मुलायम की हालत सांप छछूंदर वाली!

कहा जा रहा है कि बाप-बेटे की भावुक राजनीति सपा को बचा लेगी। वैसे यह भी सच है कि इन दिनों नेता जी मुलायम सिंह यादव की हालत साँप छछूंदर वाली हो गयी है। भाई का साथ देते है तो बेटा नाराज और बेटे के साथ जाते है तो भाई के साथ धोखा।  नेता जी ऐसा चाहते भी नहीं।  वे तो सबको लेकर चलना चाहते है और पार्टी को आगे ले जाने के लिए ही सब कुछ कर रहे है। लेकिन हो कुछ भी नहीं रहा है। नेता जी के लिए सब अपने ही है लेकिन सबको मुलायम सिंह की फ़िक्र नहीं है।  सपा के लिए नेता जी वट  वृक्ष की तरह है लेकिन इस वृक्ष की सभी टहनियां अलग होने पर आमदा है। लेकिन एक बात तय है की बाप बेटे की भावुक राजनीति सपा को बचा ले जायेगी। यही वजह है की सपा में संग्राम जारी होने के बावजूद अभी तक टूट की कहानी से सब बच रहे है। 

गैर-आदिवासी और गैर-झारखंडी के हाथ में झारखंड की कमान

झारखंड में भाजपा की राजनीति कैसे सफल हुई और मोदी की राजनीति कितनी कारगर साबित हुई, इस पर हम चर्चा करेंगे लेकिन सबसे पहले प्रदेश में बनने वाले पहले गैर-आदिवासी और गैर-झारखंडी मुख्यमंत्री के बारे में कुछ जानकारी। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने पहले रघुबर दास के नाम पर सहमति जताई और इसके बाद अपने सिखाए पढाए दूतों के जरिए रांची में रघुबर के नाम की घोषणा करवा दी। रघुबर दास इस राज्य के पहले गैर-आदिवासी मुख्यमंत्री होने जा रहे हैं। रघुबरदास के बारे में अखबारों में कई तरह की खबरें छप रही हैं। उनके व्यक्तित्व, उनके परिवार, उनकी शिक्षा दीक्षा, उनके खान पान और न जाने क्या क्या।