प्रूफ रीडरों की जरूरत तो अनंतकाल तक रहेगी

लोकमत में जब नौकर हुआ, तब काम करने की त्रिस्तरीय व्यवस्था थी। पहले खबर लिखो, उसे इंचार्ज देखते थे। इंचार्ज के खबर को संपादित करने के बाद उसे कंपोजिंग में भेज दिया जाता था। कंपोजिटर उसे कंपोज करने के बाद प्रूफ रीडर को दे देता था। प्रूफ रीडर उसे पूरी तरह पढ़ते थे। पढ़ने का उनका स्टैंडर्ड गजब का था। शब्द उनके, तथ्य हमारे। वो दरअसल थे तो प्रूफ रीडर लेकिन मैं मानता हूं कि वे रीयल एडीटर थे।

बेलगाम एंकर अंजना ओम कश्यप

अभी-अभी आजतक बंद किया है। देख रहा था, इंडिया 360 डिग्री। होस्ट कर रही थीं बेलगाम एंकर अंजना ओम कश्यप। एक खबर आई। ब्रेकिंग न्यूज में। खबर थी, नीतीश का स्टेटमेंट। नीतीश कुमार ने कहीं स्टेटमेंट दिया था कि मैं अहंकारी हूं परंतु शिष्टाचार नहीं भूलता। जाहिर तौर पर नीतीश के तीर पर मोदी ही थे। यह सब चल ही रहा है। कई दिनों से। लेकिन एक पत्रकार होने के नाते अंजना ओम कश्यप से जो उम्मीदें थी, उसे उन्होंने न सिर्फ तोड़ दिया बल्कि मेरे मन में अपने लिए और ज्यादा नफरत भी पैदा कर दिया। अंजना ने पंच मारा-कितनी बेमानी हैं ये बातें। बिहार में इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है, सड़कें नहीं हैं और इस किस्म की बातें…लड़ाई, झगड़ा, चोरी और डकैती वहां पर हो रही है….यह सब कहते-कहते उनके चेहरे पर बेहद घटिया किस्म के भाव आए थे। आप लोग इसकी रिकार्डिंग मंगवा सकते हैं। आज तक से।

गोरखपुर से निकलने वाला वीकली अखबार ‘4यू टाइम्स’ बंद

गोरखपुर में वीकली अखबार की कैटगरी में सबसे ज्यादा बिक्री वाला साप्ताहिक अखबार 4यू टाइम्स बंद हो गया। इस अखबार के बंद होने से स्थानीय खबरों की धारदार विश्लेषण करने वाले एक अदद अखबार की कमी पाठक शिद्दत से महसूस कर रहे हैं। लेकिन, जब बात धन की हो तो पाठकों की सुनता कौन है। इस अखबार का पंजीकरण कराने का काम डा. संजयन त्रिपाठी ने किया था। वही इसके मालिक-संपादक थे। मैं कार्यकारी संपादक था। 25 दिसंबर 2012 को डा. त्रिपाठी ने मुझे खुद से जोड़ा था।