के स्वामी भक्त स्थानीय संपादक  दिनेश मिश्रा को इतना बुरा लगा कि उन्होंने पहले मजीठिया कर्मियों को ना सिर्फ बुरा भला कहा बल्कि एक कर्मचारी को तो गालियां भी दीं। बाद में इन दोनों कर्मचारियों ने विरोध किया तो उन्हें मौखिक रूप से स्थानीय संपादक ने कह दिया कि आप दोनों कल से मत आईयेगा।

यूपी में मंत्री ने अफसर को दी मां-बहन की गालियां (सुनें टेप)

यूपी में समाजवार्दी पार्टी की सरकार के मंत्री बेलगाम हैं और पूरा जंगलराज कायम कर रखा है. अखिलेश यादव अपनी इमेज के सहारे इलेक्शन जीतने की तैयारी में लगे हैं लेकिन उनके मंत्री उनकी लुटिया डुबाने के लिए कमर कसे हैं. तभी तो आए दिन मंत्रियों के कारनामों की खबरें सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती है. ताजा मामला सपा सरकार के एक राज्यमंत्री की दबंगई का है.

ताजमहल देखने गई एक रइसजादी ने दी मां-बहिन की गंदी-गंदी गालियां (देखें वीडियो)

Are you safe in TajMahal? see this video आगरा में एक बार फिर से शराब के नशे में धुत शराबी पर्यटकों ने ताजमहल की सुरक्षा में सेंध लगाते हुए ताजमहल के पश्चिमी गेट को तोड़ते हुए अपनी गांड़ी के अंदर ले गए..पर्यटकों की इस दुस्साहिक कदम से रोकने में तैनात ताज सुरक्षा के सिपाहियों की पर्यटकों ने लात घूसों से जमकर पिटाई कर दी…

महिषासुर मुद्दे पर डिबेट करने वाली इस न्यूज एडिटर और एंकर को गंदी गंदी गालियां मिलीं

Kavita Krishnan : A woman news anchor in Kerala gets abusive messages branding her a slut etc for moderating a debate on Mahishasura Diwas. The irony, the irony! They falsely claim Durga was called a slut, then in revenge they brand women who moderate debates on Mahishasura, sluts!

रवीश ने गाली देने वाले से पूछा- क्या तुम ऐसे सवाल अपनी मां से कर लेते हो?

अरविंद, आपने पूछा है कि क्या मेरी मां चाचा के साथ सोई थी। क्या तुम ऐसे सवाल अपनी मां से कर लेते हो?  किस घर्मग्रंथ से तुमने ऐसे सवालों की प्रेरणा पाई है मेरे मित्र। मेरी मां देवी हो या न हो, वो मां है इसीलिए मेरी नज़र कभी उसके सामने उठ भी नहीं सकती। वैसे भी मेरी मां तो भारत माता है। दोस्त मैं माफी चाहता हूं। मैं अपनी भारत माता से ये सवाल नहीं कर सकता। वैसे तुम लोगों की हिन्दी भी बहुत ख़राब है। आप जिस विचारधारा के गुप्त गुंडे हैं, आप भारत माता का अपमान कर सकते हैं लेकिन मैं नहीं कर सकता क्योंकि इससे तो उन शहीदों का अपमान हो जाएगा जिन्होंने भारत माता के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। गुप्त गुंडे इसलिए कहा कि आप ये ट्वीट न तो अपनी बहन को दिखा सकते हैं, न अपनी मां को या पत्नी को। ज़ाहिर है आप कभी सामने नहीं आएंगे। आप अपने पिता को भी नहीं दिखा सकते।

गाली देने वाले को रवीश ने यूं समझाया

मैं भारत माता की संतान हूं। अगर मेरी मां भारत माता नहीं है तो फिर कोई भारत माता नहीं है। फिर कोई मां पूजे जाने के लायक नहीं है। मैंने हमेशा भारत माता को अपनी माता समझा है और अपनी मां में भारत माता देखी है। क्या हम सभी सौ फीसदी माँ भारती की औलाद नहीं हैं? सवाल मेरी मां का भी नहीं है। सवाल उन तमाम मांओं का है जिनके आगे बड़े बड़े नेता देवी कह कह कर गिड़गिड़ाते हैं और बाद में अपने वैचारिक समर्थकों से उन्हीं देवियो को किसी न किसी बहाने गाली पड़वाते हैं। गाली देने वाले की प्रोफाइल गलत हो सकती है मगर नकली नाम के पीछे किसी असली आदमी ने ही तो लिखा होगा। उसकी कुछ सोच होगी। वो किसी संगठन के लिए काम करता होगा। उसकी भलाई चाहता होगा। क्या उस संगठन में मांओं की यही इज़्ज़त है। अगर आप इस प्रवृत्ति को अब भी नहीं समझे और सतर्क नहीं हुए तो बहुत देर हो जाएगी। आखिर कौन लोग हैं जो पिछले कुछ दिनों धड़ाधड़ गालियां दिये जा रहे हैं।

खुद को और बरखा दत्त को सोशल मीडिया पर गाली देने वाले को रवीश कुमार ने अपनी कलम के जरिए दिखाया आइना

आपकी गाली और मेरा वो असहाय अंग

कुछ ही तो वाक्य हैं बाज़ार में
जिन्हें तल कर
जिनसे छन कर
वही बात हर बार निकलती है
बालकनी के बाहर लगी रस्सी पर
जहाँ सूखता है पजामा और तकिये का खोल
वहीं कहीं बीच में वही बात लटकती है
जिन्हें तल कर
जिनसे छनकर
वही बात हर बार निकलती है
बातों से घेर कर मारने के लिए
बातों की सेना बनाई गई है
बात के सामने बात खड़ी है
बात के समर्थक हैं और बात के विरोधी
हर बात को उसी बात पर लाने के लिए
कुछ ही तो वाक्य हैं बाज़ार में
जिन्हें तल कर
जिनसे छनकर
वही बात हर बात निकलती है
लोग कम हैं और बातें भी कम हैं
कहे को ही कहा जा रहा है
सुने को ही सुनाया जा रहा है
एक ही बात को बार बार खटाया जा रहा है
रगड़ खाते खाते बात अब बात के बल पड़ने लगे हैं
शोर का सन्नाटा है, तमाचे को तमंचा बताने लगे है
अंदाज़ के नाम पर नज़रअंदाज़ हो रहे हैं हम सब
कुछ ही तो वाक्य है बाज़ार में
जिन्हें तल कर
जिनसे छनकर
वही बात हर बार निकलती है ।
बात हमारे बेहूदा होने के प्रमाण हैं
वात रोग से ग्रस्त है, बाबासीर हो गया है बातों को
बकैती अब ठाकुरों की नई लठैती है
कथा से दंतकथा में बदलने की किटकिटाहट है
चुप रहिए, फिर से उसी बात के आने की आहट है।

खबर छपने से बौराए फर्रूखाबाद के प्रभारी सूचनाधिकारी पूरन चंद्र मिश्रा ने पत्रकार आनंद भान शाक्य को दी जमकर गालियां (सुनें टेप)

: गुंडों को लेकर रात में पत्रकार के घर पर बोला धावा : यूपी के जंगल राज में सबसे ज्यादा बेलगाम पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी हैं. भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह ने बारिश में बिना वाइपर लगे बस चलाने की लिखित शिकायत गाजीपुर जिले में पदस्थ रोडवेज अधिकारी से की तो अधिकारी ने बदतमीजी करते हुए अपने नेतृत्व में रोडवेजकर्मियों के साथ हमला बोल दिया. इस मामले में अधिकारी के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर 36 घंटे बाद तब दर्ज की जब लखनऊ से एफआईआर दर्ज किए जाने के लिए दबाव डलवाया गया. यह मामला अभी पुराना भी नहीं पड़ा था कि यूपी के फर्रूखाबाद जिले से एक नया मामला सामने आ गया है. यहां के प्रभारी सूचनाधिकारी पूरन चंद्र मिश्रा ने एक पत्रकार को फोन कर धाराप्रवाह गंदी गंदी गालियां दीं.

श्रुति सेठ, कविता कृष्णन, शर्मिला टैगोर, शोभा डे आदि को रंडी, वेश्या, चरित्रहीन कहने वाले ये लोग कौन हैं?

Krishna Kant : भारतीय सवर्ण मर्द के पास महिला की बात का जवाब नहीं होता तो तुरंत चरित्र हनन पर उतर आता है. यह पाखंडी समाज है इसलिए किसी का भी चरित्र हनन बहुत कारगर हथियार है. प्राय: पति जब पत्नी से हारता है तो लांछन लगा देता है. कोई किसी से हारता है तो उसके चरित्र पर कीचड़ उचाल देता है. सोशल मीडिया पर महिलाओं को गालियां देने वाले कौन लोग हैं?

बर्बाद फसल दिखाने आई गरीब महिला को हड़का रहे इस कलेक्टर ने चार जूते मारने लायक काम किया है या नहीं? (देखें वीडियो)

एबीपी न्यूज में स्पेशल करेस्पांडेंट ब्रजेश राजपूत ने एक वीडियो फेसबुक पर शेयर किया है. साथ ही यह भी बताया है कि इस वीडियो के एबीपी न्यूज पर चलने के फौरन बाद वीडियो में दिख रहे खलनायक अफसर के ट्रांसफर का आदेश आ गया. वीडियो में खलनायक अफसर एक गरीब किसान महिला को हड़का रहा है. यह किसान महिला जनसुनवाई में अपनी सूखी फसल दिखाने लाई थी और फसल दिखाते ही अफसर इस महिला पर बिगड़ पड़ा.

कोतवाली प्रभारी ने न्यूज चैनल के रिपोर्टर को लात मारी

उरई (जालौन) : न्यूज24 के रिपोर्टर अखिलेश कुमार सिंह ने जिला कोतवाली मुख्यालय में अपने साथ कोतवाली प्रभारी द्वारा की गई बदसलूकी की शिकायत पुलिस उच्चाधिकारियों से की है। उन्होंने बताया है कि बेवजह गुस्से में कोतवाली प्रभारी ने सबके सामने उन्हें लात मारी।  

धार्मिक चैनल के सीओओ ने एंकर के साथ ऋषिकेश के होटल में की छेड़छाड़, मामला दबा दिया गया

मानव जीवन को दिशा देने हेतु अध्यात्म, आस्था, धर्म, साधना आदि का ज्ञान पहचान कराने वाले धार्मिक न्यूज चैनलों के अंदर खुद कितनी अनैतिकता-अधार्मिकता है, इसे कोई मीडिया के बाहर का सीधा सच्चा आदमी जान जाए तो उसे पूरे धर्म से ही घृणा-वितृष्णा हो जाए. बाबाओं से पैसे लेकर उनके भाषण प्रवचन प्रसारित करने वाले धार्मिक चैनलों में से एक चैनल के सीओओ पर आरोप लगा है कि उन्होंने अपने सहकर्मी के साथ यौन दुर्व्यवहार किया है. हालांकि पीड़िता खुलकर सामने नहीं आ पा रही है लेकिन उसके साथ काम करने वाली महिलाओं का कहना है कि पीड़िता एंकर के पद पर है और उसने चैनल के अंदर कंप्लेन की हुई है.

अगर इन गालियों का इस्तेमाल करते हैं तो आप दलित-ओबीसी विरोधी हैं!

Pramod Ranjan : आप अपने विरोधियों के लिए किस प्रकार की गालियों का इस्‍तेमाल करते हैं? ‘हंस’ के संपादक राजेंद्र यादव व अनेक स्‍त्रीवादी इस मसले को उठाते रहे हैं कि अधिकांश गालियां स्‍त्री यौनांग से संबंधित हैं। पुरूष एक-दूसरे को गाली देते हैं, लेकिन वे वास्‍तव में स्‍त्री को अपमानित करते हैं। लेकिन जो इनसे बची हुई गालियां हैं, वे क्‍या हैं? ‘चूतिया’, ‘हरामी’, ‘हरामखोर’..आदि। क्‍या आप जानते हैं कि ये भारत की दलित, ओबीसी जातियों के नाम हैं या उन नामों से बनाये गये शब्‍द हैं। इनमें से अनेक मुसलमानों की जातियां हैं।

यूपी के जंगल राज का नमूना देखिए… टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने पर दबाव, गाली और धमकी

Shashank Pandey Roushu : 15 मिनट पहले की घटना। भूतपूर्व विधायक हंड़िया इलाहबाद के पुत्र आजकल उनकी जगह पर विधायक हो गए हैं, उनकी आकस्मिक मृत्यु के कारण। अभी UP STATE BRIDGE CORP. LTD. ने बैरागिया नाला पर सेतु बनाने हेतु टेंडर निकल है। इस टेंडर में मैं भी भाग ले रहा हूँ और विधायक जी के बड़े भाई रिंकू भी। कल उन लोगों ने मुझ पर एवं सभी अन्य टेंडर फॉर्म लेने वालों के ऊपर दबाव बनाकर बाकी सबके फॉर्म ज़बरदस्ती ले लिए परंतु मैंने अपना फॉर्म उन्हें नहीं दिया और मैंने टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने के लिए फॉर्म भर कर जमा भी करवा दिया है।

6 मिनट में 41 गाली बकने वाला BJP का MLA

..प्रह्लाद गुंजल को नहीं जानते? ये वैसे ही है जैसे पंखा चलाते हैं और पीएसपीए नहीं जानते। बीजेपी के पीएसपीओ। ऊपर से पार्टी सत्ता में है। तो दिसंबर की सर्दी में भी पारा जून की दोपहरी वाला था। सरोकार, संस्कार, धर्म, पूजा, वंदना, आराधना वाली भारतीय जनता पार्टी के विधायक श्री प्रह्लाद गुंजल मां-बहन-बेटियों के साथ ऐसे धारा प्रवाह संबंध बनाए जा रहे थे जैसे सत्यनारायण की कंठस्थ कथा का सस्वर वाचन कर रहे हों। ..

पहले यश मेहता को गालियां दी, नौकरी से निकाला गया तो भड़ास पर खबर छपने के कारण यशवंत को गालियां दे रहा

Yashwant Singh :  कल रात एक बंदे ने मुझे फोन किया और बिना नाम पहचान बताए धाराप्रवाह माकानाका करने लगा यानि गालियां बकने लगा. खूब दारू पिए हुए लग रहा था. उससे मैं पूछता रह गया कि भाई साब आप कौन हैं, क्या समस्या है.. पर वो सिवाय गाली बकने के दूसरा कोई काम नहीं कर रहा था, न सुन रहा था, न सवालों का जवाब दे रहा था. वह सिर्फ गालियां बकता जा रहा था. फोन कटा तो मैं हंसा. उस बंदे का नंबर फेसबुक पर डाला और फेसबुकिया साथियों से पता लगाने को कहा कि ये कौन शख्स है, जरा काल कर के इससे पूछें.

Divya Ranjan