अपने उपर लगे आरोपों का कमाल खान ने दिया करारा जवाब

..मेरी पत्नी रुचि के पिता की पलामू में बॉक्साइट की दो बहुत बड़ी माइंस थी जिससे एल्युमीनियम बनता था और बिरला की एल्युमीनियम फैक्ट्री को सप्लाई होता था… जब उनके पिता बुजुर्ग हो गए तो उन्होंने अपने पिता से कहा कि आपको अब इस उम्र में भागदौड़ नहीं करनी चाहिए इसलिए उन्होंने उनकी दोनों माइंस सरकार को सरेंडर करा दी.. अगर उनको यही चिरकुट टाइप बेईमानी करनी होती तो इसके बजाय वो अपने पिता की खानें चला कर उससे बहुत ज़्यादा पैसा कमा लेतीं… आपके तर्क के मुताबिक अगर पत्रकार को अच्छा वेतन पाना, खुशहाल होना या सम्पत्ति खरीदना अपराध है तो फिर पत्रकारों को मजीठिया वेतन आयोग की सिफारिश लागू करने के लिए संघर्ष नहीं करना चाहिए… क्योंकि इतना पैसा तो सभी मीडिया हाउस देते हैं कि पत्रकार झोला लटका के साइकिल पर घूम सके…

(कमाल खान के जवाब का एक अंश)

अनुदानित दरों पर भूखण्ड हथियाने के बावजूद सरकारी मकानों का सुख भोग रहे पत्रकारों की लिस्ट देखें

नैतिकता के चोले में रंगे सियार (पार्ट-तीन) : सैकड़ों पत्रकार ऐसे हैं जिन्हें तत्कालीन मुलायम सरकार ने रियायती दरों पर भूखण्ड और मकान उपलब्ध करवाए थे इसके बावजूद वे सरकारी आवासों का मोह नहीं त्याग पा रहे। इनमें से कई पत्रकार ऐसे हैं जिनके निजी आवास भी लखनऊ में हैं फिर भी सरकारी आवासों का लुत्फ उठा रहे हैं जबकि नियम यह है कि सरकारी आवास उन्हीं को दिए जा सकते हैं जिनका निजी आवास लखनऊ में न हो। कुछ पत्रकारों ने रियायती दरों पर मिले मकानों को किराए पर देकर सरकारी आवास की सुविधा ले रखी है तो कुछ सरकारी आवासों को ही किराए पर देकर दोहरा लाभ उठा रहे हैं।

कम्पनी में कमाल खान, रुचि कुमार और शरत चन्द्र प्रधान का कितना शेयर है?

नैतिकता के चोले में रंगे सियार (पार्ट-दो) : हुआ यूं कि तत्कालीन मुलायम सरकार के कार्यकाल में राजधानी लखनऊ के अति विशिष्ट इलाके गोमती नगर में पत्रकारों के लिए रियायती दरों पर भूखण्डों की व्यवस्था की गयी थी। भूखण्ड पंजीकरण आवंटन पुस्तिका के 3.7 कालम में स्पष्ट लिखा हुआ है कि भूखण्ड उन्हीं पत्रकारों को दिया जायेगा जो वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट 1955 के अधीन आते हैं। गौरतलब है कि इलेक्ट्राॅनिक चैनलों को इस एक्ट में शामिल नहीं किया गया है। तत्कालीन अखिलेश सरकार के कार्यकाल में इस एक्ट में संशोधन किए जाने के लिए आवाज उठायी गयी थी, लेकिन मौजूदा समय तक इस एक्ट में कोई संशोधन नहीं किया गया है। लिहाजा खबरिया चैनल में काम करने वाले पत्रकारों को पत्रकार माना ही नहीं गया है।

कमाल खान रियायती दरों पर दो-दो प्लाट का लाभ लेने के बाद भी बटलर पैलेस के सरकारी आवास पर कब्जा जमाए हुए हैं!

नैतिकता के चोले में रंगे सियार (पार्ट-एक) : नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले तथाकथित वरिष्ठ पत्रकार स्वयं कितने अनैतिक हैं इसका खुलासा ‘दृष्टान्त’ की पड़ताल में नजर आया। मीडिया के क्षेत्र से जुड़े मठाधीश अपने जूनियर पत्रकारों को तो इमानदारी से पत्रकारिता करने की सीख देते हैं, लेकिन वे स्वयं कितने बेईमान हैं, इसकी बानगी कुछ चुनिन्दा पत्रकारों के पन्ने खुलते ही नजर आ जाती है। खबरिया चैनल से लेकर अखबारों और मैगजीन से जुड़े पत्रकारों ने सरकार की चरण वन्दना कर जमकर अनैतिक लाभ उठाया। जानकर हैरत होगी कि कोई करोड़ों की लागत से आलीशान कार्यालय और बेशकीमती कारों का मालिक है तो किसी के पास अथाह जमीन-जायदाद। कोई फार्म हाउस का मालिक बना बैठा है तो किसी के पास कई-कई मकान हैं।

एक सामान्य इंजीनियर यूपी में कैसे बन गया अरबपति… जानिए महाभ्रष्टाचारी अरुण मिश्र की कहानी

भ्रष्ट अफसरों की पोषक उत्तर-प्रदेश की कोख से उत्पन्न एक मुख्य अभियन्ता अपने पद का दुरुपयोग कर अरबों की परियोजनाओं से करोड़ों की हेरा-फेरी कर अपना घर भरता रहा। काली करतूतों से कमाई गयी दौलत से चन्द वर्षों में ही यूपी और दिल्ली जैसे शहरों में अनगिनत जमीन-जायदाद का मालिक भी बन गया। आय से अधिक सम्पत्ति को लेकर सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से जांच हुई तो भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ। लगभग छह माह तक जेल की सलाखों के पीछे रहे फिर भी तत्कालीन अखिलेश सरकार की आंख का तारा बने रहे। उपहार स्वरूप दोबारा उसी जगह पर तैनाती भी दे दी गयी। स्थिति यह है कि यह अभियन्ता अब खुलेआम भ्रष्टाचार के नए-नए आयाम स्थापित कर रहा है और योगी सरकार भी कमोवेश मूकदर्शक बनी हुई है।

ये हैं भ्रष्टाचार के पितामह उर्फ अरुण मिश्रा

अखिलेश यादव जी, कहां हैं हत्यारे?

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का कार्यकाल लगभग समाप्ति के दौर में है। अगली सरकार के लिए जद्दोजहद अंतिम चरण मे है। अखिलेश यादव पूरे पांच वर्ष तक सूबे की सत्ता पर निष्कंटक राज करते रहे लेकिन इस दौरान उन्होंने एक बार भी डॉ. योगेन्द्र सिंह सचान हत्याकाण्ड को लेकर किए गए वायदों को याद करने की कोशिश नहीं की। बताना जरूरी है कि अखिलेश यादव ने (डॉ. सचान हत्याकाण्ड के दो दिन बाद 24 जून 2011) पत्रकारों के समक्ष डॉ. सचान की मौत को हत्या मानते हुए सीबीआई जांच की मांग की थी। डॉ. सचान के परिवार से भी वायदा किया था कि, उन्हें न्याय दिलाने के लिए किसी भी हद तक जाना पड़े, वे और उनकी समाजवादी पार्टी पीछे नहीं हटेगी। लगभग छह साल बाद की तस्वीर यह बताने के लिए काफी है कि अखिलेश यादव ने अपना वायदा पूरा नहीं किया। डॉ. सचान का परिवार पूरे पांच वर्ष तक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से न्याय की आस लगाए बैठा रहा। शायद डॉ. सचान की आत्मा भी मुख्यमंत्री  से यही पूछ रही होगी कि, कहां हैं हत्यारे!!

‘दृष्टांत’ मैग्जीन में प्रकाशित हुई मुलायम खानदान की अकूत संपत्ति पर कवर स्टोरी

लखनऊ से अनूप गुप्ता के संपादकत्व में निकलने वाली चर्चित मैग्जीन दृष्टांत में जो कवर स्टोरी है, वह पठनीय तो है ही, आंख खोल देने वाली भी है. जिस अखिलेश यादव के ढेर सारे लोग प्रशंसक हैं और उनमें जाने कौन कौन से गुण देखते हैं, उसी के शासनकाल में जो लूटराज अबाध निर्बाध गति से चला है, वह हैरतअंगेज है. अब जबकि चुनाव में चार दिन शेष रह गए हैं तो सब के सब पवित्र और पुण्यात्मा बन सत्ता व संगठन के लिए मार कर रहे हैं ताकि जनता मूल मुद्दों से भटक कर इनमें उनमें नायकत्व तलाशे. नीचे पूरी कवर स्टोरी है ताकि आप सबकी समझदानी में लगा झाला खत्म हो सके.

-यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया

लखनऊ के किस पत्रकार ने पोस्टिंग कराने के नाम पर पांच लाख रुपये हड़प लिया?

Anoop Gupta : राजधानी लखनऊ का एक बहुत बड़ा पत्रकार कौन है जो बटलर पैलेस में रहता है और मायावती सरकार के दौरान हेल्थ मिनिस्टर अंटू मिश्रा से अपनी निकटता बताते हुए दो सीएमओ की पोस्टिंग कराने के लिए 5 लाख रुपये एडवांस के तौर पर लिए थे लेकिन काम नहीं हुआ. अब इन बड़े पत्रकार जी की नैतिकता देखिये कि काम ना होने पर भी आज तक 5 लाख रुपये वापिस नहीं किए. हमारा सभी बड़े पत्रकार भाइयों से अनुरोध है कि आप सभी लोग अनुमान लगाएं कि ये साहब कौन हैं, नहीं तो मजबूर होकर ‘दृष्टान्त’ को ही ये जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी.

मैं यादव सिंह से ना तो कभी मिला और ना ही देखा : नवनीत सहगल

भड़ास4मीडिया के पास लखनऊ से प्रकाशित होने वाली पत्रिका दृष्टांत के संपादक अनूप गुप्ता का एक मेल आया है जिसमें दावा किया गया है कि सीबीआई के समक्ष यादव सिंह की गवाही से यूपी के सीनियर ब्यूरोक्रेट नवनीत सहगल के भ्रष्टाचार पर से पूरी तरह से पर्दा उठ जाएगा. श्री गुप्ता का कहना है कि इस काम में राष्ट्रीय हिन्दी समाचार पत्रिका दृष्‍टांत की तरफ से शीघ्र ही समस्त दस्तावेजों के साथ नवनीत सहगल के खिलाफ एक चौंकाने वाला खुलासा किया जाएगा.

‘दृष्टांत’ मैग्जीन के संपादक अनूप गुप्ता के खिलाफ लखनऊ में नया मुकदमा

(आईएएस नवनीत सहगल और पत्रकार अनूप गुप्ता)


खबर है कि लखनऊ से प्रकाशित क्रांतिकारी मैग्जीन ‘दृष्टांत’ के संपादक अनूप गुप्ता के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज करा दिया गया है. यह एफआईआर मैग्जीन के पंजीकरण हेतु फर्जी दस्तावेजों के लगाने से संबंधित है. वहीं अनूप गुप्ता का कहनाा है कि भ्रष्ट नौकरशाहों से लेकर भ्रष्ट नेताओं और भ्रष्ट मंत्रियों की पोल लगातार खोलने के कारण उन्हें सत्ता प्रतिष्ठान द्वारा निशाना बनाया जा रहा है और दमनात्मक कार्रवाई की जा रही है.

‘दृष्टांत’ मैग्जीन ने यूपी सरकार के माननीय महबूब अली को क्यों बताया भ्रष्ट, पढ़ें पूरा विवरण

जिसे सलाखों के पीछे होना चाहिए था वह अपनी आपराधिक छवि के चलते यूपी विधानसभा की गरिमा को चोट पहुंचा रहा है। जिसके खिलाफ हत्या का प्रयास, डकैती, अपहरण, मारपीट, गाली-गलौच, जान से मारने की धमकी, दंगे करवाना, मकान-जमीनों पर अवैध तरीके से कब्जा करवाना और धोखाधड़ी से सम्बन्धित दर्जनों की संख्या में आपराधिक मुकदमें दर्ज हों, उसे सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के निर्देश पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कैबिनेट मंत्री का दर्जा दे रखा है। जिसकी शिक्षा महज 12वीं तक है, वह माध्यमिक शिक्षा विभाग का कैबिनेट मंत्री बना बैठा है। यहां बात हो रही है माध्यमिक शिक्षा कैबिनेट मंत्री महबूब अली की।

पत्रकारों से यूपी के सूचना सचिव के खिलाफ सड़कों पर उतरने का आह्वान

लखनऊ : मेरे ईमानदार पत्रकार साथियों, मेरी आप से विनम्रता के साथ अपील है, नवनीत सहगल जैसे उत्तर प्रदेश की लूट के साम्राज्य के सरगना के जब मैंने दृष्टान्त मैग्ज़ीन में लगातार बेनकाब किए तो वह मेरी पत्रिका के टाइटल को कैंसिल कराने की कोशिश कर रहे हैं। प्रेस पर छापे डलवाए गए। अपने डिपार्टमेंट के तीन अधिकारियों की कमेटी बनाकर एक फर्जी रिपोर्ट बनवाई और उस प्रेस को दबाव डालकर उससे मेरी पत्रिका की छपाई बंद करवा दी.

लखनऊ के पत्रकार अनूप गुप्ता पर कोर्ट के भीतर पुलिस कस्टडी के दौरान हमला

Rakesh Srivastava : वरिष्ठ पत्रकार और ‘दृष्टांत’ मासिक पत्रिका के सम्पादक अनूप गुप्ता के खिलाफ तथाकथित भ्रष्ट नौकरशाहों का एक गिरोह लामबंद हो चुका है। इन कथित भ्रष्ट अधिकारियों के काकस ने प्रथम तो अनूप गुप्ता के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया। उसके बाद न्याय के मंदिर न्यायपालिका में भी सेंध लगाकर आनन-फानन में वारंट भी जारी करवा दिया। इसके बाद श्री गुप्ता पर कोर्ट के भीतर कुछ अराजक तत्वों ने पुलिस कस्टडी में हमला किया।

‘दृष्टांत’ पत्रिका ने छापी यूपी के एक महालूट की आंख खोलने वाली विस्तृत कहानी

-अनूप गुप्ता-


लखनऊ

अरबों की योजना में करोड़ों की दलाली! : लगभग एक दशक पूर्व कांग्रेस के कार्यकाल में केन्द्र सरकार ‘राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन’ यानि एन.आर.एच.एम. की आधारशिला रखती है। योजना का उद्देश्य ग्रामीण अंचल के उन निम्न तबके के लोगों की सेहत सुधारना था जो निजी अस्पतालों में मोटी रकम देकर अपना इलाज करवाने में असमर्थ हैं। मनमोहन सरकार के कार्यकाल में योजना के प्रचार-प्रसार के लिए करोड़ों रुपए भी सरकारी खजाने से खाली हो जाते हैं। योजना तैयार होने के बाद बकायदा देश के विभिन्न राज्यों को भारी-भरकम बजट भी आवंटित हो जाता है। उत्तर-प्रदेश भी उन्हीं राज्यों में से एक था। गुणवत्तापरक दवाओं की आपूर्ति और सरकारी अस्पतालों के अपग्रेडेशन के लिए टेण्डर आवंटित किए जाते हैं। सम्बन्धित विभाग को प्राप्त टेण्डरों पर विचार-विमर्श चल ही रहा था कि इसी बीच गाजियाबाद की एक दवा निर्माता कम्पनी सरजीक्वाइन का प्रतिनिधि गिरीश मलिक नामक व्यक्ति सामने आता है।

‘दृष्टांत’ मैग्जीन के सम्पादक अनूप गुप्ता को अपनी हत्या की आशंका

मैं पिछले लगभग डेढ़ दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़कर दस्तावेजों के साथ भ्रष्टाचार की पोल खोलता आ रहा हूं। पिछले कुछ समय से मैंने तथाकथित भ्रष्ट नौकरशाही से लेकर लखनऊ की भ्रष्ट पत्रकारिता के खिलाफ अभियान सा चला रखा है। परिणामस्वरूप मेरी मिशन पत्रकारिता को चोट पहुंचाने की गरज से विभिन्न तरीकों से प्रताड़ित करने का दौर जारी है। किसी ने मुझे जान से मारने की धमकी दी तो किसी ने मेरी पत्रकारिता को चुनौती देने की कोशिश की। हास्यासपद पहलू यह है कि मुझे चुनौती देने वाले वे पत्रकार हैं जिनका लेखन कार्य से दूर-दूर का रिश्ता नहीं रह गया है। अभी हाल ही में मेरी पत्रिका के ‘शीर्षक’ को भी चुनौती दी गयी। 

लखनऊ में दलाल पत्रकारों की भीड़ के बीच अनूप गुप्ता होने का मतलब

Yashwant Singh : लखनऊ के जांबाज़ पत्रकार Anoop Gupta दिल्ली आये तो मुझे भी कुछ पल उनके साथ गुजारने का मौका मिला। अपनी मैगजीन ‘दृष्टांत’ के जरिये दलाल पत्रकारों, करप्ट मीडिया मालिकों और भ्रष्ट नौकरशाहों में खौफ का पर्याय बन चुका ये शख्स वर्तमान दौर में साहसी पत्रकारिता का प्रतीक है। करीब आधा दर्जन बार इन्हें मारने की कोशिशें हो चुकी हैं। दर्जनों मुकदमे झेल चुके हैं और यह क्रम जारी है।

नवनीत सहगल ने दी पत्रकार अनूप गुप्ता को धमकी!

Anoop Gupta : उत्तर प्रदेश की आर्थिक तबाही का कारण, दलाल- ब्लैकमेलर पत्रकारों का भीष्म पितामाह और भ्रष्ट सरकारों का दलाल नवनीत सहगल पर मैग्जीन द्वारा किए गए बड़े खुलासे के बाद नवनीत सहगल की तरफ से मुझे आज दिनांक 04-12-2014 को समय तीन बजकर 18 मिनट शाम पर दूरभास नंबर 05224004527 से निपट लेने की धमकी दी गई.