उत्तराखंड डीजीपी की गड़बड़ियों की जांच यूपी के आईपीएस ने कैसे की?

उत्तराखंड के डीजीपी बीएस सिधू द्वारा देहरादून में खरीदे गए एक विवादित वन भूमि की यूपी के आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर द्वारा अपनी पत्नी सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर के साथ वहां जा कर अपनी निजी हैसियत में जांच करना एक आदमी को इतना नागवार लगा कि उन्होंने इसकी वैधानिकता के सम्बन्ध में आरटीआई में कई सूचनाएँ मांग लीं.

वाह रे लखनऊ पुलिस! : जो लड़की को बचा रहा था उसे एएसपी पर फायरिंग का आरोपी बना दिया

हमने हजरतगंज, लखनऊ में एएसपी दुर्गेश कुमार पर हुए कथित फायरिंग मामले में अपने स्तर पर जांच की. हमने आरोपी पुलकित के घर जाकर उसके पिता राम सुमिरन शुक्ला, माँ सावित्री शुक्ला, भाई पीयूष शुक्ला तथा अन्य परिचितों से मुलाकात की. इन लोगों ने बताया कि घटना प्रोवोग शॉप के पास हुई जिसमें परिचित लड़की को छेड़े जाते देख पुलकित और साथियों ने बीच-बचाव किया.

डीआईजी गोरखपुर के लखनऊ स्थित घर पर कांस्टेबल सुसाइड मामले का सच क्या है…

हमने डीआईजी गोरखपुर के लखनऊ स्थित गोमतीनगर आवास पर कांस्टेबल अरुण कुमार की आत्महत्या के सम्बन्ध में अरुण कुमार के मामा बलराम चौधरी से बात की. उन्होंने हमें बताया कि वे पिछले करीब डेढ़ माह से लखनऊ में डीआईजी गोरखपुर के मकान पर रह रहे थे जिनसे वे अपने तीन मोबाइल नंबर 098076-89970, 091258-66210, तथा 073983-47607 से लगभग रोज बात करते थे. आरआई, गोरखपुर देवी दयाल ने बताया कि वे डीआईजी गोरखपुर कार्यालय से सम्बद्ध थे और दिनांक 23 नवम्बर को डाक लेकर लखनऊ गए थे. वहीँ इस बारे में डीआईजी रेंज कार्यालय ने बताया कि अक्टूबर 2014 में उनकी उस कार्यालय से सम्बद्धता समाप्त हो गयी थी.

हाई कोर्ट में भारत सरकार ने कहा- ‘सहारा इंडिया परिवार’ कोई कम्पनी नहीं है!

भारत सरकार सहारा इंडिया परिवार तथा सुब्रत राय द्वारा 17 मार्च 2013 को समाचारपत्रों में प्रकाशित पूरे पृष्ठ के विज्ञापन में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) और पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बीएन अग्रवाल के सम्बन्ध में की गयी आपत्तिजनक बातों की जांच नहीं कराएगा.

कर्मचारियों को सरकारी नीतियों की आलोचना का अधिकार देने पर लोक शांति को खतरा : भारत सरकार

केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट), लखनऊ बेंच में मेरे द्वारा आईएएस, आईपीएस अफसरों द्वारा सरकारी कार्य और नीतियों की आलोचना पर लगे प्रतिबन्ध को खत्म करने हेतु दायर याचिका में भारत सरकार ने कहा है कि यह रोक लोक शांति बनाए रखने के लिए लगाई गयी है. नवनीत मिश्रा, उपसचिव, डीओपीटी द्वारा दायर हलफनामे के अनुसार यदि सरकारी सेवकों को सरकार की किसी हालिया नीति अथवा कार्य की आलोचना का अधिकार दे दिया गया तो इससे सरकारी सेवा में कोई अनुशासन नहीं बचेगा.

बिहार कैडर के आईपीएस अमिताभ दास के समर्थन में मुखर हुए यूपी कैडर के आईपीएस अमिताभ ठाकुर

To,
Hon’ble Justice Bilal Nazki,
Chairman,
Bihar Human Rights Commission,
Patna

Subject- Regarding certain report about Sri Amitabh Kumar Das, IPS currently posted as SP, BHRC, Patna

Respected Sir,

काकोरी थाने में भू-माफिया के प्रभाव में पुलिस और राजस्वकर्मियों द्वारा खुली बेईमानी

दुबग्गा मछली मंडी के पीछे दिलदारनगर नंबर-दो, थाना काकोरी, लखनऊ में भू-माफिया द्वारा खुलेआम गरीब, अनपढ़ लोगों को ठगने और प्रशासन द्वारा मदद नहीं किये जाने का एक मामला अच्छन मियां पुत्र स्व० बाबू उर्फ़ रईसुद्दीन द्वारा हमें बताया गया. उन्होंने बताया कि तकिया पीरबाग़, थाना सआदतगंज के अफजाल अहमद ने मासिक किश्त के बदले उसे और कई लोगों को बेचेनामा पर छोटे-छोटे प्लाट दिए. ये लोग उन प्लाट पर काबिज हो गए. जैसे अंतिम किश्तों का समय आया, अफजाल गायब हो गया और उसने चुपके से उस जमीन को अपने ही आदमी याकूब को रजिस्ट्री कर दी. फिर राजस्व कर्मियों को मिला कर ख़ारिज-दाखिल करा लिया और पहले से काबिज लोगों को पुलिस और गुंडों के बल पर खाली करवाया.

यूपी में जंगलराज : पुलिस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले को जान के लाले

मुंबई से अपने गाँव ओटिया, थाना शिवरतनगंज, जनपद अमेठी आये नफीस खान से आम का एक हरा पेड़ कटता नहीं देखा गया. उन्होंने 02 अक्टूबर 12 बजे एएसपी अमेठी मुन्ना लाल के सीयूजी नंबर 1977 पर इसकी सूचना दी और कोई कार्यवाही नहीं होने पर 03 तारीख को सुबह 10 बजे फिर से बताया. करीब 1.30 बजे पुलिस चौकी इन्होना, थाना शिवरतनगंज की पुलिस आई और ठेकेदार ताज मोहम्मद उर्फ़ तजऊ को पकड़ कर ले गयी. तजऊ चौकी इंचार्ज महेश चंद्रा को 15,000 रुपये दे कर छूटा और उसने पुलिस द्वारा बताये नफीस के फोन पर उसे भला-बुरा कहा.

सावधान रहें इस फर्जी कंपनी से… किराये के तीन कमरे में चल रही कंपनी में 1555 लोगों को रोजगार देने की कवायद

इंदिरानगर, लखनऊ में तीन कमरे किराये पर ले कर 1555  व्यक्तियों को रोजगार देने का दावा करने वाली एक कंपनी का मामला सामने आया है. प्रा कृषि विपणन विकास लिमिटेड नाम की इस कंपनी ने जिला विपणन अधिकारी, खंड विपणन अधिकारी, केंद्र प्रभारी, कंप्यूटर ऑपरेटर जैसे पदनाम बना कर 4800 से 20900 रुपये वेतन के कुल 1555 पदों की भर्ती का विज्ञापन दिया है. विज्ञापन को यथासंभव सरकारी स्वरुप दिया गया है जिसमें पिछड़ी जाति, एससी/एसटी के लिए आरक्षण, आयु में छूट आदि की बात है.

नूतन ठाकुर के धरने की सूचना मिलते ही लखनऊ पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्यवाही शुरू की

हमारे घर हुई चोरी में भारी पुलिस निष्क्रियता के विरुद्ध मेरे द्वारा डीजीपी कार्यालय के धरने की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग यकायक तेजी में आ गया. 15 अक्टूबर की रात हुई इस चोरी के बाद किसी पुलिस वाले ने मामले की सुध नहीं ली थी. घटना के दिन से ही मामले के विवेचक छुट्टी पर चले गए थे. पांच लाख से ऊपर की चोरी होने के बावजूद मामले में एसआर केस दर्ज नहीं किया गया था और एसएसपी लखनऊ सहित किसी भी वरिष्ठ पुलिस अफसर ने नियमानुसार घटनास्थल का निरीक्षण नहीं किया था.

सीईओ और चीफ एडिटर बनने के बाद से बिजी चल रहे Prasoon Shukla को आज घेर कर पकड़ लिया गया

Yashwant Singh : न्यूज एक्सप्रेस के सीईओ और एडिटर इन चीफ बनने के बाद से कुछ ज्यादा बिजी चल रहे अपन के मित्र Prasoon Shukla को आज घेर कर पकड़ लिया गया. हुआ यूं कि मुझे जब बड़े भाई Amitabh Thakur जी और भाभी Nutan Thakur के गाजियाबाद में होने की सूचना मिली तो प्रसून की सहमति के बाद ‘हम चार लंच साथ-साथ’ का कार्यक्रम बन गया. बच्चों से मजदूरी कराने वाले अफसरों के खिलाफ जांच करने गाजियाबाद आए यूपी के चर्चित आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने एक रोज पहले यानि कल अपनी जांच रिपोर्ट में दोषी अफसरों को दंडित करने की संस्तुति की थी.

यूपी में जंगलराज, यूपी में ‘चोरों’ की सरकार : अब आईपीएस भी सुरक्षित नहीं, अमिताभ ठाकुर के घर भीषण चोरी

उत्तर प्रदेश में जंगलराज का आलम ये हो गया है कि अब जनता तो जनता, अफसर तक सुरक्षित नहीं हैं. वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर आज सुबह जब गाजियाबाद से लखनऊ लौटे तो पता चला कि उनके घर में भीषण चोरी हो चुकी है. गोमती नगर स्थित उनके घर में चोरी की ये घटना कोई सामान्य नहीं है. जहां पर अमिताभ ठाकुर का घर है, वहां ढेर सारे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का घर है. मतलब वीआईपी इलाका है. इस इलाके में घुसने और चोरी करने की हिम्मत कोई सामान्य चोर कर ही नहीं सकता.

IPS officer Amitabh Thakur

आईजी से शिकायत का हुआ असर, चौकी इंचार्ज ने लौटाए घूस के रुपए लेकिन दो हज़ार काट के

अमेठी जिले के गाँव ओटिया, पुलिस चौकी इन्होना, थाना शिवरतनगंज में एक हरा पेड़ काटने के मामले में चौकी इंचार्ज महेश चंद्रा द्वारा ठेकेदार ताज मोहम्मद उर्फ़ तजऊ को पकड़ कर 15,000 रुपये वसूलने के मामले में आइपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर द्वारा आईजी ज़ोन लखनऊ सुभाष चंद्रा को शिकायत करने के बाद 13,000 रुपये वापस हो गए हैं. चौकी इंचार्ज ने 2,000 रुपये इसलिए वापस नहीं किये क्योंकि यह हरा पेड़ काटने का पुलिस चौकी का अपना रेट है.

जब कैलाश सत्यार्थी को ग्रेट रोमन सर्कस के मालिक ने बुरी तरह मारा था

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हर भारतीय की तरह मैं श्री कैलाश सत्यार्थी के नोबेल शांति पुरस्कार जीतने की ख़ुशी में फूला नहीं समा रहा हूँ और जून 2004 की करनैलगंज, गोंडा की उस घटना को याद कर रहा हूँ जब श्री सत्यार्थी को नेपाली सर्कस बालाओं को मुक्त करने के प्रयास में ग्रेट रोमन सर्कस के मालिक द्वारा बुरी तरह मारा-पीटा गया था.

अमेठी में हरा पेड़ काटने का रेट फिक्स है, 2000 रुपये पिकअप, 4000 रुपये ट्राली

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अमेठी जिले के गाँव ओटिया, पुलिस चौकी इन्होना, थाना शिवरतनगंज के नफीस खान ने अपने गाँव में एक हरा पेड़ कटता देखा एएसपी अमेठी मुन्ना लाल को 03 अक्टूबर को सूचित किया जिसके बाद पुलिस ठेकेदार ताज मोहम्मद उर्फ़ तजऊ को पकड़ कर ले गयी, जो चौकी इंचार्ज महेश चंद्रा को 15,000 रुपये दे कर छूट गया.

आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने यूपी पुलिस के भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे नफीस खान को सलाम कहा

Amitabh Thakur : नफीस खान को सलाम!.. यह पत्र मैंने अमेठी निवासी नफीस खान की सूचना के आधार पर आईजी ज़ोन लखनऊ को लिखा है. आपकी दृष्टि चाहूँगा, यह एक गंभीर प्रकरण है. इस देश को हज़ारों नफीस खान की जरूरत है…

एसपी अमेठी ने पेड़ कटान शिकायतकर्ता को हड़काया, पुलिस ने पैसा लेकर आरोपी को छोड़ा

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मुंबई से अपने गाँव ओटिया, थाना शिवरतनगंज, जनपद अमेठी आये नफीस खान से आम का एक हरा पेड़ कटता नहीं देखा गया. उन्होंने 02 अक्टूबर 12 बजे एएसपी अमेठी मुन्ना लाल के सीयूजी नंबर 1977 पर इसकी सूचना दी और कोई कार्यवाही नहीं होने पर 03 तारीख को सुबह 10 बजे फिर से बताया.

एसजीपीजीआई लखनऊ के लापरवाह डॉक्टरों के खिलाफ न्यायिक युद्ध

Amitabh Thakur : शायद आपराधिक लापरवाही करने वाले डॉक्टरों से कानूनी लड़ाई आसान नहीं है. यह बात अपनी पत्नी ममता शुक्ला की मौत के मामले में न्याय पाने को संघर्षरत अलीगंज निवासी सुरेश चन्द्र शुक्ला हर कदम पर महसूस कर रहे हैं. हेपेटाइटिस-सी से पीड़ित सुश्री ममता की मौत एसजीपीजीआई, लखनऊ में हो रहे इलाज के दौरान हो गयी. श्री शुक्ला ने इसके लिए गैस्ट्रोइंटेरोलोजी विभाग के डॉ विवेक आनंद सारस्वत और डॉ श्रीजीथ वेणुगोपाल को दोषी बताया कि उन्होंने प्रयोग के तौर पर जानबूझ कर ट्रायल ड्रग थाइमोसीन अल्फा-1 इंजेक्शन दिया जिससे हड्डी का कैंसर होने की काफी सम्भावना रहती है और जो मात्र हेपेटाइटिस बी रोगियों के लिए अनुमन्य है.

एक करोड़ रुपये न दे पाने के कारण जिला जज का प्रमोशन हाईकोर्ट जज के लिए नहीं हो सका!

Amitabh Thakur : हाई कोर्ट जज नहीं बने एक सज्जन की गाथा… भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश आर एम लोढ़ा द्वारा कई बार कोलेजियम व्यवस्था की जबरदस्त वकालत की गयी थी. बहुधा न्यायपालिका के चोटी के लोगों द्वारा ऐसी बातें कही जाती हैं कि यदि न्यायपालिका की नियुक्ति में बाहरी हस्तक्षेप शुरू कर दिया गया तो बड़ा नुकसान हो जाएगा और न्यायपालिका की स्वतंत्रता खतरे में पड़ जायेगी. हम सब इस बात से सहमत हैं कि जजों के बारे में सबसे बेहतर जानने वाले जज ही होंगे और इस बात से भी मेरी सहमति है कि जजों की नियुक्ति प्रक्रिया में जजों की भी भूमिका होनी चाहिए. लेकिन साथ ही इस बात से मैं व्यक्तिगत रूप से गहरी नाइत्तेफाकी रखता हूँ कि यह नियुक्ति प्रक्रिया ढकी-छिपी हो जैसा मौजूदा समय में देखने को मिलता है.

एक करोड़ नहीं दिया तो हाई कोर्ट जज नहीं बने?

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश आर एम लोढ़ा द्वारा कोलेजियम व्यवस्था की जबरदस्त वकालत करने के सन्दर्भ में आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने नए मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिख कर न्यायिक नियुक्ति प्रक्रिया में अपेक्षित पारदर्शिता लाने का निवेदन किया है ताकि प्रत्येक व्यक्ति यह जान सके कि दूसरों की तुलना में किसी एक की नियुक्ति क्यों हुई है. कोलेजियम व्यवस्था के मौजूदा अपारदर्शी ढंग के खतरों को दर्शाने के लिए उन्होंने सुरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन जिला जज, भदोही का उदाहरण प्रस्तुत किया है जिनसे हाई कोर्ट में प्रोन्नति हेतु कोलेजियम के एक सदस्य द्वारा कथित रूप से एक करोड़ रुपये मांगे गए थे. यह घटना अक्टूबर 2011 से फ़रवरी 2012 के दौरान की थी.

भ्रष्टाचारी के यार हजार, सदाचारी अकेले खाए मार… (संदर्भ- डीजीपी सिद्धू, आईपीएस अमिताभ और देहरादून पत्रकार प्रकरण)

Yashwant Singh : पत्रकार अगर भ्रष्ट नेताओं और अफसरों की पैरवी न करें तो भला कैसे जूठन पाएंगे… मार्केट इकानामी ने मोरल वैल्यूज को धो-पोंछ-चाट कर रुपय्या को ही बप्पा मय्या बना डाला तो हर कोई नीति-नियम-नैतिकता छोड़कर दोनों हाथ से इसे उलीचने में जुटा है.. नेता, अफसर, कर्मचारी से लेकर अब तो जज तक रुपये की बहती गंगा में हाथ धो रहे हैं.. पैसे ले देकर पोस्टिंग होती है, पैसे ले देकर गलत सही काम किए कराए जाते हैं और पैसे ले देकर मुकदमें और फैसले लिखे किए जाते हैं, पैसे ले देकर गड़बड़झाले-घोटाले दबा दिए जाते हैं… इस ‘अखिल भारतीय पैसा परिघटना’ से पत्रकार दूर कैसे रह सकता है.. और, जब मीडिया मालिक लगभग सारी मलाई चाट जा रहे हों तो बेचारे पत्रकार तो जूठन पर ही जीवन चलाएंगे न…

आईएएस अफसर सदाकांत व संजीव शरण का तबादला और दो घंटे बाद तबादले का निरस्त होना….

Amitabh Thakur :  बीती बात बिसारिये… आईएएस अफसर सदाकांत और संजीव शरण का तबादले और मुख्यमंत्री द्वारा काम करने पर तबादला निरस्त करने की कथित चेतावनी के दो घंटे के अन्दर ही इनका तबादला निरस्त हो जाने के प्रकरण में मैं अकादमिक फ्रंट पर यह अवश्य कहना चाहूँगा कि 28 जनवरी 2014 को आईएएस तथा आईपीएस कैडर संशोधन नियमावली के लागू हो जाने के बाद अब किसी भी आईएएस तथा आईपीएस अफसर का तबादला मात्र सिविल सेवा बोर्ड की संस्तुतियों पर ही किया जा सकता है और किसी अन्य प्राधिकारी, चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों ना हो, को इसमें हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है. ये नियम काफी सोच-विचार के बाद बनाए गए थे और इनसे किसी भी प्रकार का दुराव प्रशासनिक व्यवस्था में हानिकारक प्रभाव ही उत्पन्न करेगा. प्रशासन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के क्षेत्र में कार्य करने के नाते मैं चाहता हूँ और उम्मीद करता हूँ कि बेहतर प्रशासन के लिए ये नियम पूरे देश में पूरी तरह से पालन किये जायेंगे और इनमे किसी स्तर पर मनमर्जी के दवाब में कोई शिथिलता नहीं बरती जायेगी.

आईपीएस अमिताभ ठाकुर को सुप्रीम कोर्ट से राहत, पीआईएल करना कोई कदाचार नहीं

Amitabh Thakur : सुप्रीम कोर्ट ने विजय शंकर पाण्डेय बनाम भारत सरकार में स्पष्ट कर दिया है कि कुशासन की शिकायत सेवा नियमावली में कत्तई प्रतिबंधित नहीं है. उसने कहा है कि जनहित में दायर याचिकाएं आचरण नियमावली के खिलाफ नहीं हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत अथवा सार्वजनिक मामलों में याचिका दायर करना हमारा संवैधानिक अधिकार है. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इसके ठीक उलटा मत दर्शाते हुए मेरे पीआईएल दायर करने को कदाचरण बताया था और सराकर की अनुमति के बाद ही पीआईएल दायर करने के आदेश दिए थे. देश की सबसे बड़ी अदालत द्वारा मेरे कदम को सही बताये जाने से मैं बहुत खुश हूँ.

भ्रष्ट डीजीपी सिद्धू के पैरोल पर हैं देहरादून के कई बड़े पत्रकार!

PHOTO Amitabh Thakur

पिछले सप्ताह उत्तराखंड के डीजीपी बीएस सिधू द्वारा ख़रीदे गए एक विवादित वन भूमि के मामले में इस प्रकरण को जानने-समझने और इस पर अपनी निजी हैसियत में अग्रिम कार्यवाही करने के लिए हम (मैं और पत्नी नूतन) देहरादून गये थे. मामले की कहानी लम्बी है और उसे मैं अलग से प्रस्तुत करूँगा. उस मामले में मेरे पास इतने दस्तावेज़ हैं जो मामले की सच्चाई को एकदम से साफ़ कह देते हैं. इन दस्तावेजों को देखते ही कोई भी समझ जाएगा कि यह “चोरी और सीनाजोरी” की एक अद्भुत दास्तान हैं जिसमे एक व्यक्ति ने अपने रसूख और ऊँचे पद का सीधा दुरुपयोग कर अपना व्यक्तिगत हित साधने और कर्तव्यशील लोगों को फंसाने और परेशान करने का कुकृत्य किया है.

पुरुष आयोग : हाई कोर्ट ने पूछा- अमिताभ ठाकुर कैसे महिला प्रताड़ना से पीड़ित हैं?

आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर द्वारा पुरुषों की समस्याओं को विशेष रूप से देखने के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर पुरुष आयोग बनाये जाने हेतु दायर रिट याचिका में इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच ने उनसे कहा कि वे अदालत को बताएं वे किस प्रकार महिला उत्पीडन और प्रताड़ना से पीड़ित हैं ताकि मामले की अग्रिम सुनवाई हो सके.  जस्टिस संजय मिश्रा और जस्टिस बी के श्रीवास्तव की बेंच ने मामले को सुनने के बाद यह आदेश दिया.

मैं अपनी भावनाएं-विचार व्यक्त करता रहूंगा, भले ही यश मिले या अपयश, मित्र मिलें या शत्रु, मान मिले या अपमान : अमिताभ ठाकुर

Amitabh Thakur: अमिताभ माफ़ी मांगो वर्ना! ….. मुझे डरना अच्छा लगता है क्योंकि टीवी वाले कहते हैं “डर के आगे जीत है”. मैंने “गाँधी और उनके सेक्स-प्रयोग” शीर्षक से जो नोट लिखा था वह मुझे जीवन के कई नए आयाम दिखा रहा है. मैंने अपने लेख में मूल रूप से गाँधी के दूसरी विवाहित/अविवाहित महिलाओं के साथ नंगे अथवा अन्यथा सार्वजनिक रूप से सोने के प्रयोग पर कड़ी टिप्पणी करते हुए उसे पूर्णतया गलत बताया और कहा कि यदि हर आदमी ऐसा करने लगे तो समाज की संरचना वहीँ समाप्त हो जाएगी. मैंने कहा कि गाँधी ऐसा मात्र अपने मजबूत सामाजिक और राजनैतिक रसूख के कारण कर पाए, यद्यपि उनके आश्रम में ये सभी नियम मात्र उनके लिए लागू होते थे, अन्य लोगों को इस प्रकार दूसरी महिलाओं के साथ सोने की छूट नहीं थी बल्कि उन्हें उलटे ब्रह्मचर्य और अलग-अलग सोने के आदेश थे जो उनके दोहरे व्यक्तित्व को प्रदर्शित करता है. मैंने कहा कि मैं उक्त कारणों से निजी स्तर पर गाँधी को अपना राष्ट्रपिता मानने से इनकार करता हूँ.

आईपीएस अफसर की फुफेरी बहन से अभद्रता करने वाले को नहीं पकड़ रही लखनऊ पुलिस

Amitabh Thakur : मनबढ़ अपराधी… महिलाओं को आगे आना ही होगा… मेरी रिश्तेदारी की बहन जो लखनऊ में इंजीनियरिंग की छात्र है, को पिछले तीन-चार दिनों से एक अनजाने फोन नंबर से कॉल आ रहा था. पहला कॉल 10 या 11 अगस्त को आया था. उसने महिला हेल्पलाइन (1090) पर 11 अगस्त लगभग 9-10 बजे सुबह फोन कर शिकायत दर्ज कराई लेकिन इसके बाद भी रात-दिन कॉल आते रहे जिन्हें वह लड़की उठा नहीं रही थी. कल 13 अगस्त शाम को उस व्यक्ति का एक मैसेज आया जिसमे कुछ इस प्रकार लिखा था कि ”तुम्हे काम्प्लेक्स पर देखा था, तुम मुंह बांधे थी, मुझे अच्छी लग रही थी वगैरह.” लड़की ने एक मैसेज कर पूछा कि आप कौन हैं और आपको किसने नंबर दिया है.

यूपी सरकार द्वारा अमिताभ ठाकुर को सामाजिक संस्था से सम्बद्ध होने से मनाही

अपने किस्म के एक अनूठे आदेश में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर को एक सामाजिक संस्था से सम्बद्ध होने और उसकी गतिविधियों में भाग लेने से मना कर दिया है. प्रमुख सचिव गृह नीरज कुमार गुप्ता द्वारा दिए गए आदेश दिनांक 11 अगस्त 2014 के अनुसार अमिताभ ठाकुर को उक्त संस्था से सम्बद्ध होने की अनुमति प्रदान करने का औचित्य नहीं पाया गया.

इस IPS ने गर्लफ्रेंड का साथ ना छोड़ा, दो करोड़ दहेज से मुंह फेर लिया

Amitabh Thakur एक युवा आईपीएस अफसर की सोच ने हम सबका दिल जीत लिया : पिछले दिनों मेरी मुलाकात एक नए, अविवाहित आईपीएस अधिकारी से हुई. बातचीत के क्रम में उनसे पूछ बैठा- ‘शादी हो गयी?’ उत्तर मिला- ‘नहीं, अभी नहीं’. मैं यूँ ही आगे बढ़ा- ‘क्यों, कब तक शादी होनी है?’. उनका जवाब- ‘अभी …