आज़म खान की वक़्फ़ लूट का पर्दाफाश करने वाले पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने सीबीआई जांच आदेश के बाद नए खुलासे किए

अभिषेक उपाध्याय

Abhishek Upadhyay : आज़म खान के मामले में सीबीआई जांच के आदेश हो गए। करीब दो माह पहले तीन किस्तों में आज़म खान की वक़्फ़ लूट का पर्दाफाश किया था। आज़म बुरी तरह बौखला गए थे। पूरे रामपुर में इंडिया टीवी के पोस्टर लगाकर गालियां दीं। प्रेस कॉन्फेंस कर धमकी दी। आज़म के ख़िलाफ़ जो मामले सामने आए थे, उनका शिकार मुसलमान ही थे। वही मुसलमान जिनकी मसीहाई का दावाकर आज़म सालों साल सत्ता की मलाई खाते रहे।

सपा में हाई वोल्टेज ड्रामा, आजम के लिये मुश्किल होगा आगे का सफर

अजय कुमार, लखनऊ

समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता और मंत्री आजम खान की शख्सियत की व्याख्या करना हो तो यह कहा जा सकता है कि वह स्वभाव से अखड़ ,जुबान के कड़क,लेकिन ईमानदार और स्वाभिमानी नेता हैं। आजम पर अक्सर आरोप लगाते रहते हैं कि वह सियासी दुनिया में किसी की भावनाओं की कद्र नहीं करते है। दिल की जगह दिमाग से काम लेते हैं,इसी लिये उन्होंने  दोस्त से अधिक दुश्मन पाल रखे हैं। वह जिसके पीछे पड़ जाते हैं उसे किसी भी दशा में छोड़ते नहीं हैं और जिससे दोस्ती निभाते हैं उसके लिये सब कुछ दांव पर लगा देते हैं। आजम खान का कोई बड़ा सियासी दुश्मन नहीं है, अगर है तो वह स्वयं अपने दुश्मन हैं।

आज़म खान, रामपुर की पुलिस और दोगला चरित्र

Kanwal Bharti : कल रामपुर पुलिस ने फेसबुक पर आज़म खान के खिलाफ लिखने वाले किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। खबर है कि उसने आज़म और उसके परिवार पर कोई टिप्पणी की थी। किन्तु रामपुर पुलिस दोगली चरित्र की है।

अमिताभ ठाकुर और संघ के खिलाफ अभद्र भाषा इस्तेमाल करने पर आजम खान के खिलाफ परिवाद दर्ज

Amitabh Thakur : आज़म खान पर परिवाद दर्ज.. मैंने मंत्री श्री आज़म खान द्वारा कल रामपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और मेरे लिए अत्यंत अभद्र भाषा और शब्दों का प्रयोग करने के सम्बन्ध में सीजेएम लखनऊ के समक्ष शिकायत दायर किया. सीजेएम श्री हितेंद्र हरि ने शिकायत को परिवाद के रूप में दर्ज करते हुए मेरा धारा 200 सीआरपीसी में बयान दर्ज करने के लिए 15 दिसंबर 2015 नियत किया. श्रीआज़म खान ने रामपुर में पत्रकार वार्ता में मेरे लिए प्रशासनिक अधिकारी के नाम पर कलंक जैसे शब्दों का प्रयोग किया था. साथ ही उन्होंने आरएसएस के लिए अत्यंत दूषित शब्दों का भी प्रयोग किया था. मैंने इन्हें धारा 500 आईपीसी में मानहानि और धारा 153, 153ए, 504, 505 आईपीसी के अधीन समाज में विद्वेष फ़ैलाने वाला अपराध बताते हुए कार्यवाही की प्रार्थना की है.

दास्ताने स्टिंग ऑपरेशन : यूपी का मुगले आज़म तो बात बादशाह की करता है लेकिन भिड़ता प्यादों से है!

क्या यूपी में कोई आज़म खान की मर्ज़ी के बगैर उनके बारे में कोई खबर चला सकता है? इस सवाल का जवाब लखनऊ में आसानी से मिल सकता है लेकिन एक बात तो साफ़ है कि सत्ता में आने के बाद आज़म खान ने जितने मुकदमे पत्रकारों पर दर्ज कराये हैं उतने मुकदमे सरकार ने सूचीबद्ध माफिया सरगनाओं पर भी नही दर्ज कराए. सोशल मीडिया से लेकर मेन स्ट्रीम मीडिया तक, आज़म खान अपने बारे में अखबार क्या, फेसबुक पर भी लिखी कोई तल्ख़ लाइन बर्दाश्त नही करते. और वो हर स्तर पर कार्रवाई करने को बेताब रहते हैं. उनकी पुलिस कभी उनकी खोई हुई भैंसों को या फिर खोई हुई प्रतिष्ठा के ज़िम्मेदार पत्रकारों को पकड़ने में मुस्तैद रहती है. लोहिया की खुली विचारधारा वाली समाजवादी पार्टी की ये प्रेस विरोधी नीति अभूतपूर्व विरोधाभास से भरी है.

अगर 13 साल ‘आजतक’ में नौकरी की है तो फिर किसी बड़े मसले पर जेल या मुक़दमे पर पीछे हट जाना तो कोई बात नहीं हुई : दीपक शर्मा

अगर मुजफ्फरनगर दंगा स्टिंग फर्जी था तो अफसरों और पुलिस वालों को सरकार ने सस्पेंड क्यूं किया…

Deepak Sharma : भड़ास4मीडिया वेबसाइट से मालूम हुआ कि आज़म खान साहब ने मेरे ऊपर कई मुक़दमे दर्ज कराये हैं. यह भी पता लगा कि विधान सभा की 2013 में गठित की गयी जांच समीति ने मुज़फ्फरनगर दंगो पर आजतक के दिखाए स्टिंग ऑपरेशन पर रिपोर्ट बना ली है. सवाल मुझे जेल भेजने का नहीं है. अगर 13 साल आजतक में नौकरी की है तो फिर किसी बड़े मसले पर जेल या मुक़दमे पर पीछे हट जाना तो कोई बात नही हुई. भले ही आप अब ‘आजतक’ की जगह ‘इंडिया संवाद’ में हो.

रामपुर में ‘नए नवाब’ का इशारा मिलते ही ‘चरस वाले बाबा’ नाम से कुख्यात एक सीनियर पुलिस अफसर जेल भेज देता है…

(आईपीएस अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी नूतन ठाकुर)


: एक आईपीएस अफसर की जुबानी, रामपुर में एक नेता के दहशत, आतंक और अत्याचार की कहानी : मैं और नूतन दो दिन के लिए रामपुर गए. वजह थी यह जानकारी कि वहां करीब 80 वाल्मीकि परिवार, जो लगभग 60 वर्षों से घर बना कर रह रहे थे, को जिला प्रशासन द्वारा अचानक उजाड़े जाने की बात कही जा रही है. हम 11 अप्रैल की शाम लगभग 5 बजे रामपुर पहुंचे और 12 को लगभग 12 बजे तक वहां रहे. इस दौरान हमने मौके को भलीभांति देखा और देखते ही यह बात समझ में आ गयी कि वाल्मीकि बस्ती के लोगों की बात पूरी तरह जायज़ है. कई दशकों से ये लोग पक्के मकान बना कर रह रहे हैं, पूरे के पूरे परिवार. उनके वोटर आईडी हैं, सभी सरकारी दस्तावेज़ हैं, नगर पालिका ने मकान नंबर दिए हैं.

लोकायुक्त ने कहा- जौहर संस्थान का पट्टा सक्षम कोर्ट से निरस्त कराएं

लखनऊ : मंत्री आज़म खान के निजी ट्रस्ट को सौंपे गए जौहर अली शोध संस्थान के सम्बन्ध में सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर द्वारा दायर परिवाद में लोकायुक्त एन के मल्होत्रा ने जहां यह कहा है कि वह मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के निर्णय की जांच नहीं कर सकते हैं, वहीँ उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता शिकायती पट्टा निरस्त कराने और दोषी अधिकारियों को दण्डित कराने के लिए सक्षम न्यायालय जा सकती है.

Protest in arrest on FB comment on Azam Khan’s pressure

Social activists, led by Dr Nutan Thakur, today protested at Gandhi Statue, Hazratranj, Lucknow against arbitrary arrest of Class XI student for FB comment saying that this is complete State highhandedness undertaken purely on Azam Khan’s pressure. They included Devendra Dixit, Sharad Mishra, Anupam Pandey, Rohit Tripathi, Dr Praveen and others.

यूपी में आज़म खान के खिलाफ जांच करने में लोकायुक्त को भी पसीने छूटते हैं!

यूपी में लोकायुक्त को भी आजम खान के खिलाफ जांच शुरू करने में पसीने छूटने लगते हैं. वे नियम कानून और वैधता आदि का सवाल उठाने लगते हैं. जिनके पास जानकारों की पूरी फौज होती है, सरकारी संसाधन और संरक्षण होता है, वह भी शिकायत करने वाले से ही पूछता है कि किस नियम के तहत ये जांच करें. अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आज़म खान द्वारा बिना किसी नियम, शर्त और प्रक्रिया के राज्य सरकार के अल्प संख्यक विभाग के मौलाना जौहर अली शोध संस्थान रामपुर की बेशकीमती भूमि और भवन स्वयं की निजी संस्था मौलाना जौहर अली ट्रस्ट को दिए जाने के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर के परिवाद पर लोकायुक्त जस्टिस एन के मल्होत्रा द्वारा उठाई गयी आपत्तियों का आज उन्होंने उत्तर प्रस्तुत किया.

आज़म खान का शिया मुसलमानों के खिलाफ जिहाद, शिया धर्मस्थल गिरवाया!

उत्तर प्रदेश के वक्फ मंत्री आज़म खान ने इन दिनों शिया वर्ग के खिलाफ जिहाद छेड़ दिया है। जब से आज़म खान ने यूपी की सत्ता में भागीदार हुए हैं, उन्होंने शिया वर्ग का जीना दुशवार कर दिया है। कल उन्होंने बर्बरता की सारी हदें पार करते हुए रामपुर में हुसैनी सराय नाम के एक शिया धर्म स्थल को ध्वस्त करा दिया।  इस धर्म स्थल को गिराए जाने का मक़सद तो यह था कि रामपुर के शिया नवाबों के परिवार से अपनी राजनीतिक खुन्नस निकाली जाए लेकिन साथ ही साथ समस्त शियों को भी बताना था कि तुम्हारी कोई हैसियत नहीं है।

आज़म खान का आतंकवाद को समर्थन! पढ़िए ये उर्दू अखबार

भाई यशवंत, उत्तर प्रदेश के नगर विकास मंत्री आज़म खान ने तमाम हदें पार करते हुए  पेरिस में हुए आतंकी हमले का समर्थन किया है  लेकिन किसी पत्रकार के कान पर जूं नहीं रेंग रही है । उर्दू के कई समाचार पत्रों में आज़म खान का यह वक्तव्य छपा है जिस में आज़म ने कहा है  कि पेरिस की मैगज़ीन के पत्रकारों ने किया था उस का बदला उन को मिल गया।  इस ब्यान में आज़म ने दहशत गर्दों की निंदा करने के बजाय यह कहा है कि किसी भी धर्म के अवतारों का अपमान नहीं किया जाना चाहिए।  आज़म खान का ब्यान पढ़ कर लगता है कि उन के दिल में दहशत गर्दों के लिए कितनी हमदर्दी है। 

मीडिया ने देश का मुंह काला कर दिया, माफी मांगे : आजम खां

लखनऊ के पत्रकार तो जैसे ढोलक हो गए हों. जब चाहे जो चाहे, बजा दे रहा है. कभी अखिलेश तो कभी आजम. ये जुगलबंदी जमकर मीडिया को फुटबाल की तरह यहां से वहां पीट दौड़ा रही है. आजम खान ने फिर मीडिया पर विष वमन किया है. यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री आजम खां ने लखनऊ में मीडिया को जमकर लताड़ते हुए आरोप लगाया कि मीडिया ने अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए देश की अस्मिता के साथ खिलवाड़ कर देश का मुंह काला कर दिया है, इसके लिए मीडिया देश से माफी मांगे.

आजम खान : आह…. वाह….

Shambhu Nath Shukla :  मैं भारतीय मुसलमानों की बौद्घिक क्षमता का कायल रहा हूं। मुझे याद है कि पक्के दक्षिणपंथी रजत शर्मा ने अपने कार्यक्रम ‘आपकी अदालत’ में ओवैसी को फँसाने की बड़ी कोशिशें की पर ओवैसी लगातार अपने दमदार तर्कों और बौद्घिक कौशल के तीर चलाकर उलटे रजत को ही निरुत्तर करते रहे। लेकिन जब मैं आजम खान के बयान सुनता हूं तो लगता है कि एक अनपढ़ और जाहिल आदमी भी उनसे तो बेहतर ही बोलता है। क्या उत्तर भारत के मुस्लिम राजनेता भी अपने हिंदू हमपेशा लोगों की तरह कूढ़मगज हैं। अच्छा ही है परस्पर हमजुल्फ जो हैं।

हिंदुस्तान अखबार ने प्रेस काउंसिल से कहा- आजम खान ने वाकई ‘डंडे की भाषा’ वाला बयान दिया था

30 जनवरी 2013 को यूपी के वरिष्ठ मंत्री आज़म खां द्वारा समाजवादी पार्टी मुख्यालय में कथित रूप से सरकारी अफसरों द्वारा डंडे की भाषा समझने और उन पर चाबुक चलाने की बात कही गयी जो अगले दिन विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई, लेकिन उसके अगले दिन उन्होंने आधिकारिक बयान दे कर इससे इनकार किया और इसे भ्रामक और उनकी छवि खराब करने की साजिश बताया. मीडिया की विश्वसनीयता से जुड़ा मामला होने के कारण सामाजिक कार्यकर्त्ता डॉ नूतन ठाकुर ने प्रेस कौंसिल ऑफ़ इंडिया से इस आज़म के दोनों बयानों की सच्चाई की जांच की मांग की थी.

आजम के गार्डों ने मीडियाकर्मियों को धक्का देकर भगाया और अपशब्द कहे

कानपुर। अपने विवादित बयानों के लिए मशहूर उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री आजम खां की सुरक्षा में तैनात गार्ड भी कुछ कम नहीं हैं।  इसकी एक बानगी कल कानपुर में नजर आई। कानपुर में आजम खां के सुरक्षा गार्डों ने मीडियाकर्मियों से बदसलूकी की। यही नहीं,  विरोध जताने पर उन्होंने धक्का-मुक्की भी की। इस दौरान आजम खां तमाशबीन बने रहे और उन्होंने अपने गार्डों को संयमित रहने के लिए दो शब्द कहना भी मुनासिब नही समझा।

ऑफिसियल ट्रिप है, ऐश कीजिए कंपनी के खर्चे पर… कोई पत्रकारिता नहीं है यह सब…

Sanjaya Kumar Singh : भड़ास पर छपी ‘पुण्य प्रसून बाजपेयी, सुप्रिय प्रसाद, राहुल कंवल और दीपक शर्मा कल क्यों जा रहे हैं लखनऊ?‘ खबर को पढ़कर एक पुरानी घटना याद आ गई। जनसत्ता के लिए जब मेरा चुनाव हुआ उन्हीं दिनों जमशेदपुर से निकलने वाले एक अंग्रेजी अखबार के संवाददाता की हत्या हो गई थी। पत्रकारिता को पेशे के रूप में चुनने से पहले मुझे यह तय करना था कि कितना खतरनाक है यह पेशा। मैंने जमशेदपुर के एक बहुत ही ईमानदार पत्रकार से इस बाबत बात की। उनसे लगभग सीधे पूछा था कि जिस पत्रकार की हत्या हुई उसकी तो कोई खबर मुझे याद नहीं है। दूसरी ओर आप एक से बढ़कर एक खबरें लिखते हैं – क्या आपको डर नहीं लगता धमकी नहीं मिलती।

पुण्य प्रसून बाजपेयी, सुप्रिय प्रसाद, राहुल कंवल और दीपक शर्मा कल क्यों जा रहे हैं लखनऊ?

मोदी अगर राष्ट्रीय मीडिया को पटाने-ललचाने में लगे हैं तो उधर यूपी में अखिलेश यादव से लेकर आजम खान जैसे लोग नेशनल व रीजनल को पटाने-धमकाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़े हुए हैं. आपको याद होगा मुजफ्फरनगर दंगों के बाद आजतक पर चला एक स्टिंग आपरेशन. दीपक शर्मा और उनकी टीम ने मुजफ्फरनगर के कई अफसरों का स्टिंग किया जिससे पता चला कि इस दंगे को बढ़ाने-भभकाने में यूपी के एक कद्दावर मंत्री का रोल रहा, इसी कारण तुरंत कार्रवाई करने से पुलिस को रोका गया.