अमर उजाला को चाहिए ब्राह्मण पत्रकार

उत्तर प्रदेश : सुलतानपुर में अमर उजाला लांच होने पर रमाकांत तिवारी को ब्यूरो चीफ बनाया गया था। इनके कार्यकाल के दौरान से रिपोर्टर व कैमरामैन पदों पर ब्राह्मण बिरादरी के लोग तलाशे जा रहे हैं। इधर बीच कानाफूसी कर ब्यूरो चीफ ने होनहार कैमरामैन पंकज गुप्ता की छुट्टी करवा दी। इसके बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है। अमर उजाला लांच के समय यानि सात साल पहले पंकज गुप्ता को सुलतानपुर में कैमरामैन पद पर नियुक्त किया गया था। अपने अच्छे काम के चलते पंकज ने चंद दिनों में ही अमर उजाला को एक नया मुकाम दिला दिया, लेकिन यहां के ब्यूरो चीफ शायद ब्राह्मण को ही ज्यादा पसंद करते हैं।

मजीठिया वेज बोर्ड संघर्ष : अमर उजाला को जवाब दायर करने का अब आखिरी मौका, भारत सरकार भी पार्टी

अमर उजाला हिमाचल से खबर है कि यहां से मजीठिया वेज बोर्ड के लिए लड़ाई लड़ रहे प्रदेश के एकमात्र पत्रकार को सब्र का फल मिलता दिख रहा है। अमर उजाला के पत्रकार रविंद्र अग्रवाल की अगस्त 2014 की याचिका पर सात माह से जवाब के लिए समय मांग रहे अमर उजाला प्रबंधन को इस बार 25 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आखिरी बार दस दिन में जवाब देने का समय दिया है। अबकी बार कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कर दिया है कि अगर इस बार जवाब न मिला तो अमर उजाला प्रबंधन जवाब दायर करने का हक खो देगा और कोर्ट एकतरफा कार्रवाई करेगा।

अमर उजाला ने बनाई नई कंपनी, डिजिटल वाले होंगे शिफ्ट, प्रिंट का भी नंबर

मजीठिया में अपने कर्मचारियों को लॉलीपाप देने के बाद अमर उजाला एक बार फिर धूर्तता पर उतर आया है। खबर है कि अमर उजाला ने ऑनलाइन के लिए अलग कंपनी बना ली है। अमर उजाला डॉट कॉम के सभी कर्मचारियों को अब इस कंपनी में शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है। गौरतलब है कि अभी तक अमर उजाला अखबार और बेबसाइट दोनों एक ही कंपनी के अंतर्गत चलाए जा रहे थे लेकिन अब आनलाइन के लिए अलग कंपनी बन गई है। नई कंपनी की पूरी जिम्मेदारी तन्मय माहेश्वरी संभालेंगे। खबर यह भी है कि अमर उजाला डॉट कॉम को अलग बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिया जाएगा।

मैंने पहली बार अमर उजाला का कंपनी रूप देखा था (किस्से अखबारों के : पार्ट-तीन)

(सुशील उपाध्याय)


भुवनेश जखमोला एक सामान्य परिवार से आया हुआ आम लड़का था। वैसा ही, जैसे कि हम बाकी लोग थे। वो भी उन्हीं सपनों के साथ मीडिया में आया था, जिनके पूरा होने पर सारी दुनिया बदल जाती। कहीं कोई शोषण, उत्पीड़न, गैरबराबरी न रहती। लेकिन, न ऐसा हुआ और न होना था। भुवनेश ने नोएडा में अमर उजाला ज्वाइन किया था। 2005 में उसे देहरादून भेज दिया गया, कुछ महीने बाद भुवनेश को ऋषिकेश जाकर काम करने को कहा गया। उस वक्त भुवनेश की शादी हो चुकी थी। अमर उजाला में काम करते हुए उसे लगभग पांच साल हो गए थे, उसे तब तक पे-रोल पर नहीं लिया गया था। पांच हजार रुपये के मानदेय में वो अपनी नई गृहस्थी को जमाने और चलाने की कोशिश कर रहा था। उसे उम्मीद थी कि एक दिन वह अपने संघर्षाें से पार पा लेगा और जिंदगी की गाड़ी पटरी पर आ जाएगा, लेकिन होना कुछ और था।

कुमार विश्वास के खिलाफ झूठ का ज़हर उगलते अमर उजाला के पत्रकार!

Dr Kumar Vishwas Passport Issue Wrongly reported by Amar Ujala

पत्रकारिता की गिरती साख के कई भागीदार हैं। लेकिन इस पेशे से जुड़े कई ऐसे लोग हैं, जो पत्रकारिता की अर्थी को कन्धा देने के लिए बहुत जल्दी में नज़र आते हैं। पिछले दिनों ‘अमर उजाला’ ने खबर छापी, कि कवि और आप नेता डा कुमार विश्वास का पासपोर्ट किसी विवाद के कारण गाज़ियाबाद स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय द्वारा जमा करवा लिया गया है। अगले ही दिन पासपोर्ट अधिकारी श्री यादव के हवाले से निर्देश आया, कि पूरा मामला साफ़ है। इसलिए पासपोर्ट वापस निर्गत कर दिया जाएगा। दिनांक 14 नवम्बर को डा कुमार विश्वास को पासपोर्ट निर्गत कर दिया गया।

हिन्दुस्तान की उदारता, अमर उजाला के विज्ञापन को ख़बर बना के छापा

hindustan MK

हिन्दुस्तान में छपी ख़बर

गलाकाट व्यापारिक प्रतिस्पर्धा के बीच क्या एक अखबार किसी दूसरे अखबार की विज्ञापन योजना को प्रोत्साहित कर सकता है? कतई नहीं। लेकिन 9 अक्टूबर को हिन्दुस्तान में छपी एक खबर को इस का उदाहरण कहा जा सकता है।

अमर उजाला डॉट कॉम में लिखी जाती है घटिया खबर की इतनी घटिया कॉपी!

हिंदी न्यूज वेबसाइट्स में पहले नवभारत टाइम्स और उसके बाद भास्कर डॉट कॉम ने अश्लील और बेहूदे कंटेट्स की सारी हदें पार कर जिस तरह पेजव्यूज के कारोबार में सफलता के झंडे गाड़ दिए, उसने अन्य न्यूज वेबसाइट्स को तेजी से आगे बढ़ने का आसान रास्ता दिखाया और इसे फॉलो करने में सबसे आगे रहा है, अमर उजाला डॉट कॉम। सबसे ज्यादा दुखद बात यह है कि अमर उजाला डॉट कॉम में पेजव्यूज के चक्कर में मां-बेटे या भाई-बहन से जुड़े रेप या सेक्स की खबरों को भी चटखारेदार हेडलाइन से लगाया जाता है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग पढ़ें। ताजा उदाहरण अमर उजाला डॉट कॉम के एक खबर का है जो भाई-बहन के पवित्र त्योहार रक्षाबंधन के मौके पर पब्लिश की गई।