पढ़िए अंबानी के चैनल द्वारा भेजे गए लीगल नोटिस का भड़ासी जवाब!

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कोर्ट ने मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर हिन्दुस्तान टाईम्स से वसूली किए जाने पर लगी रोक हटायी

टर्मिनेट कर्मचारी पुरुषोत्तम सिंह के मामले में शोभना भरतिया को लगा तगड़ा झटका, एडवोकेट उमेश शर्मा ने लगातार दो दिन की थी जोरदार बहस….  जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में हिन्दुस्तान टाईम्स की मालकिन शोभना भरतिया को एक बार फिर मंगलवार १९ /२/२०१८ को दिल्ली उच्च न्यायलय में मुंह की खानी पड़ी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने मजीठिया वेज बोर्ड मामले से जुड़े वसूली मामले में लगायी गयी रोक को हटा लिया। इससे हिन्दुस्तान प्रबंधन से मजीठिया वेज बोर्ड मामले में लगाये गये १७ (१) के मामले में वसूली का रास्ता साफ हो गया है।

मजीठिया वेज बोर्ड के लिए अब जो क्लेम करेगा, वह हार हाल में जीतेगा : एडवोकेट उमेश शर्मा

सुप्रीम कोर्ट के टाइम बाउण्ड के निर्णय का स्वागत… जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में माननीय सुप्रीमकोर्ट में देश भर के मीडियाकर्मियों का केस लड़ रहे जाने-माने एडवोकेट उमेश शर्मा ने 13 अक्टूबर को सुप्रीमकोर्ट द्वारा मजीठिया वेज बोर्ड मामले को श्रम न्यायालय और कामगार विभाग द्वारा टाइम बाउंड करने के निर्णय का स्वागत किया है और कहा है कि मजीठिया वेज बोर्ड मामले में क्लेम लगाने वाले मीडियाकर्मियों की हर हाल में जीत तय है, वह एक निश्चित समय के भीतर। इससे एक बार फिर साबित हो गया है कि जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ उनको ही मिलेगा जो वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट की धारा 17(1) के तहत क्लेम लगाएंगे।

एडवोकेट उमेश शर्मा ने मजीठिया के लिए नया क्लेम लगाने वालों के लिए नया फार्मेट जारी किया

अखबार और न्यूज एजेंसियों के मीडियाकर्मियों के वेतन भत्ते प्रमोशन से जुड़े मामले से संबंधित जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में सुप्रीमकोर्ट के एडवोकेट उमेश शर्मा ने माननीय सुप्रीमकोर्ट के १९ जून २०१७ को आये फैसले के बाद उन पत्रकारों तथा गैर-पत्रकारों के लिये एक नया फार्मेट जारी किया है जिन्होंने अभी तक कामगार आयुक्त कार्यालय में अपने बकाये राशि और वेतन वृद्धि के लिये क्लेम नहीं लगाया है।

मजीठिया का लाभ लेने के लिए यह प्रक्रिया अपनाएं

सैकड़ों मीडियाकर्मियों की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ने वाले एडवोकेट उमेश शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ पाने के लिए एक दिशा-निर्देश जारी किया है जिसे फालो करके कोई भी मीडियाकर्मी मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ पा सकते है.

मजीठिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले पर एडवोकेट उमेश शर्मा की ये है टिप्पणी

Umesh Sharma
Advocate, Supreme Court


Analysing the order passed by the Supreme Court in the contempt petitions filed by employees against the newspaper establishments, it is evident that the core issue of wilful contempt, deliberate non-compliance of the directions issued by Supreme Court on 7/2/2014 and subsequent acts done by the newspaper establishments in discouraging the employees from claiming money to wage board benefits has escaped the attention of Supreme Court.

मजीठिया मामले के निपटारे को सुप्रीम कोर्ट द्वारा कमेटी बनाए जाने की उम्मीद : एडवोकेट उमेश शर्मा

मजीठिया मामले में तीन मई को आरपार की उम्मीद…. देश भर के मीडियाकर्मियों के लिये माननीय सुप्रीमकोर्ट में जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ रहे एडवोकट उमेश शर्मा का मानना है कि अखबार मालिकों के खिलाफ चल रही अवमानना मामले की यह लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है और तीन मई को इस मामले में आरपार होने की उम्मीद है। यह पूछे जाने पर कि इस लड़ाई का निष्कर्ष क्या निकलने की उम्मीद है, एडवोकेट उमेश शर्मा का कहना है कि लड़ाई मीडियाकर्मी ही जीतेंगे लेकिन जहां तक मुझे लग रहा है, सुप्रीमकोर्ट इस मामले में एक कमेटी बना सकती है।

माई लॉर्ड ने वरिष्ठ पत्रकार को अवमानना में तिहाड़ भेजा पर मीडिया मालिकों के लिए शुभ मुहुर्त का इंतजार!

…सहारा का होटल न खरीद पाने वाले चेन्नई के एक वरिष्ठ पत्रकार को सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना का दोषी मान कर आनन-फानन में जेल भेज दिया… यह वरिष्ठ पत्रकार गिड़गिड़ाता रहा लेकिन जज नहीं पसीजे… पर मीडिया मालिक तो खुद एक बार सुप्रीम कोर्ट के सामने उपस्थित तक नहीं हुए और कोर्ट को चकरघिन्नी की तरह हिलाडुला कर, कोर्ट से समय पर समय लेकर अघोषित रूप से ललकारने में लगे हैं कि जेल भेज सको तो जरा भेज कर दिखाओ….

एडवोकेट उमेश शर्मा की पत्नी एडवोकेट सुनीता भारद्वाज पर दिल्ली में दिनदहाड़े प्राणघातक हमला

भ्रष्ट बिल्डर-पुलिस गठजोड़ ने मिल-जुल कर कराया हमला… बाराखंभा रोड के न्यू दिल्ली हाउस में है उमेश और सुनीता का आफिस… इसी बिल्डिंग के बिल्डर से सुविधाओं को लेकर चल रहा था विवाद.. पुलिस से गठजोड़ करके बिल्डर ने एडवोकेट सुनीता भारद्वाज पर जानलेवा हमला करा दिया… अपने आफिस में जाने के दौरान किया गया हमला… कपड़े फाड़ डाले और सिर पर गहरा वार किया…

मजीठिया मामले में सुप्रीम कोर्ट में इस वकील के पाला बदलने से हर कोई अचरज में

पहले मीडियाकर्मियों के पक्ष में खड़ा होता था, इस बार मीडिया मालिकों के पक्ष में खड़ा हो गया… कभी सुप्रीम कोर्ट में महाधिवक्ता रह चुके कांग्रेस के मोहन पराशरन के खिलाफ जल्द ही बार एसोसिएशन में शिकायत की जायेगी. शिकायत करेंगे मजीठिया वेज बोर्ड मामले में देश भर के मीडिया कर्मियों की तरफ से सुप्रीमकोर्ट में केस लड़ रहे एडवोकेट उमेश शर्मा.

मजीठिया वेज बोर्ड : सुप्रीम कोर्ट में मीडिया मालिकों की चाल होने लगी कामयाब, अगली डेट 10 जनवरी को

लीगल इश्यू के दावपेंच में पूरे मामले को लंबा खींचने की रणनीति में सफल दोते दिख रहे मीडिया मालिकों के वकील : जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में बुधवार को लीगल इश्यू पर माननीय सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुयी। इस सुनवाई में पहले से ही घोषित एक रणनीति के तहत तय किया गया कि मीडियाकर्मियों की तरफ से सिर्फ एक एडवोकेट श्री कोलीन ही बहस करेंगे और बाकी एडवोकेट उमेश शर्मा, परमानंद पांडेय आदि चुप रहेंगे। बहस के दौरान लीगल इश्यू के मुद्दे को मीडिया मालिकों की ओर से खड़ी एडवोकेट की भारी भरकम टीम ने हाईजैक कर लिया। यह सत्यता स्वीकार किया है माननीय सुप्रीमकोर्ट में मीडियाकर्मियों की तरफ से लड़ाई लड़ रहे एडवोकेट उमेश शर्मा ने।

मजीठिया वेज बोर्ड की सुनवाई में जब लीगल इश्यू की डफली बजने लगेगी तो कमेटी की बात पीछे रह जायेगी : एडवोकेट उमेश शर्मा

सुप्रीमकोर्ट के जाने माने एडवोकेट उमेश शर्मा जब अपने चिर-परिचित अंदाज में सुप्रीम कोर्ट में बहस करते हैं तो अखबार मालिकों की घिग्घी बंध जाती है। मीडियाकर्मियों के पक्ष में पालेकर वेज बोर्ड, बछावत वेज बोर्ड, मणिसाना वेज बोर्ड और अब जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे उमेश शर्मा को लेबर लॉ का काफी अनुभव है। साफगोई से हर बात कहने वाले मृदुभाषी उमेश शर्मा ने मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर देश भर में मीडियाकर्मियों के लिये एक आंदोलन खड़ा किया। हमेशा बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले उमेश शर्मा से आठ नवंबर को जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सुनवाई और उसके बाद आये आर्डर पर बात किया मुंबई के निर्भीक पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट शशिकांत सिंह ने। प्रस्तुत है बातचीत के मुख्य अंश…

मजीठिया वेज बोर्ड : सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी बनाने का निर्देश दिया

सही दिशा में जा रही है जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सुनवाई :  देश भर के मीडियाकर्मियों के वेतन एरियर तथा प्रमोशन से जुड़े जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में माननीय सुप्रीमकोर्ट ने एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी एसआईटी बनाने का निर्देश दिया है। इस एसआईटी को लीड करेंगे हाईकोर्ट के एक रिटायर जज। आखिर ये एसआईटी के गठन के बाद जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई किस दिशा में जा रही है? देश भर के मीडियाकर्मियों में इस बात को लेकर सवाल उठ रहा है। तमाम शंकाओं के समाधान के लिए मैंने इस मामले में पत्रकारों की तरफ से लड़ाई लड़ रहे एडवोकेट उमेश शर्मा और परमानंद पांडे जी से बात की।

मजीठिया वेज बोर्ड मामले में सुप्रीम कोर्ट में कल हुई सुनवाई का विवरण जानिए एडवोकेट उमेश शर्मा से

जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में देश भर के मीडियाकर्मियों की तरफ से सुप्रीमकोर्ट में लड़ाई लड़ रहे एडवोकेट उमेश शर्मा ने अपने फेसबुक वॉल पर मजीठिया वेज बोर्ड की सुनवाई का ब्यौरा साझा किया है, पढ़िए आप भी…

22 साल पहले भी उमेश शर्मा कटवा चुके हैं अखबार मालिक की आरसी

देश भर के मीडियाकर्मियों के अधिकार से जुड़े मजीठिया वेज बोर्ड मामले की माननीय सुप्रीमकोर्ट में लड़ाई लड़ रहे एडवोकेट उमेश शर्मा 22 साल पहले भी एक समाचार पत्र के मालिक की आरसी कटवा चुके हैं। ये मामला 1994 का है और अखबार का नाम था संडे मेल। संडे मेल अखबार में 300 से 400 कर्मचारियों का पैसा फंस गया था और इसका मालिक अचानक कार्यालय का तालाबंद कर लापता हो गया था। मालिक का नाम संजय डालमिया था। पैसा फंसने के बाद कुछ मीडियाकर्मी सुप्रीमकोर्ट के एडवोकेट उमेश शर्मा के पास पहुंचे।

ट्रांसफर-टर्मिनेशन से कानूनी बचाव के लिए एडवोकेट उमेश शर्मा ने जारी किया फार्मेट

इसे सभी लोग अपने अनुसार सुधार / संशोधित कर संबंधित श्रम अधिकारी को दें….

मजीठिया वेज बोर्ड मामले में माननीय सुप्रीमकोर्ट में देश भर के पत्रकारों के पक्ष में लड़ाई लड़ रहे एडवोकेट उमेश शर्मा ने आज एक और फार्मेट जारी किया है। जिन मीडिया कर्मियों ने मजीठिया वेज बोर्ड के तहत प्रबंधन के खिलाफ लेबर विभाग में 17 (1) का क्लेम लगाया है, वे सभी लोग इस फार्मेट को भरकर तत्काल अपने-अपने लेबर विभाग में जमा करा दें। इस फार्मेट के बाद अगर आपका प्रबंधन आपका ट्रांसफर या टर्मिनेशन या सस्पेंशन करता है तो आगे की कानूनी लड़ाई में यह काम आयेगा। यही नहीं, इससे मीडियाकर्मियों का प्रबंधन द्वारा किये जा रहे उत्पीड़न पर भी काफी हद तक रोक लगेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने जागरण के मालिकों महेंद्र मोहन और संजय गुप्ता को तलब किया

मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू न करने और सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानून, न्याय, संविधान तक की भावनाओं की अनदेखी करने से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने आज दैनिक जागरण के मालिकों महेंद्र मोहन गुप्ता और संजय गुप्ता को अगली सुनवाई पर, जो कि 25 अक्टूबर को होगी, कोर्ट में तलब किया है. आज सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू न किए जाने को लेकर सैकड़ों मीडियाकर्मियों द्वारा दायर मानहानि याचिका पर सुनवाई हुई.

जस्टिस काटजू को एक बिहारी का खुला पत्र

Mr Justice Katju

I am a lawyer hailing from Bihar and practicing in Delhi High Court, Supreme Court of India. I have been closely following your musings earlier in the courts now on social media. I am piqued to write this open letter in response to your offer to Pakistan to take Bihar alongwith Kashmir as a package deal. Sir, you have not only undermined the sovereignty of our nation but also committed the offense of Sedition attracting punishment. May I reproduce the Section of IPC dealing with Sedition for your ready reference :

मजीठिया : एडवोकेट उमेश शर्मा जी ने जारी किया क्लेम फार्मेट, जो साथी बाकी हैं वो जरूर भरें

सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया वेज बोर्ड मामले में देश भर के पत्रकारों का केस लड़ रहे एडवोकेट उमेश शर्मा ने एक मैसेज के साथ 17(1) का क्लेम फार्मेट जारी किया है। एडवोकेट उमेश शर्मा ने कहा कि देश भर के सभी साथी इस क्लेम फ़ार्म को भरकर जरूर लेबर कमिश्नर कार्यालय में जमा कर दें। ये सिर्फ वही साथी भरेंगे जिन्होंने 17(1) के तहत अब तक लेबर विभाग में क्लेम नहीं लगाया है। इस क्लेम फार्मेट को लेबर कमिश्नर के कार्यालय में भरकर जमा करना है और रिसीव कराकर एक प्रति अपने पास रखना है।

मजीठिया : सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के लेबर कमिश्नर के खिलाफ जारी किया वारंट

उत्तर प्रदेश के लेबर कमिश्नर को 6 हफ्ते में दिलाना होगा मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ, 4 अक्टूबर को महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान, झारखंड और दिल्ली के लेबर कमिश्नर को हाजिर होने का आदेश

पत्रकारों के वेतन से संबंधित फिलवक्त देश के सर्वाधिक चर्चित आयोग मजीठिया वेज बोर्ड के मामले में आज माननीय सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त कदम उठाया और उत्तराखंड के श्रम आयुक्त को आज के दिन हाजिर रहने की पूर्व सूचना के बावजूद सुप्रीम कोर्ट में अनुपस्थित रहने पर कोर्ट ने वारंट जारी कर दिया है। साथ ही उत्तर प्रदेश के श्रम आयुक्त को साफ कह दिया कि 6 हफ्ते के अंदर मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश को पूरी तरह लागू कराईये। सुप्रीम कोर्ट ने लिखित रूप से तो नहीं बल्कि मौखिक रुप से यह भी कह दिया कि अगर आपने 6 सप्ताह में ऐसा नहीं किया तो जेल भेज दूंगा।

मजीठिया : बेहद सख्त सुप्रीम कोर्ट ने यूपी समेत पांच राज्यों के सचिवों को नए एक्शन रिपोर्ट के साथ 23 अगस्त को तलब किया

मीडिया मालिकों के कदाचार और सरकारी अफसरों की नपुंसकता से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने मजीठिया वेज बोर्ड मामले में अब एक एक को देख लेने का इरादा बना लिया है. अपना रुख बहुत सख्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राज्यों से आई रिपोर्ट को एक साथ एक बार में नहीं देखा जा सकता और इसमें बहुत सारी बातें स्पष्ट भी नहीं है इसलिए अब यूपी समेत पांच राज्यों की समीक्षा होगी और समीक्षा के दौरान संबंधित राज्यों के सचिव सुप्रीम कोर्ट में मौजूद रहेंगे. शुरुआत में नार्थ इस्ट के पांच राज्य हैं जिनके सचिवों को अपनी नवीनतम एक्शन रिपोर्ट तैयार करके 23 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष हाजिर रहने को कहा है.

मजीठिया केस पर Advo Umesh Sharma का वीडियो इंटरव्यू : सुप्रीम कोर्ट ने सबको दे दिया आखिरी सुनहरा मौका, अब नहीं तो कभी नहीं

प्रिंट मीडिया कर्मियों के लिए मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे अवमानना मामले में पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जो जो बातें कहीं, जो जो आदेश दिए, उसको लेकर एडवोकेट उमेश शर्मा से भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह ने विस्तार से बातचीत की. पूरी बातचीत से दो बातें सामने आई. एक तो ये कि अब ये आखिरी मौका सभी मीडियाकर्मियों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दे दिया है कि वे अपना क्लेम यानि मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से उनका कितना वेतन और बकाया आदि बनता है, उसकी लिखित अप्लीकेशन बनाकर संबंधित इलाके के श्रम अधिकारियों / श्रम आफिसों के यहां वाद दायर करें.

मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई से जुड़ी तीन जरूरी जानकारियां, प्रिंट मीडिया का हर कर्मचारी इसे पढ़े और दूसरों को पढ़ाए

पहली जानकारी ये कि सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया वेज बोर्ड प्रकरण की अगली सुनवाई की तारीख तय हो चुकी है. इसी महीने यानि मार्च की चौदह तारीख को सुनवाई की जाएगी. यह जानकारी भड़ास4मीडिया की तरफ से सैकड़ों अवमानना केस दायर करने वाले एडवोकेट उमेश शर्मा ने दी.

मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर जो लोग प्रताड़ित किए जा रहे, वे अपना डिटेल एडवोकेट उमेश शर्मा को भेजें

दिनांक 12/1/2016 को माननीय सुप्रीम कोर्ट के सामने मजीठिया मामले में सुनवाई के दौरान माननिय न्यायाधीशों ने सभी राज्य सरकारों द्वारा दिया गए स्टेटस रिपोर्ट को पत्रकारों के अधिवक्ताओं को सौंपने के लिए कहा. साथ ही मीडिया कर्मचारियों के वकीलों द्वारा कर्मियों को मैनेजमेंट द्वारा प्रताड़ित किए जाने व सादे कागजों पर दस्तखत कराने संबंधी कही गई बातों पर गौर किया. कोर्ट ने वकीलों को इस सम्बन्ध में कार्यवाही करने के आजादी दी.

दिल्ली राज्य में मीडिया मालिकों को मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर पड़ने लगा श्रम विभाग का चांटा

दिल्ली राज्य में कार्यरत मीडियाकर्मियों को मजीठिया वेज बोर्ड न दिए जाने को लेकर श्रम विभाग ने मीडिया हाउसों को धड़ाधड़ चांटे मारना शुरू कर दिया है. ऐसा दिल्ली की केजरीवाल सरकार की सख्ती के कारण हो रहा है. सूत्रों का कहना है कि अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने श्रम विभाग के अफसरों को साफ-साफ कह दिया है कि किसी का मुंह न देखें, कानूनन जो सही है, वही कदम उठाएं. इस प्रकार सरकार से पूरी तरह छूट मिल जाने के बाद दिल्ली राज्य के श्रम विभाग के अधिकारी फुल फार्म में आ चुके हैं. शोभना भरतिया समेत कई मीडिया मालिकों के खिलाफ क्रिमिनल प्रासीक्यूशन शुरू किया जा चुका है.

विनय बिहारी सिंह के केस से सबक लें और आप भी सेक्शन 17 (2) के तहत लेबर आफिस में आवेदन करें

विनय बिहारी सिंह के कोलकाता के वरिष्ठ पत्रकार हैं. इंडियन एक्सप्रेस समूह के हिंदी अखबार जनसत्ता में लंबे समय तक कार्य करने के बाद रिटायर हुए. लेकिन मालिकों ने उन्हें मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से एरियर नहीं दिया. विनय बिहारी सिंह रिटायरमेंट के बाद इंडियन एक्सप्रेस के मालिकों को लगातार मजीठिया का लाभ देने के लिये पत्र लिखते रहे. इसी क्रम में उन्होंने पहले कलकत्ता स्थित लेबर ऑफिस को लिखा परन्तु ढाक के तीन पात.

लेबर इंस्पेक्टर के यहां मजीठिया वेज बोर्ड के लिए इस फारमेट में कंप्लेन करें

उच्चतम न्यायालय में 28 अप्रैल 2015 की सुनवाई के दौरान बहुत सी बातें उठीं. यह भी बताया गया कि मजीठिया का लाभ मांगने वाले कर्मचारियों को प्रबंधन द्वारा धमकाया और डराया जा रहा है. उनसे जबरदस्ती लिखवाकर लिया गया है कि वो मजीठिआ का लाभ नहीं चाहते. अदालत को यह भी बताया गया कि प्रबंधक जबरदस्ती कर्मचारियों से लिखवा कर ले रहे हैं कि उन्होंने समझौता कर लिया है और वो मजीठिया का लाभ नहीं चाहते. इसके जवाब में मालिकों की ओर से आये बड़े और नामचीन वकीलों ने जब कुछ कहना चाहा तो अदालत ने नहीं सुना. अदालत ने इन बातों को गंभीरता से लेते हुए आदेश पास किया कि सभी राज्य सरकारें मजीठिया आदेश के अनुपालन में कार्यवाही के लिए श्रम निरीक्षकों की नियुक्ति करें और तीन महीने के अंदर अदालत के सामने रिपोर्ट प्रस्तुत करें.

सलमान खान अवैध बेल के खिलाफ पीआईएल : मीडिया ने की भरपूर कवरेज, देखें किसने क्या छापा और दिखाया…

Yashwant Singh : खोजी पत्रकार दीपक शर्मा इन दिनों एक जुझारू टीम के साथ मीडिया में नया, जमीनी और बड़ा प्रयोग कर रहे हैं. बिना बड़ी पूंजी के वह मिशनरी भाव से एक छोटे से कमरे के जरिए ‘इंडिया संवाद’ नामक वेबसाइट संचालित कर रहे हैं. साथ ही यूट्यूब पर इंडिया संवाद नामक चैनल चला रहे हैं. सलमान खान को अवैध तरीके से जमानत दिए जाने के खिलाफ दायर पीआईएल को लेकर आयोजित मीडिया से बातचीत के कार्यक्रम में ‘इंडिया संवाद’ की टीम पहुंची. टीम के अगुवा वरिष्ठ पत्रकार नाजिम नकवी जी थे. उन्होंने विस्तार से बातचीत मुझसे और मेरे वकील उमेश शर्मा जी से की. नाजिम नकवी ने फौरन रिपोर्ट फाइल की और संबंधित वीडियो यूट्यूब पर अपलोड करा दिया. इंडिया संवाद पर प्रकाशित खबर गूगल सर्च में टॉप पर आने लगी. आप भी पढ़िए इंडिया संवाद में क्या छपा और क्या दिखाया गया…

Journalist files PIL in apex court, challenges relief given to Salman Khan

सलमान खान को अवैध तरीके से जमानत दिए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर

एडवोकेट उमेश शर्मा और पत्रकार यशवंत सिंह मीडिया को जनहित याचिका के बारे में जानकारी देते हुए.


एक बड़ी खबर दिल्ली से आ रही है. सलमान खान को मिली जमानत खारिज कर उन्हें जेल भेजे जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में आज एक जनहित याचिका दायर की गई. यह याचिका चर्चित मीडिया पोर्टल Bhadas4Media.com के संपादक यशवंत सिंह की तरफ से अधिवक्ता उमेश शर्मा ने दाखिल की. याचिका डायरी नंबर 16176 / 2015 है. जनहित याचिका के माध्यम से इस बात को अदालत के सामने लाया गया है कि सेशन कोर्ट बॉम्बे ने इस मामले में पहले से निर्देशित कानून का पालन जानबूझ कर नहीं किया जिसकी वजह से सलमान खान को बेल आराम से मिल गयी और इससे भारत के पढ़े-लिखे लोग सन्न है. हर तरफ कोर्ट पर सवाल उठाए जाने लगे. सोशल मीडिया पर कोर्ट के खिलाफ नकारात्मक टिप्पणियों की बाढ़ सी आ गई.

मजीठिया वेज बोर्ड के लिए अब भी कोई सुप्रीम कोर्ट में केस करना चाहता है तो स्वागत है : एडवोकेट उमेश शर्मा

(File Photo Advocate Umesh Sharma)

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील उमेश शर्मा से भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह ने वो सवाल पूछा जिसे देश भर के कई मीडियाकर्मी आपस में एक दूसरे से पूछ रहे हैं. सवाल यह कि क्या सुप्रीम कोर्ट में कोई मीडियाकर्मी अब भी मजीठिया वेज बोर्ड का अपना हक पाने के लिए केस कर सकता है? एडवोकेट उमेश शर्मा ने बताया कि बड़े आराम से केस कर सकता है. चलते हुए केस में पार्टी बना जा सकता है, चाहें खुलकर या गोपनीय रहकर. इसके लिए वनटाइम फीस सात हजार रुपये देने होंगे.