GUJARAT FILES पढ़ते हुए मन में कुछ सवाल पैदा हो रहे हैं…

Anil Pandey : GUJARAT FILES पढ़ते हुए मन में कुछ सवाल पैदा हो रहे हैं… पत्रकार राणा अयूब की किताब GUJARAT FILES पढ़ते हुए मन में कुछ सवाल पैदा हो रहे हैं। पहला यह कि तकरीबन पांच साल पहले गुजरात दंगों को लेकर किया गया स्टिंग मोदी सरकार के दो साल पूरे होने पर किताब कि शक्ल में क्यों प्रकाशित किया गया? दूसरा, इस किताब के प्रकाशन और प्रचार प्रसार पर इतना पैसा क्यों खर्च किया जा रहा है और यह पैसा कहां से आ रहा है? इस किताब को किसी प्रकाशक ने नहीं, खुद राणा अयूब ने प्रकाशित किया है।

”मनीष सिसोदिया और आशुतोष खुद पत्रकार रहे हैं और अब वही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोटना चाहते हैं”

दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (डीजेए) केजरीवाल सरकार द्वारा दिल्ली सचिवालय में पत्रकारों के प्रवेश पर प्रतिबंध की कड़ी निंदा करता है और साथ ही दिल्ली के उप-राज्यपाल से मांग करता है कि वह प्रेस की आजादी को बचाने के लिए हस्तक्षेप करें और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को फौरन इस प्रतिबंध को हटाने का निर्देश दें। पिछली बार भी जब दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी थी तब भी केजरीवाल सरकार ने पत्रकारों के सचिवालय में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन पत्रकारों के प्रबल विरोध और सचिवालय पर धरना प्रदर्शन के बाद यह प्रतिबंध हटा लिया गया था। इस बार भी पत्रकार इसके विरोध में मीडिया रूम में दो दिन से डटे हुए हैं।