आइसा छात्र नेता नितिन राज ने जेल से भेजा पत्र- ‘रिश्वत देकर रिहाई कतई कुबूल नहीं’

सरकारों का कोई भी दमन और उनके भ्रष्टतंत्र की कोई भी बेशर्मी और बेहयाई क्रांतिकारी नौजवानों के मंसूबों को तोड़ नहीं सकती……

साथियों,

आज शायद भारतीय छात्र आन्दोलन अपने इतिहास के सबसे दमनात्मक दौर से गुजर रहा है, जहाँ छात्रों को अपनी लोकतान्त्रिक माँगो को लेकर की गई छात्र आन्दोलन की सामान्य कार्यवाही के लिए भी राजसत्ता के इशारे पर महीनों के लिए जेल में डाल दिया जा रहा है. छात्र आन्दोलन से घबराई योगी सरकार, जो कि इसे किसी भी शर्त पर कुचल देना चाहती है, हमें इतने दिनों तक जेल में रख कर हमारे मनोबल को तोड़ने की कोशिश कर रही है. लेकिन हम क्रान्तिकारी परम्परा के वाहक हैं हमारे आदर्श भगतसिंह और चंदू हैं, सावरकर नहीं, जो जेल के भय से माफ़ीनामा लिखकर छूटे और अंग्रेजों की दलाली में लग गए. हमें अगर और दिनों तक जेल में रहना पड़ा तब भी हम कमजोर पड़ने वाले नहीं हैं.

ऐसा तो किसी ने सोचा तक नहीं था

आखिर दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने 21 मार्च 2015 को मेरठ के हाशिमपुरा में 1987 में हुए नरसंहार के 16 अभियुक्त पुलिसकर्मियों को बरी कर दिया. इस नरसंहार में एक ही संप्रदाय के 40 से अधिक लोग मारे गए थे. कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की रिज़र्व पुलिस पीएसी के जवानों को बरी करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष संदिग्ध पुलिसकर्मियों की पहचान साबित करने में नाकाम रहा. तो फिर उन 40 से ज़्यादा मनुष्यों को किसने मारा ? क्या इस प्रश्न का उत्तर इस व्यवस्था के पास है ? लोग उम्मीद लगाए बैठे थे कि आरोपियों को सख्त सजा होगी, लेकिन उन्हें साक्ष्य के आभाव में बरी कर दिया जाएगा, ऐसा किसी ने सोचा तक नहीं था. कुछ लोग मान रहे थे कि कम से कम आजीवन कारावास तो होगा ही.

आइसा नेताओं के खिलाफ यौन शोषण की शिकायत करने वाली छात्रा को आइसा कार्यकर्ताओं ने पीटा

Samar Anarya : आइसा नेताओं के खिलाफ यौन शोषण की शिकायत करने वाली छात्रा को आइसा कार्यकर्ताओं ने पीटा? वह भी इतना कि लड़की ट्रामा सेंटर में भर्ती है. स्तब्ध हूँ इस खबर से. कोई सच बतायेगा? जागरण की वेबसाइट पर यह खबर अभी दिख रही है-

यौन शोषण का आरोप लगाने वाली जेएनयू छात्रा की पिटाई

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। देश के प्रतिष्ठित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में एक छात्रा के साथ ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा) के कार्यकर्ताओं द्वारा शुक्रवार देर शाम मारपीट का मामला सामने आया है। लड़की को एम्स के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है। बताया जाता है कि यह वही लड़की है, जिसने छात्र संघ पदाधिकारी अकबर चौधरी व सरफराज पर यौनशोषण का आरोप लगाया था, जिसकी जांच विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति जेंडर सेंसटाइजेशन कमेटी अगेंस्ट सेक्सुअल हेरासमेंट में चल रही है।

आइसा के एक पदाधिकारी का कहना है कि एनएसयूआइ के कार्यकर्ताओं ने उनके कार्यकर्ता चिंटू, शहला व दो और को पीटा था। चिंटू को भी ट्रामा सेंटर ले जाया गया है। इस बीच, आइसा व एबीवीपी के कार्यकर्ता देर रात तक वसंतकुंज थाने के सामने एफआइआर के लिए डटे रहे। छात्रा के साथियों ने बताया कि जब से छात्रा ने छात्र संगठन पदाधिकारियों के ऊपर यौन शोषण का आरोप लगाया है, तभी से आइसा के कार्यकर्ता लगातार उसे परेशान कर धमकी दे रहे थे।