द टेलीग्राफ में छपी ये खबर- ‘जेटली चुप, टीवी चैनल बचाव में’

Sanjaya Kumar Singh गोदी मीडिया जेटली के बचाव में कूदा… अरुण जेटली-विजय माल्या विवाद में टीवी चैनलों (और अखबारों और सोशल मीडिया पर भक्त पत्रकारों) ने जेटली का बचाव शुरू कर दिया है। माल्या के आरोपों के बाद एक तरफ जेटली ने उनसे मिलना स्वीकार कर लिया दूसरी तरफ कांग्रेस सांसद पीएल पूनिया ने कहा …

पीटीआई के नए संपादक के लिए जेटली की सिफारिश डस्टबिन में गई

Sanjaya Kumar Singh : कई बार विस्तार प्राप्त कर चुके समाचार एजेंसी पीटीआई के संपादक आखिरकार रिटायर हो रहे हैं और पीटीआई बोर्ड, इस एजेंसी चलाने के लिए प्रशासक नहीं, संपादक तलाश रहा है। इस खबर को पढ़िए आप समझ जाएंगे कि देश की सबसे बड़ी समाचार एजेंसी कितनी गंभीरता से चल रही है। इसकी हिन्दी सेवा ‘भाषा’ के संपादक कुमार आनंद हुआ करते थे और उनके इस्तीफा देने के बाद से भाषा के संपादक का भी पद वर्षों से खाली पड़ा है।

जेटली का चाबुक और मीडिया घरानों का घुटने टेकना… : चौथे खंभे का ‘आपरेशन’ शुरू

: इमरजेंसी के विद्याचरण भी पानी मांगे : वित्तमंत्री अरुण जेटली नये प्रयोगकर्ता के तौर पर सामने आए हैं। उन्होंने डीडीसीए में अगर ‘चारा मॉडल’ को आगे बढ़ाया है। तो सूचना प्रसारण मंत्रालय के जरिये ‘लोकतंत्र में इमरजेंसी’ का नया माडल दिया है। जेटली जी ने छह महीने के भीतर ही चौथे खंभे की ऐसी कमर तोड़ी है कि फिर से उठने में उसे सालों लग जाएंगे। यह सब कुछ सरकारी कोड़े से संभव हुआ है। जेटली की चाबुक क्या चली एक-एक कर सारे मीडिया घराने घुटने टेक दिए। विरोध जताने वाले सरकारी कहर का सामना कर रहे हैं। पत्रकारिता का यह हाल उन जेटली साहब ने किया है जो इमरजेंसी की पैदाइश हैं। सरकारी शिकंजा ऐसा है कि संजय गांधी और विद्याचरण शुक्ल की जोड़ी भी शरमाने लगे।

जेटली साहब ज़रा अपने दूरदर्शन को भी देखिए, वो सरकारी भोंपू बना हुआ है

Mukesh Kumar : अरूण जेटली ने सही फरमाया है कि चैनलों की चर्चाएं शोरगुल और उत्तेजना से भरी होती हैं। उन्होंने ये समझाइश भी ठीक ही दी है कि उन्हें इस पर विचार करना चाहिए यानी सुधारना चाहिए। भला कौन उसे असहमत होगा, क्योंकि सभी चैनलों की चर्चाओं से त्रस्त हैं। लेकिन जेटली साहब ज़रा अपने दूरदर्शन को भी देख लिया कीजिए। वो किस कदर एक पक्षीय और सरकारी भोंपू बना हुआ है। उसे तथ्यों-कथ्यों से कुछ लेना-देना नहीं होता, बस सरकार का अंधाधुंध प्रचार और विपक्षियों के खिलाफ़ निंदा अभियान। आखिर प्रसार भारती का गठन इसलिए तो नहीं किया गया था। अगर जेटली सचमुच में भारतीय मीडिया के चरित्र को लेकर चिंतित हैं और उसमें बदलाव चाहते हैं तो शुरूआत प्रसार भारती से ही करें। उसे मुक्त करें और समूचे मीडिया के लिए रोल मॉडल बनने दें। अगर नहीं कर सकते तो ये पाखंड उनको शोभा नहीं देता।

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पत्रकार दीपक शर्मा ने किया मोदी सरकार के कद्दावर मंत्री अरुण जेटली का भंडाफोड़

(फाइल फोटो दीपक शर्मा)


आजतक न्यूज चैनल में लंबे समय तक एडिटर स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम के पद पर कार्यरत रहे पत्रकार दीपक शर्मा आजकल छुट्टा पत्रकार के बतौर लगातार भंडाफोड़ पत्रकारिता कर अपने असली तेवर को दिखा रहे हैं. ‘इंडिया संवाद’ नामक वेबसाइट के जरिए दीपक शर्मा ने कई बड़ी स्टोरीज ब्रेक की हैं. पर इन स्टोरीज पर कारपोरेट या मुख्य धारा मीडिया मौन रहता है.

Jurnos urge Jaitley for wage board for TV employees

Electronic Media Forum Assam (EMFA), while congratulating Arun Jaitley for being bestowed the responsibility of Information & Broadcasting ministry (under GoI), urges him for initiating a separate wage board for the employees of privately owned television channels of India. Prime Minister Narendra Modi on November 10 in New Delhi distributed the portfolios of his expanded Union cabinet, where Jaitley has been given the Information & Broadcasting (I&B) ministry in addition to Finance and Corporate Affairs.