मुलायम सिंह यादव ने अपने तीन पुराने पत्रकार मित्रों को चाय पर बुलाया

Ajai Kumar : आज “नेताजी” मुलायम सिंह ने पुराने पत्रकार मित्रों को चाय पर बुलाया। श्री वीरेंद्र सक्सेना, प्रमोद गोस्वामी और मैं। लगभग एक घंटे तक तमाम नई – पुरानी बातें हुईं। वर्तमान राजनीति पर चर्चा हुई।

मुलायम फिर ‘मुल्ला’ बनने को बेताब

अजय कुमार, लखनऊ

उत्तर प्रदेश की सियासत अब दिल की जगह दिमाग के सहारे परवान चढ़ रही हैै। सभी दलों के सूरमा ‘लक्ष्य भेदी बाण’ छोड़ रहे हैं। यही वजह है बसपा सुप्रीमों मायावती अपने दलित वोट बैंक को साधे रखने के लिये बीजेपी को दलित विरोधी और  मोदी की सरकार को पंूजीपतियों की सरकार बताते हुए कहती हैं कि यूपी में बीजेपी की हालत पतली है, इसलिये वह बसपा का ‘रिजेक्टेड मॉल’ ले रही है तो मुसलमानों को लुभाने के लिये बीजेपी को साम्प्रदायिक पार्टी करार देने की भी पूरजोर कोशिश कर रही हैं। आजमगढ़ की रैलीम में मायावती ने यूपी चुनाव जीतने के लिये बीजेपी पाकिस्तान से युद्ध करने की सीमा तक जा सकता है, जैसा बयान मुस्लिम वोटों को बसपा के पक्ष में साधने के लिये ही दिया गया था। वहीं भाजपा और सपा 30 के फेर में फंसे हैं। चुनावी बेला में हमेशा की तरह इस बार भी सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने मुस्लिम वोटरों को लुभाने के लिये  अयोध्या तान छेड़ दी हैं। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह कह रहे हैं कि देश की एकता के लिये 16 के बजाये 30 जानें भी जाती तो वह पीछे नहीं हटते।

एक दिन, दो गम

अजय कुमार, लखनऊ

एक साहित्य जगत की महान विभूति थी तो दूसरा संगीत की दुनिया का सम्राट। एक कलम का उस्ताद था तो दूसरे की उंगलियों की थाप लोंगो को सम्मोहित कर लेती थी। दोनों ने एक ही दिन दुनिया से विदा ली। बात तबला सम्राट पंडित लच्छू महाराज और साहित्य की हस्ताक्षर बन गईं महाश्वेता देवी की हो रही है। भगवान भोले नाथ की नगरी वाराणसी से ताल्लुक रखने वाले लच्छू महाराज और बंगाल की सरजमी से पूरे साहित्य जगत को आईना दिखाने वाली ‘हजार चौरासी की मां’ जैसी कृतियां की लेखिका महाश्वेता देवी (90) ने भले ही देह त्याग दिया हो लेकिन साहित्य जगत और संगीत प्रेमिेयों के लिये यह हस्तियां शायद ही कभी मरेंगी। अपने चाहने वालों के बीच यह हमेशा अमर रहेंगी।

अखिलेश के साहसिक निर्णय के बाद कुनबे में युद्ध शुरू

भतीजे के दांव से बाप-चचा सब चित, सपा पर भारी अखिलेश की सोच और जातिवाद पर भारी पड़ा विकासवाद

अजय कुमार, लखनऊ

अंत भला तो सब भला। समाजवादी पार्टी में अखिलेश समर्थक यही कह रहे हैं। पहले साल बाहुबली नेता डीपी यादव को और आखिरी समय में बाहुबली अंसारी बंधुओं को ‘नो इंट्री’ का कार्ड दिखाकर अखिलेश यादव ने यह साबित कर दिया है कि अगर वह अड़ जायें तो फिर उन्हें कोई बैकफुट पर नहीं ढकेल सकता है। तीन दिनों तक चले ड्रामें के बाद सपा संसदीय बोर्ड की बैठक में अखिलेश के तेवरों को देखते हुए जब पार्टी ने मुख्तार अंसारी के कौमी एकता दल (कौएद) से किराना करने की घोषणा की तो उन लोगों के चेहरों पर मायूसी दिखाई दी जिन्हें लगता था कि कौएद की मदद से सपा पूरबी उत्तर प्रदेश की कुछ सीटों पर अपनी ताकत में इजाफा कर सकती है।

कौन होगा यूपी भाजपा में सीएम पद का चेहरा, कई नाम खारिज तो कई नाम चर्चा में

अजय कुमार, लखनऊ

उत्तर प्रदेश फिर से चुनावी मुहाने पर खड़ा है। राजनीति के गलियारों से लेकर गॉव की चौपालों , शहरों के नुक्कड़ों तक पर हर कोई यही सवाल  पूछ रहा है कि कौन होगा यूपी का अगला सीएम। सीएम की दौड़ में कुछ पुराने चेहरे हैं तो कुछ नये चेहरों को भी सीएम पद का संभावित दावेदार समझा जा रहा है। सपा की तरफ से अखिलेश यादव और बसपा की ओर से मायावती की दावेदारी तो पक्की है ही। इसलिये सपा और बसपा में कहीं कोई उतावलापन नहीं है। चुनौती है तो भाजपा और कांग्रेस के सामने। इसमें भी बीजेपी की स्थिति काफी सोचनीय है। सीएम की कुर्सी के लिये भाजपा के संभावित दावेदारों में कई नाम शामिल हैं। दोंनो ही दलों ने अभी तक सीएम उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है।

सपा में हाई वोल्टेज ड्रामा, आजम के लिये मुश्किल होगा आगे का सफर

अजय कुमार, लखनऊ

समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता और मंत्री आजम खान की शख्सियत की व्याख्या करना हो तो यह कहा जा सकता है कि वह स्वभाव से अखड़ ,जुबान के कड़क,लेकिन ईमानदार और स्वाभिमानी नेता हैं। आजम पर अक्सर आरोप लगाते रहते हैं कि वह सियासी दुनिया में किसी की भावनाओं की कद्र नहीं करते है। दिल की जगह दिमाग से काम लेते हैं,इसी लिये उन्होंने  दोस्त से अधिक दुश्मन पाल रखे हैं। वह जिसके पीछे पड़ जाते हैं उसे किसी भी दशा में छोड़ते नहीं हैं और जिससे दोस्ती निभाते हैं उसके लिये सब कुछ दांव पर लगा देते हैं। आजम खान का कोई बड़ा सियासी दुश्मन नहीं है, अगर है तो वह स्वयं अपने दुश्मन हैं।

सियासत के मामले में मोदी की स्टाइल को कॉपी कर रहे हैं नीतीश कुमार!

अजय कुमार, लखनऊ

2014 के लोकसभा चुनाव के समय गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने के लिये जो रास्ता चुना था, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिये उसी राह पर थोड़े से फेरबदल के बाद आगे बढ़ते दिख रहे हैं। मोदी ने जहां गुजरात मॉडल को आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस मुक्त भारत का नारा दिया था, वहीं नीतीश कुमार संघ मुक्त भारत, शराब मुक्त समाज की बात कर रहे हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव के समय पूरे देश में मोदी और उनके गुजरात मॉडल की चर्चा छिड़ी थी, जिसका मोदी को खूब फायदा मिला था।

यूपी में पीके ने सीएम पद के लिए राहुल, प्रियंका और शीला दीक्षित का नाम सुझाया

अजय कुमार, लखनऊ

उत्तर प्रदेश कांग्रेस में हमेशा से काबिल नेताओं की लम्बी-चौड़ी फौज रही है। कई नेताओं के नाम गिनाये जा सकते हैं जिन्होंने अपने दम से प्रदेश ही नहीं पूरे देश में अपना नाम रोशन किया। फिर भी यूपी में कांग्रेस मरणासन स्थिति में हो तो आश्चर्य होता है। 27 वर्षो से वह सत्ता से बाहर है। इन 27 वर्षो में सत्ता में वापसी के लिये कांग्रेस लगातार प्रयासरत् रही है। जब भी चुनावी बिगुल बजता है कांग्रेसी ‘सपनों की उड़ान’ भरने लगते हैं, लेकिन अंत में निराशा ही हाथ लगती है।

यूपी में जंगलराज : भ्रष्ट नौकरशाहों पर ‘सरकारी मेहरबानी’

अजय कुमार, लखनऊ

उत्तर प्रदेश के तमाम नौकरशाह भ्रष्टाचार मे लिप्त हैं, लेकिन लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुईं सरकारें इन भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाये उन्हें संरक्षण देती हैं। यह सिलसिला लम्बे समय से चलता आ रहा है और कहीं कोई सुबुगाहट नहीं सुनाई दी। जनता,  नेताओं-नौकरशाहों के गठजोड़ से भले ही .त्रस्त हो,  लेकिन सरकारों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। कई दशकों के बाद हाल ही में हाईकोर्ट ने इस गठजोड़ पर सवाल खड़ा करके जनता की उम्मीदों को पंख लगा दिये हैं। मामला सीबीआई की कोर्ट में होने के बाद भी भ्रष्टाचार के आरोपी आईएएस अधिकारी राजीव कुमार के प्रति अखिलेश सरकार जिस तरह ‘प्रेम’ का इजहार कर रही थी,  वह हाईकोर्ट को कतई रास नहीं आया। नाराज कोर्ट ने सरकार से ही इस मेहरबानी कारण पूछ लिया।

यूपी के वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार के मुताबिक नए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को गुनाहगारों की लिस्ट में नहीं खड़ा किया जा सकता

अजय कुमार, लखनऊ

भारतीय नववर्ष के पहले ही दिन उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी को अपना नया हाकिम मिल गया। यूपी में अगले साल होने वालो विधान सभा चुनाव में कमल खिलाने की जिम्मेदारी भाजपा आलाकमान ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की सहमति के बाद कट्टर हिन्दूवादी छवि वाले नेता और सांसद केशव प्रसाद मौर्य पर डालकर बड़ा दांव चल दिया है। अति पिछड़ा वगै से आने वाले केशव के उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनते ही यूपी की सियासी पारा एकदम से बढ़ना स्वभाविक था और ऐसा ही हुआ। कांग्रेस, सपा और बसपा एक तरफ केशव की कुंडली खंगाल रहे हैं तो दूसरी ओर उनकी ताजपोशी से होने वाले नफा-नुकसान का भी आकलन भी इन दलों द्वारा किया जा रहा है।

यूपी में जंगलराज : तंजील की हत्या बिगड़ी कानून व्यवस्था एक और नमूना

…2007 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को इसलिये हार का सामना करना पड़ा था, क्योंकि तब प्रदेश में जंगलराज जैसे हालात थे और तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने इस पर कोई खास ध्यान नहीं दिया था, यही समस्या अखिलेश सरकार के साथ है…

अजय कुमार, लखनऊ

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिला बिजनौर में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के डीएसपी मोहम्मद तंजील अहमद की जिस तरह से एक शादी समारोह से लौटते समय मौत के घाट उतारा गया वह शर्मनाक तो है ही इस तरह की वारदातें कई गंभीर सवाल खड़े करती है। खासकर तब तो और भी आश्चर्य होता है जब ऐसे हादसों के समय सियासतदार चुप्पी साध लेते हैं कथित धर्मनिरपेक्ष शक्तियां की जुबान पर ताला लग जाता है। उम्मीद तो यही की जा रही थी शहीद डीएसपी तंजील की मौत के बाद फिजाओं में तुम कितने तंजील मारोगे, घर-धर से तंजील निकलेगा’ का नारा गूंजेगा। यह तंजील को सच्ची श्रद्धांजलि होती, लेकिन नारा लगाना तो दूर चंद लोगों के अलावा तंजील के घर जाकर उनके परिवार के आंसू तक पोछना किसी ने जरूरी नहीं समझा। तंजील की हत्या आतंकवादी साजिश थी या फिर कोई और वजह, इसका खुलासा देर-सबेर हो ही जायेगा। 

यूपी विधानसभा का कटघरा : राजदीप आये और विधानसभा अध्यक्ष के कमरे में ही माफी मांग कर चले गये

अजय कुमार, लखनऊ

उत्तर प्रदेश विधान सभा में गत दिनों तमाम राजनैतिक दलों ने अपने आपसी मतभेद भुलाकर मीडिया का जमकर विरोध किया। विपक्ष के नेता स्वामी प्रसाद मौर्या ने तो वर्तमान मीडिया को ‘पक्षपाती’ तक कह डाला। दरअसल, सितंबर 2013 में मुजफ्फरनगर में हुए दंगों से संबंधित एक इलेक्ट्रानिक चैनल आजतक पर प्रसारित किये गये ‘स्टिंग आपरेशन’ की जांच रिपोर्ट में मीडिया घराने टीवी टुडे को दोषी पाया गया। इस संबंध में विधानसभा द्वारा गठित जांच समिति ने सदन में जो रिपोर्ट रखी उसमें बड़े इलेक्ट्रानिक मीडिया आजतक को ‘कटघरे’ में खड़ा कर दिया। रिपोर्ट में जहां तो मंत्री आजम खां को क्लीन चिट दी गई वहीं मीडिया पर पक्षपात पूर्ण कार्य करने का आरोप लगा।

यूपी सियासत में बढ़ी मुस्लिम वोटों के सौदागरों की संख्या, मुलायम अब हिन्दू कार्ड भी खेल रहे

अजय कुमार, लखनऊ

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक कालखंड ऐसा भी रहा था, जब परस्पर विरोधी भाजपा नेता कल्याण सिंह और समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव की सूबे की सियासत में तूती बोलती थी। भाजपा नेता और मुख्यमंत्री रह चुके कल्याण सिंह को उनके समर्थक हिन्दू हदय सम्राट की उपाधि देते नहीं थकते थे तो मुलायम सिंह की छवि मुल्ला मुलायम वाली थी।  दोनों की ही सियासत को परवान चढ़ाने में अयोध्या से जुड़े एक विवाद(राजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मसला)का अहम रोल रहा। कल्याण सिंह ने जहां भगवान राम के नाम का जाप कर-करके अपनी हिन्दुत्ववादी छवि को चमकाया, वहीं मुलायम ने बाबरी मस्जिद के सहारे मुसलमानों के बीच अपना जनाधार बढ़ाया। हाल यह था कि कल्याण सिंह के समर्थक मुलायम का नाम सुनते ही लाल- पीले हो जाते थे तो मुलायम समर्थक कल्याण सिंह का नाम आते ही मुट्ठी तान लेते थे।

बसपा ने तय किया मिशन-2017 एजेंडा

अजय कुमार, लखनऊ

बसपा सुप्रीमों मायावती ने मिशन 2017 के आगाज के साथ ही सियासी एजेंडा भी तय कर दिया हैै। दलितों को लुभाने के लिये बसपा बड़ा दांव चलेगी तो मुसलमानों को मोदी-मुलायम गठजोड़ से बच के रहने को कहा जायेगा।  प्रदेश की बिगड़ी कानून व्यवस्था, किसानों की दुर्दशा, बुंदेलखंड की बदहाली को अखिलेश सरकार के विरूद्ध हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जायेगा। एकला चलो की राह पर  बीएसपी केन्द्र की सत्ता पर काबिज बीजेपी को नंबर वन का दुश्मन मानकर चलेगी तो प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी को नंबर दो पर रखा गया है। नंबर तीन पर कांग्रेस सहित अन्य वह छोटे-छोटे दल रहेंगे जिनका किसी विशेष क्षेत्र में दबदबा है। बसपा हर ऐसे मुद्दे को हवा देगी जिससे केन्द्र और प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़ा किया जा सके।  विधान सभा के बजट सत्र और इससे पूर्व के सत्रों मे बसपा नेताओं ने जिस तरह के तीखे तेवर दिखाये उससे यह बात समझने में किसी को संदेह नहीं बसपा सड़क से लेकर विधान सभा तक में अपने लिये राजनैतिक बढ़त तलाश रही है। 

राहुल गांधी सियासत का एक अवसरवादी चेहरा

अजय कुमार, लखनऊ

कांग्रेस के युवराज पूरा देश जीतने के लिये निकले हैं। इसके लिये उन्हें कुछ भी करने से परहेज नहीं है।  अपनी तकदीर बनाने के लिये वह देश की तस्वीर बदरंग करने से भी नहीं हिचकिचाते हैं।  आज की तारीख में राहुल गांधी अवसरवादी राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा बन गये हैं। वह वहां तुरंत पहुंच जाते हैं जहां से मोदी सरकार को कोसा जा सकता है। अभी तक की उनकी सियासत देखी जाये तो वह देश के किसी भी हिस्से में हुई दर्दनाक मौत पर खूब सियासत करते हैं। बुंदेलखंड में भूख से मरते किसानों, मुजफ्फनगर दंगा, अखलाक की मौत, हैदराबाद में एक दलित छात्र की आत्महत्या जैसे मामलों को हवा देने में राहुल को काफी मजा आता है।

सरहद पार फेसबुक का प्यार : पाकिस्तानी प्रेमी के लिये हिन्दुस्तानी युवक ने कराया लिंग परिर्वतन

अजय कुमार, लखनऊ

प्यार अंधा होता है। उसे कुछ दिखाई-सुनाई नहीं देता है। न वह मजहब के दायरे में कैद होता है न किसी तरह की सीमाएं उसे बांध सकती हैं। न कोई प्यार पर पहरा बैठा सकता है,न ही न इसे जुल्मों-सितम से दबाया जा सकता है।  यह बात सदियों से प्रेम करने वालों के लिये कही जाती रही है। चाहें भगवान कृष्ण की दीवानी राधा हो या फिर मीरा।  लैला हो या मजनू, शीरी-फरहाद,हीर-रांझा,सलीम-अनारकली चंद ऐसे नाम हैं जिनकी बेपनाह मोहब्बत ने प्यार को नई ऊंचाइयां दी।  आजकल भी एक ‘मीरा’ का प्यार चर्चा में हैं। 

यूपी के आला पुलिस अफसरों ने खाकी को चुल्लू भर पानी में डुबोया

उत्तर प्रदेश में खाकी अपनी करतूतों के चलते अक्सर ही शर्मसार होती रहती है, लेकिन जब भ्रष्टाचार के आरोप विभाग के मुखिया पर ही लगे तो हालात कितने खराब हैं, इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। खाकी पर अबकी से उसके दो ‘हाकिमों’ (पूर्व पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) के कारण दाग लगा है। दोनों डीजीपी ने अपनी तैनाती के दौरान ट्रांसफर-पोस्टिंग को धंधा बना लिया।

बेइन्तहा पैसे वाली हो गई डाक कर्मचारी की बेटी मायावती पर टिकट बेचने को लेकर चौतरफा हमला :

: बसपा से बिदकते नेताओं की भाजपा पहली पसंद : बसपा सुप्रीमो मायावती के ऊपर एक बार फिर टिकट बेचने का गंभीर आरोप लगा है।यह आरोप भी पार्टी से निकाले गये बसपा के एक कद्दावर नेता ने ही लगाया है।मायावती के विरोधियों और मीडिया में अक्सर यह चर्चा छिड़ी रहती है कि बसपा में टिकट वितरण में खासकर राज्यसभा और विधान परिषद के चुनावों में पार्दशिता नहीं दिखाई पड़ती है। विपक्ष के आरोपों को अनदेखा कर भी दिया जाये तो यह बात समझ से परे हैं कि बसपा छोड़ने वाले तमाम नेता मायावती पर टिकट बेचने का ही आरोप क्यों लगाते हैं। किसी और नेता या पार्टी को इस तरह के आरोप इतनी बहुतायत में शायद ही झेलने पड़ते होंगे। कभी-कभी तो ऐसा लगता है कि धुआ वहीं से उठता है जहां आग लगी होती है। आरोप लगाने वाले तमाम नेताओं की बात को इस लिये भी अनदेखा नहीं किया क्योंकि यह सभी नेता लम्बे समय तक मायावती के इर्दगिर्द रह चुके हैं और उनकी कार्यशैली से अच्छी तरह से परिचित हैं।

2017 का विधानसभा चुनाव जातिवादी राजनीति के सहारे नहीं जीता जा सकेगा, अखिलेश यादव को अहसास हो गया

अजय कुमार, लखनऊ

एक वर्ष और बीत गया। समाजवादी सरकार ने करीब पौने तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया है। 2014 सपा को काफी गहरे जख्म दे गया। लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार ने धरती पुत्र मुलायम को हिला कर रख दिया। पार्टी पर अस्तित्व का संकट मंडराने लगा है। अगर जल्द अखिलेश सरकार ने अपना खोया हुआ विश्वास हासिल नहीं किया तो 2017 की लड़ाई उसके लिये मुश्किल हो सकती है। अखिलेश के पास समय काफी कम है। भले ही लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के पश्चात समाजवादी सरकार ने अपनी नीति बदली ली है, लेकिन संगठन वाले उन्हें अभी भी पूरी आजादी के साथ काम नहीं करने दे रहे हैं। सीएम अखिलेश यादव अब मोदी की तरह विकास की बात करने लगे हैं लेकिन पार्टी में यह बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है। मुलायम अभी भी पुराने ढर्रे पर ही चल रहे हैं। निश्चित ही 2015 खत्म होते ही तमाम दलों के नेता चुनावी मोड में आ जायेंगे। भाजपा तो वैसे ही 2017 के विधान सभा चुनावों को लेकर काफी अधीर है, बसपा और कांग्रेस भी उम्मीद है कि समय के साफ रफ्तार पकड़ लेगी। फिलहाल तो यही कहा जा सकता है कि कांग्रेस ही नहीं सपा-बसपा भी 2014 में अर्श से फर्श पर आ गये।

भारत के न्यूज चैनल पैसा कमाने और दलगत निष्ठा दिखाने के चक्कर में सही-गलत का पैमाना भूल चुके हैं : अजय कुमार

: इलेक्ट्रानिक न्यूज चैनलों का ‘शोर’ : टेलीविजन रेटिंग प्वांइट(टीआरपी) बढ़ाने की चाहत में निजी इलेक्ट्रानिक न्यूज चैनल अपनी साख खोते जा रहे हैं। समाचार सुनने के लिये जब आम आदमी इन चैंनलों का बटन दबा है तो उसे यह अहसास होने में देरी नहीं लगती कि यह चैनल समाचार प्रेषण की बजाये ध्वनि प्रदूषण यंत्र और विज्ञापन बटोरने का माध्यम बन कर रह गये हैं। इन चैनलों पर समाचार या फिर बहस के नाम पर जो कुछ दिखाया सुनाया जाता है, उससे तो यही लगता है कि यह चैनल न्यूज से अधिक  सनसनी फैलाने में विश्वास रखते हैं।

चार नवम्बर के बाद टूट जायेगा ‘अपना दल’

अजय कुमार, लखनऊ

अपना दल 04 नवंबर को वाराणसी में 19वां स्थापना दिवस मनाने जा रहा है। स्थापना दिवस को लेकर तैयारी भी चल रही है, लेकिन अपना दल के संस्थापक अध्यक्ष स्वर्गीय सोनेलाल पटेल की विरासत संभाले उनकी पत्नी और पुत्रियों के बीच मची राजनैतिक होड़ ने स्थापना दिवस का रंग फीका कर दिया है। कार्यकर्ता गुटों में बंट गये हैं। पारिवारिक झगड़े के कारण अपना दल के स्थापना दिवस समारोह की कामयाबी पर ग्रहण लग गया है। सोनेलाल पटेल की मौत के बाद काफी तेजी के साथ राजनैतिक क्षितिज पर उभरी उनकी तीसरे नंबर की पुत्री अनुप्रिया पटेल के खिलाफ मॉ कृष्णा पटेल ने अपनी दूसरी बेटी पल्लवी पटेल को साथ लेकर बगावती रुख अख्तियार कर लिया है।

सपा राष्ट्रीय अधिवेशन में बसपा पर चुप्पी का मतलब किसी को समझ नहीं आया

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन का पहला दिन अपने पीछे कई खट्टे-मीठे अनुभव छोड़ गया। उम्मीद के अनुसार मुलायम सिंह यादव को नौंवी बार अध्यक्ष चुने जाने की औपचारिकता पूरी करने के अलावा अगर कुछ खास देखने और समझने को मिला तो वह यही था कि समाजवादी नेताओं ने यह मान लिया है कि अब उनकी लड़ाई भारतीय जनता पार्टी के साथ ही होगी। यही वजह थी वक्ताओं ने भाजपा और खासकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर खूब तंज कसे। इसके साथ ही समाजवादी मंच से एक बार फिर तीसरे मोर्चे की सुगबुगाहट भी सुनाई दी। जनता दल युनाइटेड(जेडीयू) के अध्यक्ष शरद यादव की उपिस्थति ने इस सुगबुगाहट को बल दिया। मुलायम के अध्यक्षीय भाषण के बाद शरद यादव बोलने के लिये खड़े हुए तो उनके तेवर यह अहसास करा रहे थे कि दोनों यादवों को एक-दूसरे की काफी जरूरत है।